Monday, 13 April 2026

Article : आशा भोसले - सुरों की मल्लिका

सुरों की मल्लिका, शोख और चंचल आवाज़ की धनी, महान playback singer आशा भोसले 92 वर्ष की आयु में आज पंचतत्व में विलीन हो गयी।

शरीर चला जाता है, लेकिन कुछ आवाज़ें हवा में ठहरी रह जाती हैं, दूर तक, देर तक, कभी-कभी हमेशा के लिए। 'नया दौर' से 'तीसरी मंज़िल', 'हरे रामा हरे कृष्णा' से 'उमराव जान' और 'इजाज़त' से होते हुए 'रंगीला' और उससे बहुत आगे तक।

वक़्त बदला, मंज़र बदले, पीढ़ियां बदलीं, पर्दे पर नायिकाएं बदलीं, पर आशा भोसले की आवाज़ हमेशा जवान रही। 

आशा भोसले - सुरों की मल्लिका


जीवन परिचय :

आशा भोसले के पिता जी‌ (दीनानाथ मंगेशकर) बहुत बड़े मराठी theatre actor, Hindustani classical vocalist थे।

दीनानाथ जी के पांच बच्चे थे, चार बेटियाँ और एक बेटा।

यूँ तो पूरा परिवार गायन में निपुण था, पर लता मंगेशकर और आशा भोसले गीतों के साम्राज्य की दो साम्राज्ञी थी, या यूं कहा जाए कि इनके बिना संगीत जगत अधूरा है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

दीनानाथ मंगेशकर जी का निधन बहुत जल्दी हो गया था, जिसके कारण परिवार के भरण-पोषण के लिए दोनों बहनों ने 13 और 10 वर्ष में ही playback singing आरंभ कर दी थी, जिसमें लता मंगेशकर स्वर कोकिला और आशा भोसले सुरों की मल्लिका के रूप में उभरी।

दोनों बहनों ने एक-साथ मिलकर 92, 93 यादगार गीत दिए, जिनमें 'मनभावन के घर जाए गोरी', 'मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को', 'मैं चली मैं चली देखो प्यार की गली', 'सखी रे सुन बोले पपीहा', 'छाप तिलक सब छीनी' जैसे गाने शामिल हैं‌। इन गानों ने न सिर्फ उस दौर में लोकप्रियता हासिल की, बल्कि आज भी लोगों की पसंदीदा गानों में शुमार हैं।


बहनों का संयोग :

बड़ी बहन: लता मंगेशकर (1929 - 2022)

छोटी बहन: आशा भोसले (1933 - 2026)

दोनों बहनों की उम्र का अंतर: 3 साल, 11 महीने और 11 दिन।

निधन का संयोग: दोनों महान गायिकाओं ने 92 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा।


जीवन संघर्ष :

सच तो यह है कि अपनी विलक्षण प्रतिभा के बावजूद, आशा भोसले को 'नंबर दो' के पायदान से ही संतोष करना पड़ा, क्योंकि हिंदी film industry में 'नंबर एक' पर उनकी अपनी ही महान और दिग्गज बड़ी बहन, लता मंगेशकर थीं।

आरंभ के दौर में आशा भोसले के गीतों का गाने का style लता मंगेशकर के जैसा ही था।

लता मंगेशकर प्रतिष्ठित गायिका थीं, जिसके चलते आशा जी की demand ज्यादा नहीं थी।

लेकिन film हम दोनों के एक गीत, "अभी न जाओ छोड़ कर" ने आशा जी को फिल्म जगत में प्रसिद्ध कर दिया।

लता मंगेशकर हर तरह के गीतों को नहीं गाती थीं, उन्होंने अभी न जाओ को reject कर दिया था, जिसे आशा भोसले ने गाया और यह गाना superhit हो गया। बस यहीं से उनका दौर शुरू हो गया।


बदला अपना style :

लता और आशा दोनों का नाम एक साथ लिया जाता था, पर लता जी के आगे आशा जी को कम ही काम मिलता था।

अतः आशा जी को लगा कि अगर वो भी लता जी जैसा ही गाती रहेंगी तो उनकी अपनी कोई पहचान या शोहरत नहीं होगी। इस के बाद उन्होंने अपने गाने का अंदाज बदलना शुरू कर दिया। उन्होंने अंग्रेज़ी फिल्में देखना शुरू किया ताकि western गाने सीख सकें, देख सकें कि वे अंग्रेजी में कैसे गाते हैं। उन्होंने कव्वाली, गजल गाना भी सीखा, और गाने के अलग-अलग रूपों में जरूरी आवाज के उतार-चढ़ाव भी सीखे। उन्होंने सब कुछ सीखना शुरू कर दिया। अंग्रेजी फिल्मों से गाने का अंदाज सीखा और अलग-अलग genre में प्रयोग करने लगीं।


सबसे versatile singer :

आशा भोसले ने केवल Roman गानों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने कैबरे, गजल, कव्वाली और pop जैसे कई अलग-अलग styles में गाना शुरू किया। उन्होंने आवाज में modulation, expression और अलग tone का इस्तेमाल कर अपनी अलग पहचान बनाई. यही वजह रही कि बाद में उन्हें industry की सबसे versatile singers में गिना जाने लगा और उनका अंदाज लता मंगेशकर से बिल्कुल अलग नजर आया।

हिंदी playback singing के क्षितिज पर लता नाम के सूरज की चमक के आगे अपनी एक अलग लौ जलाना आशा की ज़िद थी।

उस दौर में यह लगभग असंभव जैसा था, लेकिन अपनी ज़िद और बेमिसाल प्रतिभा के दम पर आशा उस साये से बाहर निकलीं और संगीत के क्षितिज पर अपना एक मुकम्मल आसमां बनाया।


बगावती शादी :

16 साल की उम्र में उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर अपने से 15-20 साल बड़े गणपतराव भोसले से शादी की, जो उनके लिए कष्टदायक रही। उन्होंने 1960 में दो बच्चों के साथ घर से बाहर निकलने के बाद खुद को संभाला।


संगीतमय सफर :

आशा जी की जिंदगी में दो शख्स ऐसे थे, जिन्होंने आशा भोसले को सुरों की मल्लिका का खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पहले ओ.पी. नैय्यर और दूसरे आर.डी. बर्मन (पंचम दा)।


ओ.पी. नैयर के साथ काम :

ओ.पी. नैयर के साथ उनकी साझेदारी ने उन्हें पहचान दिलाई और उन्होंने 60 फिल्मों में 324 गीत गाए। 


ओ.पी. नय्यर और आशा भोसले की कहानी : 

आशा को लता की परछाई से निकाल कर एक 'bold' और अलग अंदाज़ वाली गायिका के रूप में स्थापित करने का असली श्रेय ओ.पी. नैयर को ही जाता है।

हिंदी cinema की सबसे चर्चित और रूमानी कहानियों में से एक है, जो 1950 के दशक के अंत में शुरू हुई। नय्यर ने आशा को 'नया दौर' (1957) फिल्म से गायिका के रूप में स्थापित किया, जो बाद में 14 वर्षों (1958-1972) तक चले उनके प्रेम संबंध में बदल गया। इस रिश्ते ने आशा को star बनाया, लेकिन नय्यर की पारिवारिक जिंदगी पर गहरा असर डाला। 

नय्यर के संगीत और आशा की आवाज ने मिलकर 'उड़ें जब जब जुल्फें तेरी' और 'हम जब सिमट के आपकी बाहों में' जैसे blockbuster गाने दिए।


आर.डी. बर्मन से मुलाकात :

आर.डी. बर्मन (पंचमदा) के साथ उनकी प्रेम कहानी और विवाह एक मील का पत्थर था।

आरडी बर्मन और आशा भोसले की प्रेम कहानी संगीत और संवेदना का एक दुर्लभ संगम थी। उम्र में 6 साल का अंतर होने के बावजूद, 1960 के दशक के "तीसरी मंजिल" (1966) के समय से इनकी दोस्ती गहरी हुई। बर्मन (पंचम दा) के करियर के कठिन समय में आशा ताई ने उनका साथ दिया और 1980 में दोनों ने शादी कर ली, 1994 में बर्मन के निधन तक इनका साथ रहा। 

उनकी जोड़ी ने 'दम मारो दम', 'चुरा लिया है तुमने', और 'मेरा कुछ सामान' जैसे सदाबहार गाने दिए।


उपलब्धियां :

आशा जी को पद्म विभूषण सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1997 मई में आशा जी पहली भारतीय गायिका बनीं जो grammy award के लिए नामांकित की गईं।

आशा भोसले ने अपनी जिजीविषा और प्रतिभा से न केवल हिंदी cinema में अपना स्थान बनाया, बल्कि एक single mother के रूप में भी खुद को साबित किया।

आशा भोंसले ने करीब 800 से अधिक films के लिए 12,000 से अधिक गाने record किए हैं। इसी के साथ उनका Guinness Book of World Records में नाम दर्ज किया गया।

वैसे तो उनके एक से बढ़कर एक सुप्रसिद्ध गीत हैं, उनमें से यह चंद गीत ऐसे हैं, जो उनके सुरों की मल्लिका के खिताब को हमेशा justify करते हैं-

  • एक परदेसी मेरा दिल ले गया
  • उड़े जब जब जुल्फें तेरी 
  • इन आंखों की मस्ती के 
  • दम मारो दम 
  • ढल गया दिन, हो गई शाम 
  • पिया तू अब तो आजा 
  • आओ न, गले लगाओ न, लगी बुझाओ न
  • कह दूं, तुम्हें या चुप रहूं 
  • ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना 
  • मुझे नौलखा मंगा दे ओ संइया 
  • सजना है मुझे सजना के लिए 
  • तू, तू है वहीं, दिल ने जिसे अपना कहा 
  • जीना है तो, हंस के जीओ 
  • प्यार का तोहफा तेरा, बना है जीवन मेरा 
  • गोरी तेरे अंग अंग में 
  • यह परदा हटा दो
  • मिलने की तुम कोशिश करना
  • कतूबा, कतूबा
  • सपने में मिलती है 
  • तुम्हारी नज़रों में हमने देखा 
  • हम लाख छुपाएं प्यार मगर 
  • कतरा कतरा बहता है 
  • मेरा कुछ सामान 
  • खाली हाथ शाम आई है 
  • प्यार कभी कम नहीं करना 
  • कजरा मोहब्बत वाला 
  • कोई शहरी बाबू, दिल लहरी
  • दिल्लगी ने दी हवा
  • तुम से मिल के, ऐसा लगा 
  • मार गई मुझे तेरी जुदाई 
  • हो जा रंगीला रे 
  • कहीं आग लगे, लग जाए
  • ज़रा सा झूम लूं मैं 
  • ले गई, लें गई, दिल ले गई 
  • शरारा शरारा 
  • राधा कैसे न जले 


ऐसे ही और बहुत से hit गानों की लड़ी सजाई थी आशा जी ने, सबका जिक्र तो संभव नहीं।

आशा जी, आप सभी singers की प्रेरणा थीं और रहेंगी।

अपने सुमधुर गीतों के साथ सुरों की मल्लिका के रूप में आप हम सब के बीच में सदैव अमर रहेंगी।