दृढ़ संकल्प
आज एक सच्ची कहानी पर लेखनी चला रहे हैं, एक ऐसे लड़के की कहानी, जो बाकियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
तो बात तब की है, जब एक परिवार गांव से दिल्ली आता है, अपनी आंखों में सपने संजोए हुए।
परिवार में मां-पापा, दो बेटे और दो बेटियां। गांव के परिप्रेक्ष्य के अनुसार एक ideal परिवार।
गांव से आए थे, पढ़े-लिखे थे नहीं, अतः पत्नी ने लोगों के घर बर्तन का काम करना शुरू कर दिया। पति गुणीं था, अतः उसने भजन मंडली में वाद्य यंत्र बजाने व चौकीदारी का काम करना शुरू कर दिया।
शहर की महंगाई, इतने में बड़ी मुश्किल से गुजर-बसर हो रही थी। अतः बड़ी बेटी ने पूरे दिन घर में रहकर काम शुरू कर दिया और बड़े बेटे ने office में छोटा-मोटा काम आरंभ कर दिया।
छोटे बेटा-बेटी को छोटे होने के कारण उनसे किसी ने किसी भी तरह के काम करने के लिए नहीं कहा।
हाँ, school में admission ज़रूर करा दिया, जिससे घर में कोई तो पढ़ा-लिखा हो। वैसे भी शहर आने का कुछ लाभ तो होना चाहिए था।
उन लोगों का पढ़ाई-लिखाई कर के कुछ बड़ा हासिल करने का कोई ध्येय नहीं था। पर छोटा बेटा पढ़ने में होशियार था और उनकी पढ़ाई के लिए घर के सब लोगों के त्याग को मान भी देता था।
अतः 6 class तक आते-आते उसने अपना लक्ष्य साधना आरंभ कर दिया। उसने खेलकूद और फालतू की बातों से अपना मन खींचना शुरू कर दिया।
गांव में होने वाले शादी-विवाह आदि आयोजन में शामिल होना लगभग बंद करना आरंभ कर दिया, क्योंकि जब भी वो लोग गांव जाते थे तो उनके लौटने की कोई समय-सीमा नहीं होती थी।
इससे स्कूल की पढ़ाई छूटती थी। घर में कोई पढ़ा-लिखा था नहीं जो इस नुकसान को भर दे।
सक्षम की लगन अब स्कूल के teachers को भी दिखने लगी, वो भी चाहते कि सक्षम आगे बढ़े, यथासंभव प्रयास भी करते थे। पर सरकारी स्कूल आठवीं तक ही था तो आगे का सफ़र सक्षम को नये स्कूल से करना था।
नौवीं कक्षा थी और अब तक सक्षम ने एक कठिन संकल्प ले लिया था कि वो engineering करेगा।
Science subject की पढ़ाई अपने आप में कठिन होती है, फिर engineering में selection बिना coaching के संभव नहीं था।
फिर इसकी preparation से लेकर engineering करने तक का ख़र्चा बहुत अधिक होना था, लोगों ने उससे कहा भी, इतना करना तुम्हारे लिए असंभव है।
पर लोग जितना कहते, सक्षम का संकल्प और अधिक सशक्त हो जाता।
Coaching center की महंगी फीस के पैसे उसके पास नहीं थे। उसने सोचा कि super 30 में join कर ले। फिल्म आने से हर गरीब बच्चा आनंद सर तक पहुंचना चाह रहा था। Engineer बनने के सपने संजो रहा था।
पर film और serial में आने वाली बातों तक पहुंचना लगभग असंभव होता है, वो भी नहीं पहुंच पाया।
उसने online का सहारा लेना चाहा, पर mobile से आखिर कितना पढ़ता।
उसने सुबह लोगों की गाड़ियां साफ़ करना और school से लौटकर 2 घंटे waiter का काम करना, साथ ही छोटा-मोटा कुछ और काम भी करना शुरू कर दिया।
फिर उसने किश्तों में एक laptop खरीदा, online classes के लिए, और शाम को 2 घंटे के लिए एक library में जाना शुरू किया। जिसकी उसे fees भी देनी होती थी, जो कि मात्र ₹2000 थी, पर इतनी fees भी उसके लिए मात्र नहीं थी...
उसकी लगन देखकर library वाले ने उसे school की छुट्टी होने वाले दिनों में भी आने की permission दे दी।
कुछ अच्छे लोगों ने उसे Aakash and FIITJEE के notes उसे free में दे दिये।
वो अपनी मंजिल पाने तक जूझता रहा, अपनी कठिन परिस्थितियों के कारण बहुत से काम करके पैसों की कमी पूरी करने के लिए और बेइंतहा पढ़ता रहा, अपने सपने को साकार करने के लिए।
आखिरकार सक्षम के दृढ़संकल्प ने उसे उसकी मंजिल तक पहुंचा ही दिया, उसका DTU में selection हो गया।
और इससे ही यह बात सिद्ध हो गई कि जो दृढ़संकल्पित होता है, उसे मंजिल अवश्य मिलती है।
मेहनत तू किए जा,
तुझको परिणाम मिलेगा...
यह पूरा गीत, link पर click करके आप सुन सकते हैं, आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी- https://shadesoflife18.blogspot.com/2022/07/poem.html?m=1

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