Friday, 24 April 2026

India's Heritage : माँ बगलामुखी

(I) प्राकट्य दिवस :

आजकल हिन्दू देवी-देवताओं की मान्यता, पूजा-अर्चना को विशेष बल दिया जा रहा है, जो कि हिन्दू संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए अत्यावश्यक भी है।

माँ बगलामुखी देवी, एक ऐसा नाम, जो आज के दिन के लिए सर्वोच्च स्थान पर विराजमान हैं। कारण यह है, कि आज उनका प्राकट्य दिवस है।

पर माँ बगलामुखी कौन हैं और क्या है उनके प्राकट्य की कथा? आज India's Heritage segment में उनकी आराधना के साथ ही यह article लिख रहे हैं…

माँ बगलामुखी


(II) तिथि :

यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, जिस दिन मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था। वर्ष 2026 में बगलामुखी जन्मोत्सव 24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।

  • आरंभ- 23 अप्रैल 2026 को रात 8:50 बजे से।
  • समापन- 24 अप्रैल 2026 को शाम 7:22 बजे तक।


(III) माँ बगलामुखी :

दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या बगलामुखी, माँ पार्वती का उग्र स्वरूप हैं। इन्हें युद्ध और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी माना जाता है। वशीकरण और कीलन की शक्ति देने वाली बगलामुखी के पीतांबरा, ब्रह्मास्त्र, रूपिणी आदि नाम भी प्रमुख हैं। इनका वाहन बगुला पक्षी है।

माँ बगलामुखी के प्राकट्य की दो पौराणिक कथाएं हैं, जो इस प्रकार हैं।


(IV) पहली पौराणिक कथा :

सतयुग में भीषण तूफान के कारण पृथ्वी नष्ट होने वाली थी। भगवान विष्णु चिंतित होकर भगवान शिव के पास गए। शिव जी ने विष्णुजी से कहा, “इस संकट को सिर्फ आदिशक्ति ही दूर कर सकती हैं।” 

प्रभु विष्णुजी ने आदिशक्ति मां जगदम्बा (पार्वती माता) की कठोर तपस्या की। इससे प्रसन्न होकर देवी जगदंबा सौराष्ट्र में हरिद्रा झील में बगलामुखी के रूप में प्रकट हुईं और उन्होंने पृथ्वी को नष्ट होने से बचाया।


(V) दूसरी पौराणिक कथा :

एक राक्षस ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के ग्रंथ चुरा लिए और पाताल लोक में जाकर छिप गया। उस राक्षस से मुक्ति दिलाने के लिए बगलामुखी की उत्पत्ति हुई। उन्होंने बगुले का रूप धर कर अपनी शक्ति से उस राक्षस का वध किया और ग्रंथ ब्रह्मा को वापस सौंप दिए। पौराणिक मान्यता के अनुसार सबसे पहले ब्रह्मा ने बगलामुखी साधना का उपदेश सनकादि ऋषियों को दिया था। सनकादि ऋषियों से प्रेरित होकर देवर्षि नारद ने भी देवी की साधना की। देवी के दूसरे उपासक भगवान विष्णु जी ने परशुराम को यह विद्या प्रदान की और उन्होंने इस विद्या को द्रोणाचार्य को प्रदान किया।


(VI) माँ बगलामुखी का स्वरूप :

वैदिक काल में सप्तऋषियों ने देवी बगलामुखी की साधना की। भगवान कृष्ण ने भी महाभारत के युद्ध से पूर्व पांडवों से बगलामुखी की साधना करवाई थी।

इनकी साधना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। इनके भैरव महाकाल हैं। बगलामुखी की दो भुजाएं हैं। इनके दाहिने हाथ में गदा है तथा बायें हाथ से एक दानव की जीभ पकड़कर उसे मारते हुए दर्शाया जाता है। देवी की यह छवि उनके स्तंभन स्वरूप को प्रदर्शित करती है।


(VII) माँ बगलामुखी की सोलह शक्तियां :

कहा जाता है कि माँ बगलामुखी सोलह शक्तियों से परिपूर्ण थीं, उनकी सोलह शक्तियां इस प्रकार हैं-

  • मंगला (मंगलकारी और शुभ करने वाली)
  • वश्या (शत्रुओं और प्रतिकूल परिस्थितियों को वश में करने वाली)
  • अचलाय (स्थिर रहने वाली)
  • मुंधरा (शत्रु के मुख को बंद करने वाली)
  • स्तंभिनी (शत्रु की क्रिया, वाणी और बुद्धि को स्तंभित करने वाली)
  • बलाय (शारीरिक व मानसिक बल प्रदान करने वाली)
  • जृम्भिणि (शत्रु के ज्ञान और चेतना को जड़ करने वाली)
  • मोहिनी (मोहने वाली)
  • भाविका (भावनाओं को समझने वाली और भावातीत)
  • धात्री (संसार के धारण करने वाली)
  • कलना (समय को नियंत्रित करने वाली)
  • भ्रामिका (शत्रुओं में भ्रम पैदा करने वाली)
  • कल्पमसा (दुष्टों का नाश करने वाली)
  • कालकर्षिणि (काल को आकर्षित करने वाली)
  • भोगस्था (भोग-विलास और सुख प्रदान करने वाली)
  • मंदगमना (शांत और स्थिर गति वाली)


(VIII) माँ बगलामुखी का महत्व :

इस दिन को शत्रुओं पर विजय, वाद-विवाद, और मुकदमों में सफलता के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। माँ बगलामुखी को 'पीताम्बरा' भी कहा जाता है, जो 'स्तंभन' (रोकने) की शक्ति हैं।


(IX) बगलामुखी माता का मंदिर : 

बगलामुखी देवी मंदिर, विशेषकर नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) (उज्जैन से ~100 किमी) और कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में स्थित, अत्यंत सिद्ध और प्राचीन शक्तिपीठ हैं। पांडव कालीन यह मंदिर शत्रुओं पर विजय, कोर्ट-कचहरी बाधाओं, और तांत्रिक अनुष्ठान के लिए प्रसिद्ध हैं।

नलखेड़ा, आगर मालवा (मध्यप्रदेश) मंदिर की मुख्य बातें:

स्थान: आगर-मालवा जिले में लखुंदर नदी के किनारे, नलखेड़ा।

महत्व: यह स्वयंभू सिद्धपीठ है, जहां पांडवों ने महाभारत युद्ध से पहले विजय प्राप्ति के लिए पूजा की थी।

विशेषता: यहाँ मां बगलामुखी की तीन मुख वाली त्रिशक्ति के रूप में पूजा होती है।

पूजा: शत्रु नाशक और करियर में सफलता के लिए यहाँ विशेष तांत्रिक हवन और पूजन किया जाता है। 

दतिया (मध्य प्रदेश) स्थित श्री पीतांबरा पीठ देश का अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली शक्तिपीठ है, जो मां बगलामुखी (पीतांबरा देवी) और धूमावती देवी को समर्पित है। 1935 में स्थापित, यह मंदिर शत्रुओं के नाश, मुकदमों में जीत और तांत्रिक साधना के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित वनखंडेश्वर शिव मंदिर महाभारतकालीन माना जाता है।

इस वर्ष दतिया के इस मंदिर में भव्य आयोजन किया जा रहा है। अनेकानेक श्रृद्धालुओं का जमावड़ा भोर की प्रथम बेला से लग गया है।


(X) दतिया बगलामुखी मंदिर :

  • स्थान- मध्य प्रदेश के दतिया जिले में, झांसी से लगभग 30 किमी की दूरी पर।
  • स्थापना- स्वामीजी महाराज (गोलोकवासी) द्वारा 1935 के आसपास।
  • प्रमुख देवता- मां बगलामुखी (पीतांबरा देवी), धूमावती देवी (जो भारत में एकमात्र स्थान पर हैं), और वनखंडेश्वर महादेव।
  • विशेषता- बगलामुखी देवी का रंग पीला है, इसलिए उन्हें पीतांबरा भी कहते हैं और यहाँ पीत (पीले) रंग की वस्तुएं ही चढ़ाई जाती हैं। यहाँ तंत्र साधना और विशेष हवन (जैसे हल्दी हवन) कराए जाते हैं, जो कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • समय- सुबह 6:00 बजे से रात 9:30 बजे तक (मंगल आरती सुबह 6 बजे और संध्या आरती 7:30 बजे)।
  • कैसे पहुँचें- दतिया railway station (झांसी-ग्वालियर मार्ग) निकटतम है।
  • पौराणिक महत्व- मान्यता है कि पांडवों ने महाभारत युद्ध से पहले माता की पूजा की थी, और यह मंदिर स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है।
  • पूजा विधि- माँ बगलामुखी को पीला रंग प्रिय है, इसलिए भक्त पीले वस्त्र पहनकर, पीली वस्तुओं (पीले फूल, हल्दी, पीले भोग) के साथ माता की पूजा करते हैं। 

माँ बगलामुखी की जय!

माँ सबके रुके हुए कार्य को पूरा करें, सभी को सुख प्रदान करें।


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Thursday, 23 April 2026

Article : Airfryer and its Recipes

(I) Queries with Airfryers :

कुछ दिनों से the airfryer style segment की recipes बता रहे हैं, तो कुछ viewers का पूछ्ना था कि कौन सा airfryer लें, कितनी capacity का लें, कौन-कौन से utensils की requirement है, क्या-क्या बन सकता है etc.

तो आज आपकी सारी queries solve कर देते हैं, और बताते हैं कि आप कैसे airfryer king और queen बन सकते हैं…

Airfryer and its Recipes


(II) Companies of Airfryers :

सबसे पहले आप को बता दें कि भारत में airfryer कई famous companies द्वारा बनाए जाते हैं, जिनमें Philips, Havells, Prestige, Agaro, Inalsa, Wonderchef, Kent, Pigeon, Milton और Xiaomi (Mi) main brands हैं। ये brands healthy cooking के लिए famous हैं और इनके airfryers different budget and capacity में उपलब्ध हैं।

तो इनमें से कौन-सा लें? आपको बता दें, सभी brands अच्छी हैं और function-wise, more-or-less सब same हैं, आप अपने budget के according लें सकते हैं।

बस लेते समय ध्यान रखिएगा कि ऐसा airfryer लें, जिसमें glass window बनी हो और अंदर LED light जलती हो। इससे food बनते हुए दिखता है तो इसे बार-बार खोल कर check नहीं करना पड़ता है कि खाना बना कि‌ नहीं।


(III) Suitable Capacities :

  • 2 to 4 Members- 4.2 litres sufficient है।
  • 4 to 6 Members- 4.2 से 6.2 litres तक का appropriate है।

वैसे कितनी capacity का लेना है, यह इस बात पर भी depend करेगा कि आप उसे use कितना करेंगे।


(IV) Required Utensils :

इसमें plastic and glass के utensils सही नहीं रहते हैं। इसके लिए silicon moulds और metallic utensils use कर सकते हैं।

वैसे बहुत से food items तो इसकी rack पर रखकर भी बन जाते हैं।


(V) Easy Handling :

Airfryer बहुत user-friendly है, इतना कि बच्चे भी इसमें कुछ भी बहुत easily बना सकते हैं। जलने का डर नहीं है, बस brushing के लिए बड़ा brush रखें, दूसरा food items को उलटने-पलटने के लिए proper tongs रहें। 

साथ ही silicon mitts होने से काम करना easy हो जाता है। इसलिए silicon mitts अवश्य लें, यह e-commerce websites पर easily available रहता है।


(VI) Easy Maintenance :

Airfryer बहुत user-friendly है, maintenance के point of view से भी।

इसकी rack and basket nonstick cookware है। Easily clean हो जाता है। Dishwasher में भी वो धो सकते हैं।

आप चाहें तो tissue paper or moist cloth से भी इसे clean कर सकते हैं।


(VII) How to Use :

  • For best results, airfryer को preheat अवश्य करें।
  • उसकी rack को ghee or oil से grease अवश्य करें।
  • Different items के लिए different temperatures रखें। Thumbrule पर सभी को 200°C पर ही नहीं बनाएं।
  • Food items पर butter, ghee or oil से की गई brushing से जितना कम-से-कम oil चाहिए, सिर्फ उतना ही लगता है, बाकी basket में store हो जाता है, जिसे आप बाद में निकाल कर reuse भी कर सकते हैं। 
  • ध्यान रखिएगा कि for perfect result, खाना बनाने के लिए जो भी रखें, space के साथ रखें, चढ़ा कर या बहुत सटाकर न रखें।
  • आप इसमें cooking, baking, frying, roasting, reheating etc. कर सकते हैं, वो भी less oily, easily and less timings के साथ।

हमने बहुत-सी recipes share की हैं, जिसका link नीचे दिया है। आपको इनसे बहुत अच्छे से idea हो जाएगा कि airfryer में क्या और कैसे बनाएं- https://shadesoflife18.blogspot.com/search/label/Recipes%20-%20the%20airfryer%20style?m=0

वैसे beginners के लिए general food items के लिए time and temperature mentioned रहता है, पर आप एक बार हमारी recipe try कर लेंगे, तो आप beginner नहीं बल्कि expert बन जाएंगे।

तो आप ready हैं ना expert बनने के लिए?

Wednesday, 22 April 2026

Poem : चलो वृक्षारोपण करते हैं

आज पृथ्वी दिवस के पावन पर्व पर आइए, उसे धन-धान्य से परिपूर्ण करने का प्रण लेते हैं।

उसी प्रण को काव्यरूप में प्रस्तुत किया है।

चलो वृक्षारोपण करते हैं


क्या कभी सोचा है यूं,

पृथ्वी को धरा कहते हैं क्यूं?


क्योंकि वो ही है जो

माँ की तरह ही 

हम सबके दुःखों को,

अपने अंक में धरती है।


और बदले में देने को,

अपनी झोली तुम्हारे

सुखों से भरती है।


देती है वो अविरल बहता,

कल-कल करता जल।

फल-फूल, सब्जी, और

सुनहरे भविष्य का कल।


तो चलो हम भी,

कुछ ऐसा करते हैं।

धरित्री के अंक को,

हरियाली से भरते हैं।


वो सदैव धन-धान्य से,

परिपूर्ण रहे,इसके लिए 

चलो वृक्षारोपण करते हैं।


 Happy Earth Day!