Saturday, 16 June 2018

Article : पिता के लिए भी...

चंद घंटों पश्चात Father’s day  है, तो आइये पिता के लिए कुछ सोचें!

पिता के लिए भी...

ये शब्द हम सब के जीवन में एक अहम भूमिका रखता है। कहीं पिता, कहीं बाबा, कहीं पापा के नाम से पुकारा जाने वाला ये अहम रिश्ता हमारे साथ तब ही से जुड़ जाता है, जब हम माँ की कोख में होते हैं। एक स्त्री का तो जब वो माँ बनने वाली होती है, तभी से ही ध्यान रखा जाने लगता है। ये खाओ, वो न खाओ, आहिस्ते से चलो, जो स्त्री को उस समय पसंद है, वो ही खिलाया जाता है।  mood swings हैं, जैसा वो चाह रही है करा जाता है।
पर उस पुरुष का क्या? वो भी पिता बनने जा रहा है। आजकल के पुरुष तो पिता बनने के साथ ही बराबर से ज़िम्मेदारी भी निभाते हैं। फिर चाहे रात में बेबी के लिए जागना हो, उसको bottle feed करना हो, या उसके diaper बदलने हो, नहलाना हो, खेलना हो। सब काम बखूबी करते हैं।
तो क्या उनका ध्यान भी जब वो पिता बनने वाले हों, तब रखना चाहिए?
जी हाँ, एक पुरुष का भी उस समय से ध्यान रखना चाहिए, उनकी health की भी proper care हो, उनमे भी mood swings होते होंगे। उन्हें भी ये tension रहती है, कि जब baby  आ जाएगा, तब उसकी दिनचर्या के according  अपना सारा schedule  plan करना होगा, उनकी responsibility भी बढ़ जाती है। जिसको वो बखूबी निभा भी रहे हैं।

तो जब समाज बदल ही रहा है, तो क्यूँ ना, ये भी किया जाए! जैसे एक माँ बनने वाली स्त्री को special treatment मिलता है, वैसा ही एक special treatment पिता बनने वाले पुरुषों को भी मिलना चाहिए।

Friday, 15 June 2018

Poem : ज़िन्दगी

ज़िन्दगी


ज़िन्दगी जिस रंग में रंगी देखो, वैसी ही नज़र आती है

सुख सोचो, तो सुख
वरना दुःख से घिरी नजर आती है

ज़िन्दगी जिस रंग में रंगी देखो, वैसी ही नज़र आती है

पाया है, जो जन्म मनुष्य का
सोचो तो गर्व से भरी नज़र आती हैं

ज़िन्दगी जिस रंग में रंगी देखो, वैसी ही नज़र आती है

हम हैं भारतीय
सोचो तो, त्योहारों से सजी नज़र आती है

ज़िन्दगी जिस रंग में रंगी देखो, वैसी ही नज़र आती है

अपना है, खूबसूरत परिवार
सोचो तो, सम्पूर्णता का एहसास कराती है

ज़िन्दगी जिस रंग में रंगी देखो, वैसी ही नज़र आती है

Wednesday, 13 June 2018

Story Of Life : सच्चाई भाग-3

अब तक आपने भाग-1 और भाग-2 में पढ़ा- माही रमन-राधिका के घर आई है। वहाँ उन दोनों के झगड़ों से माही त्रस्त हो गयी। पर राधिका का समर्पण देख कर वो रमन से तर्क करने को विवश हो गयी। अब आगे...

सच्चाई भाग-3...

रमन, आप राधिका का ध्यान क्यूँ नहीं रखते? रमन की बात सुन कर माही स्तब्ध रह गयी। रमन ने बताया, कि राधिका के अप्पा 2 साल पहले ही नहीं रहे थे, और राधिका ये हीं जानती है, वह दिल की मरीज़ है, और ये सदमा वो बर्दाश्तहीं कर पाएगी, दम तोड़ देगी। क्योंकि वो अपने पिता से अत्यधिक जुड़ी हुई है,लिए वो रोज़ गजरे के बहाने से उसे रोके रखता है।

वो जानता है, कि राधिका के लिए ऑमलेट बनाना सबसे कठिन है इलिए वो मना करता है, जबकि उसके बिना उससे खाना भी नहीं खाया जाएगा।

रात में दवा लेने को भी इलिए ही चिल्लाता है, क्योंकि वो जानता है कि राधिका अपने पैर की परवाह किए बिना ही काम में लगी रहती है, और अपने दर्द के बारे में कभी कुछ नहीं बोलती है

माही सोच रही थी, जिसे सब झगड़ा समझते थे, वो दोनों का unconditional love था, समर्पण था। आज माहि दोनों के प्यार के आगे नतमस्तक हो गयी थी, दोनों को ही एक दूसरे की कमी नहीं दिखती थी, बस गुण ही दिखते थे, और अपने से ज्यादा अपने साथी कि परवाह थी।

माही और मुकुल की जोड़ी तो सर्वत्र प्रसिद्ध थी, बेहद सुंदर माही और बहुत smart मुकुल, उच्च पद पर आसीन, किसी तरह की कोई कमी नहीं, पर उनमें वो प्यार नहीं था।

माही को लगता था प्यार  का अर्थ है- खूबसूरती, व्यतीत किए हुए सुखद पल, प्रशंसा, अपने जीवन-साथी से बस पाते ही रहने की कामना या दूसरे शब्दो में हें तो- सब अच्छा अच्छा। 

किन्तु रमन राधिका के प्यार को देख कर उसकी धारणा बदल गयी। आज माही को एहसास हो गया था, प्यार की गहराई को, वो जान चुकी थी, कि प्यार नाम है समर्पण का और साथ निभाने का, बाकी सब तो उथली बाते हैं।

वो भी राधिका और रमन की तरह अपने जीवन में प्यार की मिठास घोलना चाह रही थी, आज उसको मुकुल के लौटने का बेसब्री से इंतज़ार था, क्योंकि वो समझ गयी थी कि साथ निभाना वो भी समर्पण के साथ, ही प्यार की सच्चाई है।