Friday, 11 June 2021

Poem : मिला उनसे माँ सा दुलार

आज उनका जन्मदिवस है, जिन्होंने मेरी जिन्दगी को जन्म दिया था।

चंद शब्दों को संजोकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं🌹🌹🌺🌸🌼🌻🌹🌹


मिला उनसे माँ सा दुलार




एक सजी संवरी सी नार

दिल में जिसके प्यार ही प्यार

सास थीं वो मेरी

पर मिला उनसे माँ सा दुलार


एक एक तिनका जोड़कर

सजाया था सुन्दर संसार

सौंप दिया सब मुझे उन्होंने

मिला उनसे माँ सा दुलार 


दुनियादारी में बहुत खरी थीं

व्यवहार कुशल वो बड़ी थीं

रिश्तों में सिमटा उनका संसार

मिला उनसे माँ सा दुलार 


रीति-रिवाजों में नहीं थीं उलझी

सोच थी उनकी सुलझी 

कहती थीं, बहू बेटा हैं एकाकार

मिला उनसे माँ सा दुलार 


नहीं सौभाग्य था यह मेरा

मिलता उनका साथ अपार

चंद दिनों का साथ निभाकर

छोड़ गयीं वो यह संसार 


स्मृति के एक एक पल समेट कर

संजो रखा है आप का प्यार

अपने जन्मदिन के अवसर पर

करें मेरा चरण वंदन स्वीकार 


🙏🏻🌹🌹🌹🌹🙏🏻

Thursday, 10 June 2021

Story of Life : कोरोना से सुख (भाग-2)

कोरोना से सुख (भाग -1)  के आगे.....


कोरोना का सुख (भाग-2) 




 जब वरुण, रिया, ऋतिक घर पहुंँचे तो रेखा और रोहित ने बहुत अच्छे से welcome किया। 

जब वरुण अंदर आया तो उसने देखा, उसके कमरे में A.C. लगा हुआ था। कमरे में ऋतिक के लिए बहुत सारे खिलौने थे।

वरुण ने माँ से पूछा कि, यह सब तैयारी दो दिन में कर ली?

नहीं बेटा, हम तुम लोगों के पास से जब आए थे, तब से तुम्हारे पापा हर रोज़ कुछ ना कुछ लाकर तुम्हारा कमरा, तुम लोगों की पसंद का बनाते जा रहे हैं।

रिया तो यह सब देख कर बहुत ही खुश हो गई। 

और ऋतिक तो अपने खिलौनों से ऐसे खेल रहा था, जैसे हमेशा से यहीं रह रहा था।

खाने का समय आया तो, बहुत सारी varities थी, उन्हें देखकर रिया के मुंह से बरबस ही निकल गया, यहाँ अभी भी maid आ रही हैं?

नहीं तो? क्यों पूछा तुमने? रेखा बोली।

नहीं कुछ नहीं.... पर रिया ने मन में सोचा कि इस उम्र में भी कमाल हैं।

अगले दिन जब वरुण, रिया उठे, तब तक घर बर्तन हो चुका था। रेखा और रोहित, ऋतिक के साथ खेल रहे थे, साथ ही उसको नाश्ता भी करा रहे थे।

वरुण और रिया को देखकर रेखा बोली, चलो नाश्ता कर लेते हैं। रिया बोली, मैं जूस बना लूँ।

रेखा बोली, रिया कुछ करने की जरूरत नहीं है, हमने सब कर लिया है। नाश्ता-जूस, ऋतिक के लिए baby food, lunch सब बन चुका है।

सब हो गया, आप कब उठीं थीं।

अरे वो सब छोड़ो, चलो नाश्ता करते हैं।

नाश्ता ख़त्म होने के बाद सब ऋतिक के साथ मस्ती करने लगे। वरुण work from home के कारण कम मस्ती कर रहा था, पर सबको खुश देखकर वो भी खुश था।

कोरोना ने ऐसा कोहराम मचाया था कि सम्भलने का नाम ही नहीं ले रहा था। 

डेढ़ साल हो गए थे, पर वरुण का office नहीं खुल रहा था, उसका work from home चल रहा था। 

उसे ना तो office की tension थी, ना ही उसे रिया और ऋतिक पर ध्यान देने की जरूरत थी। उसके साथ ही मां-पापा का साथ और माँ के हाथ का tasty खाना, तो वो बहुत सुखी था।

रिया देर से उठती, उसको भी वरुण और ऋतिक किसी का ध्यान नहीं रखना था। घर के सारे काम, रेखा उसके उठने से पहले ही खत्म कर देती थीं।

वो online ही अपने दोस्तों के साथ busy रहती, मस्ती करती रहती थी और बहुत सुखी थी।

दादा जी और दादी जी का प्यार और दुलार पाकर, ऋतिक भी बहुत सुखी था।

रेखा और रोहित भी बहुत सुखी थे, बहू, बेटे व पोते के साथ।

सभी सुखी और स्वस्थ थे, तो किसी को कोरोना के रहने से कोई कष्ट नहीं था। 

बहुतों के दुःख का कारण बनने वाला कोरोना, उनके लिए सुख का पर्याय बन चुका था।

वे सब कोरोना से सुख ले रहे थे, क्योंकि वो जान रहे थे, यह पल दुबारा नहीं आएगा।

Wednesday, 9 June 2021

Article : वटसावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त

वटसावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त




भारत वर्ष, त्यौहारों का देश है। जहाँ हर माह कोई ना कोई पर्व मनाया जाता है।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि अर्थात 10 जून 2021, गुरुवार को वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है।

इस दौरान सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु व अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि बरगद के पेड़ में साक्षात ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास होता है, अतः इस वृक्ष की परिक्रमा करने से आप तीनों देवों को एक साथ प्रसन्न कर सकते हैं।

यह भी मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। 

इस बार यह व्रत और ख़ास होगा, क्योंकि इस दिन शनि जयंती, साल का पहला सूर्य ग्रहण और उच्च वृष राशि में चंद्रमा रहेगा। हालांकि भारत मे सूर्यग्रहण नहीं देखा जाएगा, अतः इसका सूतक व धार्मिक नियम मान्य नहीं है, इसलिए पूजा/व्रत आदि में कोई रुकावट नहीं रहेगी।

पूजन का शुभ मुहुर्त समय

ब्रह्म मुहूर्तः सुबह 04:08 से 04:56 बजे तक।

शुभ चौघड़िया: सुबह 05:26 बजे से 07:08 बजे तक।

अमृत काल : सुबह 08: 08 बजे से 09: 56 बजे तक।

अभिजित मुहूर्त : 11:59 बजे से 12:52बजे तक।

लाभ मुहूर्त : 12:17 बजे से 15:42 बजेे

 तक।

आप इन मुहूर्त में पूजा अर्चना कर सकते हैं।


अमावस्या का दिन वह समय

इस बार अमावस्या का प्रारंभ 9 जून से लेकर 10 जून तक है, जिसका समय इस प्रकार है- 

अमावस्या तिथि आरंभ: 9 जून 2021, बुधवार की दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त: 10 जून 2021, गुरुवार की शाम 04 बजकर 22 मिनट तक।


आप को पूजा से जुड़ी सभी जानकारी हमारे इस article (3 June, 2019) में मिल जाएँगी।

वट सावित्री या बरगद अमावस्या व्रत