Tuesday, 31 December 2024

Article : 2024 Sports Rewind

2024 साल का आज अंतिम दिन है। इस अंतिम दिन पर इस साल को अनेकानेक धन्यवाद देने, और इसकी उपलब्धियों को गिनने का दिन है।

2024 Sports Rewind



यह साल खेल जगत के लिए स्वर्णिम साल के रूप में आया था, जिसमें एक क्रिकेट विश्व कप, आधा दर्जन ओलंपिक पदक और दो शतरंज विश्व चैंपियन शामिल रहे हैं।

वर्ष 2024 ने भारतीय खेल प्रशंसकों को जश्न मनाने के कई मौके दिए जिससे खेलों की दुनिया में भारत का भविष्य उज्जवल नजर आता है।

यूँ तो वर्ष 2024 ने भारतीय खेलों में कुछ यादगार पल जोड़े लेकिन जिन तारीखों को याद किया जाएगा उनमें 29 जून, 30 जुलाई, 12 दिसंबर और 28 दिसंबर शामिल हैं।

भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम 2036 ओलंपिक की मेज़बानी के इरादे का औपचारिक आशय पत्र सौंपना रहा। यह एक ऐसा कदम है जिसमें देश के खेल परिदृश्य को बदलने की क्षमता है।


(1) Cricket :

ODI World Cup 2023 के match में, रोहित शर्मा की अगुवाई वाली भारतीय क्रिकेट टीम final तक तो पहुंची, पर जीत हासिल कर के Cup अपने हाथ में न उठा सकी। सब ओर निराशा के बादल छा गए थे।

पर फिर आया साल 2024, जो अपने साथ T20 World Cup लेकर आया...

बारबाडोस में 29 जून की उमस भरी शाम थी, एक बार फिर रोहित शर्मा की अगुवाई वाली भारतीय क्रिकेट टीम T20 World Cup के final में शामिल थी।

Match अपने रोमांचक मोड़ पर था, नहीं सूझ रहा था कि अगले पल क्या होने वाला है, तभी हार्दिक पांड्या के bowling के आखिरी spell ने कमाल कर दिया और एक दशक से भी अधिक समय तक चले इंतजार को खत्म करते हुए T20 World Cup को जीत लिया। यह देश के लिए वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।


(2) Olympics :

भारतीय क्रिकेट टीम की सफलता के एक महीने बाद, 30 जुलाई को, पिस्टल निशानेबाज – मनु भाकर – आज़ादी के बाद एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी। इस ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने 6 bronze और 1 silver medal जीता।


(3) Paralympics :

Paralympics में 7 gold, 9 silver, 13 bronze: total 29 medal मिले। Ranking वाले 79 देशों में से भारत 18वें स्थान पर था। इस बार के Paralympic खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से भारत को गौरवान्वित किया।


(4) Chess :

पिछले चार महीनों में chessboard भारत के लिए खुशहाली का मैदान बन गया है, जहां open & women, दोनों teams ने सितंबर में पहली बार Olympiad में gold medal जीते हैं, वहीं डी गुकेश और कोनेरू हम्पी ने दिसंबर में World Champion बन के नई ऊंचाइयों को छुआ।

गुकेश 12 दिसंबर को 18 साल की उम्र में चीन की डिंग लिरेन को हराकर सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन बने, साथ ही 37 वर्षीय हम्पी ने 28 दिसंबर को अपने career में दूसरी बार महिलाओं का rapid Chess world Cup जीता। 

वर्ष 2024 को भारतीय खेलों में T20 Cricket World Cup (Men's), Olympics, Paralympics, Chess Olympiad, FIDE World Rapid Championship (Women's section) and FIDE World Championship (Open section) में सफलता के लिए याद किया जाएगा।

भारत आगे आने वाले सालों में भी ऐसे ही विजई परचम लहराए और विश्व विजयी कहलाए।

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳

Monday, 30 December 2024

Bhajan : चच्चा जी के दुलारे

आज के दिन, नाना जी, चच्चा जी महाराज में समाहित हो ईश्वरीयता से परिपूर्ण हो गये थे।

आज का यह भजन, नाना जी को समर्पित है, उनके दिए हुए संस्कार, मार्गदर्शन, अथाह प्रेम और आशीर्वाद को समर्पित है। 

उन्होंने सदैव हमें सद्कर्मों की ओर प्रेरित किया है और सभी को नित प्रतिदिन चच्चा जी महाराज के सानिध्य में रखा है।

नाना जी, को सभी प्यार से पापा जी कहते हैं, उनके उसी सम्बोधन को पिरोकर यह भजन, उनकी ही प्रेरणा से तैयार किया है, जो उनके ही श्री चरणों में अर्पित है।

आइए इस भजन के साथ उनकी भक्ति में लीन हो जाते हैं।

चच्चा जी के दुलारे 



चच्चा जी के दुलारे, 

पापा जी थे हमारे 

हमें ज्ञान की दी गंगा

जो जीवन हमारा तारे


चच्चा जी के दुलारे, 

पापा जी थे हमारे

चच्चा जी के दुलारे 


सदाचार का पाठ,

सदा उन्होंने पढ़ाया

सबका किया भला जो

आया था उनके द्वारे


चच्चा जी के दुलारे, 

पापा जी थे हमारे

चच्चा जी के दुलारे


कर्म जो किया है जिसने 

प्रारब्ध वही है पाया 

मानुष जन्म है दुर्लभ

पाते नहीं हैं सारे


चच्चा जी के दुलारे, 

पापा जी थे हमारे

चच्चा जी के दुलारे 


सुख दुःख से है जीवन

आए वो बारी बारी

संयम से रहना इसमें

कट जाएंगे वो सारे


चच्चा जी के दुलारे, 

पापा जी थे हमारे

चच्चा जी के दुलारे 


धन वैभव नहीं है जीवन

मत उसके पीछे जाओ

गुरु की शरण में जीवन

 मुक्ति उन्हीं सहारे


चच्चा जी के दुलारे, 

पापा जी थे हमारे

चच्चा जी के दुलारे...




आपकी कृपा सदैव हम सब पर बनी रहे 🙏🏻 

Saturday, 28 December 2024

Article : अलविदा, देश के मनमोहन

अलविदा, देश के मनमोहन 



भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी अपनी चिरनिंद्रा में लीन हो गए। वो भारत के 13वें प्रधानमंत्री थे। 

पर वो ही केवल ऐसे प्रधानमंत्री हुए, जिनके भारतीय मुद्रा पर हस्ताक्षर भी रहे हैं...

मुद्रा पर हस्ताक्षर, पर ऐसे कैसे? 

क्या भारत के प्रधानमंत्री को यह अधिकार है कि उनके हस्ताक्षर भारतीय मुद्रा पर रह सकते हैं? 

और अगर ऐसा है तो, मनमोहन सिंह जी ‌के अलावा किसी और प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर क्यों नहीं है? और अगर ऐसा नहीं है तो उनके कैसे हैं?

क्या इसमें कांग्रेस का कोई हाथ है?

नहीं, बिल्कुल नहीं.. 

बात दरअसल यह है कि श्री मनमोहन सिंह, अपने पूर्ण कार्यकाल में न केवल भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे थे, अपितु और भी बहुत से महत्वपूर्ण स्थान पर भी रहे थे।

आइए जानते हैं, क्यों बेहद मौन रहने वाले श्री मनमोहन सिंह जी, इतने famous थे? 

श्री मनमोहन सिंह जी, अर्थशास्त्र के प्रकांड विद्वान व विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। 

Punjab University से उन्होंने graduation and post graduation की पढ़ाई पूरी की। बाद में वह Cambridge University गए, जहां से उन्होंने PhD की। इसके बाद उन्होंने Oxford University  से D-Phil भी किया। उनकी book India's Export Trends and Prospects for Self-Sustained Growth, भारत की व्यापार नीति की पहली और सटीक आलोचना मानी जाती है। 

डॉ. सिंह ने अर्थशास्त्र के अध्यापक के तौर पर काफी ख्याति अर्जित की। वह Punjab University और बाद में प्रतिष्ठित Delhi school of economics में professor रहे। 

इसी बीच वह संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन सचिवालय में सलाहकार भी रहे और 1987 और 1990 में जेनेवा में साउथ कमीशन में सचिव भी रहे। 1971 में डॉ. सिंह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किए गए। इसके बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया।

1985 में राजीव गांधी के शासन काल में मनमोहन सिंह को योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस पद पर उन्होंने लगातार पांच वर्षों तक कार्य किया, जबकि 1990 में वह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार बनाए गए। जब पीवी नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने मनमोहन सिंह को 1991 में अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया और वित्त मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा। इस समय वह न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा के सदस्य थे। मगर संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार सरकार के मंत्री को संसद का सदस्य होना आवश्यक होता है। इसलिए उन्हें 1991 में असम से राज्यसभा भेजा गया था। इसके अलावा रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रहे। भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब, जब वह 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मंत्री रहे।

श्री सिंह जी का finance minister बनना, भारत के लिए स्वर्णिम अवसर था, क्योंकि वो बहुत ही सफल अर्थशास्त्री थे। और उन्होंने अपने ज्ञान का सर्वस्व, भारत की अर्थव्यवस्था पर न्यौछावर कर, देश को समृद्धशाली बना दिया था।  

इसके साथ ही उन्होंने लगातार दो बार सफलतापूर्वक प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला है भी संभाला।

अब जवाहरलाल नेहरू जी के बाद, मनमोहन सिंह जी और अब नरेन्द्र मोदी जी हैं, जिन्होंने लगातार प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला है। 

जिस बात से आरंभ किया था कि कैसे श्री मनमोहन सिंह जी के हस्ताक्षर थे रुपए(नोट) के ऊपर... तो उसका जवाब यह है कि भारतीय मुद्रा अर्थात् रुपए पर RBI के governor के sign  होते हैं। अतः जितने समय तक मनमोहन सिंह जी RBI के governor थे, उनके हस्ताक्षर, भारतीय मुद्रा पर अंकित होते थे। लेकिन सिर्फ उतनी ही अवधि तक, ना उसके पहले, न‌ ही बाद में...

श्री मनमोहन सिंह जी जैसे महान विचारक, अर्थशास्त्री और भूतपूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

उनके पार्थिव शरीर को आज अंतिम विदाई दे दी जाएगी...