Friday, 21 December 2018

Kids Story: मिनी


मिनी


शादी होकर आई, तो सबमें बहुत जल्दी घुलमिल गयी। कब मैं अपनी ससुराल में बहू से बेटी बन गयी, पता ही नहीं चला। मेरा पूरा ससुराल बहुत ही अच्छा था। मिनी और मनीष मेरे दो प्यारे बच्चे थे। उनके होने के बाद तो मेरे जीवन का जैसे मकसद ही बदल गया।
मेरे ज़िंदगी की धुरी बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमने लगी। पर बाप रे! बच्चों को पालने को अगर त्रिदेव को भी बोल दिया जाए, तो शायद वो भी यही सोचेंगे कि किसी स्त्री का निर्माण कर दिया जाए। जी हाँ, बच्चों को अच्छे संस्कारों के साथ बड़ा करना हो तो स्त्री के धैर्य के बिना वो संभव ही नहीं है।
मिनी जब स्कूल से लौटती, तो मैं उसे खाना खाने को दे दिया करती थी, पर मजाल है, कि जब तक 20 से 25 बार ना बोल दूँ मिनी खाना खत्म करो” और उसका खाना खत्म हो जाए। पर उसके बाद भी वो पूरे 2 घंटे में खाना खत्म करती। कितनी ही बार ऐसा होता था, कि मेरा धैर्य जवाब दे जाता, कि इसका खाना तो दिन भर में खत्म नहीं होने वाला, और मैं खुद खिलाने बैठ जाती। यही हाल मनीष का भी रहा।
जब मिनी बड़ी हुई, सब बोले उससे अपने काम में हाथ बँटवा लिया करो सब की सुन के मैंने उसे कुछ काम देने शुरू किए, तो हे मेरे भगवान! जो काम मैं चार मिनट में खत्म कर लेती थी, उसे मेरी लाडो रानी 40 मिनट में भी खत्म नहीं कर पाती थी। जितनी थकान मुझे काम कर के नहीं होती थी, उससे ज्यादा उसे देख कर होने लगती थी, कि काम ना जाने कब खत्म होगा।  और फिर मैं खीज़ कर सारे काम खुद ही खत्म कर दिया करती थी। मिनी को तो काम के लिए तब ही आवाज़े लगती थी, जब मैं बीमार हुआ करती थी।

मिनी के पिता और बाकी सब के कहने से मिनी काम तो करना सीख गयी थी, पर काम को खत्म करने की स्पीड उसकी बड़ी स्लो थी।
मेरी ज़िंदगी में वो दिन भी आया, जब मिनी का विवाह सम्पन्न हो गया, और वो अपने घर चली गयी। कुछ ऐसा रहा, कि शादी के बाद मैं कभी उसके घर नहीं जा पाई। जब भी आई, मिनी ही आई।   
पर आज उसके बेटे की पहली सालगिरह थी। उसका व दामाद जी दोनों का फोन आया था। माँ आप आज नहीं आयीं तो हम भी कभी नहीं आएंगे। आपकी, ऋषिता के पहले जन्मदिन पर तबीयत ठीक नहीं थी, इसीलिए हम मान गए थे, पर अगर आप इस बार नहीं आयीं, तो हम हमेशा के लिए गुस्सा हो जायेंगे याद रखियेगा माँ, फोन रखते रखते मिनी बोली।
मिनी के पापा ने वादा किया कि इस बार सब आएंगे। आज पहली बार मैं मिनी के घर गयी थी। देखा वो भी मेरी ही तरह चकरघिन्नी बनी घूम रही थी। और मैं साथ में ये देखकर दंग रह गयी, कि मेरी मिनी तो मुझ से भी ज्यादा तेज़ी से सारे काम निपटा रही थी। तभी वो नन्ही ऋषिता को मेरे पास बैठा गयी, और बोली माँ इसे- "खाना खाओ,खाना खाओ", बोलती रहिएगा, तभी इसका खाना 2 घंटे में खत्म होगा। माँ, ये मुझे खाना खाने में रुलवा, खिजवा देती है। आप इसे देखिएगा, मैं तब तक सारे काम निपटा दूँगी
मिनी को देख कर लगा, जैसे मेरा सारा अतीत घूम गया था। और मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया, सभी बच्चे सब कुछ धीमे- धीमे ही करते हैं, स्पीड तो अभ्यास से आती है। हमारी भी ऐसी ही आई होगी, और हमारे बच्चों में भी वैसे ही आएगी। कहीं भी जादू नहीं होता है, धैर्य रखें, खीजें नहीं, बल्कि बच्चों को प्रोत्साहित करेंउन्हें कार्य समय से कैसे किया जाए वो करना सिखाएँ, वो भी बहुत ही प्यार से
सच आज मेरी मिनी बड़ी हो गयी थी, और मुझसे ज्यादा होनहार भी     

Wednesday, 19 December 2018

Poem : हमसफ़र का साथ

हमसफ़र का साथ 


ज़िंदगी की राह
टेड़ी-मेड़ी हो मगर
साथ हो गर हमसफर,
तो रास्ता कट जाता है,
कठनाईयाँ कब पड़ी
ये समझ नहीं आता है
इसलिए ही खुदा ने
अकेला ना भेजा हमें  
   हमसफर का साथ दिया     
   ना घिरे परेशानियों में     
हाथों में उसका हाथ दिया
और कोई साथ दे ना दे
संग चलेगा हमसफर
चाहे कितनी भी हो लंबी
हो कठिन चाहे डगर
जो हमसफर है तुम्हारा  
उसका मान करो सम्मान करो
है धरोहर वो खुदा की
भूल से भी कभी भी
उसका ना अपमान करो

Tuesday, 18 December 2018

Article : Housewife (A Self-employed)


Housewife (A Self-employed)

आजकल ladies बड़े शान से बोलती हैं, I’m a working women और साथ ही housewife को ऐसे हेय दृष्टि से देखेंगी, जैसे housewife होना कोई अपमान की बात हो। पर वो ऐसा करते time ये भूल जाती हैं, शायद उनकी माँ भी एक housewife ही थीं, और या फिर उनकी माँ...... तो ऐसा करके क्या उनका भी अपमान नहीं कर रहीं हैं?
कभी सोचा है कि वो housewife क्यों हैं? वो housewives इसलिए नहीं हैं, कि उनमें क्षमता नहीं है, बल्कि उनमें क्षमता तो और ज्यादा ही हैं। उनमें त्याग, तपस्या, समर्पण इस हद तक होता है, कि वो पूरे परिवार को सुद्रढ़ नींव प्रदान करता है। क्योंकि वो housewife नहीं, homemaker होती हैं।
उन्हीं के अथक प्रयास से परिवार का एक एक सदस्य अपने जीवन की ऊंचाइयों को छूता है। ये उनके त्याग और निस्वार्थ की भावना ही है, कि उन्होंने अपने जीवन को ऊंचाइयों पर ले जाने को महत्व  नहीं दिया, वरन अपने परिवार के एक एक सदस्य को उसके जीवन में उच्च स्थान प्राप्त करने में सहयोग प्रदान किया।
यहाँ ये कहना शायद ज्यादा उचित होगा, She is not a Doctor, She is Doctor maker. She is not an Engineer, She is an Engineer maker, Manager maker, Business tycoon maker, etc.
मतलब वो खुद वो नहीं हैं, पर जितने भी Greats हैं, उन सब की निर्माता हैं। कभी माँ के रूप में, कभी पत्नी के रूप में। निर्माता सदैव ही महान होता है, ये तो सब ही जानते हैं।
और अगर इस बात को एक लड़की ही employee बन कर नहीं समझ सकती कि, उसको इस मुकाम पर पंहुचने के लिए उसकी माँ ने अपने आपको housewife बनने तक ही सीमित रखा, तो हम लड़कों से क्या उम्मीद करें, कि वो अपनी माँ, अपनी पत्नी के त्याग, समर्पण, निस्वार्थ भाव को समझें, उन्हें मान प्रदान करें।
Women empowerment की होड़ में हमे ये नहीं भूलना चाहिए, कि housewives तो self employed हैं, मतलब वो तो owner हैं, किसी के under में काम नहीं कर रहीं हैं। और जितने भी working हैं, job कर रहे हैं। वो तो किसी के under में काम कर रहे हैं, तो घमंड आपको किस बात का है, नौकर होने का?
और जो working women हैं, उन्होंने ध्यान दिया है, कि वो working बनने में किस किस में पीछे रह जाती हैं, सास-ससुर की सेवा में; बच्चों को शिक्षा, प्यार व संस्कार देने में; जब आपका लाडला नन्हा-मुन्ना था, तब उसे creches में डाल कर ममता देने में; और भी बहुत सी ऐसी बाते हैं...... क्योंकि इन सब के लिए समय चाहिए, और वो तो आप अपने कार्यक्षेत्र में दे आते हैं। तो समय का अभाव तो रहेगा ही, खलेगा ही।
जितना working women की monetary earning हैं, उतनी saving तो housewives घर में ही रह कर लेती हैं। और बाकी जो कमाया, उसका तो हिसाब ही नहीं है। तो सोचिए जरा कौन ज्यादा कमा रहा है?
जिनके पति इतने सक्षम नहीं हैं, कि वो अकेले जिम्मेदारियों का निर्वाह कर सकें। वहाँ समझ आता है, पर जहाँ ऐसा नहीं है, वहाँ सब कुछ ताक पर रखकर सिर्फ अपनी महत्व्कांक्षाओं की पूर्ति हेतु working women का तमगा लगा कर झूठी शान बिखेरने से तो housewife लाख भली हैं, सर्वोच्च हैं।
Owner से worker ना तो बराबरी कर पाया है, ना कभी कर सकता है। तो आगे से याद रखिएगा, Homemaker (housewife) को कम समझने की भूल मत कीजिएगा। किसी के त्याग, समर्पण, निस्वार्थ भाव को हेय दृष्टि से मत देखिएगा, यही हैं, जो महान का निर्माण करने की क्षमता रखती हैं।
आप working women हैं, कि housewife, वो सबकी अपनी इच्छा है,अपनी requirement है। इसलिए आप जो भी हों, दूसरे को हेय दृष्टि से देखा जाए, वो गलत है। आप जो भी हैं। आप उसमे अपने फर्ज़ को पूरा करें, और दूसरों को भी सम्मान दें।       
सभी HOMEMAKER (self-employed housewives) को समर्पित, उन्हे शत शत नमन, व कोटि कोटि धन्यवाद