Thursday, 25 October 2018

Poem : नहीं, वो तुम नहीं हो

नहीं, वो तुम नहीं हो




कल मिला रास्ते में कोई
नैन नक्श तुमसे ही थे
रंग रूप भी तुम सा ही था
वो जब सामने से निकली
तो मैं कुछ क्षण ठिठका भी था
पर तभी दिल ने कहा
नहीं, वो तुम नहीं हो
होतीे गर तुम, तो ठहर जाती
पास मेरे चली आती 

वही हंसी, वही खनक
आंखों में थी वैसी चमक
जुल्फों को वैसे ही लहराना
अदाओं से दीवाना बनाना
पर तभी दिल ने कहा
नहीं, वो तुम नहीं हो
होतीे गर तुम, तो ठहर जाती
पास मेरे चली  आती

चली गयी हो तुम दूर
पर दिल में मेरे
अब भी यहीं हो
इस कदर ज़हन
में समायी हो
गर झलक मिलती
है, किसी से
लगता है सामने
तुम आयी हो
पर तभी दिल ने कहा
नहीं, वो तुम नहीं हो
होती गर तुम, तो ठहर जाती
पास मेरे चली आती

Wednesday, 24 October 2018

Article : 'शरद पूर्णिमा' और पूर्णिमा से क्यों ख़ास


'शरद पूर्णिमा' और पूर्णिमा से क्यों ख़ास 


पुराणों के अनुसार कुछ रात्रियों को विशेष महत्व दिया गया है। जिनमें हैं शिवरात्रि, नवरात्रि और उन्हीं में शामिल हैं शरद पूर्णिमा की रात्रि।
चन्द्र को देवों में औषधियों का देवता माना गया है। कहा जाता है, इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है। शीतलता के प्रतीक चन्द्र देव को प्रसाद भी शीतल ही चढ़ाया जाता है। अतः आज के दिन चावल की खीर के भोग का विशेष महत्व है। रात्रि में चाँद निकल आने के पश्चात चावल की खीर को बर्तन में रख कर कुछ घंटों के लिए इस तरह रखा जाता है, कि उसमे चंद्रमा की सीधी किरणें पड़े। ऐसा माना जाता है, इस खीर का सेवन करने से पुनर्योवन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
लंकाधिपति रावण भी शरद पूर्णिमा की रात्रि को दर्पण के माध्यम से चंद्र की किरणों को एकत्र कर अपनी नाभि में अमरत्व क्षमता को बढ़ाया करता था।
ये तो रही पौराणिक बातें, पर हमारे युवा, पौराणिक नहीं अपितु विज्ञान में विश्वास रखते हैं। वैज्ञानिक सिद्धांतों व तथ्यों ने भी इसकी पुष्टि की है कि शरद पूर्णिमा में औषिधियों की स्पंदन क्षमता अधिक बढ़ जाती है,जिससे  ओसमोसिस प्रोसैस होने में रक्तिकाओं में एक विशेष ध्वनि उत्पन्न हो जाती है।
साथ ही सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र व अश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है।
अतः शरद पूर्णिमा की रात्रि को चाँदनी रात में भ्रमण करने से रोगों का नाश होता है। यहाँ तक कि दमा के मरीजों के लिए तो ये राम बाण है।       
खीर बनाने का महत्व- वैज्ञानिकों के अनुसार दूध में लैक्टिक अम्ल व अमृत तत्व होता है, ये तत्व चंद्र की किरणों से अधिक तेज़ी से ऊर्जा को शोषित करने की क्षमता रखता है, चावल के स्टार्च से ये प्रक्रिया और तेज़ी से हो जाती है। इसीलिए खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है।  जिससे खीर में चंद्र किरणों के औषधिय गुण समाहित हो जाएँ, और उसका सेवन करके हम में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाए।
चाँदी का बर्तन - खीर को यदि चाँदी के बर्तन में रखा जाए, तो इसकी औषधीय क्षमता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि चाँदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, व इससे विषाणु दूर रहते हैं।
शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं। बंगाल, उड़ीसा में आज के दिन ही लक्ष्मी माँ की पूजा की जाती है। कहा जाता है, आज की रात लक्ष्मी माँ ये देखने निकलती हैं, कि कौन जाग रहा है? इसी कारण इसे कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं। जो जाग रहा होता है, माँ उसे धन-धान्य प्रदान करती हैं। और सोने वाले के घर में निवास नहीं करती हैं।
जब भी पूर्णिमा होती है, चाँद पूर्ण होता है। तो वो रात तो वैसे ही अपनी अलग छटा बिखेर रही होती है। फिर अगर रात शरद पूर्णिमा की हो, तो सोने पे सुहागा हो जाता है, एक तो रात हसीन, उस पर आप इस रात को घूमेंगे तो निरोगी भी हो जाएंगे। तो सोच क्या रहे हैं। बढ़िया सी चावल की खीर बनाएँ, चंद्र देव को भोग लगाएँ, खीर रूपी प्रसाद का सब के साथ उसका आनंद लें फिर अपने पूरे परिवार के साथ रात्रि-भ्रमण अवश्य कीजिये।
सब का साथ हो, और निरोगी काया हो, बस यही तो ज़िंदगी का सार है।

Tuesday, 23 October 2018

Kids Story : जलन

जलन


रचना के पापा का Bombay में नया नया transfer हुआ था। उसका school  में admission  होने में कोई दिक्कत नहीं हुई। एक तो उसके पापा IAS Officer थे। दूसरा वो पढ़ने में होशियार भी बहुत थी। जल्दी ही उसकी दो दोस्त भी बन गयीं। उनका भी new admission था। उनके school में सुनन्दा का बहुत नाम था। वो सभी field में expert थी। रचना अभी तक जितनी भी cities में गयी थी, सभी जगह उसके पापा के कारण उसे special treatment मिलता था। जिससे वो थोड़ी घमंडी भी हो गयी थी।
पर इस school में सुनन्दा के आगे उसकी कोई value नहीं थी। जिसके कारण वो सुनन्दा से चिने लगी। एक दिन स्कूल में रंगोली competition  था। रचना और सुनन्दा दोनों ही रंगोली में expert थे। जब दोनों की पूरी रंगोली बन गयी, तो ये समझ पाना मुश्किल हो रहा था, कि first  कौन आएगा। निर्णायक लोगों को ½ घंटे में आ कर निर्णय लेना था।
तभी रचना को एक युक्ति सूझी। उसने वहाँ लगे fan को सुनन्दा की रंगोली की तरफ मोड़ दिया, जिसका नतीजा ये हुआ कि सुनन्दा की रंगोली के सारे रंग mix हो गए। ये देख कर सुनन्दा मायूस हो गयी। उसे ठीक करने का समय भी उसके पास नहीं था। सुनन्दा का मायूस चेहरा देख कर रचना बहुत खुश हुई। और अपनी रंगोली के पास आकर खड़ी हो गयी।
निर्णायक गण आ गए। सब की रंगोली के पास आ कर वो देखते जा रहे थे। पर एक रंगोली ऐसी थी, जिसको देखने के बाद वो आगे बढ़े ही नहीं।
अब result की बारी थी। 3rd, 2nd का नाम घोषित हो चुका था। पर अब तक रचना और सुनन्दा दोनों में से किसी का भी नाम नहीं पुकारा गया था। सब सोच रहे थे, कि अब किसका नाम पुकारा जाएगा। पर रचना अच्छे से जानती थी, कि अब वो ही 1st आएगी। और फिर 1st का नाम भी बुलाया गया, रचना का सोचना एकदम सही निकला, रचना 1st आई। सुनन्दा आज पहली बार हारी थी। उसके आँसू थम नहीं रहे थे। सब वापस अपनी class की ओर जाने लगे। तभी एक आवाज़ आई। आप सब जानना नहीं चाहेंगे, इस बार से एक extra ordinary award भी शुरू किया गया है, वो किसे मिला है? extra ordinary means first से भी आगे!
सब वहीं रुक गए। वो है सुनन्दा!
सुनन्दा! पर उसकी रंगोली तो खराब हो गयी थी ना? रचना बुदबुदाई।
जी हाँ, यही वो बच्ची है, जिसने ये prize जीता है। आइये, आप सब मेरे साथ। सबने जा के देखा, मिले हुए रंगों से बहुत सुंदर back ground  में सफेद रंग से राधा- कृष्ण की नृत्य की रंगोली बनी थी। निर्णयक ने सबसे बोला। आप सब इस रंगोली को ध्यान से देखें तो लगेगा, जैसे यहाँ सच में राधा-कृष्ण रासलीला हुई हो, इस बच्ची ने कितना सुंदर रंग बिखेरा है।
सब अद्भुत अद्भुत कह उठे। सच, सारे टीचर भी बोल उठे, आज तक तो सुनन्दा ने भी इतनी अच्छी रंगोली कभी नहीं बनाई थी। रचना किसी को नहीं बता पा रही थी, रंगों की छटा सुनन्दा ने नहीं उसने बिखेरी है। आज तो सुनन्दा को और भी ज्यादा वाह-वाही मिल रही थी। जैसे आग में तप के सोना निखर गया हो।
रचना तो सुनन्दा को down करना चाह रही थी, पर आज उसकी जलन ने सुनन्दा को और ज्यादा famous कर दिया