कहा जाता है, साहित्य और फिल्में समाज का दर्पण होती है। कुछ हद तक सही भी है।
या यह भी कहा जा सकता है साहित्य और फिल्में, समाज की गुरु भी होती हैं। क्योंकि समाज का प्रतिनिधित्व करती फिल्में बहुत कुछ सिखा भी जाती हैं।
पर्दे पर नजर आने वाले अधिकांश हीरो और हीरोइन अपने निजी जीवन और नाम के लिए ही फिल्मों में काम करते हैं। पर उनमें से कुछ ऐसे भी हैं, जो अपने समय के superhit hero तो थे ही पर उन्होंने फिल्म में काम करते हुए भी देशप्रेम का परिचय दिया है।
और ऐसे ही एक हीरो और निर्देशक हैं, मनोज कुमार जी....
उनकी देशभक्ति की भावना ने, स्वतः ही कलम को लिखने की प्रेरणा दी है। उनकी देशभक्ति को प्रणाम करते हुए आज का यह लेख आधारित है।
Legendary Manoj Kumar
इनकी superhit films मे बहुत सी देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत फिल्में भी थीं। और यह इस बात से और भी सिद्ध होती है कि मनोज कुमार जी को भारत कुमार के नाम से भी पुकारा जाता था।
दूसरे शब्दों में कहें तो, अपने देश भारत से, प्रेम करना और उस पर गर्व करना सिखाया था, मनोज कुमार जी ने...
उनकी देशभक्ति पर आधारित सुप्रसिद्ध फिल्में हैं, उपकार, रोटी कपड़ा और मकान, शहीद, पूरब और पश्चिम और क्रांति...
जितनी यह फिल्म, superhit थी, उतने ही उसके गाने,
मेरे देश की धरती...
ओ मेरा रंग दे बसंती चोला...
भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं...
अबके बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे...
दुल्हन चली, ओ पहन चली...
इन फिल्मों और गानो में देशभक्ति की भावना इस तरह से घुली मिली है कि इनके बिना वो माहौल, वो जोश और उत्साह सोच पाना बेमानी लगता है।
मनोज कुमार जी को बहुत awards मिले हैं।
1973 में Film fare award
Dadasaheb Phalke award 2016
Film fare lifetime achievement award 1999
Film fare awards for direction, in रोटी कपड़ा और मकान व उपकार के लिए...1968, 1975
Padma Shri award 1992
Film fare awards for story and dialogues 1968 ( upkar)
Film fare awards for Best editing 1973 (shor)
Screen life time achievement award 2008
Guild award for life time achievement 2012
ऐसे ही बहुत सारे awards मिले हैं।
अगर as a hero मनोज कुमार जी को, आजकल के बच्चों की नज़र से देखेंगे तो, वो कहेंगे कि वो तो हमारी नानी, दादी के समय के हीरो थे, पर अगर देशभक्ति के गीतों की बात करेंगे तो वो उसमें आज भी गुनगुनाते और थिरकते नजर आएंगे।
आज भी school and college के स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर मनोज कुमार जी की फिल्मों के गीत गाए जाते हैं और उन पर नृत्य किया जाता है।
आज 87 साल की अच्छी और लंबी जिन्दगी को जीते हुए, उन्होंने अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया है।
यूं तो जन्म और मृत्यु, जीवन के अटल सत्य हैं, फिर भी जब कोई legendary personality, इस दुनिया से अलविदा लेती है तो सबकी आंखें नम हो ही जाती हैं।
उनकी फिल्म शोर का यह अमर गीत, जिसने चंद पंक्तियों में जीवन सार समझा दिया, हमेशा ही उनकी याद दिलाता रहेगा...
एक प्यार का नग़मा है
मौजों की रवानी है
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं
तेरी मेरी कहानी है
कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है
जीवन का मतलब तो, आना और जाना है
दो पल के जीवन से, इक उम्र चुरानी है
ज़िन्दगी और…
मनोज कुमार जी, आपके देश के प्रति अपार प्रेम को शत-शत नमन 🙏🏻
आपकी पुण्य आत्मा ईश्वर में लीन होकर शान्ति को प्राप्त करें।