Thursday, 5 November 2026

Article : पंचदिवसीय दीपोत्सव पर्व व मुहुर्त

(I) Arrival of Deepotsav :

हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा पर्व दीपोत्सव आ रहा है। यह पांच दिवसीय त्यौहार है, जिसमें प्रत्येक दिन अलग-अलग ईश्वरीय रूप की पूजा-अर्चना की जाती है।

पिछले कुछ सालों से यह confusion रहने लगा कि कब किस दिन क्या है।

तो बस इसी confusion को दूर करने के लिए आज की post share कर रहे हैं, जिसमें दिन और मुहूर्त दोनों की जानकारी दी है…

पंचदिवसीय दीपोत्सव पर्व व मुहुर्त


(II) Date of Deepotsav :

वर्ष 2026 में दीपावली का दीपोत्सव 6 नवंबर से 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। पूरे दीपोत्सव का कार्यक्रम इस प्रकार है।


(III) Dates of Deepotsav :

दीपोत्सव का आरंभ धनतेरस के साथ होता है, जिसमें अपने सामर्थ्य के अनुसार सोना-चांदी, बर्तन, खील-खिलौने, लाई-बताशा, दीया-बाती, झालर, तोरण, झाड़ू इत्यादि खरीदा जाता है।


(IV) Dhanteras :

धनतेरस के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं।

  • तिथि प्रारंभ- 06 November 2026 को 10:30 AM (सुबह) से
  • तिथि समाप्त- 07 November 2026 को 10:47 AM (सुबह) तक
  • शुभ मुहूर्त- 06:02 PM से 07:57 PM (शाम) तक
  • प्रदोष काल- 05:33 PM (शाम) से 08:09 PM (रात) तक
  • वृषभ काल- 06:02 PM से 07:57 PM (शाम) तक

इस शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।


(V) Chhoti Diwali :

दीपोत्सव के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी/छोटी दीपावली/रूपचौदस के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन तक में सारी साफ-सफाई ख़त्म कर लेनी चाहिए, तथा रात में घर के बाहर एक बड़ा-सा तेल का दीया अवश्य जलाना चाहिए।

यह मानते हैं, इससे घर की सभी समस्याएँ और कष्ट जल जाते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी व यमराज जी की पूजा-अर्चना होती है।

चतुर्दशी के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं।

  • तिथि प्रारंभ- 7 November 2026 को 10:47 बजे (सुबह)
  • तिथि समाप्त- 8 November 2026 को 11:47 बजे (सुबह) तक


(VI) Diwali :

तीसरा दिन मुख्य है, इसमें सबसे बड़ा पर्व दीपावली आती है, जिसमें गणेश जी और लक्ष्मी माता का पूजन किया जाता है। गणेश जी शुभता और माता लक्ष्मी धन-धान्य की देवी हैं। इनकी कृपा से सम्पूर्ण संसार सुख-समृद्धि से पूर्ण होता है। 

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।

  • शुभ मुहूर्त- 5:54 PM से 7:50 PM (शाम) तक (कुलावधि= 1 घंटा 56 मिनट)
  • प्रदोष काल- 5:31 PM से 8:09 PM (शाम) तक
  • वृषभ काल- 5:54 PM से 7:50 PM (शाम) तक
  • तिथि प्रारंभ- 8 November 2026 को 11:27 AM (सुबह)
  • तिथि समापन- 9 November 2026 को 12:31 PM (दोपहर)


(VII) Goverdhan Puja :

चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है, जो कि इस वर्ष 2 दिन (9 व 10 को) है। पर किस दिन को अधिक मान्यता है और क्यों है, वह भी समझ लीजिए।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।

10 November:

  • प्रातःकाल पूजा मुहूर्त- 06:40 AM से 08:50 AM (सुबह) तक (अवधि= 2 घंटे 10 मिनट)
  • अभिजीत मुहूर्त- 11:43 AM से दोपहर 12:26 AM (दोपहर) तक
  • गोधूलि मुहूर्त- 05:30 PM से 05:56 PM (शाम) तक

09 November:

  • तिथि प्रारंभ- 9 November 2026 को 12:31 PM (दोपहर)
  • तिथि समाप्त- 10 November 2026 को 2:00 PM (दोपहर)

उदया तिथि के अनुसार, सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाया जाएगा।


(VIII) Bhai Dooj :

दीपोत्सव के पांचवें दिन भाईदूज व चित्रगुप्त महाराज की पूजा होती है। हालांकि इस वर्ष यह पांचवें दिन न होकर छठे दिन होगा, और इसके साथ ही दीपोत्सव पूर्ण होगा।

तिलक का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।

  • समय- 01:10 PM से लेकर 03:20 PM (दोपहर) तक
  • द्वितीया की शुरुआत- 02:00 PM (दोपहर) से
  • द्वितीया की समाप्ति- 11 November 2026 को 03:53 PM (दोपहर) तक

चित्रगुप्त पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।

  • शुभ मुहूर्त- 1:10 PM से 3:20 PM (दोपहर) तक (नई दिल्ली पंचांग के अनुसार)।


खुशियों के साथ हर घर में दीपोत्सव मनाया जाए। हे माँ लक्ष्मी और हे गणेश जी, आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि सब जगह शुभ हो, धन-धान्य, सुख-समृद्धि हो, सभी को अपने अपनों का साथ मिले।

जय माँ लक्ष्मी, जय गणेश, जय हनुमान, जय कुबेर, जय धन्वंतरि, जय चित्रगुप्त महाराज, सभी देवी-देवताओं की जय!

Wednesday, 4 November 2026

India's Heritage : दीपावली व गेंदा

दीपोत्सव का पावन‌ पर्व आ रहा है। इसके आते ही हर छोटे-बड़े घरों में, showrooms, offices, दुकानों में, हर जगह गेंदे की माला की सजावट देखने को मिलती है।

पर‌ कभी सोचा है क्यों?

आप कहेंगे कि गेंदें के फूल का season है, तो यह बहुतायत से और किफायती कीमत पर मिल जाते हैं।

बिल्कुल सही। पर इस कारण से ज्यादा बड़ा कारण है, हर तरफ गेंदें की माला के होने के। 

आइए जानते हैं, उन कारणों को आज की इस India's Heritage की post से...

दीपावली व गेंदा


दीपावली के पावन पर्व पर गेंदे की माला का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।


(I) शुभता और समृद्धि :

गेंदे के फूल का पीला और नारंगी रंग सूर्य का प्रतीक माना जाता है, जो ऊर्जा, प्रकाश और नई शुरुआत को दर्शाता है। हिन्दू परंपरा में ये रंग बेहद शुभ और समृद्धि दायक माने गए हैं।


(II) देवी लक्ष्मी का स्वागत :

दीपावली की रात माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने और उनका स्वागत करने के लिए घरों के मुख्य द्वार, खिड़कियों और पूजा स्थल पर गेंदे की माला या तोरण बांधे जाते हैं।


(III) सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा :

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गेंदे के फूलों की सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है और घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मकता एवं खुशहाली लाती है।


(IV) पूर्णता का प्रतीक :

गेंदे का फूल अनगिनत छोटी पंखुड़ियों से मिलकर एक पूर्ण फूल बनता है, जिसे सनातन परंपरा में ‘पूर्णता’ और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।


(V) पारंपरिक सजावट :

पीढ़ियों से घरों, मंदिरों, दुकानों और कार्यालयों को सजाने के लिए गेंदे की प्राकृतिक मालाओं का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाता आ रहा है।


और यही कारण हैं, जहाँ भी शुभ कार्य सम्पन्न होता है, वहाँ गेंदें की माला से सजावट की जाती है, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो शुभता का पूरक है, गेंदें के फूल।

तो बस, अपने घर और कार्यस्थल को गेंदें की माला से सजाएँ और माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें।

Tuesday, 3 November 2026

India's Heritage : हिन्दू त्यौहार का दिन निर्धारित क्यों नहीं?

एक छोटे बच्चे की उत्कंठा थी कि, Christian लोगों के festival कितने अच्छे होते हैं न।

हर त्यौहार का एक fixed दिन, फिर चाहे Good Friday हो, Easter हो, Christmas हो, या New Year।

सब fixed, हर साल same day, पर हमारा नहीं, बल्कि अभी तो बहुत अधिक confusion तब हो जाता है, जब कोई त्यौहार एक दिन में न होकर दो दिन होते हैं।

समझ नहीं आता है, इतना chaos है क्यों? हमारे त्यौहार fixed date में ही क्यों नहीं आते हैं?

तो जो उस बच्चे को समझाया गया, आज उसे ही India's Heritage segment में share कर रहे हैं…

हिन्दू त्यौहार का दिन निर्धारित क्यों नहीं?


पहली बात उनके festival की fixed date होती है, क्योंकि calendar भी उनका और त्यौहार भी उनके, तो date तो fixed होनी ही है।

हमारे festival की भी date fixed रहती है।

हमारी festival की रहती है? हमारी तो नहीं रहती है।

रहती है, अगर उस calendar को follow करें, जिसके अनुसार हमारे त्यौहार निर्धारित किए गए हैं।

हिन्दू धर्म Gregorian calendar (current) से बहुत पहले बना था और हमारे त्यौहार भी।

और वो calendar कहलाता है पंचांग calendar, जिन्हें कुछ घरों में follow भी किया जाता है।

अब समझते हैं कि तिथियों का फ़र्क क्यों होता है?

समय, दिन, महीना, वर्ष और त्यौहार, सबकी तिथि निर्धारित करने के लिए गणना सूर्य या चंद्रमा की परिक्रमा पर आधारित होती है।

दरअसल हिन्दी पंचांग (विक्रम संवत या हिन्दू calendar) में वर्ष की गणना मुख्य रूप से चंद्र मास और सौर मास दोनों के आधार पर की जाती है, इसलिए दिनों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।

सामान्य तौर पर एक चंद्र वर्ष में 354 दिन होते हैं (प्रत्येक माह 29 या 30 दिन का होता है और 12 महीने होते हैं)। मतलब, जो calendar सौर वर्ष पर आधारित होता है, चंद्र वर्ष पर निर्धारित calendar उससे 11 दिन पहले ही अपना एक वर्ष पूर्ण कर लेता है। और हिन्दू calendar (पंचांग calendar) चंद्र वर्ष पर ही निर्धारित होता है।

चंद्र वर्ष और सौर वर्ष (365 दिन) के बीच लगभग 11 दिन के अंतर को संतुलित करने के लिए हर करीब 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस वर्ष में 383 से 385 दिन होते हैं।

सूर्य की गति के आधार पर जब गणना की जाती है (जैसे सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश पर), तो सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है (अंग्रेजी calendar भी सौर वर्ष पर ही निर्धारित होता है।)

अब इस जानकारी के अनुसार calculation कीजिए, हिन्दू त्यौहार भी fix date में ही आते हैं। हर साल 11 दिन पहले और हर 3 साल में एक महीना जोड़कर।

दूसरों की संस्कृति की तारीफ करने से पहले, एक बार सनातन संस्कृति समझकर तो देखिए, उससे उन्नत, उससे सटीक और उससे समृद्ध कुछ नहीं।

जय सनातन, जय हिन्दू!