Monday, 11 May 2026

Poem : चली थी जहाँ से

आज आप सब के साथ मुझे भोपाल के मेजर नितिन तिवारी जी की कविता को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

आज नितिन जी की लेखनी ने प्रेम-रस बरसाया है, कुछ ही शब्दों का उपयोग कर के बहुत ही खूबसूरत कविता लिखी है।

आइए, इसका आनन्द लेते हैं…

चली थी जहाँ से


चली थी जहां से,

वहीं फिर चली।

कली-सी महकती,

है कविता कली।

खिला रूप यौवन,

चमन में खिला।

चली मिलने मोहन,

से राधा चली।

कई ठांव आए,

गए भी कई।

चली जो थी कहने,

वो कहने चली।

चली थी जहां से,

वहीं फिर चली…