Tuesday, 7 July 2026

Story of Life : खुशी

खुशी


चंदू प्यारा-सा, छोटा-सा, नटखट बच्चा था। वो इतना चंचल था कि दिनभर मस्ती करता, पर किसी के हाथ नहीं आता। उसकी माँ वसुधा उसे संभालते-संभालते थक जाती, पर मजाल है कि चंदू दो पल को भी थककर बैठता।

एक दिन परेशान होकर वसुधा ने अपनी माँ शक्ति देवी को अपने घर बुला लिया। शक्ति देवी अपने नामानुसार बहुत शक्तिशाली थीं, इस उम्र में भी उनमें बहुत दम-खम था।

शक्ति देवी को देखकर वसुधा ने चैन की सांस ली, कि चलो अब कुछ दिन सुकून से निकलेंगे। चंदू को शक्ति देवी ने उसके पैदा होने के समय संभाला था, पर अभी व्यस्तता के चलते शक्ति देवी अपनी बेटी से चार साल से मिलने नहीं आ पाई थीं।

दरअसल शक्ति देवी अपने गांव की बहुत सफल मुखिया थी, साथ ही उनके बहुत बड़े खेत-खलिहान भी थे, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी उन्होंने ही उठा रखी थी, और पूरा गांव उनको बहुत मानता था। 

अभी खेत-खलिहान में बीज इत्यादि लगाकर उस तरफ से थोड़ी फुर्सत पाकर वो हफ्ते भर के लिए वसुधा और चंदू से मिलने आईं थीं। चंदू एक दिन तक तो शक्ति देवी से दूर-दूर रहा, पर जल्दी ही उनके साथ घुल-मिल गया।

क्योंकि शक्ति देवी ने उसके लिए बेहद स्वादिष्ट पकवान बनाए, उसे रात में बहुत अच्छी कहानियां सुनाईं और दिन में उसके साथ दुनियाभर के खेल खेले।

अब तो चंदू दिनभर अपनी नानी माँ के साथ ही रहता, उनके साथ खेलता, उनके हाथ से ही खाना खाता, उनके साथ ही सोता।

वसुधा, चंदू और शक्ति देवी सभी प्रसन्न थे। वसुधा चैन की सांस लेकर, चंदू अपनी नानी मांँ का साथ पाकर, और शक्ति देवी अपने नाती को लाड लड़ाकर।

एक हफ्ता कब गुजर गए, पता ही नहीं चला और शक्ति देवी के लौटने का दिन आ गया।

जब चंदू को पता चला कि नानी माँ जा रही हैं तो वो बहुत दुखी हो गया और भगवान से प्रार्थना करने लगा कि कुछ ऐसा हो जाए कि नानी माँ रुक जाएं। पर ऐसा हुआ नहीं, नानी माँ के लिए cab आ गई और वो station के लिए रवाना हो गईं।

चंदू बहुत ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था कि नानी माँ लौट आइए।

वसुधा चंदू का रोना देखकर उसे भीतर ले गयी और चंदू को समझाने लगी, तभी खबर आई कि शक्ति देवी वापस आ रही हैं। सुनकर चंदू खुशी से चिल्ला-चिल्ला कर उछलने लगा, नानी माँ आ रही हैं।

जब शक्ति देवी आईं, तो पता चला कि cab से उतरते समय उनका balance गड़बड़ हुआ, जिससे वो काफी जोर से गिर गई और उनके पैर में बहुत तेज दर्द हो रहा है।

वसुधा माँ को लेकर तुरंत hospital पहुंच गई, वहां पता चला कि उनके पैर में fracture हुआ है और 3 महीने के bed rest की जरूरत है।

अब तो शक्ति देवी दिनभर bed पर रहतीं, वसुधा भी उनकी ही तिमारदारी में लगी रहती, इस तरह से नानी माँ लौट तो आईं पर दर्द से कराहते हुए और माँ से जो थोड़ा बहुत समय चंदू को मिलता था, वो भी अब नहीं मिल रहा था।

एक दिन नानी माँ के पास बैठकर चंदू रो रहा था, उन्होंने कारण पूछा, तो उसने रोते हुए कहा, “मैंने ही भगवान जी को बोला था, कैसे भी आप रुक जाओ और आपका accident हो गया। आप लौट तो आईं पर मेरा कोई फायदा नहीं हुआ, मुझे खुशी मिली ही नहीं।”

नानी माँ ने चंदू को चुप कराया और बोला कि “इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं, जो‌ होना था हो गया। पर बेटा, आगे से अगर तुम्हारी खुशी किसी और से भी जुड़ी हुई है तो, अपनी कामना के लिए प्रार्थना करने के साथ यह भी कहो, कि उसमें उसका कोई अनिष्ट न हो, बल्कि उसे भी लाभ हो, और तुम्हारी कामना तब पूर्ण हो, जब उसकी भी वही कामना हो। अपनी खुशी को पाने के लिए अगर दूसरे को दुःख पहुंचता है तो फिर ऐसी ही ग्लानि होती है। इसलिए ऐसा मांगो कि आपका और उसका दोनों का शुभ हो, तभी सच्ची खुशी मिलेगी।”

सुनकर चंदू मंदिर की ओर दौड़ गया और भगवान जी से प्रार्थना करने लगा, और बोला “मेरी नानी माँ को जल्दी ठीक कर दीजिए और वो तब तक रहें, जब तक वो ख़ुशी से रह सकें, क्योंकि जब वो खुश रहेंगी, तभी मैं भी खुश रहूंगा।”

Monday, 6 July 2026

Story of Life : आ जिंदगी जी लें

आज की यह कहानी हर एक की जिंदगी से जुड़ी हुई कहानी है, एक बार पूरी अवश्य पढ़ें, शाय़द आपकी भी सोच बदल जाए और आप भी जिंदगी जीने लगें…

आ जिंदगी जी लें


संजना ने ऋतिक से कहा, “सुनो ना, आटा खत्म हो गया है, लेकर आते हैं।”

“क्या लेकर आते हैं संजना, वो भी online marketing के जमाने में? कौन खड़ा होगा घंटों bill की line में?”

“जाकर लाएं या order करें, आएगा तो एक ही चीज़।”

“अरे order कर दो। साथ में और भी जो कुछ मंगाना हो, उन सबका भी order कर दो।”

“ऋतिक bedroom की ओर बढ़ गया, और संजना याद कर करके सामान के order की list prepare करने लगी।”

शाम के समय संजना फिर बोली, “आज बहुत दिनों बाद Sunday free मिला है, चलो न movie देखकर आते हैं।”

“अरे यार! एक Sunday मिला है, आराम कर लो, फिर रात में Netflix में movie देखेंगे, तुम कुछ चटपटा-सा बना लेना। वहां जाकर 4 गुना दाम का popcorn खाने से अच्छा है घर में ही देख लें।”

“कौन-सी देखें? संजना ने उत्सुकता से पूछा।”

“अरे कोई भी लगा लो, सब एक-सी ही लगती हैं। उसने बेरुखी के साथ जवाब दिया।”

“यह कहकर ऋतिक नींद के आगोश में चला गया और संजना अकेली बैठी ढूंढती रही कि कौन-सी movie देखें।”

कुछ दिनों बाद संजना ने ऋतिक से कहा, “चलो न कहीं घूम कर आते हैं।”

“अरे यार, अभी कुछ दो-तीन साल पहले गये तो थे। इस साल मेरे पास बिल्कुल समय नहीं है।”

ऋतिक ने बड़ी तल्खी से जवाब दिया और फिर laptop में काम करने लगा और पिछली बार की photo को देखकर संजना मन बहलाने लगी।

दिन महीने साल बदलते रहे, और संजना और ऋतिक की जिंदगी जिम्मेदारियां निभाने और इसी तरह से घर में रहकर ही सब करने में व्यतीत होती गई।

बच्चों की ज़िम्मेदारियों से free होकर job से retire होने के बाद एक दिन ऋतिक ने संजना से कहा, “बहुत दिन हो गए, चलो कहीं घूम कर आते हैं।”

संजना की प्रसन्नता से बाछें खिल गईं, वो तुरंत मान गई।

दोनों घर से निकलकर कुछ दूर ही चले थे और थककर चूर हो गए और घर लौट आए।

कुछ देर बाद, ऋतिक bedroom से बाहर आ गया, संजना अभी भी सामान order करने की list बना रही थी।

“संजना, चलो आटा लेकर आते हैं।”

“अरे क्या हुआ? मैं list बना रही हूं online order करने के लिए।”

“नहीं, चलो लेकर आते हैं। थोड़ा समय मिल जाएगा साथ में, फिर चलेंगे movie देखने, बहुत दिन हो गए हैं।”

संजना चलने को तैयार हुई तो ऋतिक ने उसे गले से लगा लिया और बोला, “वक्त बहुत तेजी से निकल रहा है। पर हम हर पल को जीएंगे, जितना हो सकेगा, उतना अधिक समय एक-दूसरे के साथ बिताएंगे।”

संजना कुछ समझ नहीं पा रही थी, पर ऋतिक जब bedroom में चला गया था, तब सपने में वो retire होने तक के दिन जी आया था और अच्छे से समझ गया था, कि ज़िन्दगी को समय से साथ में बिताने में ही सुख है।

एक बार वक्त गुजर जाता है, तो फिर वो पल नहीं जी पाएंगे, जो जिंदगी है। जिंदगी सिर्फ भागमभाग नहीं है, बल्कि कुछ पल ठहर कर जी लेना ही जिंदगी है, समय से कुछ बेहतरीन और यादगार पल चुरा लेना ही जिंदगी है।

“आ संजना, जिंदगी जी लें, एक साथ हर जगह...”

अगर आप भी जिंदगी में साथ न रहकर ऐसे ही जिंदगी बिता रहे हैं तो मत रहिए ऐसे, अपने जीवनसाथी को खूब समय दें और जी लें जिंदगी। क्योंकि काम तो जिंदगी-भर रहेगा, पर यह वक्त पलट कर नहीं आएगा, जिसमें एक-दूजे को समय दे सकते थे और सही मायने में जिंदगी जी सकते थे…