Thursday, 5 February 2026

Poem : उम्मीद

उम्मीद

हर रोज़ उम्मीदों को,
जुड़ते टूटते देखा है।
हम जो थे अब तक
आशाओं से भरे हुए,
उन आशाओं को 
क्षण-क्षण 
बिखरते देखा है।
जीने की जो इच्छा है,
उसको तिल-तिल 
छूटते देखा है। 
हमने बहुत पास से 
खुद को बदलते देखा है। 
ज़िंदगी गुजार दी 
जिन रिश्तों को संवारने में,
उन्हीं रिश्तों को हर पल 
बदलते हुए देखा है।। 

Wednesday, 4 February 2026

Poem : शोर

शोर 


जब से इन कानों ने,

सुनना बंद किया। 

शोर बहुत धड़कनों

का सुनाई दिया,

सपनों का सुनाई दिया, 

अपनों का सुनाई दिया,

बेइंतहा तन्हाई का

सुनाई दिया।

और बस एक ही 

बात समझ आई,

न किसी से उम्मीद करो,

न किसी को उम्मीद दो,

क्योंकि अपने हिस्से की

लड़ाई खुद लड़नी होती है।

कोई दावे कर ले जितने, 

साथ कोई चला नहीं करता।

Wednesday, 14 January 2026

Poem : Makar Sankranti

मकर संक्रांति पर्व को किस दिन मनाया जाएगा, इसमें पशोपेश थी, अतः अभी यह कविता डाल रहे हैं। आप सभी को मकर संक्रांति पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ। जो आज यह पर्व कर रहे हैं उन्हें आज की शुभकामनाएँ, जो कल पर्व करेंगे उनको कल के लिए शुभकामनाएँ।

सूर्य देव की कृपा सब पर सदैव बनी रहे, सबके जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रकाश रहे 🙏🏻🌞

मकर संक्रांति


हे सूर्य देवता! यह बतलाओ,

इस संक्रांति पर्व पर,

क्या मेरे घर भी आओगे?

अपने शुभाशीष को,

घर पर मेरे बरसाओगे?

क्या सुखद-सुनहरी धूप,

घर आंगन पर मेरे,

आशीष बन कर चमकेंगी?

क्या आशा की किरणें

मेरे घर आंगन में दमकेंगी?

क्या, मेरे परिवार में फिर से,

जल्दी वो खुशियां चहकेंगी?

क्या जल्दी हम सब फिर,

एक साथ रह पाएंगे? 

हे सूर्य देवता! फिर से,

जल्दी कर दो सब वैसा,

खिचड़ी, तिल लड्डू, पैसा 

हम तुम पर सब चढ़ाएंगे। 

तुम तक पहुंच सकें, 

फिर वैसी पतंग उड़ाएंगे।

हर वर्ष उल्लास से भरा,

फिर हम भी मकर संक्रांति मनाएंगे।।