Tuesday, 13 October 2026

Recipe : Aloo Lachcha Tikki

नवरात्रि चल रही है और बहुत से लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जिसमें वो फलाहारी व्यंजन ही खाते हैं। पूरे नौ दिन तक फलाहारी व्यंजन खाना हो तो variety भी चाहिए। 

आप इसके लिए हमारे fast special segment के link पर click कर सकते हैं- https://shadesoflife18.blogspot.com/search/label/Recipes%20-%20Fasts?m=0

इसी segment में आज एक और recipe share कर रहे हैं। और यह recipe जितनी easily prepare होगी, उतनी ही all time favourite भी है।

वो है आलू की टिक्की, super crispy, but without rice flour, corn flour etc…

आलू लच्छा टिक्की


Ingredients :

  • Boiled potatoes - 2 (medium)
  • Grated potatoes - 6 (medium)
  • Pink salt - as per taste 
  • Pure ghee - shallow frying


Method :

  1. उबले आलू को mash करके fine paste बना लीजिए।
  2. अब इसमें सेंधा नमक और आलू के लच्छे डालकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  3. अब इसे टिक्की जैसा shape दे दीजिए।
  4. Pan पर शुद्ध देसी घी डालकर आलू की टिक्की को दोनों तरफ से golden brown होने तक shallow fry कर लीजिए।

Your scrumptious Aloo Lachcha Tikki is ready to serve!


Tips and Tricks :

  • इसमें उबले और कच्चे आलू के combination से टिक्की बनाते हैं।
  • इसमें उबले आलू से binding होती है, जो binding के साथ टिक्की को अंदर से soft और moist बनाता है। और कच्चे आलू से crispy texture आता है।
  • यही कारण है कि इस टिक्की में rice flour और corn flour की requirement न तो binding के लिए चाहिए, न crispy texture के लिए चाहिए।
  • जबकि ऐसी बनी टिक्की का taste और crisp गजब का आता है, इसलिए आप इसे व्रत में बना सकते हैं।

व्रत न होने से भी ऐसे ही बनाएँ, और as a chaat relish करें…


Monday, 12 October 2026

India's Heritage : The Navrang of Navratri

शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है (11 October से 19 October 2026) जो नौ दिनों का है।

शरद ऋतु में जग-जननी माँ जगदम्बा ने महिषासुर मर्दन करने में नौ रूप धारण किए थे, इसलिए ही इन्हें शारदीय नवरात्रि पर्व कहा जाता है। 

नौ रूप, नौ दिनों, और हर एक दिन के लिए नौ रंग निर्धारित रहते हैं। वो नौ रंग कौन से हैं और किस कारण से विशेष दिन के लिए विशेष रंग निर्धारित रहते हैं?

आइए, आज इसे ही share कर देते हैं, जिससे कि आप इन नौ दिनों में उसके अनुसार ही वस्त्र धारण करें और माता रानी को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करें।

नवरात्रि के नवरंग


नौ दिनों के शुभ रंग और देवी के स्वरूपों की सूची इस प्रकार है।

  • Day 1 (11) {प्रतिपदा}- माँ शैलपुत्री की पूजा:- नारंगी (orange) [उत्साह और positivity का प्रतीक] धारण करें 
  • Day 2 (12) {द्वितीया}- माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा:- सफेद (white) [शांति और पवित्रता का प्रतीक]
  • Day 3 (13) {तृतीया}- माँ चंद्र घंटा की पूजा:- लाल (red) [साहस और शक्ति का प्रतीक]
  • Day 4 (14) {चतुर्थी}- माँ कूष्मांडा की पूजा:- Royal Blue [भव्यता और स्थिरता का प्रतीक]
  • Day 5 (15) {पंचमी}- माँ स्कंदमाता की पूजा:- पीला (yellow) [खुशी और बुद्धिमत्ता का प्रतीक]
  • Day 6 (16) {षष्ठी}- माँ कात्यायनी की पूजा:- हरा (green) [प्रकृति और नए जीवन का प्रतीक]
  • Day 7 (17) {सप्तमी}- माँ कालरात्रि की पूजा:- धूसर (grey) [संतुलित सोच का प्रतीक]
  • Day 8 (18) {अष्टमी}- माँ महागौरी की पूजा:- बैंगनी (purple) [महत्वाकांक्षा और आध्यात्मिकता का प्रतीक]
  • Day 9 (19) {नवमी}- माँ सिद्धिदात्री की पूजा:- मोर हरा (peacock green) [समृद्धि और विशिष्टता का प्रतीक]

माँ का हर रूप निराला है, और उनके हर दिन का हर रंग अनोखा है। वैसे तो हर रंग माँ की विशेषता के अनुरूप ही निर्धारित किए गए हैं।

लेकिन पूजा-पंडाल kitty party इत्यादि के लिए रंगों का महत्व है। अन्यथा, माँ को जिन रंगों से सबसे अधिक प्रसन्न कर सकते हैं वो नौ रंग हैं:-

  • भक्ति का रंग
  • समर्पण का रंग
  • आस्था का रंग
  • अटूट विश्वास का रंग
  • अटूट श्रद्धा का रंग
  • सत्यनिष्ठा का रंग
  • दया का रंग
  • कर्तव्यनिष्ठता का रंग
  • प्रेम का रंग

जो इन नौ रंगों में रंगा हुआ है, माँ उससे सदैव प्रसन्न रहती हैं, अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती हैं।

बाकी वस्त्रों का रंग तो बाह्य आवरण है, उनसे ज़्यादा आंतरिक रंगों का महत्व है, उन रंगों में खुद को रंग कर भक्ति में लीन हो जाएँ।

जयकारा शेरावाली दा!

Sunday, 11 October 2026

Bhajan (Devotional Song): मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया, माँ के आगमन पर यह भजन हम सभी भक्तों की ओर से जग-जननी माँ दुर्गा, जगदंबा के श्री चरणों में समर्पित है।

माँ के स्वरूप, माँ लक्ष्मी, माँ काली, माँ शारदा को समर्पित है…

मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या



मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।

काहे की वा नाव बनाई,

काहे की पतवार,

मैय्या काहे की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


दुर्गा नाम की नाव बनाई,

भक्ति की पतवार,

ओ मैय्या ज्ञान की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


कौन सखी वामें बैठनहारे,

कौन है खेवनहार,

मैय्या कौन लगाहे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


शारदा मैया बैठनहारी,

काली खेवनहार,

मोरी लक्ष्मी जी लगावे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


भक्तों की है आस मैय्या से,

चरणन में बलिहार,

मोरी दुर्गा जी लगाहे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।


मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।




पूरे भजन का आनंद लेने के लिए इस link पर click करें-

हे माँ, आपके ही श्रीचरणों में अपनी जीवन-रूपी नैय्या डाल दी है। माँ, हम सभी भक्तों का कल्याण करें।

शारदीय नवरात्रि पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ !


बोलो दुर्गा माई की जय!