Wednesday, 27 February 2019

Article : सीना 56 इंच का


सीना 56 इंच का


कल हमारा सीना 56 इंच चौड़ा हो गया, पर क्यों?
अरे आप कैसी बात कर रहे हैं, यहाँ "क्यों" का तो सवाल ही नहीं उठता।

जिस तरह से हमारे निर्दोष जवानों को मौत की नींद सुला दिया गया, उसके लिए तो उन आतंकवादियों को जो सज़ा दी गयी, वो तो उनके लिए बस सबक ही है। उनका तो जड़-मूल से नाश होना चाहिए।

जी हाँ, पर शायद उन आतंकवादियों को ये सबक तो जरूर मिला होगा, कि अब भारत के नेता “हम करेंगे, हमें करना चाहिए” वाले केवल भाषण नहीं देते हैं।

वो अगर कहते हैं, कि “हम करेंगे” तो वो कर ही देते हैं। और अगर कहते हैं, “करना चाहिए”, तो कर के दिखाते हैं, कि क्यों करना चाहिए, और कैसे करना चाहिए।

एयर–सर्जिकल स्ट्राइक से ये भी सिद्ध हुआ, कि भारत बहुत क्षमाशील है, इसलिए उसने पाकिस्तान के एक भी मासूम सैनिक को नहीं मारा, जबकि आतंकवादी खेमा उनकी ही सरहद में था

पर साथ ही ये भी सिद्ध कर दिया कि अगर भारत अपने पर आ जाता है, रातों रात आतंकवादी खेमे में भी खौफ़ जगा देता है।

आज वो डायलॉग कितना सटीक लग रहा है, जो राजकुमार जी ने अपनी एक फिल्म में बोला था

"हम तुम्हें मारेंगे और ज़रुर मारेंगे, लेकिन वो बन्दूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक़्त भी हमारा होगा, बस ज़मीन तुम्हारी होगी" 

आज वायु सेना ने ये सिद्ध कर दिया है, वो रियल-लाइफ हीरो हैं। क्योंकि जो डायलॉग हीरो को दिए जाते हैं, वो उसे कर के दिखाते हैं। सभी सैनिकों को शत शत नमन

आज पूरा जगत भारत के इस शौर्य पूर्ण कदम की प्रसंशा कर रहा है। जिसमें, उसने एक साथ कितने ही आतंकियों का सफाया कर दिया, पर एक भी मासूमों पर आंच नहीं आने दी।

पर अब समय आ गया है, कि सारी दुनिया को एकजुट हो कर आतंकवाद के खिलाफ़ बिगुल फूँक देना चाहिए। जिससे आतंकवाद का हमारी प्यारी धरती से समूल नाश हो जाए। और उसके बाद आतंकवादी भी आतंक फैलाने से पहले दो बार सोचे जरूर कि उसका हश्र बहुत बुरा होगा।

और जो जो देश ये सोचते हैं कि आतंकवाद खत्म हो जाना चाहिए, वे सब एक जुट हो जाएँ। जब शांति कायम करने वालों का खेमा बड़ा हो जाएगा, तब आतंकवाद तो अपने आप ही कम हो जाएगा।

आज पाकिस्तान के पास बहुत बड़ा मौका है, ये सिद्ध करने का, कि उनका आतंकवाद से कोई लेना देना नहीं है। इसके लिए उसे भी भारत की ही तरह एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए। और जो आतंकवादी भारतीय हमले से बच गए हैं, उनका नाश कर देना चाहिए।    
जय भारत -जय  भारती 

Tuesday, 26 February 2019

Story Of Life : भक्षक (भाग-2 )

अब तक आपने पढ़ा,.....  प्रीति अपने पति सूरज व बच्चों के साथ train से Bombay घूमने जा रही है, जहाँ TTE उस पर कुदृष्टि रखता है.......
अब आगे.....

भक्षक (भाग-2) 


वो सीट में अंदर की तरफ बैठ गयी, जिससे TTE के आने पर वो उसकी पहुँच से दूर रहे। साथ ही वो अपना दिमाग बहुत तेज़ी से चला रही थी, कि ऐसी क्या युक्ति करे कि सारी परिस्थिति अनुकूल रहे।

सूरज ने जब, प्रीति को अंदर की तरफ बैठा देखा, तो पूछ बैठा, क्या हुआ तुम window सीट पर कैसे चली गयी? वहाँ तो चिनू-मीनू बैठते हैं ना?

हाँ, हाँ जानती हूँ, कुछ uneasy लग रहा था, प्रीति ने tension में ही भरे हुए बोला।
Courtesy: Shutterstock

क्या हुआ? सूरज परेशान होता हुआ बोला।

नहीं नहीं, कुछ नहीं, प्रीति अपने को सयंत करते हुए बोली, मुझे बस थोड़ा बाहर देखने का मन कर रहा था।

अच्छा ठीक है, मैं चिनू मीनू के साथ खेल लेता हूँ, तुम थोड़ी देर सुकून से बैठ लो। ये कहते हुए सूरज चिनू मीनू के साथ खेलने लगा।

उसी समय, वहाँ TTE आ गया। उसको देखते ही प्रीति बोली, भैया आप ने बड़ी मदद कर दी, चलो बच्चों मामा जी को thank you बोलो।

बच्चे समवेत स्वर में चिल्ला उठे, thaaaannnnk yoooou मामामामा जीजीजीजी ।

मामा जी! ..... ऐसा सम्बोधन सुनकर TTE सकपका गया। प्रीति फिर बोली, भैया आप के पास कुछ toffee, chocolate है क्या? अगर है, तो दे दीजिये, बच्चे अपने मामा से हिल जाएंगे। 

एक काम करो सूरज, कुछ देर तुम और बच्चे भैया के साथ टीम बना कर खेल लो, सफ़र भी कट जायेगा, और भैया का मन भी लग जायेगा।

सूरज को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था, आखिर प्रीति को एकदम से क्या हो गया, जो इतना भैया,भैया कर रही है।

सूरज ने कह ही दिया, क्या भैया, भैया लगा रखा है……  

क्या सूरज सब समझ जायेगा? क्या प्रीति अपनी युक्ति में कामयाब रहेगी? .....
जानते हैं भक्षक (भाग-३) 

Monday, 25 February 2019

Story Of Life : भक्षक


भक्षक

प्रीति बहुत सुंदर थी। उसका पति सूरज उस पर जान छिड़कता था, पर साथ ही वो प्रीति के प्रति बहुत ज्यादा possessive था। कोई उसकी तरफ़ देखने लगे, तो वो उससे लड़ने लग जाता था। चिनू-मीनू उनके दो सुंदर बच्चे थे।

एक दिन सभी train से Bombay घूमने जा रहे थे। सभी मस्ती में थे, हँसते खाते सफ़र गुजर रहा था।

तभी वहाँ TTE आयाticket check करते समय उसकी नज़र प्रीति पर पड़ गयी। प्रीति उसे इस कदर भा गयी, कि वो उससे नज़र ही नहीं हटा पा रहा था।

जब train एक station पर रुकी, सूरज नीचे कुछ खाने के लिए, लेने उतर गया। station बड़ा था, अतः ट्रेन देर तक रुकनी थी, इसलिए वो चिनू और मीनू को भी साथ ले गया। और बच्चा लोग, कौन सी ice-cream खाओगे? सूरज बच्चों से पूछने लगा?

Ice-Cream..... Ice-Cream का नाम सुनकर प्रीति के मुँह में भी पानी आ गया। वो भी उठ कर चल दी। सबने आइसक्रीम ले ली। ट्रेन के चलने का signal हो गया।

TTE वहाँ आ गया, प्रीति को देखकर बोला, आइये मेरा हाथ थाम लीजिये, वरना आपकी train छूट जाएगी। प्रीति मीनू का हाथ थामे TTE की मदद से train में चढ़ गयी।  सूरज चिनू को गोद में ले कर आ रहा था, तब तक ट्रेन रेंगने लगी थी। पर उस समय TTE  ने अपना हाथ अंदर कर लिया। अरे आप सूरज को तो अंदर ले लेते, TTE की ऐसी हरकत देखकर प्रीति के मुँह से स्वतः ही निकल गया।

आप भी ना Madam, सूरज जी हट्टे-कट्टे हैं, आराम से चढ़ जाएंगे, टीटी ने कुटिलता पूर्वक बोला। सूरज फुर्तीला था, वो speed तेज़ होने के पहले ही लपक कर चढ़ चुका था। प्रीति ये समझ चुकी थी, कि TTE की उस पर कुदृष्टि है। पर अब उसे समझ नहीं आ रहा था, कि वो क्या करे? क्योंकि अगर सूरज को समझ आ गया, तो वो अभी लड़ने लग जाएगा। जो कि उनकी यात्रा के लिए अनुचित रहेगा। फिर क्या पता, TTE उन्हें कैसे तंग करे?....... 
आगे क्या हुआ, जानने के लिए पढ़ते हैं........ भक्षक-(भाग-2)