आज पृथ्वी दिवस के पावन पर्व पर आइए, उसे धन-धान्य से परिपूर्ण करने का प्रण लेते हैं।
उसी प्रण को काव्यरूप में प्रस्तुत किया है।
चलो वृक्षारोपण करते हैं
क्या कभी सोचा है यूं,
पृथ्वी को धरा कहते हैं क्यूं?
क्योंकि वो ही है जो
माँ की तरह ही
हम सबके दुःखों को,
अपने अंक में धरती है।
और बदले में देने को,
अपनी झोली तुम्हारे
सुखों से भरती है।
देती है वो अविरल बहता,
कल-कल करता जल।
फल-फूल, सब्जी, और
सुनहरे भविष्य का कल।
तो चलो हम भी,
कुछ ऐसा करते हैं।
धरित्री के अंक को,
हरियाली से भरते हैं।
वो सदैव धन-धान्य से,
परिपूर्ण रहे,इसके लिए
चलो वृक्षारोपण करते हैं।
Happy Earth Day!
