Saturday, 20 March 2021

Article : कुछ बात तो है

कुछ बात तो है 


कोई कुछ भी बोले, कोई कुछ भी माने, चाहे कोई कितना ही कुछ कहता रहे। पर कुछ बात तो है। 

राहुल गांधी हो, या प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी हो, अखिलेश यादव हो, या हो केजरीवाल। सब के सब मंदिरों के चक्कर काटते नज़र आ रहे हैं।

कभी सोचा है आपने कि ऐसा भी क्या हो गया कि सभी नेताओं की, अचानक से मंदिरों में इतनी आस्था बढ़ गई?

पहले तो कभी इतने मंदिर दर्शन नहीं किए जाते थे, बल्कि हिन्दू धर्म का सदैव मज़ाक ही बनाया जाता था।

कभी हिन्दूओं को महत्व नहीं दिया जाता था, ना ही उनको आकर्षित करने का प्रयास किया जाता था।

फिर आखिर ऐसा भी क्या हो गया है?

कारण तो आप सभी जानते हैं, जो प्रत्यक्ष साक्षी भी है।

कि जब से मोदी सरकार आयी है, एक नई लहर ही चल पड़ी है। नेताओं को यह एहसास होने लगा है कि हिन्दू भी जागरूक हो गये हैं।

अब उनके वोट के बिना जीत सुनिश्चित नहीं हो सकती है।

भारत के हर क्षेत्र में हिन्दुओं को आकर्षित करने के लिए नेता यह सिद्ध करने में जुटे हुए हैं कि वह भी हिन्दू हैं।

नेताओं का तो शुरू से यही लक्ष्य रहता है कि येन केन प्रकारेण, कुर्सी मिलनी चाहिए। फिर उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं।

भारत एक हिंदू राष्ट्र है, यह सिद्ध कर रही है मोदी सरकार। अब तो आप कहेंगे कि कुछ बात तो है।

बहुत मुश्किल से भारत इस ओर अग्रसित हुआ है।

आप सब से अनुरोध है कि जो अलख जगाई गई है उसे अब बढ़ाते जाना है।

अब यह हमको सोचना है कि, उनको चुनें जो कि हिन्दुत्व को बढ़ा रहे हैं और भारत को उसकी सार्थकता प्रदान कर रहे हैं।

या हम उनको चुनें, जो केवल वोट पाने के लिए ढोंग कर रहे हैं और सत्तारूढ़ होते ही पुनः भारत को उसी ढर्रे पर ले जाएंगे।

वैसे बात खाली मंदिरों की ही नहीं है, चाय वाले से बैर है, पर चाय के बागान और चाय बनाने की प्रक्रिया भी जोर शोर पर है।

क्या कहेंगे आप?

यही ना, कि कुछ बात तो है.....

Thursday, 18 March 2021

Story of Life : तुम बिन (भाग -3)

तुम बिन (भाग - 1) और

तुम बिन (भाग - 2) के आगे...

तुम बिन (भाग -3)



घर में तीनों उनकी सेवा में जुट गए, पर अबकी बार संजना जी ठीक ही नहीं हो रही थीं।

आखिर वही हुआ, जिसका डर था...

वो दिन भी आ गया, जब गरिमा को घर छोड़कर जाना था।

गरिमा, संजना जी के सिरहाने आकर बैठ गई, आज भी उसकी आंखें नम थीं?

क्या हुआ गरिमा? 

माँ जी, आज मेरे इस घर से जाने का दिन आ गया है। मेरी जिंदगी में कुछ भी नहीं बदला।

वो सुबक सुबक कर रोते हुए बोली, आज भी मैं उनके दिल में अपने लिए जगह नहीं बना पायी।

और उसके लिए, तुम्हारे दिल में क्या है? संजना जी ने सधे हुए शब्दों में कहा।

उससे फ़र्क क्या पड़ता है, मैं तो जब इस घर में आयी थी, तब भी उन्हें दिल में बसा कर आयी थी। अब तो केवल सूनापन बचा है।

तो तुम ने क्या सोचा है? संजना जी ने कुछ सोचते हुए पूछा।

पता नहीं माँ जी? ना आप को ऐसे छोड़कर जाना चाहती हूँ, ना अब और रुकना चाहती हूँ।

तो तुम चली जाओ। 

माँ जी....... आप को ऐसी अवस्था में छोड़कर?

मेरी चिंता कब तक करोगी? तुम जब भी जाओगी, मेरे लिए वो दिन, मेरी जिंदगी के आखिरी दिन होंगे।

माँ जी......

हाँ बेटा, पर अब मैं तुम्हें रोक कर तुम्हारी जिन्दगी को और बर्बाद नहीं करना चाहती। 

तुम्हारा सामान मैंने car में रखवा दिया है। तुम्हें driver तुम्हारे मायके छोड़ आएगा।

भारी मन से गरिमा, वहांँ से चली गई।

राहुल सोकर उठा तो सारे घर में गरिमा को ढूंढने लगा। पर गरिमा कहीं नहीं मिली।

वो गरिमा को ढूंढता हुआ माँ के पास आ गया।

माँ, आप ने गरिमा को कहीं देखा है? पूरा घर ढूंढ डाला, कहीं नहीं है। उसकी आवाज़ में गज़ब की बैचेनी थी।

क्यों, तुम्हें क्या काम है गरिमा से? तुम्हें कब से उसकी परवाह होने लगी?

राहुल झेंपते हुए बोला, बस वैसे ही, दिख नहीं रही थी, इसलिए ही.....

वो अपने घर चली गई।

घर...... 

पर क्यों....? 

आप को अकेला छोड़ कर...... 

वो तो बड़ी समझदार है, उसने ऐसा क्यों किया.......?

मैं अकेले कहाँ हूँ? तुम और पापा जी दोनों तो साथ हैं मेरे।

फिर धीमें से बोलीं, अकेली तो बेचारी वो थी।

राहुल, माँ की आखिरी बात सुने बिना ही कमरे से चला गया।

बस दो दिन ही बीते थे, पर राहुल को गरिमा की इतनी याद आने लगी कि वो विरह अग्नि में झुलसने लगा।

वो बैचेनी से अपने कमरे में घूम रहा था कि उसका हाथ अपनी शादी की फोटो पर पड़ी, जिससे photo गिर गई।

राहुल, जब उसे उठा कर रख रहा था तो उसकी नज़र गरिमा की photo पर गई।

राहुल की निगाह वहीं टिक गई।

आह! कितनी खूबसूरत है गरिमा.....

मेरी सोच से भी ज्यादा सुन्दर....। फिर उसकी समझदारी और संस्कारों के तो कहने ही क्या......

राहुल से और रुका ही नहीं गया, वो driver के पास गया और बोला, गरिमा madam को जहाँ छोड़ा था, मुझे वहीं ले चलो।

राहुल, गरिमा के मायके पहुंच गया। 

दरवाजा गरिमा ने ही खोला, वो नहाकर ही निकली थी।

उसकी जुल्फ़ें अभी भी गीली थीं, उससे टपकती पानी की बूंदें, गरिमा को और हसीन बना रही थीं।

राहुल ने उसे अपनी बाहों में भरते हुए कहा कि तुम, मुझे छोड़कर कैसे आ सकती हो?

तुम्हारी अनुपस्थिति ने मुझे बैचेन कर दिया। क्या तुम नहीं तड़प रही थी, मेरे बिना?

गरिमा, विस्मय पूर्वक, राहुल को देख रही थी। उसके शरीर में सिहरन दौड़ गई थी। आज पहली बार वो राहुल की बाहों में थी।

अपने को संभालते हुए बोली, तड़प....

अब तुम एक पल यहांँ नहीं रुकोगी, अभी चलो।

तभी अन्दर से गरिमा की माँ आ गयीं। बोलीं, जमाई राजा, नाश्ता तो करके ही जाएं, सब तैयार है। आप पहली बार ससुराल आए हैं।

सारी रस्में खत्म करके दोनों घर आ गए।

गरिमा सीधे, संजना जी के कमरे में आ गई, पीछे पीछे राहुल भी आ गया था।

माँ बोल दो अपनी बहू को आगे से ऐसा नहीं चलेगा। यह कहकर राहुल अपने कमरे में चला गया।

माँ हंस दी.... पगला कहीं का.....

जब गरिमा, अपने कमरे में पहुंची तो, कमरा पहली रात सा ही सजा था।

 राहुल ने गरिमा को अपनी बाहों में भरते हुए कहा, मैं नहीं रह सकता तुम बिन..... और उसके माथे को चूम लिया.....

गरिमा ने आंखें बन्द करे हुए कहा, मैं भी नहीं रह सकती, तुम बिन......

उसके साथ ही कमरा बंद हो गया.....

Wednesday, 17 March 2021

Story of Life: तुम बिन (भाग -2)

तुम बिन (भाग -1) के आगे....


तुम बिन (भाग-2)

सामान pack कर के वो कमरे से निकली ही थी, कि तभी, गरिमा की सास आ गईं और गरिमा को सामान के साथ देखकर बोलीं बेटा, आज तुम्हारे पग फेरे का दिन नहीं है।

अपना सामान अंदर रख दो बेटा।

गरिमा के अब तक रुके हुए आंसू झरझरा के गिरने लगे...

माँ, उन्हें मेरी कोई चाह ही नहीं है तो रुकूं किसके लिए?

हमारे लिए बेटा।

आप के लिए? तो क्या आप जानती थीं कि उन्हें मेरी कोई चाह नहीं थी?

बेटा तुम लोगों की love marriage नहीं arrange marriage हुई है। और इस शादी में जुड़ते जुड़ते ही जुड़ पाते हैं।

मैं जानती हूँ कि तुम्हारे case में बात और ज्यादा difficult है, पर मुझे अपनी गरिमा और उसके संस्कारों पर उससे भी ज्यादा भरोसा है।

पर गरिमा के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

अच्छा लाओ, मुझे अपना सामान दे दो। आज से ठीक 6 महीने बाद तुम्हें यह सामान लौटा दूंगी। फिर तुम जहाँ कहोगी मैं खुद तुम्हें छोड़ कर आऊंगी।

गरिमा अपना सामान अपनी सास को देकर अंदर चली गई।

थोड़ी देर बाद शादी से सम्बन्धित और रस्में शुरू हो गईं। गरिमा और राहुल अपनी अपनी रस्में निभा रहे थे।

कुछ दिन बाद सब चले गए, घर में सिर्फ सास ससुर, राहुल और गरिमा रह गए थे।

गरिमा में ‌गुणी बहू के सारे लक्षण थे। उसने बहुत जल्दी सबका मन जीत लिया।

राहुल अब भी उसकी तरफ मुखातिब नहीं होता था।

वो अपने दोस्तों में ही रमा रहता।

पर अब गरिमा भी उसकी बेरुखी से खिन्न नहीं होती थी। वो तो बस 6 महीने काट रही थी।

धीरे धीरे वो सास ससुर की सेवा के साथ साथ, कब राहुल की पंसद का ध्यान भी रखने लगी, उसे पता ही नहीं चला।

उधर राहुल अपनी पसंद का सब कुछ देखकर चौंक जाता। 

राहुल अपने दोस्तों के घर में अक्सर देखता था कि लड़ाई-झगड़े हुआ करते थे। उन लोगों की जिन्दगी में कहीं कोई सामंजस्य नहीं था। पति-पत्नी दोनों ही सिर्फ अपने लिए सोचा करते थे।

एक दिन राहुल की माँ संजना जी का accident हो गया।

गरिमा जी जान से उनकी सेवा में जुट गई। उसकी सेवा से संजना जी ठीक होने लगीं।

गरिमा का मौन समर्पण, उस की सादगी, समझदारी और संस्कारों का राहुल कायल होने लगा, साथ ही गरिमा की तरफ कब और कैसे आकर्षित होने लगा, वो भी नहीं समझ पा रहा था।

संजना जी पूरा ठीक होते-होते 5 महीने हो गए। 

यह सोच कर कि अब वो गरिमा को और नहीं रोक सकती हैं, उनकी तबियत बहुत तेजी से बिगड़ने लगी।

घर में तीनों उनकी सेवा में जुट गए, पर अबकी बार संजना जी ठीक ही नहीं हो रही थीं।

आखिर वही हुआ, जिसका डर था...

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