Sunday, 10 May 2026

Poem : माँ ऐसा कैसे करती हैं

माँ ऐसा कैसे करती हैं


मैंने देखा है कि,

माँ जब अपनी माँ से,

और उनकी माँ जब अपनी मां से,

फ़ोन पर बातें करती हैं।

सच कहती हूँ,

वो भी बिल्कुल 

मुझ-सी ही लगती हैं।

वैसी ही वो हंसती हैं,

नखरे भी वैसे ही करती हैं,

रूठना-मनाना भी बिल्कुल 

मुझ जैसा ही करती हैं‌

पर जब वो मेरी 

माँ का रूप धरती हैं,

न जाने, तब क्यों वो

अलग रूप में लगती हैं। 

अपने सपनों को बिसराने वाली ,

कष्ट में भी मुसकाने वाली,

काम हो कितना भी अधिक, 

मिनटों में निपटाने वाली। 

हरदम खुद से पहले

वो मुझको ही रखती हैं।

समझ नहीं आता है कि 

माँ, ऐसा कैसे करती हैं?

अपने बच्चों की खातिर 

खुद को कितना बदलती हैं। 


मातृ दिवस के शुभ अवसर पर सभी माँ और उनकी ममता को कोटि-कोटि नमन।