Wednesday, 14 December 2022

Shades of Life: गरीब की बेटी (भाग -3)

गरीब की बेटी ( भाग - 1) और

गरीब की बेटी (भाग -2 ) के आगे... 

गरीब की बेटी (भाग -3)


अंजली ने सुना तो बोली, मेरी मां बहुत अच्छी है, मुझे जल्दी स्कूल भेजेगी और सिलाई सिखाने के लिए तो यूं झट तैयार हो जाएगी... 

रेखा सुनकर खुश हो गई, बोली अच्छी बात है, चार दिन बाद से सिलाई सीखने जाना है, 300 रुपए लेगी टीचर, तुम पैसे के साथ मेरे घर आ जाना, मां हम लोगों को लेकर चले चलेगी।

दोपहर के खाने के बाद, अंजली ने अपनी मम्मी से कहा, आज रेखा आई थी, उसका भी स्कूल छूट गया है और वो सिलाई सीखने जाएगी, मुझे भी भेज दोगी? 300 रुपए लेगी टीचर, हफ्ते में चार दिन क्लास लगेगी...

अच्छा, तेरे पापा आ जाएं तो बात करुंगी...

रात में अंजली के सोने के बाद दोनों पति-पत्नी ने बात की और इस निष्कर्ष पर निकले कि पढ़ाने-लिखाने से तो कुछ होना नहीं है, कौन बड़ी आफिसर बन जाएगी।

सिलाई सीख लेगी तो चार पैसे कमा लेगी। वैसे भी सिलाई सिखाने के पैसे, स्कूल की फीस से कम थे।

दूसरे दिन अंजली की मम्मी, अंजली को साथ लेकर, रेखा के घर पैसे लेकर पहुंच गई।

अंजली, रेखा से चहकते हुए बोली, मैं बोली थी ना, मम्मी मुझे सिलाई सिखाने को झट तैयार हो जाएगी। लो, हम आ गए..

वहां से सभी, सिलाई की क्लास में चले गए। वहां पैसे जमा कर दिए और अंजली ने सिलाई सीखना शुरू कर दिया। 

अंजली बहुत खुश थी, उसे अपने मम्मी-पापा दुनिया के सबसे अच्छे मम्मी-पापा लग रहे थे। वो स्कूल नहीं जा पा रही थी, पर अब उसे इसका कोई अफसोस नहीं था। 

अंजली होशियार थी, लगन की पक्की थी, उसने जल्द ही काज बनाना, उल्टी बखिया, छोटी-मोटी सिलाई और पेटीकोट बनाना सीख लिया। 

उसकी टीचर बोली, मैं तुम्हें अगले हफ्ते से सलवार सूट बनना सिखाऊंगी। ऐसा करना, तुम अब से शनिवार और रविवार की सुबह भी आ जाया करना... 

अंजली अत्यंत प्रसन्न थी, अब मैं अपने और मम्मी के लिए कपड़े घर में ही बना दिया करुंगी। 

यह बात, जब उसने अपनी मम्मी को बताई, तो वो शांत थी, उसने कोई खुशी नहीं दिखाई।

अंजली को समझ नहीं आया कि क्या हुआ? वो आशा भरी निगाहों से अपनी मां को देख रही थी।

तो उसके पापा ने अंजली को बताया कि कुछ दिनों में तेरा एक और भाई आने वाला है...

भाई की बात सुनकर, अंजली खुश हो गई, सच पापा, एक और भाई आएगा?

हाँ अंजली...

और सुन, अब तेरी मम्मी से काम नहीं हो रहा है, इसलिए तेरी सिलाई की पढ़ाई बंद करनी पड़ेगी... 

बंद...!

हाँ, वैसे भी तेरी टीचर अब 500 रुपए मांग रही है... उतने रुपए कहां हैं, हमारे पास? माँ दुःखी होते हुए बोली। वैसे ही कन्हैया की पढ़ाई के पैसे मुश्किल से जुटते हैं।

अब, तू ही बता कैसे होगा सब?

मम्मी को दुखी देखकर, अंजली बोली, ठीक है मम्मी, मैं छोड़ दूंगी सिलाई, तुम चिंता मत करो... तुम आराम करना, मैं घर के सारे काम कर लूंगी...

अंजली खुशी-खुशी मम्मी की तीमारदारी और घर के कामकाज में जुट गई...

दूसरा बच्चा भी लड़का ही हुआ, सभी बहुत खुश थे और अंजली खुशी से नाच रही थी, अंजली ने बड़े प्यार से उसका नाम राजा रखा... 

अभी राजा को हुए, 2 साल भी नहीं बीता था कि पूरे विश्व में कोरोना की लहर छा गई....

आगे पढें गरीब की बेटी (भाग -4) में ....

Tuesday, 13 December 2022

Story of Life : गरीब की बेटी (भाग-2)

गरीब की बेटी ( भाग - 1) के आगे...


 गरीब की बेटी (भाग-2)



अंजली खुशी में बांवरी हुई जा रही थी, सबसे कहती, देखा, मैं ना कहती थी कि भाई आएगा... 

पर वो नहीं जानती थी, जिस बात के लिए, वो इतनी खुश हैं, वो असलियत में उसके लिए खुशी के दिन नहीं थे.... 

पूरे घर में खुशी का माहौल था। दादी बहुत सारा सामान लेकर गांव से आईं थीं। अंजली ने बड़े प्यार से अपने भाई का नाम कन्हैया रखा। 

अंजली आज कल स्कूल नहीं जा रही थी, उसका पूरा दिन, कन्हैया के साथ खेलते हुए बीत जाता...

कुछ दिन घर में दादी रही, फिर जब उसकी मम्मी बिस्तर से उठ गई तो दादी गांव लौट गईं। 

जब सब लोग चले गए तो अंजली को अपने स्कूल की सुध जागी। वो अपनी मम्मी से पूछने लगी, मैं फिर से स्कूल कब जाऊंगी? 

मम्मी ने, बड़े प्यार से अंजली से बोला बिटिया, तेरे पापा और मैं तो अब काम पर जाएंगे, तभी पैसे और खाना ला पाएंगे।

अगर तुम भी चली जाओगी, तो कन्हैया अकेला रह जाएगा, वो छोटा सा है ना... तुम उसे अकेला छोड़ दोगी, घर में?

अंजली ने बड़े प्यार से कहा, नहीं... पर फिर दुःखी होकर बोली, लेकिन स्कूल?...

मेरी रानी बिटिया, जब कन्हैया बड़ा हो जाए, तो तुम और कन्हैया दोनों स्कूल चले जाना... ले जाएगी ना अपने भाई को स्कूल?...

हां, बिल्कुल मैं और कन्हैया दोनों जाएंगे... कहकर उसके नन्हें हाथों ने कन्हैया को उठा कर बहुत प्यार से मम्मी को बॉय बोल दिया।

मम्मी और पापा दोनों काम पर जाने लगे और छोटी सी अंजली, ने कन्हैया की सारी जिम्मेदारी बड़े जतन से निभानी शुरू कर दी, इस इंतजार में की, कि कन्हैया जल्दी बड़ा हो जाएगा और वो दोनों स्कूल जाएंगे। 

चार साल, कन्हैया के बड़े होने में गुज़र गए, पापा ने कन्हैया का स्कूल में दाखिला (admission) करा दिया। वो स्कूल जाने लगा।

अंजली ने पूछा, मम्मी अब तो कन्हैया बड़ा हो गया, स्कूल भी जाने लगा है, मैं कब जाऊंगी?...

बिटिया थोड़े पैसे जमा हो जाए, फिर तू चली जाना, 

यह सुनकर, अंजली गुमसुम हो गई...

फिर मां बोली, अच्छा सुन मेरी समझदार बिटिया, कुछ घर के काम में मेरी मदद कर दिया कर.... मैं बहुत थक जाती हूं। घर बाहर सारे काम करते करते... 

अंजली ने बड़े मन से हामी भर दी, वो अब घर के काम में माँ का हाथ बंटाने लगी।

दो दिन बाद अंजली की पक्की सहेली, रेखा उसके पास आई। और बोली, अंजली पता है मेरा भी स्कूल छूट गया, पर मेरी मां, मुझे सिलाई सिखाने की बात बोल रही है। तू भी बात कर लें, तो दोनों साथ चली जाया करेंगी...

अंजली ने सुना तो बोली, मेरी मां बहुत अच्छी है, मुझे जल्दी स्कूल भेजेगी और सिलाई सिखाने के लिए तो यूं झट तैयार हो जाएगी...

आगे पढ़ें, गरीब की बेटी ( भाग - 3) में...

Monday, 12 December 2022

Story of Life: गरीब की बेटी

 गरीब की बेटी  



अंजली, छोटी सी, प्यारी सी,  मासूम सी, चुलबुली लड़की थी, जो दिन भर हंसती खिलखिलाती, मस्ती करती रहती थी।

अपने मम्मी पापा की लाडली थी। दोनों ही उसे बहुत प्यार करते थे। उसकी मम्मी दूसरों के घर काम करती और पापा, एक बारात घर (marriage hall) में काम करते और वो स्कूल जाती। 

क्योंकि उसके पापा, बारात घर में काम करते थे, इसलिए दावत (parties) से बचा हुआ खाना वो घर ले आया करते थे, तो खाने-पीने की कोई कमी नहीं थी, बल्कि जब बारात घर में दावत होती थी तब तो, बहुत बढ़िया खाना भी खाने को मिलता था। बड़े सुख के दिन गुजर रहे थे।

उसे पढ़ने का बहुत शौक था, इसलिए वो बहुत मन लगाकर पढ़ती थी। 

पर क्योंकि वो लड़की थी, इसलिए उसके ददिहाल, ननिहाल, अड़ोसी -पड़ोसी  सभी कहते कि परिवार तब पूरा होता, जब लड़का हो, वही खानदान का नाम बढ़ाता है।

इन सबके चलते हुए, उसके मम्मी पापा ने एक बच्चा करने का मन बना लिया। 

कुछ दिन बाद ही उसकी मम्मी की गोद भर गई। जब अंजली को पता चला कि वो दीदी बनने वाली है तो वो ख़ुशी से झूमने लगी। तब वो मात्र 6 साल की थी...

उसने अपनी एक एक दोस्त को चिल्ला चिल्ला कर बता दिया कि वो अब कोई बच्ची नहीं है, बड़ी हो गई है। 

वो अब दीदी बनने वाली है। बहुत जल्दी उसकी मां उसके लिए एक छोटा सा भाई लाने वाली है।

वो उसके राखी बंधेगी, उसके संग खेलेगी, खाना खाएगी और दोनों लोग एक साथ सोएंगे...

उसकी मासूम बातें सुनकर, लोग कहते, तुझे कैसे पता कि भाई ही होगा।

वो पूरे विश्वास से बोलती, मुझे पता है... 

देखना, जब वो होगा, सब को पता चल जाएगा कि मैं सब सही बोलती हूँ। 

उसकी इस बात पर लोग हंस देते और कहते, अंजली, और अंजली की बातें...

दिन गुजरते गए और वो दिन भी आ गया है, जब उसकी मां के बेटा पैदा हो गया। 

अंजली खुशी में बांवरी हुई जा रही थी, सबसे कहती, देखा, मैं ना कहती थी कि भाई आएगा... 

पर वो नहीं जानती थी, जिस बात के लिए, वो इतनी खुश हैं, वो असलियत में उसके लिए खुशी के दिन नहीं थे....

पढ़ें आगे गरीब की बेटी (भाग -2 ) में....