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Monday, 19 August 2024

Article : राखी और बहनें

आज राखी का पवित्र, पावन त्यौहार है। भाई बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का अनूठा त्यौहार..

अनूठा क्यों? 

क्योंकि, यही एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें मोह पा लेने का या अपना बना लेना का नहीं होता है, बल्कि दे देने और अपना होने का होता है। 

और इसी खूबसूरत रिश्ते का सबसे बड़ा त्यौहार है राखी...

जो बंधा है कच्चे धागे से मजबूत रिश्ता... डोर नाजुक पर पकड़ सख़्त...

राखी और बहनें

इस त्यौहार के आने के बहुत पहले से बहनें जुट जाती हैं, अपने भाई की कलाई को सजाने के लिए, राखी लाने के लिए...

ना जाने एक राखी खरीदने के लिए, कितनी ही दुकानें और राखियां देख डालती हैं।

कैसा रंग, कैसी design चाहिए? दुकानदार पूछता रह‌ जाता है और इनकी नजरें ना जाने क्या ढूंढ रही होती हैं?

एक ऐसी राखी, जो इनके भाई को जंच जाए, जिसको देखकर भाई की आंखें चमक जाए, और वो उसे अपनी कलाई पर सजा देखकर खुश हो। साथ ही वो राखी, ऐसी भी हो, जो खूबसूरत तो बहुत हो, पर भाई के चुभे नहीं...

बस एक दिन और कुछ पलों के लिए बंधने वाली राखी के लिए, बहनें पूरी दुनिया एक कर देती हैं। और अगर भाई, त्यौहार के बीत जाने के बाद भी, अपनी कलाई पर राखी बांधें रहे, तो इनकी खुशी का ठिकाना ही क्या...

तो इस राखी पर अपने और सभी के भाइयों से सभी बहनों की तरफ से सिर्फ एक बात कहनी है कि, राखी को बहुत मान दीजिए, उसमें आपकी बहन का अथाह प्रेम और अपार मेहनत शामिल है। 

आपकी कलाई सजती है, तो आपकी बहन सुख, प्रेम और गर्व की अनुभूति से भर जाती है।

याद रखिएगा कि आपके लिए हो सकता है वो, बस एक राखी हो, कुछ धागों से बनी, एक राखी, पर उसके लिए अपने भाई के पास पहुंचाने वाली प्रेम और विश्वास की सूचक है, जिसे आपके पास समय से पहुंचाने के लिए उसने अथक प्रयास किए हैं। 


बहन के प्यार को मान दीजिए,

उसके विश्वास को सम्मान दीजिए।


Happy Raksha Bandhan...

Wednesday, 7 August 2024

Song: आया तीज का त्यौहार

आया तीज का त्यौहार




आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे  

छम-छम छम-छम मोर नाचे 

कोयल गीत मल्हार गाए

पवन ठंडी चलती जाए

सुनो सुनो रे...

आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे 

घर आंगन सजा लो 

झूला, कदम्ब पे डालो

ऊंची ऊंची पेंग लगा लो 

सुनो सुनो रे 

आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे 

मेंहदी, हाथों में लगा लो 

चूड़ी हरी हरी डालो

चुनर से, तुम रुप सजा लो

सुनो सुनो रे 

आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे 



आप सभी को हरियाली तीज पर हार्दिक शुभकामनाएं 🎉 

Monday, 5 August 2024

Story of Life : सुहाना सावन (भाग-1)

हर बार की तरह, इस सावन में भी गीतों से सजी कहानी share कर रहे हैं, आप सब से अनुरोध है कि इसे भी अपना‌ वही प्यार दीजिएगा, जो प्यार आपने पिछली कहानियों को दिया था।

सुहाना सावन (भाग-1)

शिखा के पास bank से फोन आया कि, Ma'am, आप की FD mature हो गई है तो आकर renewal करा लीजिए।

शिखा ने कहा, ठीक है कल ही आऊंगी bank...

फोन रखने के साथ ही वो अपनी FD ढूंढने लगी, जो कि mature हो गई थी।

वो खोज-बीन कर ही रही थी कि उसे FD के साथ ही एक लिफाफा भी रखा मिला।

उसने FD और लिफाफा दोनों ही उठा लिया। जब लिफाफा खोला तो उसमें रखे पत्र को पढ़कर उसकी आंखों से बरबस अश्रु धारा बहने लगी।

वो भूली दास्तां,

लो फिर याद आ गई, 

नज़र के सामने घटा सी छा गई...

अंकुर और शिखा, दो जिस्म एक जान थे। पूरे कालेज में जितना शिखा की खूबसूरती के चर्चे थे, उतना ही उनकी प्रीत के किस्से मशहूर थे।

शिखा को कालेज का पहला दिन याद आ गया, जब वो घर से निकली थी, मौसम बहुत सुहाना था, साथ ही उसका मन भी बहुत सारे सपने बुन रहा था। 

वो पढ़ने में बहुत होशियार थी, तो list में सबसे ऊपर उसका नाम था, इस बात पर उसे घमंड भी था।

जब वो कालेज पहुंची, बहुत से लड़कों की line लग गई उसके पीछे, पर अंकुर, उसने तो जैसे शिखा की ओर नज़र भर कर देखा भी नहीं, जबकि शिखा लगभग उसके बगल मे ही जाकर खड़ी हो गई।

अंकुर का यह व्यवहार, शिखा को बड़ा ही नागवार गुजरा। क्योंकि उसे हमेशा अपनी खूबसूरती के दीवाने ही मिले थे। अंकुर जैसा पहला निर्मोही मिला था।

अब तो आए दिन वो अंकुर के ही इर्द-गिर्द घूमती रहती, पर अंकुर, इस बात से बेपरवाह रहता कि college की सबसे हसीन लड़की, उसके आसपास मंडरा रही है।

इस दीवाने लड़के को कोई समझाए, 

प्यार मोहब्बत से ना जाने क्यों यह घबराए...


आगे पढें - क्यों नहीं है, एक साथ शिखा और अंकुर...

सुहाना सावन (भाग-2) में...

Monday, 28 August 2023

Story of Life: राखी (भाग - 3)

 राखी (भाग -1)

राखी (भाग -2) के आगे

राखी (भाग -3) 



कार्तिक को अपनी आंखों के सामने अपना सबसे बड़ा सपना टूटता दिख रहा था, उसकी आंखें भर आईं और मन उदास हो गया।

दादी मां ने जब कार्तिक को ऐसा देखा तो उन्हें लगा, शायद राखी के कारण, कार्तिक दुःखी है। वो बोली बेटा, राखी के लिए दुःखी मत हो, वो जल्दी ठीक हो जाएगी। कार्तिक मन ही मन बोल रहा था कि राखी के लिए नहीं दादी बल्कि राखी के कारण... वो बीमार ना पड़ती तो उसका सबसे बड़ा सपना पूरा हो जाता... वो जान चुका था कि घर में सबको बस राखी नज़र आती है, उसकी खुशियों से किसी को कोई सरोकार नहीं है। 

अभी कार्तिक और दादी मां खाना खाने बैठे थे कि पापा जतिन का फोन आया कि राखी की हालत बहुत गंभीर है, इसलिए उसे ICU में admit किया गया है। आरती का रो-रोकर बुरा हाल है। आज रात दोनों hospital में ही रुकेंगे।

राखी की हालत गंभीर जानकार, कार्तिक से खाना नहीं खाया जा रहा था। वो अपने सपने की टूटने भूलकर भगवान से राखी को ठीक करने की प्रार्थना करने लगा। साथ ही मन में दृढ़ भाव से बस यही गा रहा था...

जाने नहीं देंगे तुझेजाने तुझे देंगे नहीं...

दादी मां बोली, बेटा खाना खा लो, हम कल चलेंगे hospital... पर फिर छोटे से कार्तिक से खाना नहीं खाया गया। 

मम्मी पापा की ICU में पूरी रात आंखों ही आंखों में कट गई और कार्तिक की पूरी रात भगवान जी के सामने बैठकर प्रार्थना करते हुए।

अगले दिन सुबह फोन की घंटी घनघना रही थी, पापा का फ़ोन आया था। दादी मां ने फोन उठाया और बात की.. फिर फोन रख कर आई और प्यार से कार्तिक का माथा चूम लिया।

क्या हुआ दादी मां? कार्तिक ने असमंजस में पड़ कर पूछा... 

तुम बहुत अच्छे हो..

क्यों दादी मां?

तेरे पापा, आकर बताएंगे...

मम्मी पापा आ रहे हैं? राखी ठीक हो गई? कार्तिक चहकते हुए बोला...

पापा आ रहे हैं, मम्मी अभी राखी के पास hospital में ही रुकेंगी...

क्यों? राखी ठीक नहीं है?

सब आकर बताएंगे पापा... तभी call bell बजी 

पापा....,  कहते हुए कार्तिक दरवाजा खोलने के लिए दौड़ पड़ा, सामने पापा ही थे।

पापा, राखी कैसी है? उसे क्यों नहीं लाए? मम्मी और राखी कब आएंगे? एक बाद एक सवालों की झड़ी लगा दी कार्तिक ने...

पापा ने कार्तिक को गले लगाते हुए पापा बोले, भगवान ने तेरी सुन‌ ली, बेटा... वरना doctors ने तो जवाब दे दिया था। 

आधी रात में ही राखी हमें छोड़ कर चली गई थी, पर भगवान को तेरे प्यार के आगे झुकना पड़ा। तेरी बहन अभी ठीक है, दो दिन बाद घर आ जाएगी। 

आज सुबह तेरे football coach का फ़ोन आया था, पूछ रहे थे कि तुम school क्यों नहीं गये? तुम्हें football match के लिए कानपुर जाना था। 

जब उन्होंने यह बताया तो मुझे याद आया कि तुम कुछ football के लिए बोल रहे थे... तुम्हारी बहन की तबीयत बिगड़ गई थी, तो मैंने तुम्हारी पूरी बात सुने ही तुम्हें डांट लगा दी। 

सुबह जब मैंने तुम्हारी दादी मां को राखी के तबियत के विषय में बताया तो उन्होंने बताया कि तुम पूरी रात मंदिर के सामने बैठकर राखी के ठीक होने की प्रार्थना करते रहे।

तुमने football के लिए, प्रार्थना क्यों नहीं की? वो तुम्हारा सबसे बड़ा सपना है...

नहीं पापा, राखी मेरा सपना भी है और जिंदगी भी...

ओह मेरा बेटा! कहकर पापा ने कार्तिक को प्यार किया और कहा, तो चलो तुम्हें तुम्हारे सपने के पास ले चलता हूं।

कार्तिक तैयार होने चला गया और दादी मां को भी चलने को बोल गया। सब hospital के लिए चल दिया।

राखी, कार्तिक को देखकर चहक उठी। थोड़ी देर बाद पापा, कार्तिक से बोले बेटा, अब चलते हैं, राखी को आराम करने दो। 

दादी मां भी उठने लगी तो, जतिन बोला मां आप बैठिए राखी के पास, मैं आरती को ले जा रहा हूं। यह fresh हो ले। फिर ले आऊंगा इसे hospital... और आप को घर ले जाऊंगा। 

मम्मी-पापा और कार्तिक घर को चल दिए। रास्ते में मम्मी, कार्तिक के पास बैठी और बहुत सारा प्यार भी किया और माफ़ी भी मांगी और धन्यवाद भी दिया...

मम्मी आप यह सब क्यों कर रही हैं? कार्तिक ने मां की तरह संशय में पड़कर पूछा...

बेटा, राखी के आने से हमारा ध्यान तुम से कम हो गया, पर तुम्हारा प्यार अपनी बहन से कम नहीं हुआ और आज उसे भगवान ने तुम्हारी प्रार्थना के कारण ही हमें वापस दिया है।

पापा, हम कहां जा रहे हैं? इस तरफ़ तो घर नहीं है? तभी कार्तिक ने देखा, उसके football coach अपनी कार से उनके सामने ही आ गये।

पापा football Sir...

हां बेटा तुम्हे ही ले जाने के लिए आए हैं, पापा ने धन्यवाद भाव से Sir को देखते हुए बोला..

मुझे क्यों पापा? कार्तिक ने आश्चर्यजनक होकर कहा...

बेटा तुम फुटबॉल मैच के लिए जा रहे हो।

पर राखी अभी भी hospital में है तो मैं कैसे...

तुमने अपना फ़र्ज़ निभा लिया, अब हमें और तुम्हारी बहन को अपना फ़र्ज़ निभाना है। हमें तुम को भेजकर और उसे जल्दी से ठीक होकर... पापा का गला भर हुआ था।

कार्तिक को समझ नहीं आ रहा था कि वो खुश हो या नहीं, एक तरफ उसका सपना था और दूसरी ओर उसकी जिंदगी... पर उसकी आंखों में ख़ुशी के आंसू थे।

मम्मी बोली, मेरे राजा बेटा तुम्हारा match पांच ही दिन का है, तुम चले जाओ। राखी तो दो दिन में ही घर लौट आएगी। सब ठीक हो जाएगा, बस तुम बहुत अच्छे से खेलकर जीत कर आओ, तुम्हारी बहन के लिए वो सबसे बढ़कर होगा...

कार्तिक चला गया... 

Match का आज पांचवां दिन था। कार्तिक की team' का प्रदर्शन बहुत अच्छा चल रहा था। पर कार्तिक का खेल उतना अच्छा नहीं चल रहा था, जैसा उसने सोचा था। 

तभी ज़ोर ज़ोर से कोई चिल्ला रहा था, कार्तिक भैय्या, गोल करिए... यह आवाज़ राखी की थी... मानो कह रही हो...

लहरा दो लहरा दो, सरकाशी का परचम लहरा दो...

राखी को देखकर और उसकी आवाज़ ने कार्तिक में ग़ज़ब का जोश भर दिया था। वो अब एक के बाद एक goals करने लगा। और देखते ही देखते कार्तिक की team बहुत बड़े margin से match जीत गई। 

जीत के बाद राखी दौड़कर आयी और कार्तिक से चिपक गई.. कार्तिक उससे गले लगकर खूब रो रहा था। 

और दूर गाना बज रहा था।

इस संसार में सबसे प्यारा भाई बहन का प्यार है...

कार्तिक ने राखी से बोला, तुम आज यहां कैसे आ गई? 

आती कैसे नहीं, अपने champion भाई को जीतते हुए देखना था। फिर आज रक्षाबंधन है। मेरे रहते आप की कलाई, इस दिन सूनी कैसे रह सकती है...

यह कहते हुए उसने कार्तिक के हाथ में सुंदर सी राखी इस सुरीले गीत के साथ बांध दी

बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है...

दूर खड़े जतिन और आरती, भाई-बहन का प्यार देखकर भावविभोर हो रहे थे।

Sunday, 27 August 2023

Story of Life : राखी (भाग - 2)

राखी (भाग -1) के आगे... 

राखी (भाग-2)



जिस दिन मम्मी और राखी, घर पर आए, कार्तिक ने दादी मां के साथ मिलकर बहुत सुन्दर घर सजाया। 

कुछ दिन बाद राखी के पैदा होने का function रखा गया, खूब सारे रिश्तेदार आए थे। सभी राखी के लिए ढेरों उपहार लाए थे। कार्तिक सारे उपहार बड़े करीने से सजा रहा था।

तभी उसके चचेरे भाई कबीर ने उससे कहा, कार्तिक सारे उपहार राखी के लिए आए हैं, तेरे लिए कोई कुछ नहीं लाया है, सिवाय मेरे और यह कहकर उसने कार्तिक की तरफ फुटबॉल उछाल दी।

फुटबॉल कार्तिक को बहुत पसंद थी, पर कबीर का इस तरह का व्यवहार, उसे बहुत खराब लगा। वो कबीर से बोला, मुझे नहीं चाहिए कुछ भी, यह कहते हुए उसने कबीर को फुटबॉल वापस कर दी।

ओय कार्तिक तुझे क्या हो गया है? मैं तो तेरे लिए, तेरी favourite, football लाया हूंँ। 

अब से मेरी सबसे favourite, मेरी बहन राखी है। और हाँ अब मैं बड़ा हो गया हूँ, इसलिए मुझे सारे उपहार अपनी गुड़िया के लिए ही चाहिए, यह कहकर वो बड़े प्यार से अपनी बहन को निहारने लगा। और साथ ही यह गाना गाने लगा 

फूलों का, तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है, सारी उम्र हमें संग रहना है...

मां-पापा और दादी मां सबने कार्तिक को बहुत प्यार से निहार रहे थे और सोच रहे थे कि उन सबका लाडला, छोटा-सा कार्तिक, अब बड़ा और कितना समझदार हो गया है।

जैसे जैसे राखी बड़ी हो रही थी, वो उतनी ही चंचल और सबकी लाडली होती जा रही थी और साथ ही सबका ध्यान भी सिर्फ उसके ही इर्द गिर्द सिमटता जा रहा था।

पर इससे, कार्तिक पर सबका ध्यान कम होता जा रहा था। 

एक दिन school की तरफ से football team select की जा रही थी, उसमें कार्तिक का नाम सबसे पहले चुना गया था। उसके लिए कार्तिक को दूसरे शहर जाना था।

कार्तिक बहुत खुश था, आज दादी मां, पापा-मम्मी सबको बताऊंगा, सब खुशी से झूम उठेंगे।

पर जब वो घर पहुंचा तो राखी बहुत बीमार थी, पूरा घर उसके लिए परेशान था। कार्तिक के आते ही मम्मी बोली बेटा, राखी बहुत बीमार है, हम उसे लेकर अस्पताल जा रहे हैं। तुझे जो कुछ चाहिए, दादी मां से मांग लेना और हां उनका ध्यान भी रखना...

कार्तिक के मुंह से निकल गया, पर मां फुटबॉल....

पापा, पीछे से बोले क्या फुटबॉल?... तुम्हारी बहन इतनी बीमार है और तुम्हें फुटबॉल चाहिए.. चुपचाप वही करो, जो मां ने कहा है.. यह कहकर मम्मी पापा और राखी, hospital चले गए। 

मैं कभी बतलाता नहीं...

कार्तिक को अपनी आंखों के सामने अपना सबसे बड़ा सपना टूटता दिख रहा था, उसकी आंखें भर आईं और मन उदास हो गया।

दादी मां ने जब कार्तिक को ऐसा देखा तो...


क्या कार्तिक, इस नज़र अंदाजी को सह पाएगा...

पढ़िए अगले भाग, राखी (भाग -3), अंतिम भाग में...

Saturday, 26 August 2023

Story of Life : राखी

इस बार, सावन स्पेशल कहानी के गीतों से सजी कहानी के अंतर्गत आप के लिए, भाई बहन के रिश्ते के ताने-बाने की कहानी है। 

जैसे आपने, पहले की कहानियों को पढ़कर अपना स्नेह दर्शाया था, इसे भी वही प्यार दीजिएगा...

🏵️ राखी 🏵️



कार्तिक की 5th birthday party है, उसके मम्मी पापा ने बहुत बड़ी party रखी थी, खूब सारे दोस्त आए थे। हर जगह धूम मची हुई थी। 

कार्तिक के अधिकतर दोस्तों के भाई-बहन थे, पर वो अभी तक अकेला था। उसका भी बहुत मन था कि उसकी भी एक बहन हो, इसलिए उसने मम्मी पापा से कहा था कि इस Birthday के gift में उसे बहन चाहिए। 

पहले तो मम्मी पापा ने मना किया, पर फिर मान गये। इसलिए अपनी 5th birthday party में वो super excited था।

आज उस बात को दस महीने गुजर चुके थे। मम्मी hospital में थीं, किसी भी समय खुशखबरी सुनने को मिल सकती थी।

कार्तिक, दादी मां के साथ घर पर था, तभी पापा का फ़ोन आया, कार्तिक तुम्हारी बहन हुई है। पापा ने कहा, तुम खाना खाकर ready रहना, मैं तुम्हें और दादी मां को लेने आ रहा हूं, कार्तिक खुशी से झूम उठा। 

दादी मां और कार्तिक दोनों बच्ची को देखकर बहुत खुश हुए। दादी मां बोलीं, बहुत शुभ दिन आयी है, तेरी बहन, अब तेरी कलाई सूनी नहीं रहेगी।

यह कहकर, दादी मां ने एक सुंदर सी राखी पापा को पकड़ा दी।

पापा ने बिटिया के नन्हे हाथों को लगवा कर कार्तिक के राखी बांध दी। 

दादी मां ने अपनी सुरीली आवाज़ में गाना शुरू कर दिया,

बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है... 

छोटी बहन का स्पर्श और दादी मां की मीठी आवाज, कार्तिक को बहुत प्रसन्न कर रही थी। वो ख़ुशी से चहक कर बोला, दादी मां मेरी बहन राखी के दिन हुई है तो इसका नाम राखी, रख दें?

"राखी", बहुत अच्छा नाम है, दादी मां ने स्वीकृति दे दी।

मम्मी पापा ने भी हामी भर दी। 

राखी ने भी अपनी चमकती आंखें टिमटिमा दी, साथ ही एक प्यारी सी मुस्कान दे दी, मानो कह रही हो भईया, बहुत प्यारा नाम है।

राखी की हरकतों ने सबका मन मोह लिया...

कार्तिक ने जितने मन से छोटी बहन की कामना की थी, क्या उतना ही प्यार करेगा, जानने के लिए पढ़ें

राखी (भाग - 2) में...

Saturday, 19 August 2023

Song : आई है तीज निराली

सावन के महीने के सभी त्यौहारों की अलग ही छटा होती है, फिर उसमें हरियाली तीज की तो बात ही क्या... 

हरे श्रंगार में सजी हुई सभी सखियां, बहुत ही खूबसूरत लगती हैं। सखियों की इसी सुंदरता और मस्ती को उजागर करता आज का यह गीत, आप सब की नज़र..

 

आई है तीज निराली 



तीज आई

आई है तीज निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे 


आओ आओ 

सखियों आओ 

हिल मिल तीज मनाओ 

खुशियों वाली

आई है तीज निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे 

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे 


हरी हरी चूड़ी

हरी हरी बिंदी 

हरी ही चुनर डाली

मतवाली

आई है तीज निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे  


झूला झूलो

आसमां छू लो 

छाई मस्ती  

मनभावन वाली 

आई है निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे  


(फिरकी वाली, तू कल फिर आना... की तर्ज़ पर यह गीत बना है, आप किसी और धुन में भी इसे गा सकते हैं)

आप सभी को हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 भगवान शिव व माता पार्वती की कृपा सभी पर बनी रहे 🙏🏻🙏🏻

Monday, 16 August 2021

Bhajan : प्रभु बिना मुश्किल है जीना

आप सभी को सावन के चौथे सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🙏🏻

प्रभु महादेव हम सब पर कृपा करें 🙏🏻🙏🏻


प्रभु बिना मुश्किल है जीना 


सावन का महीना 

हंहं........हां

सावन का महीना

प्रभु बिना मुश्किल है जीना 

ओ मेरे शंकर भोले भाले-2

तीनों लोक के तुम रखवाले -2

तुम बिन कटता एक दिन ना

हंहं........हां


सावन का महीना

प्रभु बिना मुश्किल है जीना 

ओ मेरे शंकर भोले भाले-2

गले में नागों को डाले -2

तुम सा दिखता मुझको कोई ना

हंहं..... हां


सावन का महीना

प्रभु बिना मुश्किल है जीना 

ओ मेरे शंकर भोले भाले -2

हालाहल को पीने वाले -2

तुम सा देखा भोला कोई ना

हंहं..... हां


सावन का महीना

प्रभु बिना मुश्किल है जीना 

ओ मेरे शंकर भोले भाले -2

बाधाम्बर को तन में डालें -2

तुम सा कोई जोगी कहीं ना

हंहं..... हां


सावन का महीना

प्रभु बिना मुश्किल है जीना 

ओ मेरे शंकर भोले भाले -2

भभूति को मलने वाले -2

तुम सा कोई मलंग कहीं ना

हंहं..... हां


सावन का महीना

प्रभु बिना मुश्किल है जीना 

ओ मेरे शंकर भोले भाले -2

विपदाओं को हरने वाले -2

तुम सा दयालु होगा कोई ना 

हंहं..... हां

सावन का महीना

प्रभु बिना मुश्किल है जीना....




Friday, 6 August 2021

Story of Life : हसीन मुलाकात (भाग-3)

 हसीन मुलाकात (भाग-1)

हसीन मुलाकात (भाग-2) के आगे....


हसीन मुलाकात (भाग-3)




शायद आज की मुलाकात इतनी ही थी। पर आज उसकी खनखनाती हंसी और मीठी आवाज़ ने मुझे पूरी तरह दीवाना बना दिया था...

ना जाने कहाँ से आई है, ना जाने कहाँ को जाएगी, दीवाना किसे बनाएगी यह लड़की...

अगले दिन जब मैं उठा तो रात में देर तक भीगने के कारण बहुत तेज़ fever हो गया था और बदन बुरी तरह से टूट रहा था। 

आह! आज कैसे मिलूंगा उससे... 

मैं बहुत ही sincere employee हूँ। कभी बगैर बात के छुट्टी नहीं लेता था।

पर आज ना जाने क्या हो गया था कि office से छुट्टी की परवाह नहीं थी, पर उससे नहीं मिल पाना मुझे बहुत सता रहा था।

तभी बाहर बारिश की झड़ी लग गई, और आज तो ऐसी झड़ी लगी थी कि रात तक एक पल को भी नहीं थमी। उसे देखकर मन गा उठा,

लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है, वही आग सीने में फिर जल उठी है.... 

और मैं कब उसे याद करता हुआ, नींद के आगोश में चला गया, मुझे नहीं पता। 

आज कुछ तबियत ठीक लग रही थी, मैंने सोचा office नहीं जाऊंगा पर उससे मिलने जरूर जाऊंगा। 

Office से पहुंचता था तो थका-हारा दिखता था, आज घर से जाना था तो बन-ठन कर gift लेकर गया था।

आज बारिश नहीं हो रही थी, पर मौसम बहुत ज्यादा humid था। मैं बहुत देर तक इधर-उधर घूम कर उसका इंतज़ार कर रहा था।

तभी एक आदमी आया, बोला तुम अंकिता का इंतजार कर रहे हो?

अंकिता... अंकिता कौन? मैंने उससे पूछा...

एक बहुत सुन्दर मासूम सी लड़की, जिसे सावन बहुत पसंद था...

मैं उसका नाम नहीं जानता, पर मैं जिसका इंतजार कर रहा हूँ, शायद आप उसी के बारे में बोल रहे हैं...

वो थोड़ी दूर पर ही रहती थी... उसका नाम अंकिता था। वो बड़ी मासूम और दयालु थी।

यह आप बार-बार थी.. थी... क्यों बोल रहे हैं?

क्योंकि कल वो तुम्हारे इंतज़ार में बहुत देर तक यहाँ खड़ी भीगती रही, पर तुम नहीं आए, लेकिन कोई और आ गया!

कौन?... मैंने घबराते हुए पूछा?  

उसकी मौत!

क्या...

तुम्हारे नहीं आने से उसका दिल टूट गया और बहुत अधिक भीगने से शरीर...

आज सुबह ही उसे ICU में भर्ती करवाया गया था और शाम तक शायद उसे तुम्हारा इंतज़ार था, पर तुमने बहुत देर कर दी...

मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई‌, मैं उससे अब कभी नहीं मिल पाऊँगा। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैं वहीं घुटनों के बल बैठ कर रोने लगा।

क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वो कहाँ रहती थी?

अब क्या करोगे जानकर?...

आप पहेली ना बुझाएं, कहां रहती थी, वो... वो बताएं....

वो जो चौराहे पर पीली कोठी है, वहीं घर है उसका। यह कहकर वो चला गया।

मैं उसके बताए हुए रास्ते पर गया, तो देखा वहाँ तो पीली कोठी, खंडर में बदल चुकी थी। 

मुझे कोठी देखकर, अजीब सी सिरहन हुई, क्या यहाँ रहती थी अंकिता?

मैं अंदर जाने वाला था कि लगा कोई मेरे पीछे खड़ा था। मैं जैसे ही पलटा तो, मेरे मुंह से निकला - अरे अंकिता तुम जिंदा हो?

कौन अंकिता?.. मैं तो अंजलि हूँ...

मुझे नहीं पता कौन अंकिता, तुम ठीक हो, बस यही मेरे लिए सच है। कहकर मैंने उसका माथा चूम लिया...

वो कुछ पल जिसमें मुझे लगा था कि मैंने अपने प्यार को खो दिया, वो मुझे हजारों मौत दे गया था।

पर उसी समय, अंजलि का मुझसे मिलनाआना, मेरी जिंदगी की सबसे हसीन मुलाकात थी...

तभी बहुत तेज बारिश होने लगी, हमारे प्यार की साक्षी बनकर, जैसे वो भी हमारे मिलन से खुशी से झूम उठी हो।

बरसो रे मेघा मेघा.... बरसो रे मेघा मेघा, बरसो रे मेघा बरसो....

Thursday, 5 August 2021

Story of Life : हसीन मुलाकात (भाग -2)

 हसीन मुलाकात (भाग -1) के आगे...

हसीन मुलाकात (भाग -2)


Office पहुँच कर भी दिल जनाब के अंदाज ना बदले। आज office में काम कुछ कम था, तो जल्दी खत्म हो गया। सब अपना-अपना बोरिया बिस्तर समेटने लगे। पर हम आराम से बैठे हुए थे। 

Friends पूछने लगे, यार अमन, घर नहीं जाना है?

अब उन्हें कौन बताए कि दिल जनाब बांवरे हो गये हैं, 12 बजे के पहले घर के लिए प्रस्थान ही नहीं करेंगे।

खैर 12 बजे तक बेवजह का over time कर के घर चल दिया। आज पहली बार पैदल चलने में बहुत आनंद अनुभव हो रहा था। आज लग रहा था, मुझसे ज्यादा भाग्यशाली और कोई नहीं है..

रात कल सी ही थी, मतलब काले बादल और वैसा ही माहौल, बारिश की पड़ती बौछारें...बस इंतजार था, उस हसीना का।

पर यह क्या, अब तो घर बस 10 minute की दूरी पर था और वो हसीना... वो तो अभी तक दिखाई नहीं दी थी, दिल बैठा जा रहा था।

तभी ज़ोर से बिजली कड़की और साथ ही वो हसीना सामने थी।

उसे देख कर मन मयूर नाच उठा, और गाने लगा, 

एक लड़की भीगी भागी सी, सोती रातों में जागी सी, मिली एक अजनबी से, कोई आगे ना पीछे...

आज वो काले कपड़ों में थी, उसे देखकर लग रहा था कि ईश्वर ने उसे बहुत फुर्सत में तराशा है। आज से पहले मैंने इतनी खूबसूरत कोई लड़की नहीं देखी थी, शायद वो अप्सराओं से भी बहुत ज्यादा हसीन थी। मैं तो उसे देखकर पलकें झपकाना ही भूल जाता था।

आज तो वो भी मुझे देखकर हंस दी, शायद मेरा दीवानापन उसे भी समझ आ रहा होगा।

उसको हंसता देखकर, हम तो वहीं सड़क पर रपट गये। उसने मुझे उठने के लिए अपना हाथ दिया... 

उस समय तो लगा, हम भी किसी हीरो से कम नहीं हैं, और लगे गाना गाने, 

आज रपट जाएं तो हमें ना उठ्ठइयो, हमें जो उठ्ठइयो तो खुद भी रपट जइयो....

वो मेरा बेसुरा गाना सुनकर खिलखिला कर हंसने लगी, और बोली बड़े फिल्मी हो आप...

उसकी यह बात सुनकर मैंने झेंप कर मुंह नीचे कर लिया। पर जब मैंने फिर ऊपर देखा तो वो कहीं नहीं थी। 

आगे पढ़े, हसीन मुलाकात (भाग-3) में..

Wednesday, 4 August 2021

Story of Life : हसीन मुलाकात

अपने वादे के अनुसार, सावन के सौंदर्य से परिपूर्ण मौसम में एक बार फिर आप के लिए गीतों से सजी हुई कहानी लेकर आए हैं, हर बार की तरह इस बार भी कहानी को अपना स्नेह दीजिएगा..


हसीन मुलाकात




बरसात की काली स्याह अंधेरी रात, 12 बजे के ऊपर का समय रहा होगा। शायद अब तक तो आधी से ज्यादा दुनिया नींद के आगोश में जा चुकी होगी।

बरसात की रात होने के कारण, अजीब सा माहौल था, सन्नाटा तोड़ती, झिंगुर की झांय-झांय की आवाज, तो कभी, बीच-बीच में मेढ़क के टर्राने की आवाज।

तभी बचा-खुचा श्रेय तेजी से कड़कती बिजली की आवाज से पूरा हो गया।

सोच रहा था कि तेज़ क़दमों से चलते हुए, बारिश शुरू होने से पहले घर पहुंच...

पर मन का सोचा पूरा हो जाए, यह तो भाग्यशाली लोगों के साथ होता है। और भाग्य तो कितना बड़ा वाला था, यह तो आधी रात को पैदल घर आ रहा था, उससे ही पता चल रहा था।

बस घर जाने की पूरी बात सोच भी नहीं पाया था कि, मोटी-मोटी बूंदों ने टिप-टिप कर के गिरना शुरू कर दिया था।

मैं सबको कोसता हुआ आ रहा था कि अचानक कोई मुझ से टकराता है, हवा के झोंके के साथ ही उसके शरीर की भीनी खुशबू से मेरा रोम-रोम पुलकित हो उठा। पर वो है कौन यह मालूम नहीं पड़ रहा था।

और तभी अनायास बिजली कड़की, तो देखा बेहद बला की हसीन लड़की मेरे सामने थी। उसके दूधिया रंग पर उसके बालों की काली लट से टपकता पानी, बेहद दिलकश लग रहा था और बारिश से भीगा बदन, उसे और हसीन बना रहा था। 

कुछ क्षण तो मैं स्तब्ध सा उसे देखता ही रहा, पर अगले ही पल वो ओझल हो गई...

उसके जाने के बाद भी मेरे कदम आगे नहीं बढ़ रहे थे। पर वहाँ से तो वो कब की जा चुकी थी।

उसके ही ख्यालों में खोया हुआ मैं घर आ गया।

घर पहुंचने पर भी मन वहीं रुक गया था। और बस एक ही गीत गुनगुना रहा था,

एक अजनबी हसीना से यूं मुलाकात हो गई, फिर क्या हुआ यह ना पूछो, कुछ ऐसी बात हो गई.... 

सुबह हो गई, मैं जल्दी-जल्दी office जाने की तैयारी में लगा हुआ था और यह मन... यह तो जैसे बांवरा होकर निरा निक्कमा हो चला था। मैं physically जितना भड़भड़ा रहा था, mentally उतना ही उस हसीना के ख्यालों में खोया निष्क्रिय था। बस यह गाना मस्तिष्क पर हावी हो रहा था,

ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात, एक अंजान हसीना से मुलाकात की रात...

आगे पढ़े, हसीन मुलाकात ( भाग -2)...

Sunday, 12 July 2020

Story of Life : पहला सावन ( भाग - 3)

पहला सावन (भाग - 1) और....

पहला सावन (भाग-2) के आगे पढें.....


पहला सावन ( भाग  - 3) 


अरे मेरी लाडो, तेरे साथ गुजारा, उसका वो पहला सावन, तुझे याद है? कितनी मस्ती की थी तुम दोनों ने। उसकी ज़िंदगी के वो पल, वो कभी नहीं भूलना चाहता था, पर बहुत चाहकर भी India नहीं आ पा रहा था।

तो हर साल की यहाँ की photo बड़े मामा से मांगता था।

अच्छा...... रिया को सुन कर बहुत ही अच्छा लग रहा था, कि रंजन को भी वो सावन याद रहा।

पर नानी, मैं तो पिछले 10 सावन से आ ही नहीं रही हूँ, तो उसने मुझे कैसे पहचाना?

मुझ से वो तेरी हमेशा बात करता है, तेरी photo भी मैंने उसे भेजे थे, और इस सावन में वो तुझे बताने आया है, कि वो तुम्हें अपना जीवनसाथी बनाना चाहता है।

नानी!......

क्यों तुम नहीं चाहती हो? मेरी तुम्हारी माँ से भी बात हो गयी है, वो तैयार हैं।

आप लोग मुझे London भेज देंगे.......

नहीं बिटिया, रंजन अब यहीं रहेगा, पिछले 2 साल से वो India में ही है। उसने अपना business setup यहीं कर लिया है। तेरे प्यार ने उसे वापस अपनी ज़मीन से जोड़ दिया।

रिया शर्म से लाल हो गयी। आज उसका इतने दिनों का इंतज़ार जो ख़त्म हो गया था।

फिर वो और नानी दोनों बाहर आ गए, नानी साथ रिया को आया देखकर रंजन गा उठा

रिमझिम घिरे सावन, सुलग सुलग जाए मन.......”

उसका गाना सुनकर रिया मुस्कुरा दी और उसने जाकर गाना लगा दिया, और झूमने लगी.......

अबकी सावन ऐसे बरसे, बह जाएँ रंग मेरी चुनर से....... जमके बरसो जरा.......”

और तभी ख़ूब ज़ोर से बारिश शुरू हो गयी, जैसे सावन भी दोनों का साथ दे रहा हो।

रिया और रंजन को उस सावन ने हमेशा के लिए मिलवा दिया।


Saturday, 11 July 2020

Stories of Life : पहला सावन (भाग-2)


पहला सावन (भाग - 1) के आगे पढ़ें... 


पहला सावन (भाग-2)



रिया माँ के साथ घर तो लौट आई, पर वो रंजन को ना भूली।

आगे के हर सावन में उसकी रंजन से मिलने की तड़प बढ़ती गयी, पर रंजन फिर किसी सावन में नहीं आया। अब तो रिया ने भी सावन में जाना बंद कर दिया।

आज रिया 24 साल की हो गयी थी, माँ बोली- रिया तुम कितने दिनों से सावन में नानी से मिलने नहीं गयी, अब की चलना, नानी तुम्हें बहुत याद कर रही हैं।

माँ के इतना बोलने से रिया भी साथ चल दी, पूरे रास्ते आज रिया के मन में यही गीत चल रहा था.....

कितने सावन बरस गए, मेरे प्यासे नैना तरस गए.......”

रिया को आया देखकर नानी खुशी से खिल उठी, आह! मेरी प्यारी बिटिया आ गयी।

उन्होंने बड़े मामा से कहा, बेटा इस साल खूब सारे झूले लगवाना, मेरी लाडो जो आई है। 

ज्यादा झूले..... रिया बस इतना ही बोली।

सारी व्यवस्था बहुत अच्छी थी, पर रिया का मन बुझा ही रहा।

तभी एक बहुत ही smart सा लड़का उसके पास आया और बोला, रिया सावन के गाने में आज नहीं झूमोगी?

रिया उसे देखती रही, फिर वहाँ से जाने लगी, तभी गाना बजने लगा -

“मोहब्बत बरसा देना तू, सावन आया है....तेरे और मेरे मिलने का मौसम आया है........”

और वो लड़का रिया को देख देख कर dance कर रहा था, पर रिया को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। वो वहाँ से चली गयी।

नानी, रिया के पीछे पीछे अन्दर आ गयीं। 

क्या हुआ मेरी लाडो?

तुम चली क्यों आई? बचपन में तो रंजन के साथ ख़ूब dance कर  रही थी।

वो रंजन था....... नानी?

हाँ, क्यों? तुमने नहीं पहचाना? वो तो तुम्हें एक नज़र में ही पहचान गया।

ओह! तभी उसने मुझे रिया बुलाया था, और गाने में झूमने को भी कहा था।

नानी- वो मुझे, कैसे पहचान गया?

आगे पढ़ें, पहला सावन( भाग-3) में........   


Friday, 10 July 2020

Stories of Life : पहला सावन

पहला सावन

Image courtesy : Partrika

फोन घनघना रहा था, रमा हाथ पोछती हुई आयीं- हाँ माँ, कर ली है पूरी तैयारी, बस पूड़ी ही pack कर रहीं थी। तभी नन्ही रिया ने रमा का हाथ पकड़ कर हिलाया, नानी के घर चलना है ना?

हाँ, मेरी माँ, तुम्हारी नानी का ही phone है।

अच्छा माँ, रखती हूँ, रिया को ready कर के बस निकल ही रहे हैं, बाकी बात मिलकर करूंगी।

रमा के साथ रिया हर साल सावन में नानी के घर ही जाती थी। उसकी नानी के घर में सावन में बड़ा उत्सव होता था। उसमें झूले भी लगाए जाते थे, जो रिया को बहुत पसंद थे।

रिया की खूब सारी friends भी बन चुकी थीं वहाँ।

रास्ते भर रिया, यही गाती रही,

बदरा छाए, कि झूले पड़ गए, हाय........

घर पहुँचते ही रिया, नानी के गले में झूल गयी, नानी..... नानी...... झूले लग रहे हैं ना?

हाँ मेरी प्यारी बिटिया....

रमा बोली, पूरे रास्ते, झूले पड़ गए...... झूले पड़ गए...... यही गाती रही है।

इस बार नानी ने और ज्यादा झूले लगवाए थे।

नानी इतने झूले क्यों लगवाए हैं?

बेटा, इस बार तेरे बड़े मामा के London वाले friend, अपनी family के साथ आ रहे हैं, इसलिए मामा ने ही ज्यादा लगवाए हैं।

माँ, महेश भैया आ रहे हैं, रंजन और भाभी के साथ?

हाँ रमा, पूरे पाँच साल बाद आ रहा है महेश।

तभी तेरा भाई उसके लिए बहुत तैयारी करा रहा है। सबसे अच्छा दोस्त जो है उसका।  

वाह! बहुत मज़ा आएगा, कहकर रिया झूमने लगी।  

नानी बोलीं, रमा ये तो ऐसे खुश हो रही है, जैसे ये रंजन को ना जाने कब से जानती हो।

अरे...... कुछ नहीं माँ, ये झूले की दीवानी है, बहुत सारे झूले देखकर ही झूम रही है।

पूरा उत्सव बड़े धूम से मनाया गया, पर इस सावन में रिया और रंजन की बहुत पक्की दोस्ती हो गयी, जैसे ना जाने कब के बिछुड़े मिले हों।

दोनों ने इस गाने पर खूब dance किया....

“ बरसो रे मेघा, मेघा....., बरसो रे मेघा मेघा.......”

आगे की कहानी पढ़ें, पहला सावन(भाग-2) में.....


Tuesday, 30 July 2019

Story Of Life : सावन का तोहफा(भाग- 4)




 सावन का तोहफा(भाग- 4)


दो दिन बाद, नितिन छत पर बारिश में भीगते हुए गा रहा था “लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है.....   

तभी घंटी बजी, और चंद मिनटों बाद, नेहा के भैया, छत पर नितिन के सामने एक चिट्ठी ले कर खड़े थे। उन्होंने चिट्ठी नितिन को देते हुए बोला, ये तुम्हारी भाभी ने दी है।

चिट्ठी! नितिन ने आश्चर्य से भरकर चिट्ठी पढ़नी शुरू की, उसमें लिखा था, नितिन जी, आपको सावन का तोहफा भेज रही हूँ, पर इस वादे के साथ कि, आप भी हमें रक्षाबंधन में जरूर से तोहफा देंगे।

नितिन चिट्ठी पढ़कर भैया की तरफ आश्चर्य से देखने लगा, भैया तोहफा तो भाई, बहन को देते हैं, तब मैं क्यों दूंगा?

भैया बोले, अरे नितिन जी, आप नीचे चलकर अपना तोहफा देख लीजिये, फिर सोचिएगा क्या करना है?

नीचे नेहा अपनी सास के साथ बैठी थी, नेहा को देखते ही नितिन समझ गया, कि भाभी ने क्या लिखा है।

उसी रात ही नितिन ने बहुत ही सुंदर कमरा सजाया, नेहा को gown gift किया। song भी वही बज रहा था “मोहब्बत बरसा देना तू, सावन आया है.....

2 हफ्ते बाद वो नेहा के साथ, पहले अपनी बहन के घर, फिर अपने ससुराल गया, बहुत ही धूम से राखी मनाई गयी। नितिन ने भाभी से कहा, आपका सावन का तोहफा मैं जिंदगी भर नहीं भूलूँगा। “भाभी हो तो ऐसी”, नेहा ने नितिन के स्वर में स्वर मिलते हुए कहा। 

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Monday, 29 July 2019

Story Of Life : सावन का तोहफा (भाग- 3)


सावन का तोहफा (भाग-1)...... और 

सावन का तोहफा (भाग-2)........ के आगे की कहानी 



सावन का तोहफा (भाग- 3)


नितिन जब office से घर आया, नेहा जाने को तैयार खड़ी थी। नितिन का ये देखकर दिल टूट गया, उसने सावन को लेकर बहुत सारे plan किए थे।

वो बहुत सुंदर night gown लाया था, उसने सोचा था, आज ही रात इस romantic song के साथ

मोहब्बत बरसा देना तू, सावन आया है..... नेहा को gown gift करेगा।

पर घर में तो, दूसरा ही माहौल था। नेहा अपने मायके चली गयी।

अब तो नितिन और नेहा दोनों को एक-एक दिन काटना भारी पड़ रहा था। 

एक दिन आखिरकर नितिन अपने ससुराल पहुँच ही गया। 

नेहा के घर वाले थोड़ा पुरानी सोच वाले थे, उन्होंने नितिन को नेहा के भाई के कमरे में रहने को बोल दिया, ये तो और भी बुरा था, साथ तो थे, पर साथ नहीं। उसी समय दूर बजता गाना, नितिन को और दुखी कर रहा था
 “अबकी सजन सावन में...... मिल ना सकेंगे दोनों, एक ही आँगन में.....

एक दिन में ही दुखी होकर नितिन वापस चला गया, नेहा भी तड़प के रह गयी। 

नेहा ने कभी सोचा भी नहीं था, कि कभी उसे मायके से ज्यादा ससुराल पसंद आएगा. नेहा की भाभी को नेहा की मनोदशा समझ आ गयी, उनकी और नेहा की बहुत पटती भी थी। दोनों ननद-भाभी कम, बहनें ज्यादा लगती थीं।

भाभी ने नेहा के भैया से बोला, आपको हमारा पहला सावन याद है? भैया बोलेकैसे भूल सकता हूँ, उस तड़प को!

तो भाभी बोली, आज मैं आप से अपने पहले सावन का तोहफा 
चाहती हूँ, देंगे?

आज 3 साल बाद!

हाँ, देंगे ना?

अच्छा बोलो, क्या चाहिए?

आप माँ जी से बात करके, नेहा को उसके ससुराल छोड़ आइये ना, आपको आपके पहले सावन के तड़प की कसम।

कैसी बात करती हो? माँ नही मानेंगी......। 

फिर कुछ दिन बाद राखी भी है, मेरी एक ही तो बहन है। उसे भी छोड़ आऊँ, तो मेरी कलाई सूनी ना रह जाएगी?......

एक तरफ सूनी कलाई, दूसरी तरफ साजन से जुदाई, क्या है नेहा की किस्मत में, जानते हैं सावन का तोहफा (भाग- 4)

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