Saturday, 29 August 2026

Article : यादों का झरोखा

कभी-कभी लगता है कि पुराने दिन कितने अच्छे थे, हम सब मिलकर कितना आनंद करते थे।

काश कोई ऐसा दरवाजा होता है, जिससे हम अपने पुराने दिनों में लौट जाते, और यादों की गलियों में घूम आते।

पर कोई दरवाजा नहीं होता है पुराने दिनों में जाने का। हाँ, लेकिन यादों का झरोखा अवश्य होता है…

यादों का झरोखा


इसको खोलकर आप उन पलों को चंद क्षणों में जी अवश्य लेते हैं। और वो हम सबके मन में मौजूद होता है, कभी समय निकाल कर खोल कर देखिए, याद आएगा।

कि दिन-रात भाईयों-बहनों के साथ मिलकर, कुछ भी काम करने का आनन्द ही कुछ और था। काम तो खूब करते थे, पर जिम्मेदारियां कुछ नहीं थी। 

सिर पर माता-पिता का हाथ था, जिसने यह कभी न खत्म होने वाली बेहद थकाने वाली जिम्मेदारियों का एहसास ही नहीं होने दिया।

अपनों का साथ, माँ-पापा का आशीर्वाद, इससे कभी जिंदगी बोझिल ही नहीं हुई। हमेशा आगे बढ़ते जाने और कुछ पाने का नाम ही लगा जिंदगी।

वो दादी-नानी की कहानियों का भंडार,

उनके अनुभवों का निचोड़ है संसार।

मामा-मामी और मौसी-मौसा का ढेर सारा प्यार।

चाचा-चाची के साथ मस्ती अपार,

और बुआ-फूफा के आने का इंतजार।

वो सहेलियों के संग घंटों की बातें,

किसी के घर आने पर स्वागत-सत्कार।

अपने तो छोड़ो, पराए लोगों से भी मिलता था प्यार।

न जाने हम कब इतने बड़े हो गए,

अपनों से ही दूर जाकर खड़े हो गए। 

वो पुराने दिन थे कितने अच्छे, 

ज़िंदगी में वही लगते थे सच्चे।

आने वाले और बीते हुए कल के लिए कितना अच्छा लिखा है, एक बार सोचिएगा ज़रूर‌-

वो कल जिसे हमने देखा नहीं,

उसके लिए जिंदगी, 

भागी-दौड़ी चली जाती है। 

और वो कल जो बीत चुका,

उसकी खूबसूरत यादें ही,

ज़िंदगी को जिंदगी बनाती हैं। 

15 दिन, महीना, 6 महीना, साल, दो साल में एक बार यादों का झरोखा अवश्य खोलना चाहिए। ऐसा करने से मन में तरावट और ताजगी आ जाएगी, फिर आपको जिंदगी बोझिल नहीं लगेगी।

Stay healthy, stay happy :)

No comments:

Post a Comment

Thanks for reading!

Take a minute to share your point of view.
Your reflections and opinions matter. I would love to hear about your outlook :)

Be sure to check back again, as I make every possible effort to try and reply to your comments here.