Friday, 21 August 2026

Story of Life : सावन के झूले (अंतिम भाग)

सावन के झूले (भाग-1)

सावन के झूले (भाग-2) के आगे…

सावन के झूले (अंतिम भाग)


आखिर ऐसा भी क्या बिगाड़ा था उन्होंने किसी का, जो ऐसा हुआ, एक-दूसरे की धड़कन और दिल थे दोनों, आखिर एक-दूजे से दूर रहकर कैसे जिएंगे?

कुछ दिनों बाद ही कजरी तीज आ गई। सब ओर सावन के झूले पड़ गये।

सारे apartments में ladies में ग़ज़ब का उत्साह था। उसके apartment में ladies and gents दोनों मिलकर सावन का त्योहार मनाया करते थे। पति अपनी पत्नी को प्यार से झूला झूलाते।

ऐसा करते देख अनिका के मन में सिर्फ एक गाना गूंज रहा था-

“सावन के झूले पड़े 

तुम चले आओ

तुम चले आओ” 

अभी वो सोच में डूबी हुई थी कि doorbell बज उठी। अनिका ने दरवाजा खोला तो सामने सुहास खड़ा था।

“अरे तुम!” कहकर अनिका खुशी से सुहास के गले लग गई। थोड़ी देर बाद, “पर तुम तो आने वाले नहीं थे, फिर!”

“सब दरवाजे पर ही जान लोगी या अंदर भी चलोगी?” सुहास ने कहा, “तुम से बिछड़ कर मैं जी ही नहीं पा रहा था। 

हमेशा उदास और दुखी रहता, एक दिन मेरे boss ने मुझे बुलाया और कारण पूछा। मैंने बता दिया कि हमारी नयी शादी हुई है, अभी तो अपनी पत्नी के साथ चंद पल ही बिताए थे कि work from home खत्म हो गया।

वो बोले- अच्छा एक काम करो, finance का काम सीखना शुरू कर दो, अगर तुम्हारी performance मुझे अच्छी लगी, तो तुम्हारे शहर में तुम्हारी fix job कर दूंगा, लेकिन हाँ, काम में कोई कोताही नहीं चलेगी।

बस मैंने बहुत तेजी से दिन-रात काम सीखना शुरू कर दिया। जब boss ने check किया, तो मैं उसमें खरा उतरा।

बस क्या, अब से तुम्हारे पास हमेशा के लिए”

बाहर गाना बज रहा था-

“मोहब्बत बरसा देना तू

सावन आया है”

और अंदर अनिका सुहास की बाहों में खो गई, अपने सुहाने पलों को समेटते हुए…