Tuesday, 13 August 2024

Poem : सावन का महीना

 सावन का महीना

सावन का महीना,

प्रेम, प्रीत और मिलन की,

 आस लाता है,

त्यौहारों के साथ आता है।


सैंया से भैया तक,

सबके मन को भाता है।


तीज से आरंभ होकर,

राखी तक जाता है।

नभ, धरा और सभी को,

सुख का एहसास दिलाता है।


हर दिल को इसलिए ही,

सावन बहुत हर्षाता है।


चातक की प्यास बुझाने,

गोरी को साजन से मिलाने,

भाई की कलाई सजाने,

सावन का महीना आता है।

 

प्रेम, प्रीत और मिलन की,

आस लाता है।

Monday, 12 August 2024

Story of Life : सुहाना सावन (भाग-6)

सुहाना सावन (भाग-1),

सुहाना सावन (भाग-2),

सुहाना सावन (भाग-3),

सुहाना सावन (भाग-4)

सुहाना सावन (भाग-5) के आगे…

सुहाना सावन (भाग-6)

इस बरस जब सावन आया, तो पूरी दुनिया प्रीत के रंग में रंग गई, पर उन बूंदों को देखकर, शिखा के मन में बस यही चलता रहता।


'लगी आज सावन की

फिर वो झड़ी है 

वही आग सीने में 

फिर जल उठी है'


उसको इंतज़ार था, अपने प्यार का, उसे विश्वास था कि अंकुर एक दिन ज़रूर लौटेगा, और एक बार फिर उसके जीवन में पहले वाला सुहाना सावन लौट आएगा...

अब कोई दिन नहीं जाता, जिस दिन शिखा को अंकुर की याद ना आती हो...

एक दिन ऐसे ही बहुत तेज बारिश हो रही थी, और शिखा बहुत दुःखी होकर उन बूंदों को देख रही थी और उन पलों को याद कर रही थी, जब वो अंकुर के साथ भीग रही थी।

पूरा एक साल हो गया था, जिसके कारण उसके दिमाग में यह बात कहीं ना कहीं घर गई थी कि अंकुर अब उससे बहुत दूर जा चुका है, पर दिल है कि मानता नहीं, उसे आज भी हर आहट अंकुर की ही लगती थी।

वो अभी इसी उहापोह में थी कि बाहर से बहुत तेज़ आवाज़ में गाना सुनाई देने लगा...


'मोहब्बत बरसा देना तू

सावन आया है 

तेरे और मेरे मिलने का

मौसम आया है...'


जो गाना, कभी उसका favourite song था, आज वो उसे शूल की तरह चुभ रहा था।

वो गुस्से से भुनभुनाती हुई बाहर आई, तभी किसी ने उसकी आंखों पर अपना हाथ रख दिया।

गुस्से से भुनभुनाती हुई शिखा, दो पल के लिए एकदम शांत हो गई थी, उसके मन में अनेक प्रश्न घूमने लगे।

यह... यह कैसा एहसास है, ऐसा.. ऐसा कैसे हो सकता है...

नहीं, नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता है।

वो ऐसा सोच ही रही थी कि एक आवाज़ उसके कानों में गूंज गई, तुम कुछ बोलोगी भी, या हमेशा के लिए शांत हो गई हो?

शिखा पलटी और देखकर दंग रह गई और सीने से लग कर फफक-फफक कर रोने लगी।

तुम, तुम यहां कैसे? तुम तो...

हां, मैं मर ही गया था शिखा, पर तुम्हारे प्यार ने मुझे बचा लिया...

मर गये थे... बचा लिया... तुम कहां थे इतने दिनों तक? मुझसे मिले क्यों नहीं?

अरे बाप रे! इतने सवाल? 

अंदर बुलाओगी या सब यहीं बताना है?

अरे, आओ ना अंकुर, तुम्हारा ही घर है...

कहकर, शिखा बहुत सारी चीज़ें खाने-पीने की trolley में लेकर आ गई और अंकुर के सामने रखकर बोली...

अब बताओ मुझे सब...

शिखा मैं बात, उस सावन से शुरू करता हूं, जब हम भीगे थे।

तुम्हें नहीं पता, पर मुझे severe निमोनिया हो चुका था और इस कारण से doctor ने मुझे, धूल-धक्कड़, पानी में भीगना, ठंडी-ठंडी चीज़ें खाने-पीने के समय बहुत ध्यान रखने को कहा था। 

जिसका मेरी माँ बहुत ध्यान रखती थी।

पर उस दिन हद का भीगने के कारण, मेरी सांस उखड़ने लगी थी, पर मैंने ना तुम्हें ज़ाहिर होने दिया ना किसी और को, नतीजतन बात, मेरी जान पर आ गई।

उस दिन, जब तुम मेरे पास ICU में आई, तो तुम्हारे भरी हुई आंखों को मैं मरने के बाद भी नहीं भूल पाया। और उसी कसक ने मुझे, तुम्हारे जाने के आधे घंटे बाद ही फिर से जीवन दे दिया। 

ओह! क्या ही अच्छा है... पर फिर तुम मेरे पास लौटे क्यों नहीं?

क्योंकि अब मैं तुम्हारे पास पूरी तरह से ठीक होकर के ही आना चाहता था।

इसलिए मैंने एक आयुर्वेदिक center को join कर लिया था, जहां ancient Indian treatment दिया जाता है। Meditation, yoga, सात्विक भोजन और खुला व स्वच्छ वातावरण आदि था। जिसने मुझे पूर्ण नवजीवन प्रदान किया है।

अब मैं तुम्हारे साथ ज़िन्दगी के सब सुख ले सकता हूं, सबसे बड़ी बात, सुहाने सावन को enjoy कर सकता हूं।

उसके बाद शिखा ने गाना बजा दिया...


'अब के सावन ऐसे बरसे

बह जाए रंग, मेरी चुनर से

भीगे तन मन, जिया ना तरसे

जम के बरसे जरा

रुत सावन की, घटा सावन की

घटा सावन की ऐसे जम के बरसे'


दोनों खूब खुश थे और बेसुध एक दूसरे की बाहों में खोए हुए थे, आखिरकार पूरे साल भर बाद, उनके जीवन में सुहाना सावन आया था और वो भी हमेशा के लिए...

Sunday, 11 August 2024

Story of Life : सुहाना सावन (भाग-5)

सुहाना सावन (भाग-1),

सुहाना सावन (भाग-2),

सुहाना सावन (भाग-3)

सुहाना सावन (भाग-4) के आगे…

सुहाना सावन (भाग-5)

दोनों की शादी की तैयारी शुरू हो गई, लेकिन एक दिन सुबह-सुबह अंकुर की मम्मी का फोन आया...

शिखा, बेटा तुम जल्दी से city hospital आ जाओ, अंकुर तुम्हारा बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है।

Hospital में... पर वहां क्यों? 

हां बेटा, कुछ मत पूछ, बस जल्दी से आ जाओ...

शिखा, अपनी मां के साथ आनन-फानन में hospital की ओर दौड़ गई।

Hospital में पहुंचने पर, अंकुर की मां बोली, बेटा तुम सीधे ICU की ओर चली जाओ, अंकुर ने अपनी चंद सांसें तुम्हारे लिए बचाकर रखी हैं।

ICU, चंद सांसें... यह आप कैसी बातें कर रही हैं मम्मी जी? 

आप ऐसा क्यों बोल रही हैं? कहते-कहते शिखा की आंखों से बरबस ही अश्रु बहने लगे।

बेटा, यही सच्चाई है, तुम बस जल्दी से जाओ।

जब शिखा, अंकुर के पास पहुंची, उस समय अंकुर के चेहरे पर अनोखा तेज़ था और आंखें, वो तो ऐसी, जैसे ना जाने कितनी सारी बातें कहने को बेताब लग रही थी।

अंकुर क्या हुआ? तुम यहां कैसे आ गए?

शिखा वो सब छोड़ो, अभी बस इतना ही, कि जो सावन मैंने तुम्हारे साथ हमारे प्रेम की वर्षा में बिताया है, वो मेरी ज़िन्दगी का सुहाना सावन है।

मैंने अपनी जिंदगी में पढ़ाई के ऊपर कभी कुछ रखा ही नहीं, मेरी ज़िन्दगी का बस एक लक्ष्य था, IAS exam qualify करना है। वो pass करके, जैसे मेरा लक्ष्य पूरा हो गया था। ऐसा मुझे लगा...

पर जब तुमने बारिश में भीगने को कहा, तो उन शीतल बूंदों ने, तुम्हारे अनछुए स्पर्श ने और प्रेम की गर्माहट ने एक अजब सा जादू किया। 

वो मुझे एक अनोखी दुनिया में ले गया, जिसकी मैंने कभी कल्पना तक नहीं की थी और सच कहूं तो उस अनोखे अनुभव को मैं शब्दों में व्यक्त भी नहीं कर पा रहा हूं।

ओह अंकुर! मुझे कब से इस पल का इंतज़ार था, कहकर, उसने अंकुर को गले लगा लिया।

थोड़ी देर बाद, "पर यह सब क्या है? तुम यहां क्यों हो?" कहकर शिखा रोने लगी...

शिखा, I am sorry... मैं तुम्हारा साथ नहीं निभा पाऊंगा। हां, इस सुहाने सावन की मीठी याद के साथ अपनी आंखें मूंद रहा हूं, इस वादे के साथ, जल्द ही जन्म लूंगा और तुम्हारे पास लौट आऊंगा...

कहकर, अंकुर चिर निद्रा में लीन हो गया...

अंकुर के जाने के बाद, शिखा एकदम शांत हो गई, वो अपनी सारी duties अच्छे से निभाती, सिवाय शादी करने के...

वो हर पल अपने अंकुर के लौट आने का इंतजार कर रही थी, क्योंकि सावन तो उसकी आंखों से हरदम रहता था।


'मेरे नैना सावन भादो,

फिर भी मेरा मन प्यासा'


इस बरस जब सावन आया, तो पूरी दुनिया प्रीत के रंग में रंग गई, पर उन बूंदों को देखकर, शिखा के मन में बस यही चलता रहता।


'लगी आज सावन की

फिर वो झड़ी है 

वही आग सीने में 

फिर जल उठी है'

 

उसको इंतज़ार था, अपने प्यार का, उसे विश्वास था कि अंकुर एक दिन जरूर लौटेगा, और एक बार फिर उसके जीवन में पहले वाला सुहाना सावन लौट आएगा...


आगे पढें, सुहाना सावन (भाग-6) में…