आज आप सब के साथ मुझे उत्तराखंड के भुवन चंद्र अवस्थी जी के विचार को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।
भुवन जी बहुत ही ज्ञानी, जीवन्त, प्रेरणादायक और आध्यात्मिक भाव के प्राणी है।
उनके साथ विचार-विमर्श के पश्चात्, बहुत से प्रश्न उठे, जिनका सिलसिलेवार तरीके से अध्ययन किया।
जो पता चला, वो बहुत ही रोचक व अंतरात्मा को शांति प्रदान करने वाला था, तो सोचा उसे ही साझा करें।
आज के India's Heritage segment में वही, जिस सत्य के बिना हम नहीं।
हम हिन्दुओं में राम नाम का बहुत महत्व है, पर क्यों? क्यों भारत में लोग एक-दूसरे से मिलने पर good morning, सुप्रभात इत्यादि न कह कर राम-राम कहा करते थे? और क्यों एक बार राम न कह कर दो बार राम नाम दोहराते थे, अर्थात् राम न कहकर राम-राम कहा करते थे।
आज इसी को बताने जा रहे हैं, उनके शब्दों में...
मंत्रों से बढ़कर तेरा नाम
राम-राम का महत्व :
सबसे पहले तो good morning या सुप्रभात कहने से आप एक-दूसरे के उस सुबह के शुभ होने की कामना करते हैं। पर पता है, जब आप राम-राम कहते हैं तो क्या होता है?
राम नाम की अगर मात्रा का जोड़ करते हैं तो:
र्+अ+म् = 54 आता है।
दो बार अगर राम बोलते हैं तो:
54+54 = 108
मतलब आप दो बार राम नाम बोलते हैं तो उसका प्रभाव 108 बार जाप करने के बराबर हो जाता है।
जब आप राम-राम कहते हैं तो प्रतिउत्तर में अगला भी राम-राम कहता है, अर्थात् उसने भी 108 बार राम नाम का जाप कर लिया।
108 बार मंत्र-जाप की परंपरा :
मंत्र जाप जब भी किया जाता है तो 108 बार जाप करने की परंपरा है, पर क्यों? यह भी देख लेते हैं।
जप (मंत्रों का जाप) 108 बार करने की परंपरा के पीछे कई धार्मिक और आध्यात्मिक कारण हैं। माना जाता है कि 108 बार जाप करने से ब्रह्मांड के कंपन के साथ सामंजस्य स्थापित करने में मदद मिलती है, और यह संख्या पवित्र मानी जाती है।
इसके प्रमुख कारण :
- वैदिक संस्कृति में महत्व- 108 को वैदिक संस्कृति में पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
- सूर्य, चंद्रमा व पृथ्वी का संबंध- सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी से औसत दूरी उनके व्यास का 108 गुना है।
- ऊर्जा रेखाएँ- 108 ऊर्जा रेखाएँ हृदय चक्र में मिलती हैं, जो जीवन का केंद्र है।
- माला में मोती- हिंदू मालाओं में 108 मनके होते हैं, जो 108 बार जाप करने का प्रतीक हैं।
- श्वासों की संख्या- कुछ लोगों का मानना है कि 108 संख्या 24 घंटे में मनुष्य द्वारा ली जाने वाली 21,600 सांसों से संबंधित है।
- नक्षत्र और चरण- 27 नक्षत्रों और प्रत्येक के 4 चरणों को मिलाकर 108 बनता है।
- ज्योतिषीय महत्व- 12 राशियाँ और 9 ग्रहों का गुणनफल 108 होता है।
- ब्रह्मांड का प्रतीक- 108 संख्या ब्रह्मांड की संपूर्णता और गति का प्रतिनिधित्व करती है।
संक्षेप में, 108 बार जाप करने से आध्यात्मिक लाभ, ऊर्जा का प्रवाह, और ब्रह्मांड के साथ संबंध स्थापित करने में मदद मिलती है।
अर्थात् आपके good morning या सुप्रभात कहने से आप एक-दूसरे के लिए केवल उस सुबह को शुभ बनाते हैं, लेकिन राम-राम कहकर, आप केवल एक सुबह, एक दिन को नहीं बल्कि उसके सम्पूर्ण जीवन को संपूर्णता देकर शुभ बनाते हैं और यदि सब प्रत्येक दिन राम-राम कहते हैं, तो उनका मानव जन्म लेना सार्थक हो जाता है।
सोचिए कितना सहज और सरल है, इस विधि से प्रभू की आराधना करना, जिसमें एक निमिष मात्र पल में आपने 108 बार का जाप कर लिया और बाकी जितनों ने उसका उत्तर दिया, उन सभी ने भी 108 बार का मंत्र जाप कर लिया।
बस यही है राम नाम की महिमा, और इसलिए कहा भी गया है:
“मंत्रों से बढ़कर तेरा नाम,
जय श्री राम, जय श्री राम,
जय श्री राम, राजा राम!”
इतनी सहज, सुलभ, सरल और प्रभावशाली संस्कृति है, भारतीय संस्कृति और सभ्यता, और बस यही कारण है कि भारतीय संस्कृति को सर्वोपरि माना जाता है।
आप सभी को राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!
जय श्री राम!
भुवन जी, आपका विशेष धन्यवाद।


