बंगाल में 4 मई को ममता की सरकार गई और सत्ता में आई BJP government, और इसके साथ ही 15 साल तक सत्ता पर काबिज TMC government भी चली गई।
पर आपको पता है, यह जीत जितनी BJP government के लिए आवश्यक थी, उससे भी ज्यादा हमारे देश भारत के लिए जरूरी थी?
आइए जानते हैं, कि क्यों BJP और देश के लिए जरूरी थी यह जीत...
बंगाल में जीत क्यों थी ज़रूरी
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP की जीत को party और समर्थकों द्वारा कई प्रमुख कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था। यह जीत न केवल राज्य की सत्ता में बदलाव, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा मोड़ मानी गई है।
इसके लिए यह जान लेते हैं कि BJP की सरकार इन सभी राज्यों में है-
- Assam
- Arunachal Pradesh
- Tripura
- Manipur
- Sikkim
- Nagaland
- Meghalaya
- Mizoram
- Gujarat
- West Bengal
- Uttarakhand
बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल वर्षों से एक ऐसा चुनावी किला बना हुआ था जिसे भेदना मुश्किल था। वामपंथी शासन और फिर ममता बनर्जी के वर्चस्व को तोड़कर सत्ता में आना बीजेपी के लिए एक बड़ी वैचारिक और संगठनात्मक उपलब्धि है।
2026 के चुनावी घटनाक्रम के बाद यहाँ अब BJP की सरकार (सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में) है।
जब से भारत देश में BJP government सत्तारूढ़ हुई है, तब से ही पूरे देश में double engine सरकार कायम हो सके, विकास हो सके, इसके लिए BJP प्रयासरत रही है और बहुत हद तक सार्थक भी हुई है।
Party का मानना था कि बंगाल को विकास के मुख्यधारा में लाने के लिए राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार होना ज़रूरी था, ताकि रुकी हुई परियोजनाओं को गति मिल सके।
West Bengal Bangladesh के साथ 2216 km लंबा border साझा करता है। BJP ने अवैध घुसपैठ को एक बड़ा मुद्दा बनाया था और उनका मानना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह जीत बहुत ज़रूरी थी।
समर्थकों का मानना था कि ममता बनर्जी के शासनकाल में राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार के कारण राज्य में भय का माहौल था, जिसे बदलने के लिए सत्ता परिवर्तन जरूरी था।
RG Kar medical college में हुई निंदनीय घटना के पश्चात उसको नज़रअंदाज़ किया जाना TMC को भारी पड़ गया।
इस चुनाव के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और हिंदू मतदाताओं की असुरक्षा का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया था, जिसे बीजेपी ने प्रमुखता से दूर करने का वादा किया था।
इस जीत ने न केवल TMC के 15 साल के शासन को खत्म किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एकता और भविष्य पर भी बड़ा असर डाला है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि और मजबूत हुई है।
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा सरकार बनी।संक्षेप में, यह जीत वैचारिक वर्चस्व, विकास, सुरक्षा और राजनीतिक सत्ता के पुनर्गठन के लिए एक मील का पत्थर मानी गई है।
इस तरह से यह जीत केवल BJP government के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा और अखंडता के लिए भी जरूरी थी।
जय हिन्द, जय भारत!


