Thursday, 17 September 2026

Poem : आपदा को अवसर

भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी एक प्रेरणास्रोत हैं। उनकी जीवन यात्रा अत्यंत कठिन रही है, फिर भी वो डिगे नहीं, डटे रहे और उन्होंने वो प्राप्त किया जो आसान नहीं था।

उनके जन्मदिवस पर यह कविता उनकी ऊर्जा और शक्ति को समर्पित है। इस का मुख्य कारण उनका शांति से हर कठिनाई से जूझना है और उनके जीवन का एक मूलमंत्र है।

आज उसी को कविता में पिरोया है। इसका सार समझने का प्रयास कीजिएगा, तो जीवन में सफल होंगे यह सुनिश्चित है…

आपदा को अवसर



जीवन कठिन है,

कठिनता ही जीवन है। 

हम इस बात को,

भूल क्यों जाते हैं?

थककर, बैठकर,

उसे कोसते क्यों जाते हैं?

उससे कुछ हल नहीं होगा,

नए जोश के साथ,

चलो, उठो, लड़ो। 

और आओ मन में, 

नया उत्साह जगाते हैं।

जो दे न सकी ज़िंदगी, 

उसे छीनकर लाते हैं। 

चलो इस आपदा को 

अवसर बनाते हैं…


आज की इस कविता को पढ़कर, बहुत से लोग हमें मोदी भक्त कहेंगे, तो कोई अंधभक्त, तो कुछ शायद चाटुकार भी बोल दे।

उनकी सब बातें हमारे लिए कोई मायने नहीं रखती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कविता मोदी जी पर नहीं, बल्कि उनके अथक प्रयासों और परिश्रम के ऊपर आधारित है।

नमन है एक ऐसे मनुष्य को जिसने साबित कर दिया कि परिश्रमी मनुष्य सफलता के शिखर पर अवश्य पहुंचता है।

अगर आप कविता का सार समझेंगे तो अवश्य ही जान जाएँगे कि यह कविता प्रेरणा स्रोत की ज्योति है, जिसने अपने अंदर जला ली वो सफल अवश्य होगा…