Monday, 16 December 2024

Story of Life : मजबूर (भाग -7)

मजबूर (भाग-1) ,

मजबूर (भाग-2) ,

मजबूर (भाग-3) ,

मजबूर (भाग - 4)  ,

मजबूर (भाग -5) व 

मजबूर (भाग -6) के आगे...

मजबूर (भाग -7)  


विराज उससे पहले कुछ और पूछता या कहता, उससे पहले सविता जी ने उसे वापस जाने को कह दिया...  

फिर अपनी बेटी पर गुस्साते हुए बोली, इसे सिवाय आलस के कुछ और पता भी है।

यह क्या बताएगी कि क्या कहां रखा है, जब इसे अपने mobile का भी होश नहीं है, जिस पर वरुण ने चार घंटे पहले ही सब कुछ whatsapp कर दिया था।

लीजिए पढ़िए, मुकेश जी को फोन पकड़ाते हुए कहा...

वरुण ने लिखा था, सासू मां और ससुर जी आपको लाखों करोड़ों धन्यवाद कि आपने ने मुझे 50 करोड़ रुपए दे दिए। यह उतने ही रुपए हैं, जो आपने राजकुमार के नाम किए थे। 

मैं सिर्फ उतने रूपए लेकर ही अपने बेटे के साथ इस देश को छोड़ रहा हूं।

मैं मजबूर था, अपने ही बेटे की kidnapping के लिए, मैं मजबूर हो चुका था, आपकी बिगड़ैल और बद् दिमाग बेटी के साथ रहकर...

वरना शादी से पहले मैं भी सफल business man था, पर आपकी बेटी ने कभी मेरी कीमत नहीं समझी और मुझे बर्बाद करने मे कोई कसर नहीं छोड़ी।

मेरी तो छोड़िए कभी अपने बेटे की कीमत भी उसने नहीं समझी...

मैंने उससे निभाने की बहुत कोशिश की, सोचा शायद वो मां बनकर सुधर जाएगी। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, यह आप लोग भी जानते हैं।

मैंने बहुत मजबूर होकर, यह कदम उठाया है। मैं आपका गुनहगार हूं, आप चाहें तो मुझे जेल करवा सकते हैं या मुझे मेरे बेटे के साथ सुखी रहने दे सकते हैं।

मैं आपसे वादा करता हूं कि जितना जल्दी हो सकेगा, मैं आपके 50 करोड़ रुपए भी वापिस कर दूंगा। और आप भी जानते हैं कि मैं काबिल हूं, सक्षम हूं, यह जल्दी कर दूंगा।

आशा है आप मुझे माफ़ कर देंगे। मेरे लिए नहीं तो राजकुमार के लिए माफ़ कर दीजियेगा। क्योंकि उसे उज्जवल भविष्य जीने का अधिकार है, जो आपकी बेटी के संग संभव नहीं है।

सब कुछ पढ़ने के बाद मुकेश जी और सविता ने सिर झुका लिया, क्योंकि जो कुछ लिखा था, पूर्णतः सत्य ही तो था...

उन्होंने वरुण को जवाब दे दिया कि तुम उन रुपयों को हमेशा के लिए अपने पास रख लो। उस पर राजकुमार का पूरा हक है, उसे अच्छा लालन-पालन देना और हो सके तो कभी-कभी हम से मिलवाने ले आना। उसे यही बताना कि उसके नाना और नानी बहुत अच्छे हैं, उसे बहुत प्यार करते हैं। 

हम लोगों को तुम लोगों का इंतजार रहेगा। हम समझ रहे हैं कि तुम कितने मजबूर हो गए थे, ऐसा कदम उठाने के लिए, हमने तुम्हें माफ़ किया।

सब दुखी थे, वरुण और राजकुमार के जाने के बाद, सिवाय अंकिता के... उसे न उन लोगों के जाने का दुःख था, न पैसों के जाने का... बल्कि वो तो खुश थी कि वरुण ने अपनी मजबूरी बता कर उसे आज़ाद कर दिया था। क्योंकि वो हमेशा के लिए मुक्त हो गई थी, अपनी जिंदगी, सिर्फ अपने लिए जीने को। वो खुश थी क्योंकि वो मजबूर थी, ऐसे ही जीने के लिए...

Sunday, 15 December 2024

Story of Life : मजबूर (भाग-6)

मजबूर (भाग-1) ,

मजबूर (भाग-2) ,

मजबूर (भाग-3) ,

मजबूर (भाग - 4)  व

मजबूर (भाग -5) के आगे..

मजबूर (भाग-6)



एक काम करो, तुम सब एक साथ रहो, मैं जल्दी से जल्दी रुपये-पैसों का इंतजाम करता हूं। फिर राजकुमार को वापिस ले आएंगे। 

मुकेश जी के लिए 50 करोड़ का arrangement करना, कोई बहुत कठिन काम नहीं था, हां amount बड़ा था, तो एक बार ठीक से मंथन करना जरूरी था। 

मुकेश जी एक घंटे में ही रुपयों से भरे हुए 2 बड़े-बड़े suitcases लेंआए।

उन रुपयों को देखकर वरुण के निश्चेष्ट शरीर में जैसे जान आ गई हो। खुशी से उसकी आंखें छलक आईं। उसने मुकेश जी को करोड़ों-करोड़ बार धन्यवाद दिया और कहा, आप मेरे लिए ईश्वर के फरिश्ते के समतुल्य हैं। आज मुझे मेरी जिंदगी वापस मिल जाएगी। वरुण रुपयों से भरे हुए suitcases लें गया। 

जब बहुत देर तक न वरुण और न राजकुमार लौटे और न कोई ख़बर मिली, यहां तक कि वरुण का फोन भी  out of reach जा रहा था। तो मुकेश जी का माथा ठनका, आखिर क्या वजह रही? कहीं वरुण, किसी problem में तो नहीं है? 

उन्होंने बहुत ही famous detective विराज को call और सारा केस समझाया। 

विराज ने घर आकर, सबसे पहले रमेश से पूछताछ की, कि आखिर उस दिन हुआ क्या था?

सब सुनकर, विराज को बड़ी हैरानी हुई, उसका दिमाग बहुत तेज़ी से चलने लगा... कि रमेश, राजकुमार से मात्र दस कदम की दूरी पर था, फिर भी राजकुमार को जब कोई kidnap कर रहा था, तो उस‌ समय बच्चे का शोर रमेश को सुनाई क्यों नहीं दिया?

साथ ही जब बच्चा, kidnap हो रहा था तो उस‌ समय आस-पास किसी को भी कुछ ग़लत हो रहा है, इसका एहसास क्यों नहीं हुआ। क्या बच्चे ने उस kidnapper के साथ जाने में कोई विरोध नहीं किया?...

ऐसा कैसे हो सकता है?... 

विराज ने, मुकेश जी से पूछा कि आप की बेटी और दामाद के आपसी relation कैसे हैं? 

जी... इस बात से क्या मतलब है आपका? अंकिता गुस्से से चिल्लाई...

बहुत गहरा मतलब है, आप बताइए मुझे, क्योंकि अब इस case को यही बात सुलझाएगी... साथ ही यह भी check कीजिए कि आप के पति और बेटे का passport घर पर है या नहीं? 

अंकिता बोली, मुझे नहीं पता कि वरुण का passport कहां रहता है और न मैं यह जानती हूं कि राजकुमार का passport बना है कि नहीं?...

विराज उससे पहले कुछ और पूछता या कहता, उससे पहले सविता जी ने उसे वापस जाने को कह दिया... 

आगे पढ़े मजबूर (भाग -7) में 

Saturday, 14 December 2024

Story of Life : मजबूर (भाग-5)

मजबूर (भाग-1) ,

मजबूर (भाग-2) ,

मजबूर (भाग-3)  व

मजबूर (भाग - 4)  के आगे 

मजबूर (भाग-5)



रमेश, राजकुमार के खो जाने से पहले से ही परेशान था, फिर वरुण के सवालों की झड़ी से अंदर तक कांप उठा। 

वो सोचने लगा, वरुण साहब जो इतना शांत रहते है, जब उसने सवालों की झड़ी लगा दी है।

तब अंकिता madam तो उसका क्या ही हाल करेंगी? 

और और... मुकेश साहब, और सविता मालकिन जिनका राजकुमार एकलौता और बेहद लाडला नाती है... वो तो उसे lockup में भेजने से बिल्कुल नहीं चूकेंगे...

रमेश को थर-थर कांपते और सोच में पड़े देखकर, वरुण ने उसे झकझोरा और फिर से राजकुमार के विषय में पूछा...

नहीं साहब, मुझे नहीं पता, राजकुमार बाबा कहां हैं? मैं तो पास के आइसक्रीम पार्लर से बाबा के‌ लिए आइसक्रीम लेने गया था। 

बस उतनी ही देर में बाबा, ग़ायब हो गए... यह कहते-कहते रमेश की आंखों से गंगा-जमुना बह निकली...

चलो, फिर घर... अब तो यह पुलिस केस है, वही निपटेगी तुम से...

नहीं साहब, पुलिस को मत देना, मैं बाबा को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था। न जाने कैसे हो गया?

रमेश और वरुण घर पहुंच गए और उन्होंने अंकिता और उसके पापा-मम्मी को राजकुमार के खो जाने की बात कही...

यूं तो अंकिता को राजकुमार से कोई बहुत लगाव नहीं था, पर उसके खो जाने से वो विह्वल हो गई और फूट-फूटकर रोने लगी...

जब तक मुकेश और सविता पहुंचे, तब तक में वरुण और अंकिता का रो-रो कर बुरा हाल हो चुका था।

राजकुमार को याद कर-कर के, वरुण तो दो-तीन बार बेहोश भी हो चुका था।

मुकेश जी को आया देखकर वो उनके पैरों पर गिर पड़ा, पापा मेरे बेटे को बचा लीजिए...

बचा लीजिए का मतलब..? क्या कुछ पता चला है उसका..? कौन उसे मारना चाहता है?

पापा, अभी-अभी kidnappers का फोन आया था, पूरे पचास करोड़ रुपए मांग रहे हैं।

आप तो जानते हैं कि मेरे पास आपकी बेटी से शादी करने के पश्चात् अब उतना नहीं रहता, फिर अभी business भी थोड़ा मंदा ही चल रहा है।

मैं कहां से लाऊंगा इतना..? 

बहुत मजबूर हो चला हूं, अपने जिगर के टुकड़े को बचाने के लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूं..

अभी आप दे दीजिए, फिर मैं धीरे-धीरे सब लौटा दूंगा..

50 करोड़... दो मिनट के लिए, मुकेश जी भी सोच में पड़ गए...

पापा, आप क्या सोच रहे हैं? वैसे भी इस कंगले से मुझे कोई उम्मीद नहीं है। दे दीजिए 50 करोड़ रुपए और छुड़वा लीजिए, हम सब के कलेजे के टुकड़े को...

हां, मुकेश जी, हमारे कौन 10-15 नाती-पोते हैं? जो कुछ है, बस यही तो है। कुछ मत सोचिए, बस राजकुमार को बचा लीजिए।

वो नन्ही-सी जान, अभी चार साल का ही तो है, रो-रो कर परेशान हो गया होगा।

हम्म... मुकेश जी ने चुप्पी तोड़ी, हां सविता तुम ठीक कहती हो, वैसे भी जो कुछ है, वो अंकिता और राजकुमार का ही है...

एक काम करो, तुम सब एक साथ रहो, मैं जल्दी से जल्दी रुपये-पैसों का इंतजाम करता हूं। फिर राजकुमार को वापिस ले आएंगे। 

आगे पढ़ें, मजबूर (भाग-6) में