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Monday, 3 August 2026

Bhajan (Devotional Song) : सब कुछ ही है तेरे हाथ

आज सावन का पहला सोमवार है, शिव-शंभू को प्रसन्न करने का पर्व।

अपना सर्वस्व समर्पित करते हुए उनसे प्रार्थना है कि मझधार में फंसी हुई नाव को पार लगा दें।

वो सर्वशक्तिमान है, सर्वज्ञ हैं, उनकी कृपा से सब संभव है।

हे प्रभु, हम सब पर कृपादृष्टि बनाएं…

सब कुछ ही तेरे हाथ


 मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं,

तू तो जाने सारी बात।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ।


मैं तो मैं हूँ, 

मैं क्या जानूं,

मेरी हस्ती तेरे हाथों,

तेरे हाथों हैं जज़्बात।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ। 


मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं,

दुःख मेरे कटते तेरे हाथों,

सुख मुझे मिलता तेरे साथ।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ।


मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं, 

मझधार में नाव जो अटकी,

उसको लगा दो तुम तो पार।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ। 



हर हर महादेव!

To listen to this song through YouTube, click here…

Saturday, 9 May 2026

Song : सूना सूना घर है मेरा

जब एक सैनिक, देश पर सब कुर्बान करने के लिए अपने पीछे, घर-बार छोड़कर आ जाता है, तो उसके त्याग और तपस्या को हर कोई सराहता है। पर उसके पीछे उसकी पत्नी की क्या व्यथा होती है, वो कोई नहीं सोचता है।

आज का यह गीत, उसी विरह वेदना को व्यक्त करता हुआ प्रस्तुत किया है… 

सूना सूना घर है मेरा


सूना सूना घर है मेरा…


सूना सूना घर है मेरा 

सूनी है अटरिया,

जब से गये हैं पिया,

दूजी नगरिया।

सूना सूना घर है मेरा...


का से कहूं,

दिल की बतियां,

कटतीं न रतियां।

उनके बिना अब, 

दिल को चैन कहां है?

सूना सूना घर है मेरा...


हर ओर फैली खुशियाँ,

अब भाती नहीं है।

उनके बिना नैनों में,

नींद आती नहीं है। 

सूना सूना घर है मेरा...


होली-दीवाली अब सब, 

नीरस है लगती। 

हर पल अखियां उनकी,

राह है तकती।

सूना सूना घर है मेरा...


यह गीत उन सभी को समर्पित है, जिनके पति उनसे किसी भी कारण से दूर रह रहें हैं।




गाना सुनने के लिए नीचे दिए गए link पर click करें-

Tuesday, 11 November 2025

Shaadi-Vivah Song : बन्नी Reels बनाए बात बात में‌

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत है- बन्नी तेरी हल्दी में

दूसरा गीत भात मांगने पर आधारित है- मेरे भैया चले आना 

तीसरा गीत, दुल्हन की मनमोहक रुप को पूर्ण करती हुई, मेंहदी पर आधारित है-मेंहदी रचने लगी हाथों में

शादी-विवाह में बन्ना बन्नी और चुहलबाज़ी वाले गीत बहुत पसंद किए जाते हैं।

बन्ना बन्नी पर आधारित तीन गीत, जिसमें दो चुहलबाज़ी और शरारत से भरपूर हैं:

बन्ना जी जरा जमके कमाना

रात को आ गये चोर

तो एक विवाह के बाद का प्रेम, लज्जा और संस्कार से परिपूर्ण-

बन्ना बुलाए, बन्नी नहीं आए

जो भी शादी करने जा रहे हैं, उनको आगाह करता, आज का यह मजेदार गीत, जिसमें यह प्रस्तुत किया है कि आजकल की बन्नी कैसी हैं, और ससुराल में आकर, वो क्या-क्या करने वाली हैं...

बन्नी Reels बनाए बात-बात में


मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू पोंछा लगा लो

पोछा लगाते reels बनाए वो 

सास फिसल गई 

कमर टूट गई 

बहू को दे रही गाली

 

मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू खाना बना लो

खाना बनाते reels बनाए वो 

रोटी जल‌ गई 

खाक हो गई 

सब्जी हो गई काली

 

मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू कपड़े तो धोलो

कपड़े धोते reels बनाए वो 

कपड़े फट गये

चिथड़े हो गये 

सर्फ हो गया खाली 


 मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


सासु बोली 

बहू बर्तन तो धोलो

 बर्तन धोते reels बनाए वो 

बर्तन रह गए 

पानी बह गया 

टंकी हो गई खाली 

 

मतवाली 

वो Instagram वाली 

Mobile रखे हाथ में 

बन्नी reels बनाए बात बात में 


Monday, 10 November 2025

Shaadi-Vivah Song : बन्ना बुलाए, बन्नी नहीं आए

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत है- बन्नी तेरी हल्दी में

दूसरा गीत भात मांगने पर आधारित है- मेरे भैया चले आना 

तीसरा गीत, दुल्हन की मनमोहक रुप को पूर्ण करती हुई, मेंहदी पर आधारित है-मेंहदी रचने लगी हाथों में

शादी-विवाह में बन्ना बन्नी और चुहलबाज़ी वाले गीत बहुत पसंद किए जाते हैं।

बन्ना बन्नी पर आधारित दो मजेदार गीत-

आज का यह गाना, मेरी नानी जी का प्रिय गीत था, उसे ही साझा कर रहे हैं, वो तब जितना सुरीला और तर्कसंगत था, आज भी है। विवाह के तुरंत बाद का वार्तालाप (संवाद) गीत है, जिसमें प्रेम भी है, लज्जा भी, संस्कार भी और सबसे बढ़कर,  ससुराल से जुड़ने के बाद, सबसे मीठी याद भी...

बन्ना बुलाए, बन्नी नहीं आए


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

ससुर जी खड़े हैं 

सास भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी

 

लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

ताऊ जी खड़े हैं 

ताई भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

चाचा जी खड़े हैं 

चाची भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

फूफा जी खड़े हैं 

बुआ भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी


मैं कैसे आऊं 

भैय्या जी खड़े हैं 

भाभी भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बन्ना बुलाए, 

बन्नी नहीं आए 

आजा प्यारी बन्नी रे

अटरिया सूनी पड़ी 


मैं कैसे आऊं 

जीजा जी खड़े हैं 

दीदी भी खड़ी हैं 

पायल मेरी बजनी रे


अटरिया सूनी पड़ी 

लंबा घूंघट डाल के 

पायलिया उतार के 

आजा प्यारी बन्नी रे 

अटरिया सूनी पड़ी 


बहुत ही मीठा, प्रेम, लज्जा और संस्कार में ढला, बन्ना बन्नी वार्तालाप गीत

Sunday, 9 November 2025

Shaadi-Vivah Song : रात को आ गये चोर

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत है- बन्नी तेरी हल्दी में

दूसरा गीत भात मांगने पर आधारित है- मेरे भैया चले आना 

तीसरा गीत, दुल्हन की मनमोहक रूप को पूर्ण करती हुई, मेंहदी पर आधारित है-मेंहदी रचने लगी हाथों में

शादी-विवाह में बन्ना, बन्नी और चुहलबाज़ी वाले गीत बहुत पसंद किए जाते हैं, और वैसा एक गाना हमने कल डाला भी था- बन्ना जी जरा जमके कमाना

तो प्रस्तुत है, चुहलबाज़ी और हंसीं मज़ाक़ से परिपूर्ण एक और गीत, जो पूरे माहौल को खुशनुमा बना देगा।

रात को आ गये चोर


रात को आ गये चोर 

बन्ने की दादी ले गए रे - 2

बन्ने की दादी बड़ी लड़ाकू 

डर गये सारे चोर डाकू 

सर को पकड़, रोए चोर

बन्ने की दादी दे गए रे


रात को आ गये चोर 

बन्ने की मम्मी ले गए रे - 2

बन्ने की मम्मी तगड़ी मोटी 

खा गई उनकी सारी रोटी 

भूखे मर गये चोर 

बन्ने की मम्मी दे गए रे 


रात को आ गये चोर 

बन्ने की ताई ले गए रे - 2

बन्ने की ताई बड़ी खर्चीली 

चोरों की हो गई जेबें ढीली 

कंगाल हो गये चोर 

बन्ने की ताई दे गए रे 


रात को आ गये चोर 

बन्ने की बहना ले गए रे - 2

बन्ने की बहना डिस्को नाचे

नाच नाच कर धरती को हिला दे

चक्कर खा गए चोर 

बन्ने की बहना दे गए रे 




Note : बन्ना-बन्नी के परिवार से नोंकझोंक गीत, आप जिस भी पक्ष के हैं, उसके अनुसार यह गीत गाया जा सकता है, जैसे अगर बन्नी पक्ष में हैं तो ऐसे ही और बन्ना पक्ष में हैं तो इसमें बन्ना की जगह बन्नी लगाकर गाया जाएगा।

Saturday, 8 November 2025

Shaadi-Vivah Song : बन्ना जी जरा जमके कमाना

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत है- बन्नी तेरी हल्दी में

दूसरा गीत भात मांगने पर आधारित है- मेरे भैया चले आना 

तीसरा गीत, दुल्हन की मनमोहक रुप को पूर्ण करती हुई, मेंहदी पर आधारित है- मेंहदी रचने लगी हाथों में

शादी-विवाह में बन्ना, बन्नी और चुहलबाज़ी वाले गीत बहुत पसंद किए जाते हैं।

तो चलिए कुछ गीत बन्ना-बन्नी के नाम… 

आज की बन्नी की क्या demand है बन्ना जी से, आज गीत द्वारा उसी को साझा कर रहे हैं।

तो सारे कुंवारे, इस गाने को ध्यानपूर्वक सुनें, और प्रयास करें, अपनी होने वाली वधू को प्रसन्न रखने का...

बन्ना जी जरा जमके कमाना


आया महंगाई का ज़माना,

बन्ना जी जरा जमके कमाना।


दाल और रोटी का गुजारा जमाना,

पिज्जा-बर्गर है खाना।

बन्ना जी जरा जमके कमाना।


आया महंगाई का जमाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना 


हल्दी और उबटन का गुजारा जमाना 

ब्यूटी पार्लर हैं जाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना 


आया महंगाई का जमाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना 


साड़ी और कुर्ते का गुजारा जमाना 

जीन्स टी-शर्ट ही पहनना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना 


आया महंगाई का जमाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना

 

बाइक और कार का गुजारा जमाना 

ऐरोप्लेन में बैठाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना 


आया महंगाई का जमाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना


चिठ्ठी और तार का गुजारा जमाना 

आइफोन दिलाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना 


आया महंगाई का जमाना 

बन्ना जी जरा जमके कमाना


Friday, 7 November 2025

Shaadi-Vivah Songs : मेहंदी रचने लगी हाथों में

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत था- बन्नी तेरी हल्दी में

दूसरा गीत भात मांगने पर आधारित है, मेरे भैया चले आना

शादी के शुभ कार्य में मेंहदी का विशेष महत्व है, या यूं कहें कि मेंहदी से सजे हुए हाथ पैर, वधू के सौंदर्य को पूर्ण करते हैं।

आज का यह खूबसूरत गीत मेहंदी रचने वाली शाम में गाया व बजाया जाए, तो रौनक दोगुनी हो जाएगी।

मेहंदी रचने लगी हाथों में



मेहंदी रचने लगी हाथों में, बन्ने के नाम की

मेहंदी रचने लगी हाथों में, बन्ने के नाम की 


आई शुभ घड़ी देखो, मेरे आँगन आज जी


बाजे-बाजे रे शहनाई, पिया तेरे नाम की

बाजे-बाजे रे शहनाई, पिया तेरे नाम की


आई शुभ घड़ी देखो, मेरे आँगन आज जी


मेहंदी रचेगी गहरी, प्यार गहरा होगा

मेहंदी रचेगी गहरी, प्यार गहरा होगा

लाल-ख़ुशहाल रंग, संग तेरे होगा

लाल-ख़ुशहाल रंग, संग तेरे होगा


मेहंदी रची है गहरी सी, बन्ना तेरे नाम की 

मेहंदी रची है गहरी सी, बन्ना तेरे नाम की 


आई शुभ घड़ी देखो, मेरे आँगन आज जी


भूल ना जाना हमें, जा के ससुराल तू

भूल ना जाना हमें, जा के ससुराल तू

तड़पेगी ममता मेरी, आएगी याद तू

तड़पेगी ममता मेरी, आएगी याद तू

बिछिया बाजे, पायल छनकी, बन्ना के नाम की

बिछिया बाजे, पायल छनकी, बन्ना के नाम की


आई शुभ घड़ी देखो, मेरे आँगन आज जी


मेहंदी में नाम, हमने जिसका लिखा है

मेहंदी में नाम, हमने जिसका लिखा है

पढ़ के बताओ जी, किसका लिखा है

पढ़ के बताओ जी, किसका लिखा है

गोरे हाथों में रची है, प्रीत तेरे नाम की

गोरे हाथों में रची है, प्रीत तेरे नाम की


आई शुभ घड़ी देखो, मेरे आँगन आज जी

आई शुभ घड़ी देखो, मेरे आँगन आज जी


Thursday, 6 November 2025

Shaadi-Vivah Song : मेरे भैया चले आना

शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में हल्दी चढ़ने की रीति पर पहला गीत था- बन्नी तेरी हल्दी में

आज दूसरा गीत साझा कर रहे हैं।

शादी के शुभ कार्यों में भात मांगने की शुभ प्रथा होती है, इस गीत द्वारा उसी को प्रस्तुत किया है।

देखिए, कैसे बहन भाई से सभी भौतिक वस्तुओं के बदले कुछ और लाने को कहा रही है।

भाई-बहन के अटूट प्रेम को प्रदर्शित करता गीत... 

मेरे भैया चले आना



मेरे भैया चले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 

समय पर भात ले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 


न लाना कान‌‌ के झुमके 

न लाना माथे का टीका 

मेरी भाभी को ले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 


मेरे भैया चले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 

समय पर भात ले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 


न लाना हाथ के कंगना

न लाना कोई भी गहना 

तुम बच्चों को ले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है  


मेरे भैया चले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 

समय पर भात ले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 


न लाना महंगी-सी साड़ी 

न लाना चुनरी और लहंगा 

 परिवार संग ले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है  


मेरे भैया चले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है 

समय पर भात ले आना 

तुम्हें बहना बुलाती है




Wednesday, 5 November 2025

Shaadi-Vivah Songs : बन्नी तेरी हल्दी में

आज से शादी-विवाह से जुड़े रीति-रिवाजों के गीत साझा कर रहे हैं, उस श्रृंखला में यह पहला गीत है।

बन्नी, बन्ना के हल्दी चढ़ने की रस्म, विवाह में एक विशेष रस्म होती है, जो जितना विवाह से जुड़ी होती है, उतनी ही ईश्वर व घर से जुड़े सभी लोगों से मिलने वाला आशीर्वाद भी होती है।

आज उसी पर यह गीत साझा कर रहे हैं।

बन्नी तेरी हल्दी में


आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

ओ बन्नी तेरी हल्दी में, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।


पहली हल्दी दादी ने पिसाई। 

दादी ने पिसाई, श्री गणेश को चढ़ाई।

सफल हो गए सब काम, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।


दूजी हल्दी नानी ने पिसाई।

नानी ने पिसाई, लक्ष्मी मैया को चढ़ाई।

अरे अन्न-धन भरे भंडार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।


तीजी हल्दी मम्मी ने पिसाई, 

मम्मी ने पिसाई, गोरा मैया को चढ़ाई।

दे दिया अमर सुहाग, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।


चौथी हल्दी चाची ने पिसाई। 

चाची ने पिसाई, सीता मैया को चढ़ाई।

दे दिया धर्म का ज्ञान, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।


पांचवी हल्दी बुआ ने पिसाई,

बुआ ने पिसाई, राधा रानी को चढ़ाई।

दे दिया प्रेम का ज्ञान, तो बन्नी तेरी हल्दी में।

आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।


आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

ओ बन्नी तेरी हल्दी में, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।

आया है सारा परिवार, ओ बन्नी तेरी हल्दी में।




हमने यह गीत बन्नी (वधू या लड़की) पर आधारित बनाया है, अगर आप बन्ने (वर या लड़के) के पक्ष से हैं तो जहां बन्नी है, आप वहां बन्ने लगा लीजिएगा।

Tuesday, 28 October 2025

Song : पहिले पहिल छठी मइया

आधुनिकता के इस दौर के बावजूद भी लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर ना ही परंपराओं में कोई बदलाव हुआ, ना ही लोगों की आस्था कम हुई है। यही वजह है की सैकड़ों वर्षों से आस्था और विश्वास से लोग, लोक आस्था का महापर्व छठ मानते आए हैं।

इस पर्व में गाए जाने वाले गीतों की विशेषता यह होती है कि इसे भोजपुरी, मैथिली या मगही भाषा में गाया जाता है।

यह बहुत कर्णप्रिय होते हैं, और अपने तीज़-त्यौहार और संस्कृति से जुड़े हुए होते हैं।

पिछली छठ पर्व पर कांच ही बांस की बहंगिया गीत का हिंदी में भावार्थ किया था, जो लोगों द्वारा बहुत पसंद किया गया था, तथा हमारे पाठकों की यह मांग थी कि कुछ अन्य लोकप्रिय गीतों को भी हिंदी में भाव के साथ अनुवादित कर दें, जिससे आने वाली पीढ़ी इन गीतों के भावार्थ के साथ इनसे जुड़ सकें।

आज पहिले पहिल छठी मइया गीत का भावार्थ करने का प्रयास किया है, आशा है यह भी आप लोगों की कसौटी पर खरा उतरेगा।

पहिले पहिल छठी मइया


यह गीत, तब के संदर्भ में रचित किया गया है, जब कोई व्रती, पहली बार छठी मैया का व्रत आरंभ कर रही है, इस गीत के द्वारा छठी मैया को रिझाने, उन्हें अपने द्वारा किए गए पहले व्रत में हुई त्रुटि को माफ़ करने और व्रत से प्रसन्न होकर आशीष देने की कामना कर रही है।

जिसमें पति से स्नेह मिलने की कामना, पुत्र की मंगल कामना, कुल-परिवार की सुख-सम्पन्नता की कामना की गई है।

साथ ही वो घाट पर अति मनोहारी दृश्य को देखकर अति प्रसन्न होकर, छठी मैया से आए हुए उनके अनेकों भक्तों के भी सुख की कामना कर रही है। 

छठी मैया से मिलने वाली हजारों असीस की कामना कर रही है।

इस भजन के बोल इस प्रकार हैं, एक बार इन बोल को ऊपर दिए गए भावार्थ के साथ मिलाकर समझेंगे तो यह गीत आपके मन-मस्तिष्क पर छपता चला जाएगा, और आप स्वतः छठी मैया के असीम स्नेह और कृपादृष्टि से जुड़ते चले जाएंगे।


पहिले पहिल छठी मइया 

पहिले-पहिल हम कइनी

छठी मइया, बरत तोहार

छठी मइया, बरत तोहार

करीहा क्षमा, छठी मइया

भूल-चूक, गलती हमार

भूल-चूक, गलती हमार

गोदी के बालकवा के दीहऽ

छठी मइया, ममता, दुलार

छठी मइया, ममता, दुलार

पिया के सनेहिया बनइहा

मइया, दीहऽ सुख सार

मइया, दीहऽ सुख सार

नारियर, केरवा, गउदवा

साजल नदिया किनार

साजल नदिया किनार

सूनीहा अरज, छठी मइया

बढ़े कुल-परिवार

बढ़े कुल-परिवार

घाट सजवली मनोहर

मइया, तोर भगती अपार

मइया, तोर भगती अपार

लीही न अरगिया, हे मइया

दीहीं आसीस हजार

दीहीं आसीस हजार

पहिले-पहिल हम कइनी

छठी मइया, बरत तोहार

छठी मइया, बरत तोहार

करीहा क्षमा, छठी मइया

भूल-चूक, गलती हमार

भूल-चूक, गलती हमार

भूल-चूक, गलती हमार


बोलो छठी मैया की जय 🙏🏻 

छठी मैया, आप अपने भक्तों पर अपनी कृपादृष्टि, अनुकंपा और स्नेह सदैव बनाए रखियेगा 🙏🏻  

छठी पर्व से जुड़ी अन्य post, कृपया इन्हें भी देखें और छठी मैया से पूर्ण रूप से जुड़ जाएं और उनकी हजारों-हजार असीस पाएं।

Thursday, 7 November 2024

Song : बहंगी लचकत जाय

आज छठ पर्व का तीसरा दिन, कार्तिक शुक्ल षष्ठी है। यह छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है, इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है, और शाम को अपने सामर्थ्य के अनुसार सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा इक्यावन प्रकार के फल-सब्जियों और अन्य पकवानों को बांस की डलिया में लेकर व्रती महिला के पति, देवर या फिर पुत्र नदी या तालाब के किनारे जाते है।

नदी और तालाब की तरफ जाते समय महिलाएं समूह में छठी माता के गीतों का गान करती है। नदी के किनारे पहुंचकर पंडित जी से महिलाएं पूजा करवाती है और कच्चे दूध का अर्ध्य डूबते हुए सूरज को अर्पण करती है।

लोक आस्था के महापर्व छठ के आगमन के साथ ही सभी जगह, छठ से जुड़े लोकगीत, लोग गुनगुनाने लगे हैं।

बहंगी लचकत जाय

इन गीतों की विशेषता यह होती है कि इसे भोजपुरी, मैथिली या मगही भाषा में गाया जाता है।

यह बहुत कर्णप्रिय होते हैं, और अपने तीज़-त्यौहार और संस्कृति से जुड़े हुए होते हैं।

आधुनिकता के इस दौर के बावजूद भी लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर ना ही परंपराओं में कोई बदलाव हुआ, ना ही लोगों की आस्था कम हुई है। यही वजह है की सैकड़ों वर्षों से आस्था और विश्वास से लोग,  लोक आस्था का महापर्व छठ मानते आए हैं।

आज, हम बात कर रहे हैं खास तौर पर छठ में बांस के बने सूप की, जिसका इस पर्व में अपना अलग ही महत्व है। 

छठ पूजा के दौरान आपने हमेशा ये प्रसिद्ध लोकगीत, कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, सुना ही होगा।

यह बेहद सुरीला व मधुर गीत है, और इसे अनुराधा पौडवाल जी की आवाज में सुन‌ लें, तो यह मन में एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह भर देता है। 

पर अगर इस गीत का अर्थ पता चल जाए, तो यह गीत आपको, अपनी तरफ और अधिक आकर्षित करेगा।

चलिए जानते हैं, इस गीत का वृतांत और अर्थ।

जब भी छठ का त्यौहार आता है, तब एक बांस का बना सूप (बहंगी), जिसे पीले वस्त्र में लपेटकर, उसमें पूजा से जुड़ा सारा सामान-फूल रखकर, घर के पुरुष उसे सर पर उठाकर नजदीक के घाट पर चलते हुए जाते हैं, तो सूप हिलता-डुलता है, जिसे हमारी भोजपुरी भाषा में (लचकत जाए) शब्द का प्रयोग करते है। इस पूरे वृतांत पर ही आधारित है यह प्रसिद्ध गीत... 

इस गीत की लाइनें इस प्रकार हैं - कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय, बहंगी लचकत जाय, होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाय।

इसका अर्थ हुआ कि - कच्चे बांस से बनी बहंगी (दौरी या सूप) को जब घाट पर ले जाया जा रहा है, तो वो लचक (हिल-डुल) रही है। ये बहंगी इस वजह से लचक रही है क्योंकि उसमें व्रत से जुड़ी तमाम सामग्रियां भरी हुई हैं। व्रती महिला अपने पति से कह रही है कि वो अब इस बहंगी को घाट तक पहुंचाए। व्रती महिला इस चीज को देखकर बहुत खुश है कि, बहंगी लचक रही है। कहरिया शब्द का इस्तेमाल इसलिए हुआ है क्योंकि गुजरे जमाने में व्रत, या किसी शुभ कार्य से जुड़ी सामग्री को ले जाने का काम कहार जाति के लोगों को दिया जाता था। जब मायके से लड़की के ससुराल किसी सामान को पहुंचाना होता था, तो भी कहार ही उसे ले जाया करते थे। बस इसी वजह से इस गीत में भी व्रती महिला अपने पति से, अपने देवर से कह रही है कि साजन जी, देवर जी, आप काहर के समान ही सामानों से सुसज्जित सूप को घाट (नदी के किनारे) पर पहुंचा दें।

जब राहगीर, सूप देखकर पूछता है कि यह कहां जा रहा है, तो उसे कहती है कि, तुम तो अंधे हो? (यहां तात्पर्य अक्ल के अंधे से है, जो नहीं देख पा रहा है, कि सूप किसलिए जा रहा है) यह सूप छठ मैया के पास जा रहा है, वो इसमें अपनी कृपा बरसाएंगी। पीले वस्त्र में लिपटा, सामानों से सुसज्जित सूप उनके लिए ही जा रहा है।


ये गीत बेहद लोकप्रिय है।

कांच ही बांस के बहंगिया, यह पूरा गीत इस प्रकार है -


कांच ही बांस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाय।

बहंगी लचकत जाय।।


होई ना बलम जी कहरिया,

बहंगी घाटे पहुंचाय।

बहंगी घाटे पहुंचाय।। 


ऊंहवे जे बारि छठि मैया,

बहंगी उनका के जाय।

बहंगी उनका के जाय।।


कांच ही बांस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाय।

बहंगी लचकत जाय।।


बाट जे पूछेला बटोहिया,

बहंगी केकरा के जाय।

बहंगी केकरा के जाय।।


तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया,

बहंगी छठ मैया के जाय।

बहंगी छठ मैया के जाय।।


ओहरे जे बारी छठि मैया,

बहंगी उनका के जाय।

बहंगी उनका के जाय।।

 

कांच ही बांस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाय।

बहंगी लचकत जाय।।


होई ना देवर जी कहरिया,

बहंगी घाटे पहुंचाय।

बहंगी घाटे पहुंचाय।।


ऊंहवे जे बारि छठि मैया,

बहंगी उनका के जाय।

बहंगी उनका के जाय।।


कांच ही बांस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाय।

बहंगी लचकत जाय।।


आज इस गीत को आप भी सुनें, गुनगुनाएं, और छठी मैया की असीम कृपा पाएं 🙏🏻

🪔🙏🏻 छठ मैय्या की जय 🙏🏻🚩

Wednesday, 7 August 2024

Song: आया तीज का त्यौहार

आया तीज का त्यौहार




आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे  

छम-छम छम-छम मोर नाचे 

कोयल गीत मल्हार गाए

पवन ठंडी चलती जाए

सुनो सुनो रे...

आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे 

घर आंगन सजा लो 

झूला, कदम्ब पे डालो

ऊंची ऊंची पेंग लगा लो 

सुनो सुनो रे 

आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे 

मेंहदी, हाथों में लगा लो 

चूड़ी हरी हरी डालो

चुनर से, तुम रुप सजा लो

सुनो सुनो रे 

आया तीज का त्यौहार

है यह सावन की बहार 

पड़े बूंदों की बौछार 

हर्षे सब नर नार 

सुनो सुनो रे 



आप सभी को हरियाली तीज पर हार्दिक शुभकामनाएं 🎉 

Saturday, 19 August 2023

Song : आई है तीज निराली

सावन के महीने के सभी त्यौहारों की अलग ही छटा होती है, फिर उसमें हरियाली तीज की तो बात ही क्या... 

हरे श्रंगार में सजी हुई सभी सखियां, बहुत ही खूबसूरत लगती हैं। सखियों की इसी सुंदरता और मस्ती को उजागर करता आज का यह गीत, आप सब की नज़र..

 

आई है तीज निराली 



तीज आई

आई है तीज निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे 


आओ आओ 

सखियों आओ 

हिल मिल तीज मनाओ 

खुशियों वाली

आई है तीज निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे 

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे 


हरी हरी चूड़ी

हरी हरी बिंदी 

हरी ही चुनर डाली

मतवाली

आई है तीज निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे  


झूला झूलो

आसमां छू लो 

छाई मस्ती  

मनभावन वाली 

आई है निराली 

छाई है हरियाली

छाई है चहूं ओर रे

हरे रंग का चढ़ा है 

बड़ा जोर रे  


(फिरकी वाली, तू कल फिर आना... की तर्ज़ पर यह गीत बना है, आप किसी और धुन में भी इसे गा सकते हैं)

आप सभी को हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 भगवान शिव व माता पार्वती की कृपा सभी पर बनी रहे 🙏🏻🙏🏻

Monday, 15 August 2022

Patriotic Song : 🇮🇳 हर ओर तिरंगा है

आज हर एक भारतीय, देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ है, हर ओर हमारा तिरंगा यूं लहरा रहा है, मानो पूरा भारत ही तिरंगा बन गया हो।इस दृश्य को देखकर, ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे हम वो पल, वो हर्ष, वो उत्साह फिर से जी रहे हों, जो 1947 में आज़ादी के समय था...

आइए इस पल को इस देशभक्ति गीत के साथ पुनः जीवित कर लें...


🇮🇳 हर ओर तिरंगा है 🇮🇳




हर ओर तिरंगा है,

हर छोर तिरंगा है।

भारत में जन जन का,

सम्मान तिरंगा है।


है जोश बहुत हम में,

इस जश्न ए आजादी का।

लहू रग में जो दौड़े,

वो जान तिरंगा है।



हर ओर तिरंगा है,

हर छोर तिरंगा है।

भारत में हर दिल का,

अरमान तिरंगा है।


आज़ादी के मतवालों का,

सब मिलकर नमन करें।

जिनकी शहादत का,

पहचान तिरंगा है।


हर ओर तिरंगा है

हर छोर तिरंगा है

जहां पुष्प सभी महके

वो बागान तिरंगा है


आज़ादी के उत्सव का

बीता, साल पचहत्तर है। 

नए सफल भारत का,

स्वाभिमान तिरंगा है।


हर ओर तिरंगा है,

हर छोर तिरंगा है।

भारत में हर मन का,

ईमान तिरंगा है।



हर मज़हब से ऊंचा,

हर जात से ऊंचा है।

भारत की सरगम का,

हर एक गान तिरंगा है।



हर ओर तिरंगा है,

हर छोर तिरंगा है।

भारत के कण कण का,

मान तिरंगा है।



हमारी आन तिरंगा है,

हमारी शान तिरंगा है।

रहे विश्व विजयी परचम,

गुणों की खान तिरंगा है।


हर ओर तिरंगा है,

हर छोर तिरंगा है।

भारत में तन मन का,

अभिमान तिरंगा है।



आप सभी को ७६वें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🎉 

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Tuesday, 12 July 2022

Poem : तुझको परिणाम मिलेगा

आज हमारे बच्चे, युवावस्था की दहलीज पर कदम रखने जा रहे हैं। इसमें से कुछ NEET, JEE, BHABHA, Agnipath, और भी बहुत से competition दें रहे हैं।

उन सभी में, साथ ही आने वाले समय में और भी युवावस्था की दहलीज में कदम रखने वाले सभी बच्चों में, जोश, उत्साह और हिम्मत को प्रेरित करने वाले एक गीत को प्रस्तुत कर रहे हैं।

सारे ही बच्चों को all theक्ष best, साथ ही बहुत सारा आशीर्वाद... सभी अपने लक्ष्य को प्राप्त करें...

तुझको परिणाम मिलेगा  


मेहनत तू किए जा,

तुझको परिणाम मिलेगा।

कोई चाहे या ना चाहे,

तुझको तो नाम मिलेगा।।


लम्बी कितनी डगर हो,

चाहे कितना कठिन सफर हो।

तू रुकना नहीं, तू झुकना नहीं,

तुझको मुकाम मिलेगा।।


मेहनत तू किए जा,

तुझको परिणाम मिलेगा।

कोई चाहे या ना चाहे,

तुझको तो नाम मिलेगा।।


वक्त लगे, लग जाए, 

तेरी हिम्मत हार ना पाए।

तू डरना नहीं, तू गिरना नहीं, 

मनचाहा काम मिलेगा।।


मेहनत तू किए जा,

तुझको परिणाम मिलेगा।

कोई चाहे या ना चाहे,

तुझको तो नाम मिलेगा।।


जो हार कभी ना माने

ईश्वर, भी साथ हैं उसके।।

यह विश्वास जिसने किया है

उसको पैगाम मिलेगा 


मेहनत तू किए जा

तुझको परिणाम मिलेगा

कोई चाहे या ना चाहे 

तुझको तो नाम मिलेगा 




Friday, 11 December 2020

Song : यादें शेष है!

आज आप सब के साथ मुझे  राजस्थान(सिरोही) के मंझे हुए साहित्यकार छगन लाल गर्ग "विज्ञ" जी के गीत को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है। 

आप भी गीत का आनन्द लीजिए।


 यादें शेष है! 



रश्मि भीगी आज यादें शेष है !


नेह के श्रृंगार का रस श्लेष है !!


पीर सारी रक्त में अविराम -सी !


जल रही तुम दर्द के पैगाम- सी !


ठहरता अनुराग का अवशेष है !


रश्मि भीगी आज यादें शेष है !


घेरते दृग रश्मियों के डोर में !


बाँध देता प्राण को फिर छोर में !


प्यार का कतरा बहा अखिलेश है !


रश्मि भीगी आज यादें शेष है !


स्नात कलियाँ खेलती अरमान से !


भृंग हलचल राग के अनुमान से !


प्रीत केसर फूल का परिवेश है !


रश्मि भीगी आज यादें शेष है !


गीत गाती इन हवाओं में जरा !


नेह की गुंजार का नव रस भरा !


प्यार का उजड़ा हुआ परदेश है !


रश्मि भीगी आज यादें शेष है !


ज्ञात पथ की दूर तक पहचान है !


भीगती मधु रात भी अनजान है !


आह कैसा रूप का अति तैश है !


रश्मि भीगी आज यादें शेष है !!


Disclaimer:

इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय इस blog (Shades of Life) के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और यह blog उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है।