Wednesday, 4 November 2020

Poem : करवाचौथ

 करवाचौथ 



आ गई करवाचौथ पिया जी,

इसको तुम भूल ना जाना।

कोरोना की बातें समझाकर,

इसको सूना मत करवाना।।


बहुत ऊंची नहीं ख्वाहिश मेरी,

बस छोटी छोटी पूरी कर देना।

ना तोड़ना, आसमां से चांद तारे,

बस, हीरों का हार तुम ला देना।।


आ गई करवाचौथ पिया जी,

इसको तुम भूल ना जाना।

कोरोना की बातें समझाकर,

इसको सूना मत करवाना।।


बहुत ऊंची नहीं ख्वाहिश मेरी,

बस छोटी छोटी पूरी कर देना।

भले ना चलो, होटल मे अबकी

बस, पिज्जा ही आर्डर कर देना।।


आ गई करवाचौथ पिया जी,

इसको तुम भूल ना जाना।

कोरोना की बातें समझाकर,

इसको सूना मत करवाना।।


बहुत ऊंची नहीं ख्वाहिश मेरी,

बस छोटी छोटी पूरी कर देना।

नहीं दिलाना, सब्यासाची का लंहगा,

पर ब्रांडेड डिजाइनर सूट दिला देना।।


आ गई करवाचौथ पिया जी,

इसको तुम भूल ना जाना।

कोरोना की बातें समझाकर,

इसको सूना मत करवाना।।


बहुत ऊंची नहीं ख्वाहिश मेरी,

बस छोटी छोटी पूरी कर देना।

नहीं घूमाना तुम, लंदन, पेरिस,

सिंगापुर, मोरिशियस ही घूमा देना।।


आ गई करवाचौथ पिया जी,

इसको तुम भूल ना जाना।

कोरोना की बातें समझाकर,

इसको सूना मत करवाना।।


तुम्हारी लंबी उम्र की कामना

लिए, भूखी-प्यासी मैं रहती हूँ।

बड़ी बड़ी बाते नहीं करती मैं,

छोटी छोटी से खुश हो लेती हूँ।।


तो आ गई करवाचौथ पिया जी,

इसको तुम भूल ना जाना।।

कोरोना की बातें समझाकर,

इसको सूना मत करवाना।।


आप सबका अखण्ड सौभाग्य रहे , प्रेम प्रीत से जोड़ी बंधी रहे। 

आप सभी को करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ 🕉️🙏🏻💐💞


Tuesday, 3 November 2020

Stories of Life : ईश्वर की इच्छा

 ईश्वर की इच्छा


आज काम के सिलसिले में स्टेशन जाना हुआ।

वहाँ super fast express के आने का समय हो रहा था, जिसका station में stoppage नहीं था।

एक आदमी स्टेशन पर किनारे की तरफ ही टहल रहा था, और जैसे ही train super speed से platform पर आ रही थी, वो आदमी तुरन्त track पर उतरा और train के track पर आने के चंद मिनट पहले भाग कर दूसरे track पर पहुंच गया।

2 second के लिए सबकी heart beat रुक गई और जब train cross कर गयी। तब उस आदमी को जीवित देखकर सबकी जान में जान आई।

वो आदमी मुस्कुराता हुआ वापस उसी platform पर आ गया, जिस पर हम खड़े थे।

मुझ से रहा नहीं गया और उसके पास पहुंच कर पूछा, क्यों भाई, तुम्हें डर नहीं लगता है?

ऐसे super fast express के cross करते time में,  कौन track cross करता है?

क्या तुम जानते नहीं हो, यह कितना dangerous है, तुम मर भी सकते हो?

उसने बड़ी लापरवाही से कहा, डर....... डरकर क्या जीना?

जो ईश्वर की इच्छा होगी, वही होगा।

मैंने कहा, पागल हो क्या भाई?

बड़ी बे सिर पैर की बात कर रहे हो। 

इतनी तेज आती हुई train से कब तक बचोगे?

बेवकूफियाँ खुद करो, और दोष ईश्वर के सिर।

वह बोला, सब अब यही तो कर रहें हैं, तो मैं अकेला कैसे पागल?

सब...... क्या मतलब है तुम्हारा?

देखो ना, सब जानते हैं कि कोरोना में दूरियाँ बना कर रखनी है, Mask लगाना है, साफ सफाई रखनी है।

पर अब कितने इन सब बातों का ध्यान रख रहे हैं?

क्या सब यही कहकर,सब कुछ नहीं कर रहे हैं? कि अब जो ईश्वर की इच्छा।

ईश्वर ने कब कहा कि बेवकूफियाँ करो?

सब जानते हैं कि कोरोना जानलेवा है, हरकतें खुद मूर्खों वाली करेंगे, फिर जब कोरोना की चपेट में आ जाएंगे तो या तो कहेंगे, हे प्रभु हम पर ही संकट क्यों?

या सारा ठीकरा ईश्वर पर थोप देंगे कि जो ईश्वर की इच्छा।

वो यह कहकर दूर कहीं ओझल हो गया, पर उसकी बात ने मुझे झकझोर दिया।

सच ही तो कह रहा था, सब जानते हैं कि कोरोना बहुत dangerous है, फिर भी उसके protocol को follow ना कर के, हम में से ना जाने कितने कोरोना को spread करने का कार्य यह कहते हुए कर रहे हैं कि अब जो ईश्वर की इच्छा।

कब तक डरकर घर में बैठे रहें? कब तक होटल में खाना ना खाएं? कब तक घूमने ना जाएं? कब तक खेलें कूदें नहीं? कब तक maid को ना बुलाएं? कब तक लोगों से ना मिलें........

आखिर कब तक???

जब तक ज़रुरी है, तब तक। क्योंकि एक दिन ही जाने से, ना जाने दिन रुकना पड़ सकता है।

और हाँ, अगर आप को भी उस आदमी की, बात ने झकझोरा है तो, घर पर रहें, उतना ही बाहर निकलें, जितना अति आवश्यक हो, स्वयं भी  सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें।

क्योंकि ईश्वर की इच्छा यह बिल्कुल नहीं है कि सब बीमार पड़ें या मृत्यु को प्राप्त हों।

अपनी मनमानी को व्यर्थ में ईश्वर की इच्छा का नाम मत दें। 

Monday, 2 November 2020

Short Story : आह

 आह




आज भी रात करवटों में ही गुजर गयी, आज भी किस्मत में केवल इंतजार ही रहा।

रह रह कर आंसू ढुलक जा रहे थे। पर उसे देखने, समझने वाला तो गहरी नींद में सोया हुआ था।

भरे पूरे घर में रहने वाली सृष्टि को पिया जी, वक्त निकाल कर और सबसे नज़र बचा कर, आकर छेड़ जाया करते। कभी उसकी जुल्फों से खेल जाते, कभी गोरे गोरे गालों को सहला जाते, कभी बाहों में भर लेते।

उनकी इन हरकतों से वो उन्हें झूठ-मूठ को झिड़क देती, पर उसका रोम रोम पुलकित हो जाता, मन में प्रेम हिलोरें लेने लगता था।

सृष्टि को पिया का सान्निध्य पाकर लगता कि वो कोई अप्सरा है या कोई बहुत सुन्दर सा पुष्प जिसके चारों ओर पतिदेव भंवरा बन मंडराते रहते हैं।

पर, इधर जब से कोरोना आया है, तब से पिया जी, ना जाने कौन सी दुनिया में रहने लगे हैं।

दिन भर कोरोना से जुड़ी कवायदों को करते करते, कब सुबह से शाम हो जाती, पता ही नहीं चलता है।

पिया जी, का सारे दिन का समय तो यह मुआ कोरोना ही ले जाया करता है और रात....... रात में तो जो बिस्तर में आ गिरते, तो इतने थके होते, कि कब गहरी नींद में सो जाते, वो तो उन्हें भी पता नहीं चलता।

सृष्टि मन में बस यही सोचती

खाली हाथ शाम आयी है, खाली हाथ जाएगी.....

और कमरा..... पिया जी के ज़ोर ज़ोर से आते हुए खर्राटों से गूंजने लगता, और साथ ही सृष्टि के इंतजार और दुःख भरी आह से!