Monday, 1 April 2019

Article : April Cool Day


April Cool Day


Courtesy: joy.org.au

जी हाँ आप ने सही पढ़ा, हमने April cool day ही लिखा है। बहुत सालों से हम 1 April को April fool day की तरह से मानते आए हैं। पर कभी आप ने सोचा है, इससे हासिल क्या होता है? कुछ भी नहीं!  सिवाय इसके कि हम किसी को कुछ क्षण के लिए सबकी नज़र में या उसकी खुद की नज़र में मूर्ख, छोटा या नीचा साबित करने में कामयाब हो जाते हैं।

पर पता है, किसी को नीचा दिखाना कोई महानता का काम नहीं है। तभी आपको इसके लिए कोई कभी याद नहीं करेगा। पर इसके बदले में आप किसी की ऐसी मदद कर दें, कि उसकी ज़िन्दगी में सुकून आ जाए, तो वो आपको अवश्य याद रखेगा।

इसलिए इस बार से हम 1 April को cool day की तरह से मानना शुरू करेंगे। तो सोच क्या रहे हैं? पूरा दिन बचा है, अभी से ही planning करते हैं, कि हम कैसे दूसरों के काम आते हैं।

उस दिन हम ऐसा कुछ plan कर सकते हैं, कि अपने बच्चों के लिए तो हम बहुत कुछ करते हैं। अब की बार माँ, पापा के भी लिए कुछ करें।

अपने employees को डाँटा तो अपने बहुत बार होगा, उस दिन जिस बात में वो अच्छे हैं, उसकी प्रसंशा कर दें।

अगर आपकी maid बहुत दिनों से advance माँग रही है, तो उसे उस दिन दे दीजिये।

कोई भूखा मिल जाए तो, उसे कुछ खिला दीजिये, किसी की प्यास बुझा दीजिये। कोई रूठा है, तो मना लीजिये।
Courtesy: Pexels

बच्चों को ice-cream खिला कर cool day की शुरुआत करें, उनको कब से गर्मी की प्रतीक्षा थी, कि गर्मी आये, और उनके cool cool day शुरू हो जाएँ

यकीन जानिए, किसी को मूर्ख बना के जो खुशी मिली होगी, उसे ज्यादा सुख, किसी को मुस्कुराहट देने में है।

और अगर आपको ये सब नहीं करने की इच्छा है तो, सबसे पहली शुरुआत हम 1, 1 पौधा अपने आसपास लगा कर करते हैं, इससे हम दो काम एक साथ करेंगे, एक तो भूमि ऋण या प्रकृति ऋण चुकाएंगे, साथ ही आगे आने वाले पीढ़ी को शुद्ध वातावरण भी देंगे।

Fool day मनाया बहुत
Cool day मनाएंगे अब
मूर्ख बना चुके बहुत
चेहरे पर खुशियाँ लाएँगे कब  

Friday, 29 March 2019

Story of Life: लालसा (भाग-२)


अब तक आपने पढ़ा, सुमित को उसके बचपन के दोस्त, रजत का फ़ोन आता है, कि सभी दोस्त एकत्रित हो रहे हैं, वो भी आ जायेपर सुमित दुविधा में है, क्योंकि उसे रचना को हीरे का हार दिलवाने जाना है जब रचना को reunion की बात पता चलती है, तो वो बिना क्रोधित हुए सुमित को जाने को कह देती है....... 
अब आगे.....   

लालसा (भाग-२)

रचना बोली आप अपने दोस्तों से मिल आइये, ऐसे मौके बार-बार नहीं मिलते हैं।

पर तुम्हारा set…, उसका क्या होगा, क्या पहनोगी फिर?
उसका कुछ सोचते हैं, मैं jeweller से बात करूंगी, कुछ सोचती सी बोली "रचना, 

मैं फिर time नहीं निकाल पाऊँगा", मैंने उसे याद दिलाते हुए बोला, जिससे वो आखिरी क्षण मैं मुझसे कोई उम्मीद ना लगाए। पर अभी भी रचना ने उन्हीं सधे शब्दों में कहा, कि ठीक है, आप मिल आइये।

मैं बहुत खुश था, अपने दोस्तों से मिलने की बात सोच-सोच कर, साथ ही इस बात से भी की रचना ने अपनी खुशी को पीछे रखकर मेरी खुशी को प्राथमिकता दी।

सारे ही दोस्तों ने खूब मज़े किए, वक़्त तो जैसे हमे अपने बचपन में ही ले गया था। चार घंटे हम उसी दौर में रहे। फिर सभी अपने अपने घर जाने को ready हो गए।

जब मैं लौट रहा था, तो रजत भी साथ हो लिया। उसे, मैंने अपने और रचना से हुई बात के बारे में बताया।

सुनकर रजत बोला, मतलब आज भाभी के कारण हमारी team जुड़ पायी। तभी हम उसी jeweller के showroom के सामने से गुजर रहे थे।   

मैंने रजत से कहा, भाई तू यहाँ से cab कर ले। मुझे रचना के लिए set लेना है अभी तो showroom खुला है, पर घर जा कर रचना को लाऊँगा, तब तक में बंद हो जाएगा। क्या करूँ, कुछ सूझ नहीं रहा है।

अरे यार, क्या छोटा करने वाली बात बोल दी, रजत गुस्से में भर कर बोला। अरे मैं भी तेरी मदद करना चाहता हूँ। तू जा jeweller के showroom पर set पसंद कर, मैं तब तक भाभी को लेकर आता हूँ। आज हमारी लालसा पूरी करने में उन्होंने अपनी इतनी बड़ी लालसा का त्याग कर दिया था।

मुझे तो मन मांगी मुराद मिल गयी थी। मैंने रजत को कहा, क्या खूब idea दिया है, मेरे दोस्त! जा, जल्दी से रचना को ले आ। तब तक मैं कुछ set पसंद करके रखता हूँ।

थोड़ी ही देर में रजत और रचना आ गए। रचना जब showroom पहुंची, तो बहुत surprise थी। आते ही बोली, आपने मुझे यहाँ के लिए बुलाया था?...... क्यों रजत ने तुम्हें बताया नहीं था? मैंने रजत की तरफ देखते हुए पूछा।

नहीं! मुझे तो रजत भैया, बस इतना ही बोले, चलिये भाभी, आज धन्यवाद देने की रात है। मैं सारे रास्ते पूछती रही, कि इसका क्या मतलब है। पर ये कुछ बताएं तब ना, रचना कुछ झुंझलाती सी बोली।

अरे भाई, तुम दोनों के प्यार के बीच में क्यूँ हड्डी बनूँ, रजत शरारत भरी आवाज़ में बोला।

रचना के सामने मैंने दो set रख दिये, उन्हें देखकर रचना खुश होते हुए बोली, ओह! ये बात थी?
Courtesy: Shutterstock

हाँ, पसंद कर लो, मैंने रचना को बैठाते हुए बोला। मुझे तो दोनों ही बहुत पसंद आ रहे हैं, अब क्या करूँ? रचना असमंजस में पड़ कर बोली।

तो तुम दोनों ही ले लो। आज मैं बहुत खुश हूँ, जिसके पास इतना अच्छा हमसफर हो, जिसे अपनी लालसा से बढ़कर मेरी लालसा की चिंता हो, उसके लिए 1 set कम होगा।

फिर मैं रजत की तरफ मुड़ गया, धन्यवाद! मेरे दोस्त, आज ये तुम्हारे कारण ही संभव हो पाया।

अरे यार, मुझे शर्मिंदा मत कर, आज भाभी ने सिर्फ तेरी ही नहीं, हम सबकी लालसा पूरी की है, तो इतना फर्ज़ तो मेरा भी बनता है ना।

सब हँसने लगे, सच आज का दिन बहुत अच्छा था।

Thursday, 28 March 2019

Story Of Life : लालसा


लालसा


आज अपने दोस्तों का साथ बहुत दिनों के बाद मिला था। पहले तो हम बहुत सारे घंटे साथ बिताया करते थे। पहले स्कूल में, फिर tuition, और उस के बाद, कुछ घंटे मस्ती के। कभी चाय की दुकान पर या कभी चाट- पकौड़ी के ठेलों पर। वो खींचते थे, एक दूसरे को, कि आज भी याद आ जाता है, तो चेहरे पर एक मंद मुस्कान छोड़ ही जाता है। और जो हम घंटों खेला करते थे, उसको तो जोड़ा ही नहीं जा सकता। क्या मस्ती भरे दिन थे।

फिर सारे set हो गए बड़ी बड़ी post पर। और उसके बाद शादी, family। बस फिर क्या था, सारा समय ना जाने कहाँ फुर्र हो गया। दोस्तों के लिए तो क्या अपने शौक के लिए भी time नहीं मिलता है। पहले office के सौ काम, फिर घर के 36 झमेले। इन से फुर्सत मिलते- मिलते पूरा पस्त।

पर आज रजत का सुबह फोन आया। यार, अनिल London से एक हफ्ते के लिए आ रहा है, उससे मिलने का Sunday का plan है, hotel rivera में। हम सभी 10 दोस्तों का मिलने का plan है। इस समय नरेंद, और निखिल भी पुणे, और केरल से आए हुए हैं।
Courtesy: Depositphotos



देख मना मत करना, तू भी आ जाएगा तो अपनी क्रिकेट की team इकठ्ठा हो जाएगी। रजत की ऐसी बात सुन कर मैं मना नहीं कर पाया। सच बहुत दिनों बाद ऐसा बढ़िया मौका हाथ आया था।

पर अब रचना से बात करनी थी, वो कई दिनों से मुझसे अपने लिए diamond का set लेने को बोल रही थी। पर काम के busy schedule के कारण मैं उसे एक महीने से टाल रहा था। पर अभी पिछले हफ्ते ही इस Sunday में चलने की बात की थी।

अब समझ नहीं आ रहा था, आखिर कैसे उससे कहूँ, कि इस Sunday भी नहीं जाऊँगा। क्योंकि दोस्तों के साथ समय बिताना है। ladies को वैसे भी गहनों से बहुत लगाव होता है, फिर वो set उसे अपने भाई की शादी में पहनना था। महिना भर बाद तो मैं उसे दिलाने का दिन निकाल पाया था। 

और साथ ही problem ये भी थी कि अगर मैं इस Sunday को नहीं जाता तो, उसे शादी में पहनने के लिए set नहीं ही दिला पाता। क्योंकि मेरे next दो Sunday tour थे, फिर शादी की date आ जानी थी।

मैं अभी इसी उधेड़बुन मैं ही था, कि सामने से रचना आ गयी। मुझे यूं सोच में डूबा देखकर वो पूछने लगी, क्या हुआ, सुमित? क्या सोच रहे हो? कोई problem है क्या? मैंने सच बोलना ही उचित समझा। और रचना को रजत से फोन पर हुई सारी बात बता दी।

मुझे पूरी उम्मीद थी, सुन कर रचना गुस्सा हो जाएगी। पर नहीं! ऐसा कुछ नहीं हुआ......

ऐसा क्या हुआ, कि रचना गुस्सा नहीं हुई, जानते हैं लालसा (भाग- 2) में