Thursday, 31 January 2019

Story Of Life : छोटी सी बात (भाग-२)



अब तक आपने पढ़ा, सुधा अपने ससुराल में बहुत खुश है, सब सुधा को बहुत प्यार व मान देते हैं। सुधा की सास, सुधा पर उसके देवर की शादी करवाने की ज़िम्मेदारी सौंप देती है...

छोटी सी बात (भाग-२) 


बेटा, भगवान का दिया सब तो है, हमारे पास। अगर तुम्हें लग रहा है, कि 
लड़की अच्छी है, तो तुम बात कर लो, और हाँ, तुम बात करते समय अपनी आंटी को ये भी बोल देना, कि हमे दहेज़ बिलकुल भी नहीं चाहिए। पर माँ वो हमारी तरह धनी भी नहीं हैं, शायद शादी में उतनी धूम भी ना कर पाएँ। ठीक है, वो हम देख लेंगे, माँ ने कहा।
सुधा अपने मायके गयी, तो अपनी mumma से उसने बताया कि उसकी सासू-माँ ने उसके ऊपर नितिन की शादी की ज़िम्मेदारी सौंपी है, दहेज़ भी लेने से इंकार कर दिया है। नितिन के लिए उसे सरिता पसंद आ रही है। ये तो बहुत अच्छी बात है, तो ये सब तुम इतनी टेंशन में क्यू बोल रही हो? Mumma ने सुधा से पूछा। mumma, मुझे केवल ये लग रहा है, कि क्या वो लोग शादी धूमधाम से कर पाएंगे?
चल ना बात कर लेते हैं। अगर वो लोग धूम से नहीं कर पा रहे होंगे, तो मैं और तुम्हारे पापा एक और बेटी की शादी कर लेंगे। mumma की ऐसी बात सुन कर सुधा चहक उठी, बोली mumma आप बहुत अच्छी हैं।
फिर दोनों सरिता के घर चले गए। सरिता की माँ सारी बात सुन के बहुत खुश हुईं। बोली बेटा मेरी बेटी ने पिछले जन्म में कोई बहुत अच्छा काम किया होगा, जो उसे तुम्हारे जैसी बड़ी बहन जैसी जेठानी मिलेगी।
आंटी मेरे ससुराल में सभी बहुत अच्छे हैं, कर्म तो मेरे भी बहुत अच्छे रहे होंगे, जो मुझे वो लोग मिले। सरिता को भी सब बहुत पसंद आएंगे।
पर, सुधा धूमधाम से शादी करने की बात पूछने से झिझक रही थी। Mumma ये समझ गईं, उन्होने सीधे ही पूछ लिया, आप लोग शादी कैसी कर पाएंगे? वैसे मैं और सुधा के पापा आपका इसमे सहयोग कर सकते हैं।
नहीं नहीं, सरिता की माँ बोलीं, मैं अपनी बेटी की बहुत धूमधाम से शादी करूंगी। सरिता के पापा, के सरिता की शादी को ले कर बहुत अरमान थे। उन्होने सरिता की शादी के लिए 2 प्लॉट डाल के रखे थे। उन्होने अपने अंतिम समय में मुझसे कहा था, कि उनकी लाड़ो की शादी ऐसी धूम से करूँ, कि सारी दुनिया याद रखे। आप बस ये कर दीजिये, वो प्लॉट बिकवा दीजिये।
Mumma बोलीं, आप उसकी चिंता मत कीजिएगा, सुधा के पापा के बहुत दोस्त हैं, आपको प्लॉट के ऊंचे ही दाम मिलेंगे। पर,  आंटी जी फिर आप के पास क्या रह जायेगा? सुधा चिंतित सी बोली। मुझ अकेली जान के लिए सरिता के पापा ने जो FD कराई है, वो बहुत है।
सुधा ने ससुराल में सब बात अपनी माँ को बता दी। नितिन और सरिता को मिलवाया गया। दोनों ने कहा, अगर पसंद सुधा की है, तो दोनों तैयार हैं। जब नितिन को पता चला कि, सरिता भी उसकी भाभी को बहुत मानती है, तो उसे सरिता और ज्यादा भा गयी।
सुधा बहुत मन से शादी की सारी तैयारी में जुट गयी, उसके लाडले की जो शादी थी। शादी के सारे function 1 महीने के अंतर में ही हो जाने थे। आज दोनों की engagement होनी थी, सब जगह से सुधा को ही पुकारा जा रहा था, क्योंकि सभी चीज़ की ज़िम्मेदारी सुधा ने अपने कंधों पर उठा रखी थी।
सारे काम निपटा कर सुधा engagement में जाने के लिए तैयार हो रही थी। साड़ी में safety pin लगाना रह गया था। तभी नितिन आ गया, भाभी जल्दी चलिये, माँ बोल रही हैं, मुहर्त का समय हो गया है। हाँ अभी आ रही हूँ, कह कर सुधा ने कस के पिन साड़ी में लगाने की कोशिश की, बहुत देर से pin साड़ी में लग नहीं रही थी। पर अबकी जब लगी, तो सुधा की चीख भी निकाल गयी। क्या हुआ भाभी? नहीं, कुछ नहीं pin थोड़ा सा चुभ गयी थी। कहाँ? भैया को भेजूँ क्या? अरे, नहीं रे, pin तो ऐसे कई बार ही चुभ जाती है। चलो, चलते हैं, वैसे ही बहुत देर हो गयी है।
बहुत ही अच्छे से सारा function निपट गया। अब इसके बाद हर हफ्ते ही कुछ ना कुछ function थे। सुधा उन सब की तैयारी में जुट गयी, सारी ज़िम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। और वो सारे function इतने अच्छे से plan कर रही थी, कि सारे function एक से बढ़ कर एक हो रहे थे। वो सबकी पसंद, सुविधा और भव्यता सबको दिमाग में रख कर plan करती थी।
पर इन सब में वो, ये ध्यान नहीं रख रही थी, कि जिस कंधे में pin चुभी थी, वहाँ दर्द भी रह रहा था, और वहाँ swelling भी आ गयी है...

सुधा की इतनी व्यसता, का क्या असर होगा, जानते हैंछोटी सी बात (भाग-३)  

Tuesday, 29 January 2019

Story Of Life : छोटी सी बात


छोटी सी बात


सुधा अपनी ससुराल में बहुत खुश थी। वो सब का बहुत ध्यान रखती थी। ससुराल में वो सबकी बहुत लाडली थी। और उसका देवर नितिन वो... वो तो भाभी का पूरा भक्त था। एक बार सुधा कुछ बोल देती, तो बस नितिन उसको जब तक पूरा ना कर देता, कुछ और ना करता।
नितिन की शादी योग्य उम्र हो गयी थी। माँ ने सुधा को बुलाया, बोली बेटा अब तू नितिन की शादी की ज़िम्मेदारी भी ले ले। और अपनी जैसी ही कोई ला दे मेरे नितिन के लिए, तो मेरी ये ज़िम्मेदारी भी खत्म हो जाए। वैसे तेरे आ जाने से भी मेरी ज़िम्मेदारी पूरी हो गयी है, तेरे आने के बाद से किसी को भी मेरी याद कहाँ आती है। तुम आई तो थी बहू बन के, पर घुलमिल के कब इस घर की बेटी बन गयी पता ही नहीं चला। और मेरे नितिन की तो तुम माँ, बहन, भाभी, सहेली सब बन गयी, उसको को तो तेरे सिवा कोई सूझता ही नहीं है।
माँ, मैं ये ज़िम्मेदारी लेने को तैयार हूँ, पर एक बार नितिन भैया से भी तो पूछ लेते हैं, उनकी पसंद क्या है?
ठीक कह रही हो बेटा, पर वो भी तुम ही पूछ लेना, तुझे ही अपने दिल की बात बताएगा। माँ सुधा से ये बात कर ही रहीं थी, कि नितिन कमरे में आ गया।
अरे माँ जब नितिन भैया आ ही गए हैं, तो अभी ही जान लेते हैं। हाँ बेटा पूछ ले इससे। आप लोग क्या पूछना चाह रहे हैं॰ नितिन ने पूछा? यही कि आपको कैसी लड़की पसंद है? भाभी आपको जो लड़की पसंद हो, मैं उसी से शादी कर लूँगा। देखा, सुधा मैंने क्या कहा था, नितिन को तुम जिसे कहोगी, ये उसी से शादी कर लेगा। सब ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे।
सुधा ने अपनी ज़िम्मेदारी पूरा करने की तरफ सोचना शुरू कर दिया। उसने अपने पति सचिन से कहा, माँ ने मुझे नितिन की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी सौंप दी है। आपको क्या लगता है, सरिता कैसी रहेगी अपने नितिन के लिए?
कौन सरिता? तुम उसके विषय में माँ से ही बात कर लो। वैसे भी तुम ladies इस मामले में expert होते हो। मैंने भी माँ की पसंद से ही तुमसे शादी की थी। देखो ना माँ का निर्णय कितना सही था। जान हो तुम इस घर की, सचिन ने सुधा के गालों को सहलाते हुए बोला।
हाँ, हाँ, आप दोनों भाई एक से ही हैं, सारी जिम्मेदारी हम ladies पर छोड़ के ऐश कीजिये। मैं माँ से ही पूछ लूँगी, सुधा गुस्साते हुए बोली।
अगले दिन वो माँ से पूछने लगी, माँ मेरे मायके में पड़ोस में निशा आंटी रहती हैं, उनकी बेटी सरिता बहुत ही सुंदर और अच्छे संस्कारों वाली लड़की है। पर उसके पापा नहीं हैं, तो वो लोग दहेज़ नहीं दे पाएंगे। अगर आपको ठीक लगे तो, मैं बात कर लूँ?.....

क्या सुधा, अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा पाई, जानने के लिए पढ़ते हैं छोटी सी बात (भाग -२) में

Saturday, 26 January 2019

Poem : अब देश की बारी है

आप सभी को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकमनाएं, आइए इस गणतन्त्र दिवस पर हम देश के विकास की शपथ लेते हैं। वही देश को आज़ाद कराने वाले शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

अब देश की बारी है



देश विकास करे ना तो
आज़ादी के मतवालों की
व्यर्थ हो जाए कुर्बानी है
उन शहादतों की खातिर
क्या सबने विकास की ठानी है
बहुत सोच चुके 
अपनी खातिर
अब देश की बारी है
केवल नेताओं की नहीं
देश का विकास करने की 
हम सबकी ज़िम्मेदारी है
कालाबाज़ारी,बेईमानी,अत्याचार
हैं ये सब 
बर्बादी के हथियार
गर ठान ले 
हर भारतवासी
इन सबका होगा, 
भारत से बहिष्कार  
तो, समझो भारत को
विकसित देशों में
सर्वप्रथम पहुँचने 
की तैयारी है