Friday, 28 July 2023

Story of Life : मां का साथ (भाग -3)

मां का साथ (भाग -1)

मां का साथ (भाग -2) के आगे...

 मां का साथ (भाग -3) 


तुमने ठीक कहा आशना, यह मेरी गलती ही है!... 

गलती... कैसी गलती? कौन हैं यह लोग...

यह लोग मेरा अस्तित्व हैं, मेरी पहचान हैं...

क्या? यह आपके मम्मी-पापा हैं? पर सारी तस्वीरें तो एक से जैसे लोगों की नहीं लग रही है, तस्वीरों को फिर से देखते हुए आशना बोली...

हां यह मेरे मम्मी पापा की ही तस्वीरें हैं। कुछ तस्वीरें उनकी हैं, जिन्होंने मुझे जन्म दिया है, साथ ही कुछ ऐसी हैं, जिन्होंने मुझे जिंदगी दी...

जिंदगी!.. मतलब? क्या आपके मम्मी-पापा, आपके बचपन में ही इस दुनिया से चले गए थे?

समझो तो वैसा ही है...

क्या कहना चाहती हैं रंजना दी? खुलकर बताइए, झुंझलाती हुई आशना बोली...

आशना, तुम्हें पता है, लड़कियां जब तक मायके में होती हैं, बच्ची ही होती हैं। 

कोई जिम्मेदारी नहीं, कोई अपेक्षा नहीं, बस बच्चों की तरह हर बात पर मां-पापा की ओर देखना, फिर वो जैसे कहें, वैसा ही करना और वैसा ही सोचना...

बड़े तो हम तब हो जाते हैं, जब हमारी शादी हो जाती है, क्योंकि तब ही हमारी सोच पनप जाती है। क्या सही है क्या ग़लत, हमारा अस्तित्व, हमारी पहचान आदि...

तभी हम पर जिम्मेदारियां आती है, हमसे अपेक्षा रखी जाती है।

और हम में से बहुत उसे निभाना नहीं चाहते हैं, और मैं भी तुम्हारी तरह वैसी ही थी। 

क्या मतलब?... आशना ने भृकुटी तानते हुए कहा..

मतलब मुझे भी आजादी चाहिए थी। मैं भी सिर्फ अपने पति के साथ ही रहना चाहती थी। हर काम अपनी मर्जी का, हर बात अपनी पसंद की। 

अपने घर की, अपनी जिंदगी की खुद मालकिन, सास-ससुर की बात से ही सब हो, यह गवारा नहीं था मुझे।

फिर क्या हुआ? आशना ने उत्सुकता से पूछा...

होना क्या था, मेरे ऊधम मचाने से, और घर की शांति को कायम रखने के कारण, मेरे सास-ससुर व पति ने निश्चय किया कि, हम एक ही शहर में रहते हुए अलग रहें।

ऐसा होने से मुझे विजयी होने का एहसास हुआ और मैं अति प्रसन्न रहने लगी।

दिन भर सहेलियों से, रिश्तेदारों से बातें, shopping, kitty party, घूमना फिरना, बस मस्ती ही मस्ती...

जिंदगी जैसे सपनों सी थी, दिन ऐसे बीत रहे थे, जैसे फिल्मों और serials में दिखाते हैं, बस रोमांस ही रोमांस।

ऐसा लगता था कि हम दोनों, Hero and heroine हैं।

Wow! What a life... कहकर आशना की आंखें चमक गई। ऐसी ही जिंदगी की तो कल्पना कर रही थी वो... 

रंजना दी, आपने सही पहचाना था, मुझे नहीं रहना अपनी सास के साथ... हर चीज़ उनके हिसाब से करो, यह मुझे नहीं जमता।

शादी करने से फायदा ही क्या? जब अभी भी दूसरों के हिसाब से ही जीना पड़े... मुझे मेरा अपना घर चाहिए, अपनी मर्ज़ी, अपनी जिंदगी...

आप की बातों में मुझे अपने सपनों की तामीर होती हुई दिखाई दे रही है। 

आप मुझे बताइए ना कि आप ने ऐसा क्या कहा? क्या किया? कि आप ने एक शहर में रहते हुए भी अपनी इतनी सुन्दर दुनिया बना ली...

रंजना ने कहा, यह कौन कठिन काम है। मैं तुम्हें वो सब बता सकती हूं कि आज से कल तक में ही तुम अपनी दुनिया बसा सकती हो..

सच! रंजना दी..., आशना खुशी से झूम उठी, आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन है, और आप मेरे लिए फरिश्ता... आप बताइए ना मुझे, मैं आपकी ताउम्र शुक्रगुजार रहूंगी।

ठीक है तो सुनो...

आगे पढ़े, माँ का साथ (भाग -4) अंतिम अंक में 

Thursday, 27 July 2023

Story of life: माँ का साथ (भाग -2)

 मां का साथ (भाग - 1) के आगे... 

माँ का साथ (भाग- 2)


एक दिन वो kitty party में गयी थी, वहां उसकी ज्यादातर सहेली, अपने ससुराल से अलग रहती थीं। उन्हीं में से एक रंजना भी थी, जिसके घर आज की kitty party थी...

आशना सबके बीच में बहुत खुश थी। सारी ladies बहुत मस्ती के mood में थीं। खूब variety के नाश्ते-खाने की चीजें, music, नाच-गाना, ठहाके...  

एक अलग ही माहौल था। सब बेपरवाह, एक अलग ही दुनिया में..

सभी अपने अलग रहने के फैसले से बहुत खुश थीं और अपनी आजादी के जश्न को मना रही थीं।

उन सबकी बातें और मौज मस्ती सुन और देखकर आशना ने भी अपना मन पुख्ता कर लिया था कि आज घर जाकर कार्तिक से फैसला करवा के ही मानेगी कि या तो वो साथ रहेगी या माँ...

अब वो किसी भी कीमत पर अपनी आजादी, अपनी मौज मस्ती को बर्बाद नहीं होने देगी। 

जब kitty party over हो गई, सब एक एक करके अपने अपने घर को रवाना होने लगीं...

अब वहां केवल रंजना और आशना रह गये थे। 

आशना ने रंजना से कहा कि उसे लेने कार्तिक आएगा और आज एक important meeting है, इसलिए आते-आते थोड़ा time लग जाएगा। 

रंजना बोली, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें  तुम्हारे घर drop करवा दूं? मैं अपने driver से बोल दूंगी, वो अभी अपने घर नहीं गया है...

आशना ने कहा कि, रंजना दीदी अगर आपको problem ना हो तो मैं यहीं रुकूंगी, actually मुझे कार्तिक के साथ, jewelers के पास भी जाना है। मेरी सास ने आज सोने के कंगन लाने को कहें हैं।

It's ok, मुझे कोई problem नहीं है, तुम्हारे यहां रहने से मुझे अच्छा ही लगेगा।

पर तुम थोड़ी देर अकेले बैठोगी? मैं तब तक सब समेट दूं। बच्चे और husband आ जाएंगे तो फैला घर अच्छा नहीं लगेगा। 

ओह हां, आप कर लीजिए अपना काम, मैं यहां बैठी हूं।

रंजना सब समेटने चली गई, उसकी maid उसका हाथ बंटा रही थी।

आशना वहीं बैठी, पूरा घर देख रही थी। 

घर करीने से सजा हुआ था। एक-एक चीज modern सोच की दिख रही थी।

तभी उसका ध्यान दीवार पर लगी photo पर गया, वहां जो photo लगी थीं, उसमें रंजना, उसके पति, बच्चों की बहुत सारी photos लगी थीं। और उस दीवार के बगल में भी कुछ photos थीं, जिसमें सभी बूढ़े लोगों की photo थी। कुछ ऐसी भी photo थीं, जिसमें जवान लोग भी थे पर वो सारी black and white थीं। 

जिन्हें देखकर लग रहा था कि जिन बूढ़े लोगों की photo हैं, black and white, उन्हीं की जवानी की photo थीं। 

आशना को वो कोना ज्यादा पसंद नहीं आया। उसने रंजना के आते से ही बोला, आपका घर बहुत सुंदर है रंजना दी, सब modern चीजें हैं। सिवाए इस दीवार के... लगता है जैसे यह तस्वीरें, गलती से यहां लगा दी गई हो... 

तुमने ठीक कहा आशना, यह मेरी गलती ही है!... 

गलती... कैसी गलती? कौन हैं यह लोग..

अब आगे, माँ का साथ (भाग -3) में

Wednesday, 26 July 2023

Story of Life: माँ का साथ

 माँ का साथ




कार्तिक अपनी माँ, सिया का एकलौता व लाडला बेटा था। बचपन में ही उसके पिता का साया उसके सिर से उठ गया था।

मां ने पिता की जगह, बैंक में नौकरी कर ली थी। साथ ही रात में छोटे बच्चों को tuition भी पढ़ाती थी, जिससे कार्तिक को किसी तरह की कोई कमी नहीं रहे।

कार्तिक भी अपनी माँ के कहे बिना कुछ नहीं करता था। हर बात, वो मां से ही पूछता था। 

जब कार्तिक छोटा था, तब तो सिया भी यही चाहती थी कि, कार्तिक सिर्फ उसी से जुड़ा रहे, पर जब वो बड़ा हो गया तो, सिया उससे हमेशा यही कहती कि, कार्तिक अब तुम बड़े हो गए हो, अब तुम खुद समझा करो कि तुम्हें क्या करना है...

पर कार्तिक, हमेशा यही कहता, आप से बड़ा तो कभी नहीं होऊंगा, तो कैसे बड़ा हो गया? और मां को गले लग जाता... मां-बेटे के प्यार को पूरा मोहल्ला जानता था। 

कार्तिक पढ़ने में बहुत होशियार था, हमेशा अव्वल आता था, पहली ही बार में उसने entrance exam clear कर लिया और बड़ी government company में officer बन गया। 

कार्तिक गोरा, ऊंचे-लम्बे डील-डौल वाला बहुत ही smart लड़का था, फिर government officer... उसके लिए रिश्तों की लाइन लग गई।

सिया ने बड़ी धूमधाम से अपने बेटे की शादी आशना से कर दी।

आशना, जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही नकचढ़ी और आलसी भी। 

कुछ ही दिनों में उसे, सिया और कार्तिक का रिश्ता खटकने लगा। उसनेे अलग रहने का मन बनाना शुरू कर दिया। 

वो आए दिन, कार्तिक से अलग घर लेने को कहा करती, पर कार्तिक, एक कान से सुनता और दूसरे से निकाल देता.. 

आशना ने घर में रहना कम और social parties में रहना ज़्यादा शुरू कर दिया...

एक दिन वो किटी पार्टी में गयी थी, वहां उसकी ज्यादातर सहेली, अपने ससुराल से अलग रहती थीं। उन्हीं में से एक रंजना भी थी, जिसके घर आज की kitty party थी...

आगे पढ़े, माँ का साथ (भाग -2) में...