By Animika Sahai
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Monday, 15 June 2020
Invitation : आप और हम - रंग बिखेरें संग संग
Friday, 12 June 2020
Stories of Life : भय (भाग - 3)
भय (भाग - 3)
जब वे सब घायल थे, रंजना ने वहाँ पड़ी रोड से उन चारों की बेतहासा धुनाई की। उस समय उसे देखकर कोई नहीं कह सकता था, कि यह वही रंजना है, जो बेहद सौम्य है, वो पूर्णत: चंडी का स्वरूप धारण कर चुकी थी।
वो डॉक्टर थी, इसलिए उसे पता था, कहाँ मरने से ये फिर कभी किसी मासूम को सता नहीं पाएंगे, साथ ही ज़िन्दगी भर अपने कुकर्म को भुगतेंगे भी, पर ठीक नहीं हो पाएंगे। आखिर में उसने उन दोनों के पैर से गोली भी निकाल दी।
जब वो उन दरिंदों को सज़ा देकर हटी, तो उसकी वही दोस्त भी आ गयी। अरे रंजना मेरे इंतज़ार तो कर लेती, मैं भी तो आ ही रही थी ना।
रंजना ने उसे gun वापस करते हुए कहा, तुम्हारी service gun और training मेरे साथ थी। बस और मुझे कुछ नहीं चाहिए था।
रंजना आज तुम्हें भय नहीं लगा?
नहीं! आज मुझे एक ही जुनून था, इनसे बदला लेने का।
रंजना तुम्हारी जैसी सारी लड़कियाँ हो जाएँ, तो हम पुलिस वालों की जरूरत ही ना हो।
काश मुझे, उस दिन भी भय ना लगता, तो इन दरिंदों को उस दिन ही सबक सीखा देती।
रंजना, अपनी दोस्त के साथ वापस आ गयी। अगले दिन news थी, एक लड़की ने अपनी अस्मत लूटने वालों को सज़ा दी। अब सज़ा देने के लिए कानून नहीं खुद लड़कियाँ हो रही हैं बुलंद।
उन दरिंदों की हालत देखकर बहुत दिन तक उस इलाके में कोई वारदात नहीं हुई। क्योकि वो जीवित तो थे, पर बस एक जीवित लाश से। आज उन्हें समझ आ रहा था, कि जिन लड़कियों के साथ वो ऐसा करते थे, उन्हें कैसा दर्द होता था, और उन्हें कैसी अपनी ज़िदगी लगती थी।
साथ ही वहाँ की लड़कियों के अंदर भी जोश भर चुका था, कि अगर भय नहीं करेंगी, तो वो चंडी का स्वरूप बन सकती हैं। और अगर लड़की को चंडी का रूप धरना आता है, तो भय दरिंदों को लगेगा।
Thursday, 11 June 2020
Story of Life: भय (भाग-2)
भय (भाग-2)
पर रंजना की माँ का भय सही निकला, एक दिन रात के समय लौटते समय रंजना को चार वहशी दरिंदों ने घेर लिया, और उसकी अस्मत तार- तार कर दी।
रंजना घर तो आ गयी, पर उस दिन
से वो इतनी भय ग्रस्त रहने लगी, कि वो कमरे से भी बाहर नहीं
निकलती थी।
ऐसे ही 1 महिना निकल गया, एक दिन वो TV. देख रही थी, तो
उसमें news आ रही थी, उन्हीं चार
दरिंदों ने एक और मासूम को बर्बाद कर दिया। इस बात से रंजना डरी नहीं, उसमें एक अलग ही हौसला जाग गया।
उसने उस रात अपने को मजबूत करने और अपने भय को
हराने की बहुत सारी योजना बनाई।
अगले दिन वो अपनी एक दोस्त से मिली, और उसके साथ 1 हफ्ता गुजर दिया।
एक हफ्ते बाद वो उस जगह बहुत style से ready होकर एक bag लेकर अकेले पहुँच गयी।
उसको अकेला देखकर वो दरिन्दे
अपनी क्रूर हँसी के साथ उसको घेर कर खड़े हो गए। पर आज वो डर नहीं रही थी, क्योंकि उसे कुछ खोने का भय भी नहीं था।
उनमें से एक जैसे ही उस पर झपटा, उसने उस पर pepper spray, कर दिया। pepper spray से उसकी आंखे कसकर जलने लगी, वो अपनी आँख मलते
हुए पीछे खिसक गया।
जैसे ही दूसरा आगे बढ़ा, उसने उस पर acid फेंक दिया,
दूसरा भी दर्द से करहा गया।
अब बाकी दोनों एक साथ उस पर टूट पड़े। पर उसने बढ़ी
फुर्ती के साथ अपनी gun निकली और दोनों के पैरों पर गोली
चला दी। अब चारों बुरी तरह करहा रहे थे, वो सपने में भी नहीं
सोच पाये थे, कि कोई लड़की इस तरह से उन पर वार कर सकती है।
जब वे सब घायल थे, रंजना ने.....
आगे जानने के लिए पढ़ें, भय के अंतिम भाग,


