आज सावन का पहला सोमवार है, शिव-शंभू को प्रसन्न करने का पर्व।
अपना सर्वस्व समर्पित करते हुए उनसे प्रार्थना है कि मझधार में फंसी हुई नाव को पार लगा दें।
वो सर्वशक्तिमान है, सर्वज्ञ हैं, उनकी कृपा से सब संभव है।
हे प्रभु, हम सब पर कृपादृष्टि बनाएं…
सब कुछ ही तेरे हाथ
मैं तो मैं हूँ,
मैं क्या जानूं,
तू तो जाने सारी बात।
जानूं मैं इतना ही जानूं,
सब कुछ ही है तेरे हाथ।
मैं तो मैं हूँ,
मैं क्या जानूं,
मेरी हस्ती तेरे हाथों,
तेरे हाथों हैं जज़्बात।
जानूं मैं इतना ही जानूं,
सब कुछ ही है तेरे हाथ।
मैं तो मैं हूँ,
मैं क्या जानूं,
दुःख मेरे कटते तेरे हाथों,
सुख मुझे मिलता तेरे साथ।
जानूं मैं इतना ही जानूं,
सब कुछ ही है तेरे हाथ।
मैं तो मैं हूँ,
मैं क्या जानूं,
मझधार में नाव जो अटकी,
उसको लगा दो तुम तो पार।
जानूं मैं इतना ही जानूं,
सब कुछ ही है तेरे हाथ।



















