Tuesday, 9 June 2026

Tip : पित्ती (hives) के लिए home remedies

पित्ती उछलना एक ऐसी समस्या है, जो ठंडा-गरम होने से हो जाती है। कभी-कभी दवाइयों के reactions से भी होती है।

अगर समस्या ठंडा-गर्म होने से हुई है तो उसका उपाय बता रहे हैं। यह परेशानी ठंडक या गर्मी किसी भी मौसम में हो सकती है। 

इसमें पूरे शरीर पर छोटे-बड़े चक्कते या दाने जैसे हो जाते हैं, जो कि शरीर के skin colour के या लाल रंग के होते हैं, जिसमें खुजली भी हो सकती है।

इस समस्या के होने पर विभिन्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।


Points to Remember :

  • इसके होने से बहुत अधिक परेशान नहीं होना चाहिए, यह मुख्यतः दो-चार दिन में ठीक हो जाती है। कभी-कभी दो से चार घंटे में भी ठीक हो जाती है।
  • खुजाना बिल्कुल नहीं चाहिए, उससे इसके aggravate होने की संभावना बढ़ जाती है और समस्या एक हफ्ते तक में ठीक होती है।
  • खुजाने से दानों के दाग़ permanent भी हो सकते हैं।
  • अगर समस्या गर्मी में हुई है तो सब कुछ ठंडा-ठंडा दीजिए (जैसे खाना-पीना इत्यादि), कमरे का तापमान ठंडा रखिए, cotton के हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें।
  • अगर समस्या ठंडक में हुई है तो गर्म-गर्म ही सब लें (जैसे खाना-पीना इत्यादि)। कमरे का तापमान, बिस्तर और कपड़े इत्यादि गर्म और cosy रखें।
इस समस्या पर हम पहले भी post डाल चुके हैं जिसका link इस प्रकार है- https://shadesoflife18.blogspot.com/2023/06/tip-home-remedies-for-hives.html?m=1

कुछ और tasty and effective Remedies पता चली है, जो आज share कर रहे हैं…

पित्ती (hives) के लिए homemade remedies



Home Remedies :

इसके अतिरिक्त पित्ती उछलने पर कुछ घरेलू नुस्खे भी हैं, जिनको अपनाने से पित्ती की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। आखिरी वाली remedy को अपनाने से permanently relief भी मिल सकता है-

  • 1 glass पानी में 1 पेड़ा घोलकर पिला दीजिए और चादर ओढ़कर ½ घंटे सुला दीजिए।
  • 1 tsp. baking powder को ½ glass पानी में घोलकर उसके फाहे से शरीर में जहां-जहां पित्ती उछली है, उसमें लगा लें, आराम मिलेगा और पित्ती ठीक हो जाएगी।
  • ½ tsp. जौ का आटा ¼ tsp. शुद्ध देसी घी और 1 glass पानी में डालकर पिला देने से permanent पित्ती उछलना बंद हो जाती है।
यह सब घरेलू उपाय हैं जिनसे फायदा मिल जाता है, अगर नहीं भी मिला तो नुकसान भी नहीं करेंगे।

अगर फिर भी ठीक न हों तो doctor से सलाह लें। दवाई के reaction से हुई है, तब तो doctor के treatment से ही ठीक होगी।


Disclaimer- The tips and remedies mentioned above are only for general information, and have been stated on the basis of experiences. They might be beneficial, but no guarantee about complete normalcy could be taken. It can also never substitute any kind of medication. Consult a doctor for more information and before any kind of medication. Remember, only doctors can completely help someone become healthy.

Monday, 8 June 2026

Article : Seat or Scam?

आज का यह article एक सच्ची घटना पर आधारित है, और आप सभी को सचेत करने के लिए डाल रहे हैं।

साथ ही कुछ information भी, एक बार अंत तक अवश्य पढ़ें, सचेत और सुरक्षित रहें…

बात कुछ दिन पहले की, एक premium train की है, train का नाम mention करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसी घटना किसी भी train में हो सकती है। जब एक premium train में ऐसा घटना हुई, तो किसी में भी होना कौन बड़ी बात है।

Train मुम्बई से दिल्ली की ओर जा रही थी। जगह का नाम इसलिए mention किया, क्योंकि source and destination दोनों ही बड़े शहर थे।

अब घटना विस्तार से जानते हैं…

Seat or Scam?


हम लोग BDTS (Bandra Terminus) से चढ़कर NZM (Hazrat Nizamuddin) को आ रहे थे। एक यात्री मुम्बई से चढ़कर मथुरा को आ रहा था। वो एक businessman था और premium trains से आता जाता था, तो उसे tickets के regarding rules पता थे।

आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि आप जब online ticket book करते हैं, तो अगर waiting ticket है और train चलने के पहले भी अगर waiting बरकरार रहती है तो आप का ticket अपने आप automatically cancel हो जाएगा।

But अगर आप ने ticket उसकी window से (means offline) book किया है, और train चलने से पहले आप का ticket waiting category में ही रहता है, फिर भी automatically cancel नहीं होगा। वो cancel तभी होगा, जब आप ticket window पर जाकर cancel कराएंगे।

अतः आपका window से book किया हुआ ticket waiting category में होने के बावजूद आपको train में चढ़ने के लिए eligible रखेगा। हाँ, seat मिलेगी कि नहीं, वो berth availablity पर depend करता है। तो आप को उस दिन की बात बताते हैं। 

उसने ticket window से ticket book की थी। Ticket waiting ही थी। जब उसने ली थी, तब 53 waiting थीं, जो train में चढ़ने पर 10 पर पहुंच गई थीं, but still RAC or clear की category में नहीं आई थी।

वो पूरी तरह आश्वस्त था कि कुछ देर में जब TT आएगा, उसे seat available हो जाएगी। TT ticket check करने आया तो उसकी window की waiting ticket देखकर बोला situation देखकर बताएगा।

गाड़ी ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली। हमारे साथ ही वो भी BDTS से चढ़ा था। बोरिवली पर हमारी berth set के सभी passengers आ गये, अतः उसे seat से उठना पड़ा। एक-दो TT आए इस बीच, पर किसी ने उसे confirmed berth नहीं दी।

रात गहराना शुरू होने लगी। हमारी side-upper and side-lower seat थी, एकदम दरवाजे से लगी। हमें train में sound sleep नींद नहीं आती है, फिर gate से लगी seat, बार-बार खुलने-बंद होने से disturbance और सबसे बड़ी बात, हमारी तबीयत काफ़ी खराब थी, अतः बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी।

अब आगे की बात सुनिए। Attendant ने gate से लगी berth पर कुछ सामान रखकर उसपर चादर डालकर एक उबड़-खाबड़ बैठने की जगह बना रखी थी। वह आदमी उसी पर बैठकर अगले TT के आने का इंतजार करने लगा।

तभी उस attendant ने मुम्बई-जैसी भाषा में उससे कहा, “आपको clear-seat मांगने का है, तो ₹1000 दो, तुरंत एकदम मस्त seat दूंगा।” Premium trains के ticket already महंगे होते हैं, उस पर सीधे ₹1000 और, उसने ₹1000 देने से मना कर दिया और TT का इंतजार करने लगा।

अब वो attendant हर आधे-घंटे में इधर-उधर से आता और ₹1000 में seat offer की बात करता, पर वो आदमी ₹1000 देने को राज़ी नहीं हुआ। अंततः उस आदमी का इंतजार खत्म हुआ, रात के लगभग 2 बजे एक TT आया।

उसने उससे seat availablity की बात की। TT ने availablity के लिए मना कर दिया। कहा अगर ₹600 दे, तो confirm seat दे सकता है। आदमी मरता, क्या न करता, उसने ₹500+₹200 के notes दिए, साथ ही उसने attendant की शिकायत भी कर दी।

Attendant को TT ने हड़काया, “क्या रे, क्या खाली-पीली परेशान करता है।” उस आदमी ने पूछा, “सर कौन-सी seat है?” वो बोला, “अभी आकर बताता हूँ।” “पर सर ₹100 तो दे दीजिए, मैंने आपको ₹700 दिए थे।”

“आता है, देता है न आकर, घाई-घाई क्यों करता है।”

आधे घंटे में फिर attendant बोला, “चलो ₹600 दो, अभी मस्त seat दिलाता है।” अब तो वो TT को पैसा दे चुका था, फिर क्यों पैसे देता। 15 minutes बाद वो attendant बोला, “फिर दूसरी जगह देख लो, यहां से जगह खाली करने का।”

रात के तीन बज रहे थे और वो आदमी मथुरा के आने के इंतजार में लुटा हुआ इधर-उधर घूम रहा था। न उसको seat मिली, न पैसे, क्योंकि वो TT लौटकर ही नहीं आया। मुम्बई में लोग बड़े ईमानदार होते हैं, सब झूठ। TT और attendant दोनों मुम्बई से थे।

Tourists और मजबूर इंसान को हर जगह बेवकूफ ही बनाते हैं, लूटते ही है, चाहे मुम्बई हो, कलकत्ता हो, लखनऊ हो, दिल्ली, जयपुर, बनारस, मथुरा इत्यादि हर जगह। अभी तक दो ही जगह मिलीं, जहाँ “अतिथि देवो भव:” दिखा, ऋषिकेश और उज्जैन।

At least हमें तो, पर आपका क्या experience रहेगा, भगवान जाने। अब इस घटना से बचने का केवल एक उपाय है कि ऐसे waiting ticket से भी तभी यात्रा करें, जब आपके साथ और भी लोग हों, जिनकी confirmed seat हो, जिससे लेटकर नहीं, तो कम से कम seat पर बैठकर तो जा सकें। विशेषता ठंड की रातों में, उन्हें काटना और कष्टप्रद होता है।

Ticket train में खरीदने से आपको seat मिलेगी या धोखाधड़ी, नहीं पता। जागरूक रहिए, सजग रहिए, सावधान रहिए, प्रसन्न रहिए। ऐसी ही और जानकारी के लिए, जुड़े रहें...

Friday, 5 June 2026

Poem : जीवन के दिन चार बचे हैं

आज आप सब के साथ मुझे भोपाल के मेजर नितिन तिवारी जी की कविता को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

आज नितिन जी ने इस कविता में माध्यम से कहा है कि, दुःख अवसाद को भूलकर आगे बढ़ना ही जीवन है, और जीवन की इस सच्चाई को उन्होंने बहुत खूबसूरती से उकेरा है।

आइए, इसका आनन्द लेते हैं…

जीवन के दिन चार बचे हैं


जीवन के दिन चार बचे हैं,

आग बुझी अंगार बचे हैं।

दबे उम्मीदों की राखड़ में,

बुझी आग के सार बचे हैं।

भीतर ही जो रहे सुलगते,

गढे हुए दो चार बचे हैं।

हमने खूब सजाया उपवन,

मानो सदा रहेगा यह तन‌। 

थे बसंत उत्सव के भागी,

चले गये सब उजड़ा मधुवन।

पत्ते छीन लिये पतझड ने,

फूल नहीं बस खार बचे हैं।

कर कमजोर थाम पतवारें,

नौका जब मझधार भंवर है।

है पुरुषार्थ सिर्फ शब्दों में,

जीवन नैया भी जर्जर है।

सांसे है गिनती की बाकी,

भोगे जो व्यवहार बचे हैं।

चार रोज तो काफी हैं यदि,

कुछ करने को संकल्पित हों।

बीती बातें सभी भुला दें,

जियें जैसे आज को ही अर्पित हो।

कल का क्या जो होगा सो हो,

जियें यही सुख सार बचे हैं।।