कल आपको India's Heritage segment में आचार्य वराहमिहिर के विषय में जानकारी दी थी, जिससे आप समझ सकें कि क्यों है भारत महान और सबसे अधिक प्रतिष्ठा सनातन धर्म को क्यों दी जाती है।
इस link पर click करके आप उस post को पढ़ सकते हैं- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-varahamihira-legend.html?m=1
आइए, उसके आगे जानते हैं आज के अंक में…
Varahamihira - A Legend (Part-2)
(I) Symbol Reason :
उज्जयिनी और गुप्त साम्राज्य का ‘वराह चिन्ह’ ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टिकोण से सम्राट विक्रमादित्य (जिन्हें गुप्त वंश के चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ से भी जोड़ा जाता है), भगवान विष्णु के परम भक्त थे।
- धर्म की रक्षा का प्रतीक- सनातन परंपरा में भगवान विष्णु ने पृथ्वी को हिरण्याक्ष नामक राक्षस से बचाने और समुद्र के तल से बाहर निकालने के लिए वराह अवतार लिया था।
- राजचिन्ह का चयन- विक्रमादित्य ने जब शकों और विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर धर्म और राष्ट्र की रक्षा की, तो उन्होंने भगवान वराह को अपना आदर्श माना। जिस तरह वराह देव ने पृथ्वी को संकट से उबारा था, उसी तरह विक्रमादित्य ने अपनी प्रजा को संकट से बचाया था।
- सिक्कों और ध्वज पर स्थान- इसी के प्रतीक स्वरूप सम्राट विक्रमादित्य ने उज्जयिनी के राजचिन्ह, शाही मुहरों और सिक्कों पर ‘वराह’ (सूअर) की आकृति को अंकित करवाया। यह चिन्ह वीरता, भूमि की रक्षा और अन्याय के खिलाफ विजय का प्रतीक माना गया।
- वराह उपाधि से सम्मान- भविष्यवाणी के सत्य साबित होने पर राजा विक्रमादित्य ने उनकी विद्वता से प्रसन्न होकर उन्हें राज्य के सर्वोच्च सम्मान ‘वराह’ चिह्न से अलंकृत किया।
(II) Varahamihira :
वराहमिहिर प्राचीन भारत के एक महान खगोलशास्त्री, गणितज्ञ और ज्योतिषी थे, जो अपनी प्रसिद्ध रचना ‘पंचसिद्धांतिका’ और ‘बृहत् संहिता’ के लिए जाने जाते हैं। उनके मुख्य योगदान और उनकी प्रसिद्धि का अवलोकन भी कर लेते हैं।
- Astronomy- उन्होंने अपनी पुस्तक पंचसिद्धांतिका में पांच खगोलीय सिद्धांतों का संकलन किया। उन्होंने यह भी बताया कि चंद्रमा और ग्रह स्वयं के प्रकाश से नहीं, बल्कि सूर्य के प्रकाश से चमकते हैं।
- Mathematics- उन्होंने गणित और त्रिकोणमिति में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने pascal's triangle का प्रारंभिक रूप और magic squares का निर्माण किया।
- Brihat Samhita- यह उनका एक विश्वकोश जैसा ग्रंथ है, जिसमें architecture, ग्रहों की गति, ग्रहण, वर्षा, कृषि, और रत्न शास्त्र जैसी विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई है।
- Astrology- उन्होंने होराशास्त्र पर 'बृहज्जातक' और 'लघुजातक' जैसे प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे, जो भारतीय ज्योतिष में आज भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
शायद अब आपको भी एहसास हुआ होगा कि मेरा भारत महान और सबसे ऊपर है सनातन की पहचान...

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