Friday, 7 August 2026

Short Story : कोशिश

कोशिश 


संजना तकिया पर मुंह छिपाए लेटी थी। 

नहीं किसी से नाराज़गी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि वो जीवन की परिक्षाओं को दे देकर थकने लगी थी।

यह वही संजना थी, जो कभी किसी भी situation से थकी नहीं थी, हारी नहीं थी। 

हर कठिनाइयों को दृढ़ता के साथ हराती थी। पर आखिर वो भी कब तक परेशानियों का सुदृढ़ और प्रसन्नता से सामना करें।

उसके चेहरे पर छाई मायूसी को देख कर सब ने मान लिया, कि अब संजना वो संजना नहीं रही।

पर संजना अब भी वही थी, लेकिन अब उसे इंतजार था कि उसके अपने उसे थामें, जिसकी कोशिश उसने जिंदगी भर की, अब वो कोशिश उसके अपने करें।

वो कोशिश करें, उसके दिल को समझने की। क्या वो कोशिश करेंगे? क्या रिश्तों की अहमियत है लोगों में, आज भी? 

या आधुनिकता के नाम पर रिश्तों को यूं ही तिलांजलि दी जाती रहेगी...

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