Wednesday, 16 October 2019

Article : करवा चौथ.... सुहागन व्रत.... Most popular fast


करवा चौथ..सुहागन व्रत..Most popular fast  


लीजिये जी फिर से आ गया, सुहागनों में most popular करवा चौथ का व्रत।

सारे ही व्रतों में इसकी TRP सबसे ज्यादा high है।

अरे..... आप नाराज़ क्यों हो रहे हैं? TRP लिखने से।

इसके नज़ारे तो आपको बाज़ारों से लेकर मन तक सब जगह देखने को मिल जाएंगे।  

बाज़ारों में कपड़ों की दुकान हो, jewellery की या सुहाग के सामानों की, सब जगह ladies की भीड़ दिखेगी। हर तरफ कर्वे सजे हुए हैं, रंग बिरंगी सजी हुई चलनी हैं, सीकें हैं, और पूजा के बाकी समान भी हैं।

जगह जगह मेहंदी वाले भी दिखाई दे रहे हैं। इस समय हाथों में सजी मेहंदी और भर भर चूड़ियों वाले हाथ ही नज़र आएंगे।   

बाज़ार की रौनक के बाद मन भी देख लें।

आप खुद ही सोचिए ना, सुहागनों के व्रत तो, तीज और वट सावित्री (बरगदाई अमावस्या) भी हैं, पर इनको हर कोई नहीं करना चाहते हैं। जिसमें तीज तब भी लोग जानते हैं, पर बरगद अमावस्या का तो कितनों को नाम भी पता नहीं होगा।

क्यों कुछ गलत कहा हमने? नहीं ना!

पर बात जब करवा चौथ की आती है, तब तो जिनके घर में रीति है, वह तो रखती हैं ही, जिनके घर रीति नहीं होती, वह भी शौक में रखने लगते हैं।

किसी और की क्या बात करें, हमने खुद शौक में ही रखना शुरू किया है। बचपन में नानी जी, मौसी जी, मामी जी लोगों को व्रत करते देखते, और चाँद के निकलने की प्रतीक्षा के पल, यह सब हम बच्चों को भी कहीं ना कहीं attract करता था।

बाकी रही सही कसर movies और serials ने पूरी कर दी। इतने ज्यादा romantic way में दिखाते हैं, कि कोई unromantic या धर्म से डरने वाला ही इस व्रत को नहीं रखेगा।

पर भाई, इस व्रत को रखना कोई हँसी- खेल नहीं है। व्रत तो लोग शौक में रखने को तैयार हो जाते हैं, पर जब रखते हैं तो पता चलता है, भूख के साथ साथ जल का भी परित्याग करना पड़ता है। तब पता चलता है, शौक में तो shock लग गया है।

जब दिन शुरू होता है, तब तो बरदाश्त होता है, पर जैसे जैसे शाम होने लगती है, भूख, प्यास बरदाश्त से बाहर होने लगती है। और रात होते होते तो बस, सारा romance गायब हो जाता है। सब लोग बस ये ही जपने लगते हैं, कि जल्दी चंद्रमा निकले और खाना-पीना शुरू किया जाए।

तो भाई पति के प्रेम में शुरू किया हुआ, व्रत अंत तक आते आते खाने-पीने के जप पर समाप्त होता है।

कहीं कहीं ससुराल वाले, या किसी के पति इस बात को लेकर बहुत सख्त रहते हैं, कि बिल्कुल भी जल व फल आदि का सेवन नहीं होना है। फिर चाहे कोई व्रत रखने में बीमार ही क्यों ना पड़ जाए।

वैसे इस मामले में मेरे पति बिल्कुल उल्टे हैं। वो पूरे समय इसी कोशिश में रहते हैं, कि मैं जल व फल आदि का सेवन कर लूँ।  

हम सेवन नहीं करते हैं, क्योंकि हम तो तीज का व्रत भी करते हैं, जो इससे भी कठिन हैं। यह व्रत तो चंद्र दर्शन के साथ ही पूर्ण हो जाता है, जबकि तीज तो अगले दिन सूर्य दर्शन के साथ पूर्ण होता है।

पर मैं अपने पिता और पति के कथन से पूर्णत: सहमत हूँ, कि ईश्वर प्रेम, श्रद्धा और लगन देखते हैं, ना कि व्रत की कठिनता।

तो यदि आपके घर की स्त्री कठिनता के साथ व्रत नहीं रख सकती है, तो उसे बाध्य मत कीजिये। यह व्रत आपसी प्रेम का प्रतीक है, इसको उसे प्रेम से ही रखने दें।

एक स्त्री भूखी प्यासी व्रत कर रही है, पर सोचती यही रह रही है, कि चाँद निकले और कुछ खाऊँ। तो उसने आपके प्रेम के लिए व्रत कब रखा? शुरू में तो वो आपकी लंबी उम्र की कामना कर रही थी, पर अंत तक आते आते तो वो खाने-पीने का ही जप करने लगी।

फिर ऐसी लंबी उम्र ले कर भी क्या करेंगे, जहाँ जीवन-साथी स्वस्थ ना हो या साथ में ना हो।

जबकि दूसरी स्त्री जो, फल और जल ग्रहण करके पूरे समय आपके प्रेम और चिरायु की कामना करती रही। क्योंकि उसका शरीर भूख-प्यास के कष्ट से पीड़ित नहीं है, अतः उसका मन पूरी तरह से पूजा-पाठ, श्रद्धा प्रेम और लगन में लीन है।

आप ही सोचिए, क्या उचित है?

कहने का तात्पर्य यह है कि बाध्यता के साथ नहीं प्रेम के साथ उसे व्रत करने दीजिये, क्योंकि स्त्रियों में बेहद शक्ति होती है। अगर आप उन्हें उनके अनुसार व्रत करने देंगे। तो जब तक उनका स्वास्थ्य उनका साथ देगा, वो निर्जल और निराहार व्रत ही करेंगी, और बहुत प्रेम से भी करेंगी। 

Tuesday, 15 October 2019

Kids Story : Advay the hero : Last Day (part -2)


 Advay the hero : Last Day( part -1)के आगे...... 


Advay the hero : Last Day(part-2)



वो दुखी होकर, अपनी सीट पर बैठ गया।

तभी उसे कुछ रुपए ज़मीन पर दिखे। उसने उन्हें उठा लिया। जब उसने उन्हें गिना तो, वो उतने ही थे, जितने picnic के लिए चाहिए थे। वो सबसे आखिर में पैसे देने के लिए line में खड़ा हो गया।

आज सारे ही बच्चों ने पैसे जमा कर दिये थे, सिवाय तरुण और advay के।

Ma’am ने advay को बुलाया, और कहा, तुम ने तरुण के पैसे जमा कर दिये, अपने क्यों नहीं किए?

तरुण अपना नाम सुन कर ma’am के पास आ गया। ma’am मुझे तो अपने पैसे मिल नहीं रहे थे, इसलिए मैंने नही जमा किए, पर advay तुमने मेरे क्यों जमा किए?

Advay बोला, ma’am ये इसी के पैसे हैं। जमीन पर पड़े थे, जब मैं line में खड़ा था, तब मैंने देखा था, ये वहीं ढूंढ रहा था, जहाँ से मुझे ये पैसे मिले थे। इसलिए मैंने इसके पैसे इसके नाम से जमा कर दिये। मेरी mumma ने भी पैसे दिये थे, पर वो मैं घर में भूल गया।

Ma’am बोली, पैसे तुम्हें पड़े मिले थे, ये कोई नहीं जानता था। तो तुमने वो पैसे अपने नाम से क्यों नहीं जमा करे? आज last day है, अगर तुम अपने नाम से जमा करते, तो तुम picnic जा सकते थे।

मेरी mumma बोलती हैं, जैसे चोरी करना बुरी बात है। वैसे ही किसी की गिरी हुई चीज़ को अपना मान लेना भी गलत है। वो जिसका गिरा होता है, उसका ही होता है। इसलिए ही मैं उसे आप को देने आ रहा था, तभी तरुण मुझे ढूँढता दिख गया, तो मैंने उसके नाम से पैसे जमा कर दिये।

Ma’am, advay की ईमानदारी से बहुत खुश हुईं। उन्होंने advay के picnic के पैसे अपने पास से दे दिये। फिर advay से कहा, तुम भी picnic जा रहे हो कल तुम पैसे लेते आना, मैंने तुम्हारे पैसे अपने पास से दे दिये हैं। Advay बहुत खुश हो गया। 

उन्होंने सारे बच्चों को advay की ईमानदारी वाली बात बताई, और कहा सब को ऐसे ही ईमानदार होना चाहिए। सब ने advay के लिए clapping की। साथ ही सबको इस बात की भी खुशी थी, कि advay भी picnic में जा रहा था।

तभी advay की class में एक slip आई, कि advay के पापा ने picnic के लिए पैसे भिजवाए हैं।

Advay घर आकर अपने mumma के गले लग गया। वो पूछने लगी, क्या हुआ? तुम आज बहुत खुश हो। 

तुम तो पैसे घर में ही भूल गए थे। फिर जब पैसे भूलने वाली तुम्हारी बात मैंने पापा को बताई, तो उन्होंने तुम्हारे school में पैसे भेज दिए थे
क्या तुम इसलिए खुश हो?

तब advay ने school वाली सारी बात बता दी, उसकी mumma ने प्यार से उसका माथा चूम लिया। आज उनके लाडले ने उनके दिये संस्कारों को मान दिलाया था।


Monday, 14 October 2019

Kids Story : Advay the hero : Last Day

 Kids Story : Advay the hero : Last Day


Advay के school में picnic के लिए पैसे collect हो रहे थे
Ma’am ने तीन दिन का समय दिया था, पैसे जमा करने के लिए।


Advay ने घर में आकर अपने माँ-पापा को सब बता दिया, तो वो बोले, अगर तुम्हारा जाने का मन है, तो हम पैसे दे देंगे। 
Advay बोला, मैं अपने friends से पूछूंगा, अगर सब जा रहे होंगे, तभी जाऊंगा, वरना नहीं जाऊंगा।

माँ-पापा ने कहा, तुम पता कर लो, फिर पैसे ले जाना। 

बच्चे छोटे थे, तो सब के ही माँ-पापा जल्दी ready नहीं हो रहे थे।advay ने अपने friends से पूछा, वो लोग जाएंगे? तो सब ने कहा कि हमारे माँ-पापा ने  मना कर दिया।


Advay ने भी मन बना लिया कि वो भी नहीं जाएगा। एक दिन निकल गया।

दूसरे दिन कुछ दोस्त पैसे ले आए, बोले हमारे माँ-पापा मान गए हैं। जब कुछ के माँ-पापा मान गए, तो बाकी का भी जाने का मन करने लगा। 
एक ने advay से पूछा, तुम्हारे माँ-पापा तो किसी बात के लिए मना नहीं करते हैं, तो उन्होंने पैसे क्यों नहीं दिये?

Advay बोला, वो तो ready थे, पर क्योंकि तुम लोगों में से कोई नहीं जा रहा था, तो मैं नहीं लाया।

सारे दोस्तों ने decide कियाकल last day है, सब जरूर से पैसे ले आएंगे। 

Advay तुम भी जरूर से लाना, तुम्हारे बिना मज़ा नहीं आएगा। सारे दोस्तों ने advay से स्कूल से लौटेते समय बोला।

हाँ, हाँ जरूर से ले आऊँगा।


Mumma आज last day है, आप मुझे पैसे दे दीजिये, सब जा रहे हैं। और मुझसे बोल रहे थे, कि मेरे बिना मज़ा नहीं आएगा।

ठीक से रखना, कहकर माँ ने पैसे दे दिये। advay उस समय तैयार हो रहा था, उसने पैसे table पर रख दिये। तैयार होकर दूध पीकर वो चला गया।

आज वो बहुत खुश था, सारे दोस्तों का picnic जाने का program जो पक्का हो गया था।

Ma’am ने class में आते ही बोल दिया, जितने भी बच्चे पैसे लाये हैं, जमा कर दें। आज last day है, जिसने आज नहीं दिये, वो फिर नहीं जाएगा।

Advay ने पैसे देने के लिए अपने bag की pocket खोली, वहाँ पैसे नहीं थे। तभी उसे याद आया, उसने पैसे तो table पर ही छोड़ दिये थे। यह याद आते ही वो बहुत मायूस हो गया। आज last day था, सारे friends पैसे दे चुके थे, बस वही रह गया था।

वो दुखी होकर, अपनी सीट पर बैठ गया। तभी उसे कुछ ...