Monday, 15 December 2025

Poem : घना-सा तुषार

आज सुबह जब 5:30 बजे उठे तो कुहासे का असर इस क़दर छाया था, कि लग ही नहीं रहा था कि भोर की पहली बेला निकल चुकी है, ऐसा ही हाल कुछ (सुबह के) 7:30 बजे तक था।

घना-सा तुषार


घना-सा तुषार है छाया,

कर को कर नहीं सुहाया,

बीत चुकी है रात्रि बेला पर 

तिमिर अभी भी है समाया।


यह है हेमंत का असर,

या प्रदूषण हो रहा प्रखर,

ठप हो रहे काज सारे

कुछ न आ रहा नज़र। 


पर क्या ऐसा प्रकृति ने था सोचा, 

या है हमारे तृष्णा का परिणाम,

अंतहीन पाने की चाह ने 

ला दिया है ऐसा अंजाम।


जो बोयेगें, हम इस क्षण में,

वही तो नौनिहाल पाएंगे,

उनको सुख देने की लालसा में 

उनके लिए कंटक की सेज सजाएंगे।


जो दिया है सृष्टि ने,

उसे वैसे ही करो प्रयोग,

तभी उत्तरकाल में बना रहेगा 

सुख-सम्पन्नता का सुयोग।

Sunday, 14 December 2025

Story of Life : बदलती ज़िंदगी (अंतिम भाग)

बदलती ज़िंदगी (भाग-1),

बदलती ज़िंदगी (भाग-2),

बदलती ज़िंदगी (भाग-3), और

बदलती ज़िंदगी (भाग-4) के आगे…

बदलती ज़िंदगी (अंतिम भाग)


रितेश ने बहुत grand party रखी, उसमें सभी परिवारिक जन, और बहुत बड़े-बड़े guests invited थे। बड़ी-बड़ी companies के CEO, नेता, अभिनेता और वो सारे लोग भी जो उस रात की party में शामिल थे, जिन्होंने सुधा का अपमान किया था।

भारतीय संस्कृति के अनुसार ही party plan की गई थी। इस party की बस शर्त इतनी थी कि no alcohol, no non-vegetarian food, & no short/revealing outfits.

सबको party का decorum follow करना था। और सबने किया भी, कौन इतने बड़े invitation को‌ ठुकराता...

आज की रात भी official party थी, पर सुधा के साथ-साथ सभी Indian dresses में थे। किसी के हाथ में जाम नहीं था, बल्कि jaljeera, lemon juice, lassi, chach etc.

और सबसे बड़ी बात, आज सभी सुधा के पहनावे और साज-सज्जा की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे थे। आज वो आपस में एक-दूसरे से बोल रहे थे, “सुधा ma'am की पसंद बहुत classy, rich and beautiful है। हमारे रितेश की तो किस्मत ही खुल गई सुधा जी से शादी करके।”

एक बात, रितेश को बहुत अच्छे से समझ आ रही थी कि पैसा, power and post जिसके पास हो, ज़माना उसके आगे झुकता है 

रितेश भी आज बहुत खुश था, कि उसके बाबूजी ने उसके लिए बहुत ही अच्छा जीवनसाथी चुना है, जिसने उसकी जिंदगी संवारीं नहीं बल्कि निखार‌ दी है। उसे जिंदगी के उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

उसकी जिंदगी, जो शादी के चंद महीनों बाद ही बदल गई थी, वो चंद सालों में इतनी अधिक बदल जाएगी, उसका उसने सपने में भी नहीं सोचा था।‌ 

वो अपने बाबू जी से बोला, “मैं आपसे अपने मन की एक बात कहना चाहता हूँ।”

“हाँ, बोल न बेटा।” बाबू जी ने बड़े प्यार से कहा।

“आज से चंद सालों पहले मुझे लगा था कि आपने मेरी जिंदगी तबाह कर दी, मुझे आपके अनुसार विवाह नहीं करना चाहिए था, बल्कि अपने जीवनसाथी को खुद पसंद करके विवाह करना चाहिए था।

पर आपकी पसंद ही सर्वश्रेष्ठ है, इसके लिए अनेकानेक धन्यवाद, कि आपने मेरे लिए सुधा को चुना। आपकी दूरंदेशी नजरों ने वो देखा, जो मैं कभी नहीं देख पाता। सच है, माँ-बाप का अनुभव, सदैव शिरोधार्य है।”

यह कहकर उसने बाबूजी के चरण स्पर्श किए।

बाबू जी ने उसे गले लगते हुए कहा, “जब तुम्हें लगा था कि तुम्हारी जिन्दगी तबाह हुई है, तुम्हें तभी कहना चाहिए था, मैं तुझे तभी बता देता कि मैंने अपने दिल के टुकड़े के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनसाथी चुना है।

जो जब भी तकलीफ़ आएगी, वो ऐसे डटकर मुकाबला करेगी कि तेरी जिंदगी संवरती जाएगी, सर्वश्रेष्ठता की ओर बढ़ती चली जाएगी।”

“सच है बाबू जी।” रितेश के चेहरे पर प्रेम, आभार और खुशी के मिश्रित भाव थे और आंखें छलछला आई थीं…

Saturday, 13 December 2025

Story of Life : बदलती ज़िंदगी (भाग-4)

बदलती ज़िंदगी (भाग-1),

बदलती ज़िंदगी (भाग-2), और

बदलती ज़िंदगी (भाग-3) के आगे…

बदलती ज़िंदगी (भाग-4)


उसकी cab RS enterprises के एक छोटे से office के सामने रुकी। दरबान ने उसकी cab का दरवाजा खोल कर welcome किया।

Office में भी उसका welcome हुआ। रितेश reception पर बैठ कर अंदर बुलाए जाने का इंतजार करने लगा।

कहां आत्मविश्वास का उदाहरण कहा जाने वाला रितेश, आज सिमटा-सकुचा हुआ बैठा था।

उसे लोगों का welcome किया जाना बहुत अजीब लग रहा था, ऐसे कौन-सी company अपने employee का welcome करती है। जरूर से बिल्कुल भी नहीं चलने वाली company होगी, तभी ऐसा कर रही है, वैसे भी गांव की भोली-भाली सुधा को इनसे बड़ा क्या ही office पता होगा, रितेश के मन में उधेड़बुन चल रही थी।

थोड़ी ही देर में receptionist उसे office के main room में ले गई और उसे boss की chair पर बैठने को बोलकर चली गई।

रितेश खड़ा ही रहा, उसे लगा कि receptionist ने कुछ और बोला और उसने कुछ और समझ लिया है।

थोड़ी ही देर में सुधा अंदर आई और बड़े प्यार से रितेश के गले लगते हुए बोली, “और CEO जी क्या हाल-चाल हैं?”

“CEO!”

“हाँ जी, CEO. देखिए, हम तो ठहरे कलाकार इंसान, तो इतने दिनों में बस इतनी बड़ी company आपको gift कर पाए, अब इसे MNC बनाने की जिम्मेदारी आपकी। अब आप को उन सबको सिद्ध करना है कि हमारा मज़ाक़ उड़ाना, उनकी सबसे बड़ी भूल थी। By the way, Happy anniversary!”

“Happy anniversary, अपनी company gift के रूप में?”

“जी हाँ मेरे सरकार, आपके साथ जिंदगी के एक साल गुजर गए, जिसमें कुछ पल बहुत खूबसूरत थे, कुछ परेशानी के भी, पर हम दोनों मिलकर अब जिंदगी के सारे पल खूबसूरत बनाएंगे।”

“ओ मेरी सुधा! तुम कितनी अच्छी हो, जब मैं जिंदगी से हार गया था, तब तुमने हिम्मत नहीं हारी। Happy anniversary sweetheart. तुम देखना, अब मैं बहुत कड़ी मेहनत करूँगा और बहुत जल्द हमारी यह RS (Ritesh-Sudha) enterprises एक MNC बन जाएगी।”

रितेश का उत्साह देखते ही बनता था, जैसे वो पुराना वाला आत्मविश्वासी, मेहनती और कुशल रितेश बन गया हो।

पहले केवल सुधा ही इस सपने को अंज़ाम दे रही थी, पर अब तो रितेश का साथ भी मिल गया था। Company दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की करने लगी।

सुधा के हाथों की कारीगरी बेजोड़ थी, उसने अपने employees को भी सिखाना शुरू कर दिया था। काम बढ़ता गया और employees भी बढ़ने लगे। चंद ही सालों में company national level तक पहुंच गई।

Internet का ज़माना है, तो business को international level तक पहुंचाने के लिए, रितेश ने सुधा के द्वारा बनाई गईं paintings, embroidered sarees, suits, bedsheets upload कर दिए।

RS enterprises की ख्याति विदेश तक पहुंच गई थी और MNC का status पाने लगी। 


आगे पढ़ें, बदलती ज़िंदगी (भाग-5) में।