Thursday, 25 February 2021

Story of Life : प्यार (भाग- 2)

प्यार (भाग- 1) के आगे......

प्यार (भाग- 2) 



आज भी दरवाजा उसने ही खोला, मुझे देखते ही खिलखिला उठी।

ओह! आप हैं। आज तो पूरे papers हैं ना?

जी!...... मैंने झेंपते हुए कहा।

आइए बैठिए, मैं पापा जी को बोल देती हूँ। यह कहकर वो अन्दर चली गई।

और अपने पापा जी के साथ बाहर आई।

Good evening sir

Good evening बेटा, बताओ कैसे आना हुआ?

जी, मैं सुशांत हूँ, Car की company में marketing manager हूँ। हमारी company survey कर रही है कि कितने लोग automatic car में interested हैं।

वैसे तो हमारी team का कोई salesman ही आता आप के पास।

पर आप ने कुछ दिन पहले इसके regarding inquiry की थी, इसलिए आप को सारी details देने में personally आया हूँ।

जी, सही कहा आपने, मैंने कुछ दिन पहले पूछा तो था। दरअसल बेला ही कह रही थी कि अब हम automatic car लेंगे।

आओ बेटा, तुम भी समझ लो।

ओह तो नाम बेला है, शायद इसीलिए यह हर समय बालों में बेला का फूल लगाती है।

दोनों ही बार उसके बालों में बेला का फूल लगा था।

Actually पापा जी को, पैरों में problem है तो हम लोग सोच रहे थे कि automatic car ही लें। 

आप का क्या कहना है सुशांत जी, इस बारे में?

जी, बिल्कुल..... अगर ऐसा है तो आप लोगों का बहुत ही अच्छा decision है।

उसके बाद मैंने सारी details उन्हें बता दी।

और यह कहकर वापस चला गया कि एक बार showroom जरुर आइएगा, तो सब कुछ और अच्छे से समझ आ जाएगा।

जी, इस Saturday की evening आते हैं।

अब मुझे Saturday का बेसब्री से इंतज़ार था। मेरा double benifit था।

एक तो उसका दीदार, दूसरा Car की deal.

Saturday आया, और ठीक 5 बजे, वो अपने पापा जी के साथ थी।

मैंने खूब आवभगत की। मेरे colleague and junior सब उसे एकटक देखने में लगे हुए थे।

बहुत सी cars देखकर, वो यह कहकर चले गए, decision लेने के लिए थोड़ा time चाहिए।

आप अच्छे से सोच लीजिए, मेरा number आप के पास है ही, कुछ और पूछ्ना हो तो आप call कर लीजिएगा और जरुरत हो तो, बता दीजिएगा, मैं घर भी आ जाउंगा।

उनके जाने के बाद सबने मुझे घेर लिया।

क्या Boss, क्या खूबसूरत लड़की है। 

तो कोई बोल रहा था, चक्कर क्या है? बड़ी आवभगत हो रही थी।

तब ही किसी ने चुटकी ली, ओह! घर के चक्कर लगा रहे हैं.....

आगे पढ़े, प्यार (भाग-3) में......

Wednesday, 24 February 2021

Story of Life : प्यार

 प्यार


आज इस बात को घटे हुए चार साल हो गए थे। पर अब भी उसके गेसू में लगे बेला के फूलों की खुशबू मेरी सांसों में रची-बसी थी।

ना जाने क्यों कोई भी रात उसके पायलों की झंकार की आवाज़ के बिना पूरी नहीं होती थी।

क्यों उसकी यादें, रह रह कर मुझे सताती थी।

वो थी ही इतनी मासूम, बिल्कुल छोटे बच्चे जैसी।

 कभी दुःख तो उसकी आंखों में दिखा ही नहीं। 

हिरनी सी चंचल आंखें, दूध सा उजला उसका चेहरा, तीखी सी नाक, सुर्ख लाल होंठ।

उस पर उसकी अदाएं, उफ्फ कैसे किसी का मन काबू में रहेगा।

फिर मैं भी अदना सा इंसान ही हूँ, उसकी एक झलक, कब मेरा दिल ले गयी, जान ही नहीं सका।

मैं एक MNC company में job करता था। Sales के promotion के regarding, हम लोगों को market का survey करना था।

उसके लिए ही call Bell press की थी।

जब दरवाजा खुला तो वो ही सामने थी।

कानों में रस घोलती, आवाज़ में उसने पूछा, किस से मिलना है, आप को?

जी!..... आप के पापा जी हैं क्या?

वो कुछ बोलती, उसके पहले ही उसका doggy दरवाजे से निकल कर भाग गया।

और वो यह कहती हुई भाग गयी कि आप बैठिए, पापा जी आ रहे हैं।

थोड़ी देर में उसके पापा जी आ गये, और वो भी अपने doggy के साथ।

Doggy को पकड़ने के कारण उसकी जुल्फ़ें बिखर गई थीं।

उसका नैसर्गिक सौंदर्य देखकर, मैं ऐसा मंत्र मुग्ध हो गया, कि मैं क्यों आया था, वो ही भूल गया।

उसके पापा जी ने पूछा, आप क्यों आये हैं?

मैंने कहा, जी..... वही याद करने की कोशिश कर रहा हूँ।

मेरी इस बात पर उसका खिलखिलाना, मुझे ग़ज़ब का दीवाना कर गया।

आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ था, पर आज ना जाने क्या हो गया था मुझे?

फिर थोड़ा सम्हलते हुए मैंने कहा, जी.... आज कुछ papers नहीं हैं, file में। 

एक दो दिन में आता हूँ।

यह ना जाने उससे मिलने की कशिश थी, या मेरा दीवानापन? पर मैं दो दिन बाद फिर उसकी चौखट पर खड़ा था।

आगे पढ़ें, प्यार (भाग - 2) में.....

Tuesday, 23 February 2021

Short Story : साधना

 साधना


खुशबू जी, अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरा कर चुकी थी, दो बेटे और एक बेटी थी। 

सबका विवाह हो चुका था,  सबके बच्चे भी हो चुके थे। सब अपने परिवार में सुखी थे।

पति भी retire हो चुके थे। वो बड़े independent थे। जब तक job करते रहे, तब तक तो खूशबू जी, तब भी कुछ काम बोल दिया करते थे, पर अब तो एक भी काम के लिए कुछ ना बोलते थे। और बचे हुए समय में अपने आप को बागवानी में रमा लिया था।  

खुशबू को तन्हाई सताने लगी थी। उसको समझ नहीं आता, क्या करें।

आजकल की भागती दुनिया में किसी के पास कुछ समय नहीं था।

बच्चे बोले माँ, आप को whatsapp, Facebook सिखा देते हैं। समय कब निकल जाएगा, आप को पता भी नहीं चलेगा।

बच्चों के सिखाने से कुछ दिन मन उसमें रम गया। पर कुछ दिन बाद, virtual world उन्हें रास नहीं आया।

बेमतलब की झूठी तारीफ और दुनिया भर के forward messages से उनका मन जल्दी ही भर गया।

किसी ने कहा, सत्संग देखो, वहाँ जाओ, मन प्रसन्न रहेगा।

सत्संग का असर यह होने लगा कि उनका जीवन के प्रति मन ही उचाट होने लगा।

जिसको देखकर, पति और बच्चों ने उन्हें ऐसा करने को मना कर दिया।

एक दिन अचानक से उनकी मुलाकात, अपनी बचपन की सहेली रीता से हो गयी।

रीता बड़ी नकारात्मक सोच वाली हुआ करती थी। पर अभी वो बहुत प्रसन्न दिख रही थी।

खुशबू ने इसका कारण पूछा तो वो बोली, हम लोगों की साधना है इसका कारण।

वो कैसे?

मेरे समूह में हमउम्र लोग हैं। सब किसी ना किसी काम में बड़ी निपुण हैं। 

हमारे समूह का हफ्ते भर का काम बंधा हुआ है।

एक दिन हम भजन गाते हैं, जिसमें हर हफ्ते किसी एक को नया भजन गाना होता है, चाहे नया भजन खुद बनाओ या कहीं से नया सुनकर या देखकर लाओ। ऐसे हमें बहुत सारे भजन याद हो गये हैं।

एक दिन हम कपड़े सीलते हैं। जिसको अच्छा आता है, वो dress बनाता है, बाकी उसकी मदद करते हैं। जिससे सबके पास बहुत अच्छी dress हो गई है।

एक दिन सब मिलकर खूब बढ़िया खाना बनाते हैं, फिर उसे अपने घर में ले जाकर परिवार के साथ खाते हैं।

एक दिन हम गरीबों की बस्ती में जाते हैं, और वहाँ अपने हाथों से बना खाना और कपड़ा बांटकर आते हैं।

एक दिन हम सब एक दूसरे की परेशानी पर चर्चा कर के उसका हल निकालते हैं। जिससे सबका मन हल्का हो जाए। कोई किसी की व्यथा का मज़ाक नहीं उड़ाता है।

एक दिन हम सब में से कोई एक अपना हुनर सबको सिखाता है।

और एक दिन हम सब, कहीं घूमने जाते हैं, कभी शहर के ही किसी मन्दिर या किसी monument या कभी बाज़ार। और कभी कभी शहर के बाहर भी घूमने जाते हैं। किसी के पति या बच्चे भी साथ चलना चाहें तो चल सकते हैं।

इस तरह हम सब साधना करते हैं।

वाह! क्या मुझे भी अपने group में शामिल करोगी?

नेकी और पूछ-पूछ, तुम तो वैसे भी हमारे group की शान थी। तुम जैसी होनहार से कौन नहीं जुड़ना चाहता है।

कुछ दिनों में ही खुशबू जी, साधना की नई खुशबू से महकने लगी। उन्हें खुश देखकर सब खुश थे।

अब वो, सब से यही कहतीं, अपने हम उम्र लोगों का साथ और जीवन के सभी रंग, यही तो सच्ची साधना है।