Thursday, 23 July 2020

Song : दिल से बंधी एक डोर

आप सभी को हरियाली तीज की अनेकाएक हार्दिक शुभकामनाएँ, आप सब की ज़िंदगी में रंग, खुशियाँ व उम्मीद सदैव बनी रहे। 

दिल से बंधी एक डोर




दिल से बंधी एक डोर,
जो दिल तक जाती है। 
सारी सखियां मिल कर,
तीज मनाती हैं॥  

पहने सब हरी हरी चूड़ी,
हरी हरी चुनरी, हरी ही बिंदी है। 
हाथों में सुन्दर सुन्दर,
मेंहदी रचाएं जाती हैं॥  

दिल से बंधी एक डोर.....

आज छाई हर ओर हरियाली,
तीज आई मनभावन वाली॥ 
सखियों संग बैठ के झूला,
पींग पर पींग बढ़ाएं जाती हैं॥ 

दिल से बंधी एक डोर......

संग मिलती हैं सारी सखियां,
बांटे, घेवर और मिठाईयाँ॥ 
झूमती है धरा भी,उनके संग,
जब सब मिल कजरी गाती हैं॥ 

दिल से बंधी एक डोर ......




यह गीत  दिल से बंधी एक डोर की तर्ज़ पर ही बना है, आप चाहें तो इसे  किसी अन्य धुन पर भी गा सकते हैं ।   

Wednesday, 22 July 2020

Short Stories : बारिश

बारिश

किशन को हमेशा से बारिश का मौसम सबसे अच्छा लगता था।

उमड़- घुमड़ आए काले बादल, जिससे दोपहर भी शाम सी हो जाती थी।

फिर तेजी से बिजली का कड़कना, माँ का उसे अपने आंचल में छुपा लेना।

तभी मूसलाधार बारिश का होना, और उसका झूमकर नाचना।

फिर बहुत ही स्वादिष्ट भजियोँ की खूशबू का  उन पलों में चार चांद लगाना

उसकी खुशबू से दोस्तों का खिंचा आना

फिर पूरी टोली का बारिश में मस्त हो कर नहाना, और साथ ही भजिए का लुत्फ उठाना

यह सब उसे बारिश में दीवाना बना देता था।

पर यह कैसी बरखा? 

जिसमें बादल भी आए, बिजली भी कड़की, बरखा भी बड़ी जोर से थी बरसी, माँ ने वो स्वादिष्ट भजिए भी बनाए....

पर इस मुए कोरोना के कारण एक दोस्त भी ना आए...

माँ ने सोचा, आज तो उसके लाडले की आंखों से भी बरसात होगी, वो कैसे उन्हें रोक सकेगी?

पर नहीं, किशन बस एक टक बारिश देख रहा था, और भी ज्यादा बड़ी‌- बड़ी आंखें खोल कर।


ए किशन, क्या देख रहा है रे, इतनी बड़ी- बड़ी आंखें खोल कर, माँ ने पूछा

माँ, गिन रहा हूँ, बारिश की कितनी बूंदें गिर रही हैं।

सबसे मैंने कहा है, अगली साल दोगुनी हो कर गिरना, जो कुछ कमी रह गयी है। उसको पूरी करना।

इसलिए, बड़ी- बड़ी आंखें खोल कर देख रहा हूँ, कोई छूट ना जाए, मुझे मूर्ख ना बनाएं।

किशन की मासूमियत, विश्वास, जोश और उम्मीद ने उनके मन में कोरोना से लड़ने का नया उत्साह भर दिया।

वो सोचने लगी, कितनी बड़ी बात उनके लाडले की मासूमियत ने कह दी, 

यह तो हम पर है कि हम थक कर हार कर जिंदगी से मायूस हो जातें हैं, या दोगुने जोश, उत्साह और उमंग से आने वाली खुशियों का इंतजार करते हैं। उन्हें पूरी करने की कोशिश करते हैं।

Monday, 20 July 2020

Bhajan : निराले भोला

आप सभी को सावन के तीसरे सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏻🔱🕉️

आज आप सब के साथ मुझे रायपुर छत्तीसगढ़ की मंजू सरावगी मंजरी जी  का भेजा हुआ भजन साझा करते हुए अपार प्रसन्नता रही है।

🌹निराले भोला🌹



शीश गंगे की धार, गले मुण्ड की माल
भोले भाले, मेरे भोला सबसे निराले

बारह बार धरती पे  शिव आये
द्वादश ज्योति लिंग में समाये
सुन भक्तों की पुकार, आये नन्दी पे सवार
दिये दर्शन,  भोले जगत के रखवाले
मेरे भोला सबसे निराले....... 

मस्तक पे चंदा बिराजे
जटाओं में गंगा साजै
है त्रिनेत्र धारी, शिव भोला त्रिपुरारी 
पहने बिच्छू ततैया, गले में सर्प काले
मेरे भोला सबसे निराले........ 

ऊंचे हिमालय में बैठे
संग गौरा गनेश लेके
तन में भस्म रमाय, मन मृगछाला भाय
भोले बाघाम्बर वाले
मेरे भोला सबसे निराले..... 

कांवरिया मन को भाते
शीश पे कांवड़ जल चढा़ते
दूध दही से नहाते,पंचमेवा पंचामृत लाते
फूल धतूरा कनेर, बेल पतियां, जनेऊ दुशाले
मेरे भोला सबसे निराले........ 

हाथ में डमरू धारी
भूत प्रेत  से इनकी यारी
नृत्य तांडव किया, हलाहल पिया
कैलास वासी, बनारस बसाने वाले
मेरे भोला सबसे निराले.... 

शीश गंगे की धार, गले मुण्ड की माल
भोले भाले, मेरे भोला सबसे निराले

✍✍



यह भजन मंजू जी ने इस धुन में गाया है, आप चाहें तो इसे किसी और धुन में भी गा सकते हैं।


Disclaimer:
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