Wednesday, 9 June 2021

Article : वटसावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त

वटसावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त




भारत वर्ष, त्यौहारों का देश है। जहाँ हर माह कोई ना कोई पर्व मनाया जाता है।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि अर्थात 10 जून 2021, गुरुवार को वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है।

इस दौरान सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु व अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि बरगद के पेड़ में साक्षात ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास होता है, अतः इस वृक्ष की परिक्रमा करने से आप तीनों देवों को एक साथ प्रसन्न कर सकते हैं।

यह भी मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। 

इस बार यह व्रत और ख़ास होगा, क्योंकि इस दिन शनि जयंती, साल का पहला सूर्य ग्रहण और उच्च वृष राशि में चंद्रमा रहेगा। हालांकि भारत मे सूर्यग्रहण नहीं देखा जाएगा, अतः इसका सूतक व धार्मिक नियम मान्य नहीं है, इसलिए पूजा/व्रत आदि में कोई रुकावट नहीं रहेगी।

पूजन का शुभ मुहुर्त समय

ब्रह्म मुहूर्तः सुबह 04:08 से 04:56 बजे तक।

शुभ चौघड़िया: सुबह 05:26 बजे से 07:08 बजे तक।

अमृत काल : सुबह 08: 08 बजे से 09: 56 बजे तक।

अभिजित मुहूर्त : 11:59 बजे से 12:52बजे तक।

लाभ मुहूर्त : 12:17 बजे से 15:42 बजेे

 तक।

आप इन मुहूर्त में पूजा अर्चना कर सकते हैं।


अमावस्या का दिन वह समय

इस बार अमावस्या का प्रारंभ 9 जून से लेकर 10 जून तक है, जिसका समय इस प्रकार है- 

अमावस्या तिथि आरंभ: 9 जून 2021, बुधवार की दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त: 10 जून 2021, गुरुवार की शाम 04 बजकर 22 मिनट तक।


आप को पूजा से जुड़ी सभी जानकारी हमारे इस article (3 June, 2019) में मिल जाएँगी।

वट सावित्री या बरगद अमावस्या व्रत

Tuesday, 8 June 2021

Story of Life : कोरोना से सुख

 कोरोना से सुख 



वरुण, दुर्गापुर में अपने मां बाप रेखा और रोहित के साथ रहता था। पढ़ने में होशियार था, तो उसकी कलकत्ता में एक बड़े farm में job लग गई थी। 

Private company थी तो, salary तो बहुत अच्छी थी, पर छुट्टी नाम मात्र को मिला करती थी।

वरुण के कलकत्ता जाने से रेखा और रोहित बहुत दुःखी रहते थे। क्योंकि छुट्टी की कमी के कारण वरुण, बहुत कम ही घर आता था।

नौकरी अच्छी होने से कलकत्ता के ही धनाढ्य परिवार की इकलौती बेटी रिया से उसकी शादी हो गई।

शादी के बाद तो वरुण और ही कम जाता था। जिसका एक कारण रिया भी थी, जिसे छोटा शहर फूटी आंख नहीं सुहाता था। साथ ही अपने सास-ससुर भी बहुत कम ही रास आते थे।

कुछ सालों बाद वरुण का बहुत प्यारा सा बेटा हुआ। ऐसे तो रेखा और रोहित भी बहुत ज्यादा कलकत्ता में नहीं आते थे। उन्हें कलकत्ता की भागती दौड़ती जिंदगी नहीं पसंद थी, फिर वहां आकर वो घर में ही कैद होकर रह जाते थे। आसपास किसी से वरुण का बहुत ज्यादा मेलजोल नहीं था जैसे की बड़े शहरों में होता है, अपने सिवा किसी से कोई मतलब नहीं।

पर पोते का मोह उन्हें खींच लाया। पूरे छह महीने रहकर गये। जब तक वो थे, रिया को एक काम के लिए हाथ नहीं हिलाना पड़ता था।

बच्चे के, रिया के, घर के, बाहर के सारे काम रेखा और रोहित मिलकर, कर देते थे।

वरुण और रिया तो राजा रानी की तरह रह रहे थे। और घर शीशे की तरह चमक रहा था। बहुत प्यार से उन्होंने अपने पोते का नाम ऋतिक रखा।

छह महीने बाद, जब ऋतिक सम्भालने लायक हो गया, तो वो बोले, अब हम जाएंगे। वरुण और रिया नहीं चाहते थे कि अभी वो जाएं, पर उन्होंने रोका भी नहीं।

उनके जाते ही रिया ने दिन-भर के लिए काम वाली बाई लगा ली, जो घर के सारे काम, खाना पीना के साथ ऋतिक को भी देखती थी।

बाई ना तो ऋतिक का उतना ध्यान रखती थी, ना ही घर का, और 15,000 भी लेती थी। पर रिया अब कोई काम नहीं करना चाहती थी। वो तो बस क्लब, किटी पार्टी और मस्ती करने में ही व्यस्त रहती।

ऋतिक को देखे हुए पूरे साल भर हो गये हैं, अब तो वो सरसर दौड़ने भी लगा होगा, रेखा ने रोहित से कहा।

बोला तो है वरुण को, कि एक चक्कर लगा लें, अब देखो कब तक आता है। रोहित ने गहरी सांस छोड़ते हुए कहा। 

कुछ दिन बाद पूरी दुनिया में कोरोना फैल गया। सारी दुनिया का नजारा ही बदल गया था। 

सब कुछ रुक गया, सब कुछ थम गया। कामवाली बाई का आना बंद, work from home, कहीं आ जा नहीं सकते, सारी gathering बंद, मौज मस्ती बंद। 

घर में बंद और बहुत सारा काम, इससे लोग बहुत परेशान रहने लगे।

रिया तो बहुत ही ज्यादा परेशान थी, कोई मौज मस्ती नहीं और काम इतना की खत्म ही नहीं होता था। 

एक दिन रिया‌ ने वरुण से कहा- हम कुछ दिन के लिए, दुर्गापुर चलें, माँ- पापा कितने दिनों से बुला रहे हैं। 

वरुण को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ, उसने रिया से पूछा- तुमने जो कहा, वो सही है? तुम सचमुच दुर्गापुर चलना चाहती हो?

हाँ,  इसमें चौंकने वाली क्या बात है, माँ-पापा ने कितने दिनों से ऋतिक को भी नहीं देखा है।

फिर अभी चलने में तुम्हें छुट्टी भी नहीं लेनी होगी, तुम्हारा Work from home चल रहा है। वहीं से काम कर लेना। 

पर कोरोना?

कौन हमें flight या train से जाना है, अपनी car से ही चलना है। घर से चलकर, घर ही तो पहुंँचना है, सब safe है।

Ok, तो चलो पापा को फोन कर देता हूँ।

वरुण ने फोन करके पापा को बोल दिया कि रिया चाहती है कि, कुछ दिन आप लोगों के साथ बिताए जाएं, इसलिए वो दो दिन बाद ही घर आ रहे हैं।

रेखा और रोहित खुशी से झूम उठे, उन्हें अपनी बहू पर बहुत प्यार आ रहा था। 

जब वरुण, रिया, ऋतिक घर पहुंँचे तो...

आगे पढ़ें, कोरोना से सुख (भाग - 2) में....

Monday, 7 June 2021

Poem : प्रहार

आज आप सब के साथ मैं, इंदौर के श्री लक्ष्मी नारायण वर्मा मानव, जी के द्वारा भेजी गई कविता को साझा रही हूँ। 

मुझे यह बताते हुए, अत्यंत दुःख हो रहा है कि श्री लक्ष्मी नारायण जी अब हमारे बीच नहीं हैं।😔

उनकी उत्कृष्ट रचनाओं में से चंद हमारे पास हैं, जिनमें से यह एक है। उनकी इच्छा थी, कि उनकी रचनाओं को साझा किया जाए।

अतः श्रृद्धांजलि स्वरूप हम उनकी उन रचनाओं को समय-समय पर साझा करते रहेंगे।💐🙏🏻

श्री लक्ष्मी नारायण जी आप को हमारा शत शत नमन 🙏🏻


प्रहार




है कोई यहाँ जो मानवता पर,

प्रहार को रोक सके।

कश्मीरी आतंकी केंसर,

भ्रष्टाचारी ऐड्स को रोक सके।

नित्य प्रति निरपराध,

अनगिनत मसीहे,

सलीबों पर,

लटकाए जा रहे हैं।

मठाधीश अपनी अपनी,

स्तुतियों में लीन,

समूचे राष्ट्र को,

भटकाए जा रहे हैं।

अहिंसा और शांति की,

ओट लेकर हिंसा और

क्रांति को हवा दे रहे हैं।

जान बूझकर,

स्वस्थ नागरिकों को,

विषमता की दवा दे रहे हैं।

अब भी समय है,

चेतना के शून्य स्वरों को,

उद्बोधन देने का।

बीहड़ों से लेकर,

अट्टालिकाओं तक,

स्वतंत्र संबोधन देने का।

खोजिए सर्व सम्मत,

समाधान जो सभी को,

उचित दिशा निर्देश दे सके।

ख़ाली हाथों को काम,

भूखे पेटों को रोटी,

प्यासे होंठों को पानी,

हर तन मन को

समुचित परिवेश दे सके।