आज India's Heritage segment में एक ऐसी बात share कर रहे हैं, जिसे पढ़कर शायद आप को लगे कि यह India's Heritage कैसे है।
तो पहले उसे ही clear करते हैं, कि पहले जमाने में लोग पढ़े-लिखे उतने नहीं होते थे जैसे आज हैं।
पर उनके अनुभव का ज्ञान इतना अधिक था, जिससे वो बिना पढ़े-लिखे ही आज से अधिक सक्षम थे, अपने सभी कार्यों को सुचारू रूप से करने में।
वैसे यह ज्ञान आज भी बड़े-बूढ़े और ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास मौजूद है।
तो उसी अनुभव का सार है, आज की यह India's Heritage segment की post…
जामुन की बहार, वर्षा कम इस बार
“जामुन ज़्यादा तो बारिश कम”, यह एक लोकप्रिय पारंपरिक कहावत है जो बताती है कि यदि जामुन का bumper उत्पादन हो, तो यह उस क्षेत्र में सूखे या कम बारिश का संकेत हो सकता है।
दरअसल प्रकृति में कुछ जीव ऐसे हैं, जिन्हें मौसम का पूर्वानुमान हो जाता है, जैसे चातक, पपीहा और मोर।
ऐसे ही वनस्पतियों में जामुन के वृक्ष को भी मौसम का पूर्वानुमान हो जाता है।
बारिश से पहले ही जामुन की भरमार, जानकार लोगों में इस बात से मौसम को लेकर बेचैनी बढ़ गई है।
इस पारंपरिक मान्यता और इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बारे में आइए अधिक जानते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से इस मान्यता को निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है।
- Stress Fruiting- Botany में इसे कभी-कभी “Masting” या तनाव फलना कहा जाता है।
- Survival Instinct- जब पेड़ों को जमीन के नीचे नमी या पानी की कमी महसूस होती है, तो वे खतरे को भांप लेते है। अपनी species को बचाए रखने के लिए पेड़ अपनी सारी energy अधिक से अधिक फल (जैसे जामुन) पैदा करने में लगा देते है।
- Direct Connection- इसलिए, बहुत ज्यादा जामुन का आना वास्तव में आने वाले मौसम में पानी की कमी या सूखे की ओर इशारा कर सकता है।
जामुन के वृक्ष का ऐसा इशारा चिन्ता का विषय है…

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