Tuesday, 4 June 2024

Article : कौन संभालेगा देश

आज चुनाव का नतीज़ा निकलना है कि पूरे देश में किस political party का वर्चस्व है।

देश की जनता के लिए क्या priority है, उनकी निजी आवश्यकताएं या देश की सुरक्षा, विकास और संस्कृति? 

क्या फिर से BJP सत्तारढ़ होगी?

या INDIA alliance का दबदबा रहेगा?

कौन संभालेगा देश


अगर BJP जीतती है, जैसा कि रुझान से दिखाई भी दे रहा है, तो एक बार फिर देश मोदी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। 

दो साल के अपने सफलतम कार्यकाल के पश्चात्, तीसरा सत्र उनका कैसा रहेगा?

हमारे देश के साथ-साथ, विदेशी देशों की भी नज़र चुनाव के नतीजों पर टिकी हुई है।

वह भी देख रहे हैं कि उन्हें भारत में निवेश करना है कि नहीं?

कल sensex बहुत तेजी के साथ खुला था और शेयर बाजार में एक बड़ी उछाल आई थी।

लेकिन आज के रूझान को देखते हुए, share market थोड़ा ठंडा हुआ है…

Share market के गर्म या ठंडे होने से क्या औचित्य है? तो आपको बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी होगी, इसका पूरा link, share market के गर्म या ठंडे होने पर ही निर्भर करती है।

इसी से यह निर्धारित होता है कि विदेशी देश, कितना निवेश कर रहे हैं। और यह तो सीधा सा गणित है कि जिस देश में सबसे ज़्यादा निवेश होगा, वो देश उतना ही विकसित और उन्नत होगा। 

INDIA alliance के आने से एक बात सोचने वाली रहती है कि सत्ता कौन संभालेगा, क्योंकि जैसा कि saying है, 'Too many cooks spoil the broth…'

जब सब की सोच ही एक सी नहीं, तो देश किस सोच से चलेगा? 

लोकसभा चुनाव होने में दो states का महत्वपूर्ण स्थान है, पहला उत्तरप्रदेश और दूसरा महाराष्ट्र...

वो क्यों?

क्योंकि इन दोनों ही states में सबसे ज्यादा seats होती है। 

यह नेता लोग जो कि किसी भी परीक्षा के परिणामों को महत्वपूर्ण नहीं समझते हैं, उन्हें लोगों पर पड़ने वाले pressure की कोई चिंता नहीं रहती है।

वो आज के दिन सबसे ज़्यादा मानसिक तनाव में रहते हैं। पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने क्या ऊपर-नीचे किया है? उन सब का परिणाम होता है, नतीजों का दिन...

पर साथ ही यह दिन यह भी निर्धारित करता है, आगे देश का कितना उत्थान होगा या पतन? 

एक देश पर सत्तारूढ़ हुई political party यह भी निर्धारित करती है कि उसका दूसरे देशों के साथ संबंध मधुर बनेंगे या खटास वाले?

इस तरह से देश का विकास, सुरक्षा और संस्कृति सब आज के नतीजे पर ही निर्धारित होगी। 

अब results तो वही आएंगे, जिस हिसाब से लोगों ने votes दिए हैं... 

बस ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जो भी देश संभाले, वो देश का विकास करे ना कि अपना और अपने परिवार का..

उसके लिए देश की सुरक्षा प्रथम हो...

उसके लिए देश की सभ्यता और संस्कृति सर्वप्रिय हो...

बस वही बने जो देश को अखंड रख सके...

Monday, 3 June 2024

Short Story : दो मासूम आँखें

आज hospital गए थे, अपनी आँखों को दिखाने के लिए routine check-up में।

जैसा कि आप जानते हैं कि हम एक blogger हैं, तो जो writers होते हैं, उनकी आँख, नाक, कान औरों की अपेक्षा कहानी बुनने में थोड़ी ज़्यादा तेज़ होती है, सो हमारी भी है। अब आप इसे अच्छी कहें या बुरी, पर आदत है तो है।

आज वहीं की एक बात साझा कर रहे हैं। आज की कहानी एक मासूम बच्चे की है। 

दो मासूम आँखें

एक छोटा बच्चा, आरव अपने मम्मी-पापा के साथ आया था, अपनी आँख की किसी problem के regarding.

नहीं पता कि उसको exactly क्या problem थी, पर कहानी उसकी आँखों की problem पर नहीं है।

उस छोटे-बच्चे से उसके पापा बोले रहे थे, "आरू, आपसे doctor uncle पूछेंगे कि आप कितना mobile देखते हो, और आप जैसे ही बताओगे कि बहुत देर तक, वैसे ही वो आपके injection लगा देंगे।"

सुनकर आरव ठुनठुनाने लगा, आजकल के बच्चों की तरह, वो भी बहुत ज़्यादा mobile देखा करता था। उसका भी screen time बहुत ज़्यादा था। आजकल बच्चों में यह समस्या बढ़ती जा रही है, जिससे उनको eyesight की problem रहने लगी है।

"पापा, मैं injection नहीं लगवाउंगा, please, please. मत लगवाइए ना…"

वो बोले, "मैं क्या कर सकता हूँ, doctor uncle जैसे ही सुनेंगे, कि तुम इतना mobile देखते हो, तुम्हें injection लगा देंगे।

"नहीं, नहीं पापा। अब से मैं mobile नहीं देखूँगा, TV देखूँगा।"

"अच्छा, TV देखोगे, mobile नहीं देखोगे?"

"हाँ पापा, नहीं देखूँगा mobile. बस आप doctor uncle से कह दीजिएगा, कि वो injection ना लगाएँ। Please, बोल दीजिएगा ना…"

"अच्छा ठीक है, बोल दूँगा।"

"नहीं लगाएँगे फिर injection?" आरव ने मासूमियत से पूछा।

"हाँ, हाँ। नहीं लगाएँगे injection, क्यों लगाएँगे? जब तुम mobile नहीं देखा करोगे।"

"पापा, अब से मैं पढ़ाई भी खूब करूँगा।"

उसके पापा हँस दिए। 

तभी आरव को दिखाने की call आ गई, और वो खुशी-खुशी doctor को अपनी आँख दिखाने चला गया, अपनी mummy को bye करके।

कहानी बस इतनी-सी है। लेकिन जो आपसे बात कहनी है, वो यह है, कि बच्चे भी जानते हैं कि mobile screen कम देखनी चाहिए, वो हमारी आँखों को नुकसान करती है।

पर आजकल बच्चों का बहुत ज़्यादा mobile देखने का trend-सा चल गया है। कुछ हम लोगों की बच्चों से free रहने की चाहत, कुछ आधुनिकता, और कुछ बच्चों का mobile देखने का खिंचाव।

Result है दो-चार साल से ही चश्मिश बच्चे…

आप बोलेंगे कि screen देखने में ऐसी भी क्या problem है?

Actually भगवान ने हमारी आँखें दूर-पास, सब देखने के लिए बनाई है, और लगातार पास देखते रहने से वो थक जाती हैं, exhaust हो जाती हैं, और finally खराब हो जाती हैं।

इसलिए, बच्चों को mobile उतना ही use करने के लिए दीजिए, जितना ज़रूरी है। अपने free रहने, या उनके addiction के लिए नहीं।

इन मासूमों की आँखें healthy रहें, इसका ध्यान रखना हमारी duty भी है, और ज़रूरी भी है।


Saturday, 1 June 2024

India's Heritage : अयोध्या के रक्षक

आज आप के साथ India's Heritage segment में एक ऐसी कहानी साझा कर रहे हैं कि मानो तो आस्था, ना मानो तो मनगढ़ंत कहानी... 

पर यह कहानी हमारी बनाई गई नहीं है, बल्कि सत्य घटना है।

अयोध्या के रक्षक


बात आज की नहीं है, सन् 1998 की है।दुश्मन की नज़र रामलला की जन्मस्थली के अयोध्या हनुमानगढ़ी मंदिर पर थी।

6 December 1992 को बाबरी मस्ज़िद ढाई जा चुकी थी, और बदला लेने की भावना बलवती हो चुकी थी। 

उन्हें मौका भी मिल गया और उन्होंने अयोध्या हनुमानगढ़ी पर बम लगा दिए, इस तैयारी से कि हनुमानगढ़ी मंदिर के साथ-साथ ही अयोध्या का भी बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया जाए। 

पर बम लगाए जाने की जानकारी पुलिस दल को मिल गई। इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा, जो कि इस पुलिस दल के प्रमुख थे, अपने दल, 3 bomb squads, sniffer dogs और STF (Special Task Force) के साथ हनुमानगढ़ी मंदिर पहुंच गए। पूरा हनुमानगढ़ी मंदिर लोगों से खचाखच भरा हुआ था।

बम बहुत अच्छी जगह छुपाए गए थे, जैसे handpump के अंदर etc.

पुलिस दल, तीनों bomb squads और sniffer dogs बहुत निपुण थे, उन्होंने बहुत जल्दी ही तीनों बम defuse कर दिए।

बम defuse होने के बाद सब खड़े होकर इस बात की खुशी ही मना रहे थे, कि तभी पुलिस प्रमुख को एक और bomb squad दिखा। 

पर साथ तो तीन ही आए थे, तो यह चौथा कौन था?

बहुत ही फुर्ती के साथ एक पुलिस वाले ने उसका पीछा किया। वो कोई bomb squad नहीं, बल्कि एक आतंकवादी था। उसने हनुमानगढ़ी मंदिर में बम लगा दिया था।

पुलिस वाले की फुर्ती और अविनाश जी की सूझबूझ से वो आतंकवादी पकड़ा गया। पर उसने कैसे भी नहीं बोला कि उसने बम, मंदिर पर किस ओर लगाया है? बोला तो बस इतना कि कोई नहीं ढूंढ सकता कि बम कहां है? तुम्हारे पास चंद मिनटों का समय है। आज बम फटने से तुम्हारे भगवान भी नहीं रोक सकते हैं।

आतंकवादी मंदिर के बाहर पकड़ा गया था, उसे कुछ पुलिसकर्मियों ने पकड़ कर रखा, बाकी बड़ी तेजी से मंदिर की ओर दौड़ पड़े।

मंदिर पर बम ढूंढा जाने लगा, पर कहीं कुछ समझ नहीं आ रहा था, कि बम कहां हो सकता है? समय रेत की तरह हाथों से निकला जा रहा था।

तभी पुलिस वालों ने देखा कि ठंडे पानी की मशीन से दो तार निकल रहे हैं और एक छोटा बंदर उसका दूसरा सिरा अपने मुंह में डाले हुए हैं।

यह सब देखकर उन्हें लगा कि बम शायद यही हैं, पर बम defuse करने के लिए बंदर का हटना जरूरी था। 

तभी अविनाश जी ने कहा कि केले को डाल दो, बंदर चला जाएगा, उसे किसी तरह का कोई नुक्सान ना पहुंचे। 

मंदिर का प्रांगण था तो तुरंत ही केले मिल गए। बंदर की तरफ केले को फेंक दिया गया।

बंदर ने तार छोड़ दिया और केले लेकर मंदिर की चोटी पर पहुंच गया।

एक बम squad आगे बढ़ा और उसने बम को defuse करने का इशारा कर दिया, सब की जान में जान आई।

पर आश्चर्य तब हुआ, जब squad ने बताया कि उसने सिर्फ timer बंद किया था, बम तो उस बंदर ने चंद मिनट पहले ही निरस्त कर दिया था। 

सब बस उस बंदर को देख रहे थे और सोच रहे थे कि "जिसके रक्षक हों स्वयं हनुमान, उसका फिर क्यों ना हो कल्याण"...

सही भी तो है :

सब सुख लहै तुम्हारी शरण 

तुम रक्षक काहू को डरना 

थोड़ी देर बाद सब समवेत स्वर में बोले,

जय श्री राम🚩

जय बजरंग बली 🚩

भारत देश है जन्मस्थली प्रभू श्री राम की, कृष्ण भगवान की, आज भी श्रद्धा हो तो ईश्वरीय चमत्कार दिखाई दे जाते हैं...