राखी का सही अर्थ बताती हुई, हृदयस्पर्शी कहानी...
राखी का सौदा (भाग-1)
कृष और कृतिका दोनों में बहुत प्यार था। एक-दूसरे के बिना चैन नहीं था। इतना प्यार की उन्हें मां-पापा से पहले एक दूसरे की याद आती थी।
लतिका दोनों बच्चों का प्यार देख निहाल हो जाती, पर कभी-कभी उसको यह चिंता भी सताती कि क्या यह प्यार इनकी जिंदगी भर रहेगा? इनकी शादी हो जाने से कोई फर्क तो नहीं आएगा?
प्रणव कहता, “तुम नाहक चिंता करती हो, भाई-बहन का रिश्ता सबसे निराला होता है। जब अभी उनको अपने आगे हमारी याद नहीं सताती है, तो कभी भी कोई भी कारण इन लोगों के प्यार में दरार नहीं डाल सकता।”
दिन गुजरते गए और कृष व कृतिका का प्यार गहराता गया।
कृष की शादी सुहाना से हुई। वो भी घर में रच-बस गई। सुहाना और कृतिका की भी खूब पटती थी।
कृतिका की शादी के समय कृष और सुहाना काम में इतने ज्यादा जोश से लगे थे, कि समझ नहीं आ रहा था कि कृतिका लतिका और प्रणव की बेटी है या कृष और सुहाना की।
शादी खूब धूमधाम से हुई। हर ओर शादी के arrangements की वाहवाही हो रही थी।
विदाई के समय कृतिका लतिका और प्रणव से गले मिलकर रोने लगी, पर जब उसके भैय्या-भाभी आए, तो वो उनसे लिपट कर इतना तेज़ रोने लगी कि उसे संभालना मुश्किल हो रहा था।
उसे विह्वल देखकर, कृष और सुहाना कृतिका को उसके ससुराल तक छोड़ कर आए।
पहली राखी पर जब कृतिका मायके में पहुंची तो ढोल-नगाड़े के साथ उसके भैय्या-भाभी ने उसका भव्य स्वागत किया।
पूरा त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया और विदा के समय कृष ने कृतिका के साथ गहने, रुपये-पैसे, कपड़े, मेवा-मिठाई आदि इतना ज्यादा दिया, जैसे लोग शादी-विवाह में बेटी को देते हैं।
अब तो यह सिलसिला हर राखी में ही होता, कृतिका की ससुराल में भी सब कहते कि तुम्हारा भाई जहां से निराला है, इतने सालों तक कौन इतना मान-मनुहार करता है। तुम दोनों भाई-बहन का प्यार ऐसा ही बना रहे।
पर सब दिन एक से कहां होते हैं।
कृष का business थोड़ा घाटे में जाने लगा। राखी आने को थी, तो उसकी चिंता और बढ़ गई कि बहन आएगी तो हर बार की तरह उतना नहीं दे पाएगा।
तो क्या करें, पैसे उधार ले? या इस बार घर पर न रहें? वो इसी उहापोह में था, तो सुहाना ने कहा कि उधार लेकर भी वो उतना अधिक नहीं कर पाएंगे, तो अच्छा रहेगा कि इस साल घर पर न रहें और एक बार सब ठीक-ठाक हो जाने पर वैसा ही मान-मनुहार कर लेंगे।
सुहाना ने कृतिका को फोन करके बता दिया कि वो लोग business के कारण abroad जा रहे हैं, बड़ी deal मिली है, आने से बताएंगे और उसके राखी के तोहफे तभी उसके घर लेकर आएंगे।
कृतिका ने हाँ तो कह दिया, पर उसको विश्वास नहीं था कि उसके भैया उससे राखी बंधवाए बिना रह लें। वो राखी में आई तो उसने देखा कि घर पर सचमुच ताला लगा था।
यह देखकर उसके आंसू छलक आए, भैया ने ऐसा कैसे कर लिया, वो पलटी ही थी कि उसका ध्यान गया…
आगे पढ़ें, राखी का सौदा (भाग-2) में…


