वो कौन था (भाग-3) के आगे…
वो कौन था (भाग-4)
एक दिन राघव ने कुशल को आकर जो बताया, वो अविश्वसनीय था, ऐसा भी हो सकता है, वो सोच ही नहीं सकता था।
वो सीधा राघव के साथ वहाँ पहुंच गया, जहाँ से राघव को यह अविश्वसनीय खबर मिली थी। वो एक mental asylum था।
“राघव, यह मुझे कहाँ लाए हो?”
“Sir, उस जगह, जहाँ आपको अनबुझ पहेली का जवाब मिलेगा। आप बस चुपचाप मेरे पीछे-पीछे आइए।”
राघव के साथ कुशल चुपचाप चलता गया और finally राघव एक कमरे की खिड़की के सामने जाकर रुक गये। कमरे में मद्धम रोशनी थी, जो कि वहाँ एक लेटी हुई पर पड़ रही थी।
जब कुशल ने गौर से देखा तो चौंक गया, “अरे! यह तो रिया है।”
“हाँ Sir, यह रिया जी ही हैं।” राघव ने स्वीकृति में सिर हिला दिया।
“मेरी classmate, मेरी ही तरह बहुत होनहार, पर यह यहां कैसे पहुंच गई?” कुशल पुरानी यादों में खो गया...
“आपके कारण सर।”
“मेरे कारण! यह तुम क्या कह रहे हो? मैंने ऐसा क्या किया? मैंने इसके साथ कुछ बुरा किया था, ऐसा तो मुझे कुछ याद नहीं।”
“सर…
आगे पढ़ें, वो कौन था (अंतिम भाग) में…

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