Monday, 24 June 2024

Recipe : Dahi ke Sholay

Monsoon कहीं आ चुका है तो कहीं आने वाला है, ऐसे में पकौड़ी-कचौड़ी मिल जाए तो मज़ा आ जाता है। पर हमने सोचा कि इस monsoon का स्वागत किसी और चीज़ से किया जाए…

तो आज आप के लिए parties का most favourite snack item share कर रहे हैं।

यह, हर party की शान बन चुका है, फिर चाहे kitty हो या office meeting, ring ceremony हो या marriage, new year celebration हो या होली की बहार।

'दही के शोले', बहुत ही पसंद किए जाते हैं।

हम आपको इसका जो version बता रहे हैं, वो easily prepare हो जाएगा, साथ ही बहुत कम oily होगा।

तो चलिए देख लेते हैं, क्या है इसका secret…

दही के शोले

A. Ingredients :

  • Curd - 500 gm.
  • Bread - 6 to 8 
  • Black pepper - 1 tsp. 
  • Salt - as per taste/1 tsp.
  • Ginger - ½ inch 
  • Green chilli - 3 to 4 
  • Coriander leaves - handful 
  • Clarified butter (घी) - for frying


B. Method :

  1. दही को मलमल के कपड़े में बांध कर 4 to 6 hours के लिए छोड़ दें।
  2. अदरक, धनिया पत्ती और हरी मिर्च को बारीक काट लें।
  3. Bread को mixer grinder jar में डालकर पीस लें और bread का चूरा बना लें।
  4. दही में नमक, काली मिर्च, अदरक, धनिया पत्ती और हरी मिर्च डालकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  5. 2 bread का चूरा दही में mix कर दीजिए। 
  6. इससे दही के mix में binding आ जाएगी।
  7. अब इनकी balls बना लें।
  8. अब इन balls को बाकी बचे हुए bread के चूरे में roll कर दीजिए। 
  9. अब इस balls को एक बार हाथ से फिर से गोलाकार कर लीजिए।
  10. फिर एक बार और bread crumbs में roll कर लीजिए।
  11. और फिर एक बार ball को गोलाकार कर लीजिए।
  12. अब इन balls को atleast 1 hour के लिए freezer में रख दीजिए।
  13. फिर serving से पहले इन्हें निकाल लीजिए।
  14. एक wok लीजिए। उसमें घी डालकर अच्छे से गर्म कर लीजिए।
  15. अब इस घी में balls को golden brown होने तक deep fry कर लीजिए।


Now, your yummy and tasty 'Dahi ke Sholay' is ready to serve. You can serve it with your favourite sauce or chutney.

Tips and tricks  के बिना तो यह perfect बन ही नहीं सकते हैं तो चलिए वो भी देख लेते हैं।


C. Tips and Tricks :

  • हमने इसे घी में fry किया है, आप चाहें तो olive oil or refined oil भी use कर सकते हैं।
  • वैसे घी में तलने से इसका taste enhance हो जाता है।
  • आप कहेंगे कि जब तल ही दिया तो कम घी कहां रहा?
  • Authentically, दही के शोले बनाने में, bread slice को गीला करके soft करते हैं, फिर उसमें दही के mix की filling भर के roll करते हैं, फिर deep fry करते हैं। पर इस तरह से bread बहुत घी और तेल खींचता है। 
  • जबकि हमने जो method बताया है, उसमें crispy texture तो उतना ही आता है, पर घी और तेल कम लगता है।
  • साथ ही इस method में दही के शोले, फूटकर घी या तेल में नहीं फैलते हैं।
  • दही को कम से कम 4 to 6 hours के लिए ज़रूर से बांधे। अगर आप के पास मलमल का कपड़ा नहीं है तो महीन छन्नी में डालकर दही का पानी निकाल दें।
  • जितना thick दही होगा, उतने perfect दही के शोले बनेंगे।
  • दही में bread crumbs उतना ही मिलाएं, जितने से binding हो जाए। ज्यादा bread crumbs डाल देने से दही का creamy texture spoil हो जाएगा।
  • आप अपने taste के according दही के mix में onion and capsicum भी add कर सकते हैं, पर ध्यान रखिएगा सब एक दम छोटे-छोटे और बारीक कटे हुए हों।
  • दही के शोले को double बार bread crumbs में ज़रूर से roll कीजिए। 
  • इससे एक तो proper texture contain होता है। दूसरा balls घी में खुलती नहीं है, इस कारण कम घी लगता है। 
  • साथ ही crisp भी अच्छा आता है।
  • Balls को freezer में atleast one hour ज़रूर से रखें, इससे binding अच्छे से होती है और fry करना easy रहता है।
  • Balls गर्म घी में ही डालें, इससे binding नहीं खुलती है। साथ ही इसमें पकाना कुछ नहीं है, सिर्फ golden brown होने तक fry करना है।
  • अगर आप fat को लेकर conscious रहते हैं, तो इस mix को flat करके तवे पर टिक्की के जैसा भी सेक सकते हैं। 
  • हमने white bread use की है, अगर आप चाहें तो brown bread भी use कर सकते हैं। 
  • वैसे authentically, white bread ही use करते हैं।


तो चलिए, method, tips and tricks follow कीजिए और घर पर ही parties की शान दही के शोले बनाएं और मानसून का लुत्फ उठाएं।

Saturday, 22 June 2024

Article : एक test NTA का

NTA.

आज कल यह नाम बहुत सुनने को मिल रहा है…

पर यह NTA है क्या?

NTA यानी National Testing Agency, जो कि एक autonomous and self-sustained testing organization है।

यह higher educational institutions में admissions & fellowships के लिए entrance examinations conduct करती है।

पर पिछले कुछ दिनों से इसके द्वारा conduct किए गए कुछ exams में भारी गड़बड़ियां पाई गईं हैं।

एक test NTA का

NEET UG के result का तो पूछना ही क्या...

67 candidates के 720/720 marks आना हो या फिर technically & mathematically impossible 719 & 718 का score! कहा जा रहा है कि यह scores grace marks के बदौलत है, but क्या इतने grace marks मिलना valid भी है कि एक 580 के पास score को भी 720 तक inflate कर दिया जाए? जहाँ पिछले साल तक सिर्फ दो candidates के 720 आ रहे थे, आज वहीं 67 candidates के 720 आए हैं। क्या हमारे undergraduates एक साल में इतने मेधावी हो गए? और same centre से 5-6 candidates के 720/720 आने की बात तो अलग ही है...

सब candidates के results आने के बाद भी यह निश्चित नहीं हो पा रहा है कि उन्हें जहाँ admission मिल रहा है, वही उन्हें मिलेगा या फिर कुछ फेरबदल हो जाएगी।

उसके बाद NET का भी वही हाल रहा। 

उसका तो exam ही cancel कर दिया गया, यह statement दे कर कि exam की अखंडता के साथ समझौता हुआ है।

आगे इस exam के result का क्या होगा, ईश्वर ही जानें।

पर इस तरह से युवाओं के भविष्य से खिलवाड़, कहां तक उचित है?

किसी का भी exam देना, अपने आप में एक कठिन परिस्थिति है, उसके बाद उसके result का wait करना और कठिन, फिर result ऐसा आए जिसमें कोई clearance नहीं... किसी torture से कम नहीं है।

हालांकि अब centre ने अपना ध्यान इस ओर केन्द्रित किया है। 

इन exams में हो रही त्रुटियों की पीछे की NTA की functioning की जांच करने के लिए एक committee बनाई गई है।

पर public की उनसे यह demand है कि वो जांच तो करें ही, साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि आगे से इस तरह की गड़बड़ियां ना हो।

क्योंकि देश के निर्माता और भविष्य निर्धारण करने वाले इन professions में इस तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

वैसे भी इस तरह की गलतियां, अराजकता बढ़ाती है और यह सिद्ध करती है कि शासन का कार्य उचित तरीके से नहीं चल रहा है।

सारा दोष, मौजूदा सरकार पर डाल दिया जाता है। जिसका फायदा, विपक्ष सरकार तुरंत उठाती है, क्योंकि वो तो बैठी ही इसी ताक पर है कि एक ग़लती हो और हंगामा किया जाए। 

इससे कभी-कभी मुद्दा जो होता है, उससे भटक कर बे-सिर-पैर की राजनीति में कब बदल‌ जाता है यह पता नहीं चलता है; और जिसे problem होती है, वो suffer करता रह जाता है।

'एक test NTA का' भी होना ज़रूरी है, जिससे पता चले कि loopholes कहाँ हैं।

इस matter को पूरी तरह से, शीध्र-अतिशीघ्र solve करना चाहिए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी situation फिर ना खड़ी हो - कार्य सुचारू रूप से चले और विपक्ष को मौका ना मिले, आगे ऐसे और failures को मुद्दा बनाकर राजनीति करने का…


जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳

Friday, 21 June 2024

India's Heritage : सर्वे सन्तु निरामया

योग भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। यह भारत द्वारा विश्व को दिए कई बहुमूल्य खज़ानों और धरोहरों में से एक है। योग का शाब्दिक अर्थ है जुड़ना, और इसका उत्सव मानवता का उत्सव है। 

इसे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से वैश्विक चेतना का विषय बनाया है। आज पूरी दुनिया न सिर्फ योग दिवस मना रही है, बल्कि योग को दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा मान चुकी है।

आज India's Heritage segment में इसी विषय में विचार करेंगे। 

सर्वे सन्तु निरामया

जैसा कि भारतीय संस्कृति का‌ मूल मंत्र है; 

'सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया…'

तो यह संभव कैसे है?

उसका ही सार है कि नित्यप्रति योग करें, योग करने से निरोगी रहेंगे और जब निरोगी रहेंगे तो सुखी भी रहेंगे।

कहा जाता है, 'योग: कर्मसु कौशलम्…'

अर्थात् यदि आप की जीवन शैली में योग एक अभिन्न अंग है, तो आप अधिक कुशलता से अपने कार्य को कार्यान्वित कर सकते हैं।


क. योग के प्रथम गुरू :

योग के प्रथम गुरू, देवों के देव - महादेव हैं। आपको बहुत जगह पद्मासन मुद्रा में यौगिक ध्यानस्थ शिव-मूर्ति भी देखने को मिल जाएंगी।

अगर अवतरण रूप में देखा जाए तो, ऋषि पतंजलि जी, को प्रथम गुरु माना जाता है, जो कि शेषनाग के अवतार हैं।


ख. योग और भारतीय ऋषि :

योग भारतीय ज्ञान की हज़ारों वर्ष पुरानी शैली है। 

योग, प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों और तत्त्व-वेत्ताओं द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है, अर्थात विभिन्न ऋषियों ने बहुत पहले ही योग को कैसे किया जाए और उसकी सहायता से कैसे मोक्ष प्राप्त किया जाए, बता दिया था।

इन ऋषियों में, पतंजलि जी ने 'चित्त की वृत्तियों के निरोध' को योग कहा है। व्यास ने समाधि को ही योग माना है। योगवासिष्ठ के अनुसार योग वह युक्ति है जिसके द्वारा संसार सागर से पार जाया जा सकता है।


ग. योग के प्रकार :

योग के कई सारे अंग और प्रकार होते हैं, जिनके जरिए हमें ध्यान, समाधि और मोक्ष तक पहुंचना होता हैै। 

'योग' शब्द तथा इसकी प्रक्रिया और धारणा हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में ध्यान प्रक्रिया से सम्बन्धित है। योग शब्द भारत से बौद्ध पन्थ के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्वी एशिया और श्रीलंका में भी फैल गया है और इस समय सम्पूर्ण विश्व में लोग इससे परिचित हैं।

हिन्दू संस्कृति को सनातन बनाने में योग का विशेष स्थान है।


घ. योग शब्द का उल्लेख : 

सबसे पहले 'योग' शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। इसके बाद अनेक उपनिषदों में इसका उल्लेख आया है।


ङ: हठयोग :

कठोपनिषद में सबसे पहले योग शब्द उसी अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जिस अर्थ में इसे आधुनिक समय में समझा जाता है। माना जाता है कि कठोपनिषद की रचना 3rd century और 5th century B.C.E. के बीच में हुई थी। 

पतञ्जलि का योगसूत्र योग का सबसे पूर्ण ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल 1st century C.E. या उसके आसपास माना जाता है। हठ योग के ग्रन्थ 9th से लेकर 11th century C.E. में रचे जाने लगे थे। इनका विकास तन्त्र से हुआ।

जैसा कि आधुनिक काल में समझा जाता है, इसका क्या अर्थ है?

प्राचीन काल में योग साधना का मुख्य उद्देश्य, आध्यात्मिक था, मोक्ष प्राप्ति था, ईश्वर प्राप्ति था।

पर आधुनिकता काल में योग को हठयोग के रूप में लिया जाने लगा है, इसमें body fitness and relaxation को highlight करते हैं। इसके लिए विभिन्न आसन हैं, साथ ही different techniques भी use करते हैं।


स्वामी विवेकानंद को जब Europian countries में name and fame मिला, तब कुछ गुरुओं ने भारत के आधुनिक योग का प्रचार-प्रसार विभिन्न देशों में जाकर किया, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा की गई और खुले दिल से अपनाया भी गया।

जिसकी विशेषता सम्पूर्ण विश्व जान रहा, मान भी रहा है। आइए, हम सब मिलकर अपने इस भारतीय धरोहर को मान प्रदान करते हुए उत्सव मनाते हैं।

जिससे; 'सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया…'

हमारा पिछले योग दिवस का heritage segment भी अवश्य पढ़ें।, और अपनी भारतीय संस्कृति से जुड़ें - पतंजलि योग सूत्र का उद्भव: एक अनोखी कथा


जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳