Tuesday, 30 July 2019

Story Of Life : सावन का तोहफा(भाग- 4)




 सावन का तोहफा(भाग- 4)


दो दिन बाद, नितिन छत पर बारिश में भीगते हुए गा रहा था “लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है.....   

तभी घंटी बजी, और चंद मिनटों बाद, नेहा के भैया, छत पर नितिन के सामने एक चिट्ठी ले कर खड़े थे। उन्होंने चिट्ठी नितिन को देते हुए बोला, ये तुम्हारी भाभी ने दी है।

चिट्ठी! नितिन ने आश्चर्य से भरकर चिट्ठी पढ़नी शुरू की, उसमें लिखा था, नितिन जी, आपको सावन का तोहफा भेज रही हूँ, पर इस वादे के साथ कि, आप भी हमें रक्षाबंधन में जरूर से तोहफा देंगे।

नितिन चिट्ठी पढ़कर भैया की तरफ आश्चर्य से देखने लगा, भैया तोहफा तो भाई, बहन को देते हैं, तब मैं क्यों दूंगा?

भैया बोले, अरे नितिन जी, आप नीचे चलकर अपना तोहफा देख लीजिये, फिर सोचिएगा क्या करना है?

नीचे नेहा अपनी सास के साथ बैठी थी, नेहा को देखते ही नितिन समझ गया, कि भाभी ने क्या लिखा है।

उसी रात ही नितिन ने बहुत ही सुंदर कमरा सजाया, नेहा को gown gift किया। song भी वही बज रहा था “मोहब्बत बरसा देना तू, सावन आया है.....

2 हफ्ते बाद वो नेहा के साथ, पहले अपनी बहन के घर, फिर अपने ससुराल गया, बहुत ही धूम से राखी मनाई गयी। नितिन ने भाभी से कहा, आपका सावन का तोहफा मैं जिंदगी भर नहीं भूलूँगा। “भाभी हो तो ऐसी”, नेहा ने नितिन के स्वर में स्वर मिलते हुए कहा। 

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Monday, 29 July 2019

Story Of Life : सावन का तोहफा (भाग- 3)


सावन का तोहफा (भाग-1)...... और 

सावन का तोहफा (भाग-2)........ के आगे की कहानी 



सावन का तोहफा (भाग- 3)


नितिन जब office से घर आया, नेहा जाने को तैयार खड़ी थी। नितिन का ये देखकर दिल टूट गया, उसने सावन को लेकर बहुत सारे plan किए थे।

वो बहुत सुंदर night gown लाया था, उसने सोचा था, आज ही रात इस romantic song के साथ

मोहब्बत बरसा देना तू, सावन आया है..... नेहा को gown gift करेगा।

पर घर में तो, दूसरा ही माहौल था। नेहा अपने मायके चली गयी।

अब तो नितिन और नेहा दोनों को एक-एक दिन काटना भारी पड़ रहा था। 

एक दिन आखिरकर नितिन अपने ससुराल पहुँच ही गया। 

नेहा के घर वाले थोड़ा पुरानी सोच वाले थे, उन्होंने नितिन को नेहा के भाई के कमरे में रहने को बोल दिया, ये तो और भी बुरा था, साथ तो थे, पर साथ नहीं। उसी समय दूर बजता गाना, नितिन को और दुखी कर रहा था
 “अबकी सजन सावन में...... मिल ना सकेंगे दोनों, एक ही आँगन में.....

एक दिन में ही दुखी होकर नितिन वापस चला गया, नेहा भी तड़प के रह गयी। 

नेहा ने कभी सोचा भी नहीं था, कि कभी उसे मायके से ज्यादा ससुराल पसंद आएगा. नेहा की भाभी को नेहा की मनोदशा समझ आ गयी, उनकी और नेहा की बहुत पटती भी थी। दोनों ननद-भाभी कम, बहनें ज्यादा लगती थीं।

भाभी ने नेहा के भैया से बोला, आपको हमारा पहला सावन याद है? भैया बोलेकैसे भूल सकता हूँ, उस तड़प को!

तो भाभी बोली, आज मैं आप से अपने पहले सावन का तोहफा 
चाहती हूँ, देंगे?

आज 3 साल बाद!

हाँ, देंगे ना?

अच्छा बोलो, क्या चाहिए?

आप माँ जी से बात करके, नेहा को उसके ससुराल छोड़ आइये ना, आपको आपके पहले सावन के तड़प की कसम।

कैसी बात करती हो? माँ नही मानेंगी......। 

फिर कुछ दिन बाद राखी भी है, मेरी एक ही तो बहन है। उसे भी छोड़ आऊँ, तो मेरी कलाई सूनी ना रह जाएगी?......

एक तरफ सूनी कलाई, दूसरी तरफ साजन से जुदाई, क्या है नेहा की किस्मत में, जानते हैं सावन का तोहफा (भाग- 4)

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Friday, 26 July 2019

Poem : कारगिल विजय दिवस

कारगिल विजय दिवस




सन् निन्यानबे में फिर सेना ने
भारत को विजय दिलाई थी
दूर खदेड़ दुश्मन को
फिर से धूल चटाई थी
60 दिन तक युद्ध चला
एक वीर ना सोया था
जीत दिलाने तक सबने
अपना सुख चैन खोया था
युद्ध में भारतीय सेना ने
ऐसे दांत किए थे खट्टे
पुनः युद्ध करने को फिर
ना हो सके पाकिस्तानी इकठ्ठे
उन वीर सैनानियों की शहादत को
स्मरण करने का दिन आया है
कारगिल विजय दिवस पर
तिरंगा फिर से लहराया है
शांति का प्रतीक है भारत
मानवता का नारा है
सर्वे भवन्तु सुखिन:
यह संदेश हमारा है
जय हिन्द जय भारत