Tuesday, 29 September 2026

Article : हमारे अपनों के दिन

इस वर्ष पितृपक्ष या कनागत की शुरुआत 26 September (शनिवार) को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ हो चुकी है, और इसका समापन 10 October (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।

इन विशेष दिनों को हमारे अपनों के दिन भी कहा जा सकता है, क्योंकि इन दिनों में हम किसी देवी-देवता की पूजा-अर्चना नहीं करते हैं, बल्कि अपने पूर्वजों की पूजा-अर्चना करते हैं।

अपने पूर्वजों के विशेष दिन में पंडित जी को बुलाकर उनके नाम से दान-पुण्य, पूजा-हवन इत्यादि करते हैं‌।

पर यह विशेष दिन हमारे लिए और अधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाते हैं, क्योंकि इन दिनों में हम ईश्वर से अधिक नज़दीक हो जाते हैं…

हमारे अपनों के दिन


हमारे द्वारा की गई पूजा-अर्चना ईश्वर जल्दी स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि इस समय में की गई पूजा-अर्चना दान-पुण्य इत्यादि हमारे पूर्वजों से होते हुए ईश्वर तक पहुंचते हैं।

हमारे पूर्वज, ईश्वर के प्रिय होते हैं और हम अपने पूर्वजों के। तो हो गई न ईश्वर से नज़दीकी!

पर क्या इसमें उन्हीं पूर्वजों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जो स्वर्गवासी या ब्रह्मलीन हो गए हैं?

नहीं, ऐसा नहीं है कि केवल उन्हीं की पूजा-अर्चना से पुण्य अर्जित किया जा सकता है। 

बल्कि उनकी पूजा-अर्चना के साथ-साथ ही अगर आप अपने जीवित दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता या सास-ससुर की सेवा करेंगे, उनकी इच्छाओं की पूर्ति करेंगे, उनके साथ समय व्यतीत करते हैं, तब भी आप को वही पुण्य मिलेगा।

यह विशेष दिन हमारे अपनों के हैं, उनकी सेवा और पूजा-अर्चना के दिन है।

भारतीय संस्कृति में यह 16 दिन इसलिए ही निर्धारित किए गए हैं, कि हर साल हम atleast 16 दिन अपने पूर्वजों से जुड़ें, उन्हें धन्यवाद दें, उनके नाम से दान-पुण्य पूजा-अर्चना करें।

पर जो चले गए, उनके लिए विधिवत कर्मकाण्ड संस्कार करना, और हमारे जो बुजुर्ग जीवित हैं उन्हें neglect करने से कुछ पुण्य अर्जित नहीं होगा।

अगर पूरी प्रक्रिया विधिवत करनी है, तो जो ब्रह्मलीन पूर्वजों के लिए पूजा-अर्चना दान-पुण्य करें और जो बुजुर्ग जीवित हैं उनकी सेवा-सुश्रुषा करें, उन्हें मान-सम्मान दें, उनके साथ समय व्यतीत करें।

तब आपकी पूजा अर्चना विधिवत पूर्ण होगी। और उनके आशीर्वाद से होंगे आपके सभी कार्य सम्पन्न व पूर्ण होगी सभी मनोकामनाएं, जिससे आप सुखी, स्वस्थ और समृद्ध रहेंगे।

एक और सबसे बड़ी बात होगी, हमारे अपनों के दिन में अपने पूर्वजों और बुजुर्गों की सेवा से, कि आपके बच्चों में संस्कार आएंगे, वो भी सबसे जुड़ेंगे और सबसे बढ़कर वो सीखेंगे। अपनों से जुड़ना, उनकी सेवा करने, उन्हें मान-सम्मान देना।

और एक दिन पलट कर यह आपको भी सुख प्रदान करेगा, क्योंकि ध्यान रखिएगा कि एक दिन बुजुर्ग सबको होना है और ब्रह्मलीन भी।

तो जाने से पहले सबकी सेवा कर लीजिए, क्योंकि ईश्वर भी उन्हीं से प्रसन्न होते हैं, जिनके पूर्वज और बुजुर्ग उनसे प्रसन्न हैं।

हमारे सभी पितर तृप्त रहें, हम से प्रसन्न रहें और उनकी कृपा दृष्टि सदैव बनी रहे।

हमारे सभी पूर्वजों व बुजुर्गों को शत-शत प्रणाम!

Monday, 28 September 2026

India's Heritage : Bharatiya Math-Magicians (Virahanka)

Maths Storytelling Day था, तो India's Heritage segment में महान महर्षि बौधायन के विषय में जानकारी share की थी- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math.html?m=1

फिर उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए भारत के एक और महान गणितज्ञ, जिन्हें Madhava of Sangamagrama कहते हैं, के विषय से जुड़ी कुछ बातें share की- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math_0152809532.html?m=1

इनके बाद महान गणितज्ञ और संस्कृत भाषा के ज्ञाता श्रीधराचार्य के विषय में जानकारी share की- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math_0980722856.html?m=1

आज भारत के एक और महान गणितज्ञ और संस्कृत के प्रकांड विद्वान, विरहांक के विषय में जानकारी share कर रहे हैं।

Bharatiya Math-Magicians (Virahanka)


(I) Who Was He :

इन्होंने संस्कृत भाषा की ऐसी विद्या में maths के formulae दिए हैं, जो कि अपने आप में सर्वोच्च है और सिद्ध करती है कि क्यों भारतीय संस्कृति सर्वोपरि है।

Virahanka 6th से 8th c. CE के बीच के एक प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और छंदशास्त्री थे, जिन्होंने संस्कृत छंदों का अध्ययन करते हुए Fibonacci Sequence को सबसे पहले खोजा था।

संस्कृत भाषा में अत्यंत समृद्ध और व्यवस्थित छंद शास्त्र (जिसे पिंगल शास्त्र भी कहते हैं) पाया जाता है, जिसके आधार पर वैदिक और लौकिक संस्कृत के श्लोक रचे जाते हैं।

इनके विषय में पढ़कर आपको एहसास होगा कि भारत सदैव से महान और विकसित रहा है।


(II) Major Information :

  • Time Period- इनका अनुमानित समय 6th to 8th c. CE माना जाता है।
  • Treatises- इन्होंने Pingala (4th c. BCE) के ‘छंदसूत्र’ पर आधारित 'वृत्तजातिसमुच्चय' नामक ग्रंथ की रचना की थी।


(III) Main Contributions :

  • Expansion Process- इस ग्रंथ में इन्होंने मात्रा-छंदों के pattern और उनकी गिनती के लिए ‘expansion’ process की विस्तृत व्याख्या की है।
  • Virahanka-Fibonacci Sequence (Arithmetic Progression + Recursive Rule)- उनका सबसे बड़ा योगदान उस number sequence की खोज है, जिसे आज western world में गलती से ‘Fibonacci Numbers’ कहा जाता है। उन्होंने Italian mathematician Fibonacci (1202 CE) से लगभग 500 वर्ष पहले ही इस सूत्र की खोज संस्कृत कविता के छंदों (मात्राओं) को गिनने के लिए कर ली थी। विरहंक संख्या अनुक्रम का Recursive Formula विरहंक ने दिया था, कि यदि किसी sequence का अगला पद निकालना हो, तो वह पिछले दो पदों के sum के बराबर होता है। इसे गणितीय रूप में इस प्रकार लिखा जाता है- [V(n) = V(n-1) + V(n-2)] Initial conditions यह हैं कि उसके शुरुआती terms कुछ इस प्रकार हैं- [V₀ = 0, V₁ = 1] [At some places, V₀ = 1] इस सूत्र के आधार पर बनने वाली विरहंक संख्या श्रृंखला निम्नलिखित है- [0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55]
  • Combinatorial Rules for Prosody- विरहंक ने संस्कृत कविता में लघु (short syllable = 1 मात्रा) और गुरु (long syllable = 2 मात्रा) के संयोजन से बनने वाले कुल छंदों (rhythms) की संख्या ज्ञात करने के लिए इस सूत्र का आविष्कार किया था।यदि हमें n मात्राओं (beats) वाले कुल संभावित छंदों की संख्या निकालनी है, तो उसका सूत्र है- [n = V(n+1)] E.g.- यदि कुल मात्राएँ n = 3 हैं, तो कुल संयोजन V₄ = 3 होंगे (जैसे; लघु-लघु-लघु [1+1+1], गुरु-लघु [2+1], लघु-गुरु [1+2])।
  • Connection to Golden Ratio- हालांकि विरहंक ने सीधे तौर पर decimal मान नहीं दिया था, लेकिन उनके इसी सूत्र के दो लगातार नंबरों को विभाजित करने पर Golden Ratio प्राप्त होता है- [Lim (n→∞) V(n)/V(n-1) = φ ≈ 1.6180339887...] यह ratio प्रकृति की बनावट (फूलों की पंखुड़ियाँ, शंख आदि) में हर जगह दिखाई देता है।


ऐसे ही अनेकानेक Math-Magicians, Scientists, वीर‌ योद्धा, भाषाओं के ज्ञाता, दार्शनिकों, आदि भारत के कण-कण में व्याप्त हैं, जिनकी जानकारी हम समय-समय पर अपने India's Heritage segment में share करते रहेंगे।

तो इससे जुड़े रहिए और विशेष रूप से अपने बच्चों को बताएँ, जिससे वो भारत का सच्चा और समृद्ध इतिहास जान सकें और गर्व कर सकें अपने भारत पर।

मेरा भारत महान!

Stay tuned…

Sunday, 27 September 2026

India's Heritage : Bharatiya Math-Magicians (Sridharacharya)

Maths Storytelling Day से India's Heritage segment में भारत के गणितज्ञों के विषय में जानकारी share कर रहे हैं।

सबसे पहले महान महर्षि बौधायन के विषय में जानकारी share की थी- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math.html?m=1

फिर उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए भारत के एक और महान गणितज्ञ, जिन्हें Madhava of Sangamagrama कहते हैं, के विषय से जुड़ी कुछ बातें share की थीं- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/indias-heritage-bharatiya-math_0152809532.html?m=1

आज भारत के एक और महान गणितज्ञ श्रीधराचार्य के विषय में जानकारी share कर रहे हैं। इसे पढ़कर आपको एहसास होगा कि भारत सदैव से महान और विकसित रहा है।

और साथ ही यह भी ज्ञात होगा कि संस्कृत भाषा के ज्ञाता किस तरह से गणित से जुड़कर यह सिद्ध कर रहे हैं कि संस्कृत भाषा और विज्ञान एक ही मंच पर आसीन हैं…

Bharatiya Math-Magicians (Sridharacharya)


अर्थात् संस्कृत भाषा केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि अपने आप में सम्पूर्ण है, जिसमें कला, विज्ञान, दर्शन सब निहित हैं।

बात करते हैं श्रीधराचार्य जी के विषय में, और उनसे जुड़ी खोजों व सिद्धान्तों के विषय में।


(I) Main Overview :

श्रीधराचार्य 8वीं से 9वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ, संस्कृत पंडित और दार्शनिक थे।

  • Time- इनका अनुमानित समय 750 से 930 CE के बीच माना जाता है।
  • Birthplace- इनका जन्म बंगाल के हुगली क्षेत्र (दक्षिण राधा) के भूरिश्रेष्टि गाँव में हुआ था।


(II) Major Contributions :

  • Quadratic Formula [x=(-b±√{b²-4ac})/2a]- श्रीधराचार्य का सबसे प्रसिद्ध योगदान Quadratic Formula है, जिसका उपयोग किसी quadratic equation (ax²+bx+c=0) के roots या हल निकालने के लिए किया जाता है। यदि कोई Quadratic Equation इस रूप में है; [ax²+bx+c=0] तो इसे हल करने का श्रीधराचार्य सूत्र है; [x=(-b±√{b²-4ac})/2a]
  • Rules of Zero [x±0=x, 0(x)=0]- उन्होंने 0 को add करने [x+0=x], subtract करने [x-0=x], और multiply करने (x×0=0) के नियम समझाए।
  • Main Treatises- उन्होंने ‘पाटीगणित’ और ‘त्रिशतिका’ (पाटीगणितसार) नामक प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं, जिनमें अंकगणित और बीजगणित के नियम बताए गए।
  • Area of Circle- उन्होंने circle के area को निकालने के लिए भी शुरुआती सूत्र दिए।

मेरा भारत महान!