Thursday, 14 February 2019

Poem : Valentine's day


Valentine's day



Valentine's day है ऐसा त्योहार
फिजाँ में जैसे घुल गया हो प्यार  

रंग सब तरफ गुलाबी सा छाया है
प्रेम प्रीत से सजा त्योहार आया है

कहीं card, कहीं फूल, कहीं gifts
हर तरफ बस इनकी ही बहार है

हर साजन, अपनी सजनी को  
खूबसूरत तोहफा देने को तैयार है

वक़्त भी जैसे इस दिन थम जाता है
प्यार का गवाह वो भी बन जाता है

बस इस दिन ही नहीं, सब दिन
आप सब की ज़िंदगी में हो प्यार

आप सब ही को मुबारक हो
Valentine's day का त्योहार

Wednesday, 13 February 2019

Story Of Life : कौन करे (भाग -२)


पंकज, प्रिया का appointment letter लेकर आता है, जिसका प्रिया को बहुत दिन से इंतज़ार था, पर letter देखकर उसे घर की सारी जिम्मेदारी याद आने लगती है. तब पंकज जिम्मेदारियों में साथ निभाने की बात करता है...... 
अब आगे.....

  
कौन करे (भाग -२) 


आज से प्रिया को office जाना शुरू करना था, पंकज भी प्रिया के साथ ही उठ गया। दोनों ने ही मिलकर सारे काम किए। और अपने अपने office चले गए। आज पहली बार पंकज थोड़ा late हुआ था।
लौटेते समय पंकज, संयम को लेकर, प्रिया को लेने पहुँचा। क्योंकि प्रिया का ऑफिस पंकज से पहले लगना था, और उससे देर में छूटना था। पंकज को संयम के साथ आया देखकर वो बहुत खुश हुई। प्रिया बहुत fresh लग रही थी। पंकज के पास आ कर वो चहकते हुए बोली, मेरा आज बहुत ही अच्छा welcome हुआ। मुझे आज office join करके मज़ा ही आ गया। I love you पंकज, अगर तुम साथ देने का वादा नहीं करते तो, शायद मैं join करने का सोच नहीं पाती।

सब कुछ अच्छे से चल रहा था, एक दिन पंकज की माँ, उनके साथ रहने को आ गईं। उनके आने से आए दिन पंकज को उनकी दवाई आदि, लाने या doctor को दिखाने के कारण office जाने में late होने लगा था या उसे छुट्टी लेनी पड़ रही थी।
साथ ही पंकज रोज ही प्रिया के साथ घर के काम में हाथ भी बांटता। यह सब पंकज की माँ को अच्छा नही लग रहा था। एक दिन तो वो बोल ही दीं, अच्छा महारानी को नौकरी कराई है तूने। आए दिन तू कभी खाना बनाता है, कभी बर्तन धोता, कभी घर की साफ-सफाई, कभी संयम को संभालना और छुट्टी भी लेगा, तो वो भी तू ही। ये क्या तरीका है?
माँ, मैं ऐसा क्यों नहीं कर सकता, बताओ तो? शादी करके पत्नी अर्द्धांग्नि कहलाती है, नौकरानी नहीं। जिस तरह से वो मेरे लिए हर काम में खड़ी रहती है, मुझे भी वैसा ही करना होगा ना? जब वो मुझे घर को चलाने में धनार्जन करके support कर सकती है , तो क्या मैं उसका घर के कामों में हाथ नहीं बंटा सकता?
रही बात छुट्टियों की, तो उसकी नौकरी अभी नयी है, इसलिए वो ज्यादा छुट्टी नहीं ले सकती। शाम को जब प्रिया घर आई, तो आज वो माँ जी के लिए नया स्वेटर और body massager ले कर आई थी। और आते ही बोली, मैंने आपका योगा teacher से appointment ले लिया है, कल से मेरे साथ ही चलिएगा, आपके घुटने जल्दी ही फिर से पहले जैसे हो जाएंगे।
पर प्रिया, तुमने वहाँ का appointment क्यों लिया, वहाँ तो बहुत fees लगती है। पंकज ने चौंक कर पूछा?
अरे अब माँ जी की बहू कमा रही है, तो क्या अपनी माँ जी के लिए इतना भी नहीं कर सकती? अब तो खर्चे की सोचने की जरूरत नहीं है, सब top का ही होगा। ये सुन के सब हँसने लगे  
प्रिया की ऐसी बात सुन कर माँ जी, समझ गईं, अब ज़माना बदल रहा है, जब कमाने के लिए सब बाहर निकल रहे हैं, तो घर का काम भी सभी को ही करना पड़ेगा। ये सोचने से काम नहीं चलेगा, कि ये काम कौन करे? या वो काम कौन करे?
उसके बाद से ना तो पंकज की माँ को पंकज के काम करने से ऐतराज हुआ, ना ही कभी प्रिया से कोई शिकायत हुई।

Tuesday, 12 February 2019

Story Of Life : कौन करे

कौन करे


पंकज, आज office से आते वक़्त मिठाई भी साथ लाया था। घर के अंदर आते ही उसने प्रिया के हाथ में मिठाई का डिब्बा देते हुए कहा, आज तुम्हारा appointment letter ले कर आया हूँ। आखिरकार तुम्हारी मेहनत रंग ले ही आई।

अपना appointment letterदेखकर प्रिया भी खुशी से उछल पड़ी। लेकिन अगले ही पल उसकी खुशी जाने कहाँ काफूर हो गयी।
अभी तक जिस appointment का उसे इतना इंतज़ार था, आज उसके मिलते ही उसे अपनी गृहस्थी की एक एक ज़िम्मेदारी का ख्याल सताने लगा। अगर मैं office join कर लूँगी, तो छुटकू संयम का क्या होगा। अभी दो साल का ही तो है, हर समय उसे Mumma चाहिए।  मेरे बिना एक पल भी तो नहीं रहता है, वो! फिर उसके बिना मैं भी कहाँ रह पाऊँगी? कैसे अपने नन्हें-मुन्नों को छोड़ के लोग काम कर लेते हैं?
फिर घर का इतना सारा काम, बाप रे! कैसे सब खत्म करके office जाऊँगी। पर इतना अच्छा offer उससे छोड़ा भी नहीं जा रहा था। प्रिया को खोया हुआ देखकर, पंकज ने उसे झकझोरा, क्या हुआ प्रिया, कहाँ खो गयी? कितने दिनों से तुम्हें appointment का इंतज़ार था, आज जब मैं लेकर आया हूँ, तो तुम्हें कोई खुशी ही नहीं हो रही है।
मैं कैसे खुश हो जाऊँ? मुझे ये समझ ही नहीं आ रहा है? प्रिया अपने में ही खोई-खोई सी बोली। क्यों क्या हुआ? कौन सी बात तुम्हें इतना परेशान कर रही है, प्रिया की बिखरी ज़ुल्फों को संवारते हुए पंकज ने पूछा।
पंकज आपने कभी सोचा है? जब हम दोनों office जाएंगे, तब संयम का क्या होगा? वो अभी दो ही साल का है। और बताओ, और क्या क्या चल रहा है, तुम्हारे मन में? पंकज ने बड़े ही सधे शब्दों में पूछा।
और क्या क्या बताऊँ, घर के ढेरों काम हैं, पानी के आने का समय है, दूध वाला, काम वाली, राशन, सब्जी लाना, खाना बनाना और भी बहुत सारे काम रहते हैं घर पर, तुम क्या जानो। तुम तो office चले जाते हो, पर तुम्हारे पीछे यह सब काम निपटाते-निपटाते कब शाम हो जाती है, मुझे पता ही नहीं चलता है। और तुम्हारा काम तो office से आने के बाद खत्म हो जाता है। पर तुम्हारे आने के बाद भी मैं तो चकरघिन्नी बनी रहती हूँ और बिस्तर पर सोने से पहले तक मेरा काम चलता ही रहता है। और उठने के साथ ही फिर शुरू हो जाती हूँ।
अच्छा जी सब सुन लिया मैंने, अब मेरी भी सुन लो, मैंने सब सोच लिय है, पंकज ने कुछ तेज़ स्वर में बोला। संयम को creche में डाल देंगे। creche! कितने आराम से तुमने बोल दिया, रह भी पाएगा मेरा लाडला? क्यों? क्यों नहीं रह पाएगा?पहला बच्चा है क्या? बहुत सारे रहते हैं। संयम भी रह लेगा। घर का काम हम मिलके करेंगे। आखिर दोनों का घर है, तो ज़िम्मेदारी भी दोनों की ही होनी चाहिए। फिर जब दोनों ही कमाएंगे, तो अधिक पैसा आएगा, तो helping source भी बढ़ जाएंगे।
आपने सब कितना आसान कर दिया है, पर सब इतना आसान है नहीं। प्रिया ने पंकज की सारी बातों को सुनते हुए कहा। मुझ पर विश्वास तो करो, जान! सब हो जाएगा। पंकज ने प्यार से उसका गाल सहलाते हुए बोला।
प्रिया के office join करने में एक हफ़्ते का समय था, उससे पहले ही पंकज ने संयम का creche में admission करा दिया। एक maid से खाना बनाने की बात कर ली।
आज से प्रिया को office जाना शुरू करना था........

क्या प्रिया ऑफिस जा पायी? या उसने नौकरी का विचार छोड़ दिया... जानते हैं  कौन करे (भाग-२) में