Thursday, 1 October 2026

Recipe : Bhelpuri

आज की recipe बहुत common recipe है, आप में से बहुतों को बनानी भी आती होगी।

पर इसको डालने का कारण यह है कि हमारे एक viewer की demand थी कि हम इसकी recipe share करें, क्योंकि उसे हमारे द्वारा बनाई गई भेलपुरी बहुत पसंद है।

भेलपुरी एक ऐसी recipe है, जो कि विभिन्न states की delicacy है, इसके flavour में थोड़ा फेरबदल और नाम बदल जाता है।

और कमाल की बात यह है कि हर अपने state में as a street food यह famous भी बहुत है। चाहे महाराष्ट्र की भेलपुरी हो, बंगाल की झालमुरी हो, या उत्तर प्रदेश का चुरमुरा, सब एक से बढ़कर एक बेमिसाल…

Bhelpuri



Ingredients :

  • Puffed rice - 1 cup
  • Besan Bhujia - 1 packet (of ₹5)
  • Aloo Bhujia - 1 packet (of ₹5)
  • Salted Peanuts - 1 packet (of ₹5)
  • Onion - 1 (medium) 
  • Boiled potato - 1 (medium)
  • Boiled peas - 1 tbsp.
  • Tomato - 1 (medium) 
  • Fresh coriander leaves - handful
  • Green chillies - as per taste
  • Lemon juice - 1 tsp.
  • Salt - as per taste
  • Black salt - ½ tsp.
  • Cucumber - 1 (small)


Method :

  1. प्याज़, टमाटर, खीरा, उबला आलू, धनिया-पत्ती और हरी मिर्च को finely chop कर लीजिए।
  2. एक बड़ा-सा bowl लीजिए, उसमें लइया/लाई/मुरी/मुरमुरे, आप जिस भी नाम से जानते हैं, ले लीजिए।
  3. उसमें बेसन भुजिया (बेसन के सेव), आलू भुजिया और भुनी मूंगफली डालकर अच्छे से mix करके dry mix ready कर लीजिए।
  4. एक अलग bowl लीजिए, उसमे finely chopped veggies और उबली हुई मटर डाल दीजिए।
  5. अब इसमें नींबू का रस, salt, और black salt डालकर अच्छे से mix करके wet mix ready कर लीजिए।
  6. Serve करने से just पहले ही dry mix और wet mix को अच्छे से मिला दीजिए।

Savour this palatable, delectable, and spicy Bhelpuri!


Tips and Tricks :

  • जब भी आप भेलपुरी तैयार करें, ध्यान रखिएगा कि सारे dry ingredients fresh और crispy हों।
  • जब भी मुरमुरे खरीदें, कम amount में खरीदें और उसे airtight container में रखें।
  • अगर आप की मुरी soggy और soft हो गई है, तो पहले dry roast करके उसे crispy कर लीजिए।
  • बेसन भुजिया, आलू भुजिया और मूंगफली crispy हों इसके लिए उनके ₹5 या ₹10 वाले packets use करें। छोटे-छोटे packets में freshness और crisp ज्यादा अच्छा रहता है।
  • हम हमेशा Haldiram’s के products ही use करते हैं। Keeping in mind, अच्छी quality के ingredients लेने से dish के अच्छे बनने की chances बढ़ जाते हैं। 
  • प्याज़ डालने से crunchy taste और टमाटर, आलू व खीरा से juicy taste आता है।
  • नींबू और हरी मिर्च से खट्टा और चटपटा स्वाद आएगा।
  • अगर आप प्याज नहीं खाते हैं तो उसके जगह finely chopped मूली भी डाल सकते हैं।
  • आप कहेंगे कि यह तो वो भेलपुरी नहीं है जो Mumbai में मिलती है। हाँ, बिल्कुल नहीं है। भेलपुरी और झालमुरी की recipe भी जल्दी share कर देंगे, अगर आप की demand आती है।
  • याद रखियेगा कि dry mix और wet mix दोनों पहले अलग-अलग ready कीजिएगा, फिर mix कीजिए, जिससे dry mix में freshness और crisp देर तक बनी रहे।
  • हमने सफ़ेद और काला दोनों नमक डाला है, काले नमक को डालने से taste enhance हो जाता है।
  • ध्यान रखिएगा कि salt का amount सिर्फ इतना हो कि वो wet mix से बस उतना ही ज्यादा हो, जो कि मुरमुरे के लिए required हो, क्योंकि dry mix के बाकी ingredients already salty हैं।
  • मेरे बेटे और उसके दोस्तों को यह बहुत पसंद है, तो हम इसे उसके tiffin में भी रखते हैं।
  • मुरमुरे और दोनों भुजिया का proportion ऐसा हो, कि दोनों भुजिया मिलाकर जो amount हो, उससे मुरमुरे थोड़े plus में हो।
  • याद रखियेगा कि पूरी prepare करके नहीं रखनी है, बल्कि wet mix छोटे डिब्बे और dry mix main tiffin box में रखें।  जिससे बच्चा अपने recess time में dry mix और wet mix मिलाकर crispy और tasty भेलपुरी ready कर लेगा।
  • बेटे के tiffin में dry mix में केवल लइया, आलू भुजिया और बेसन भुजिया ही mix करते हैं। उसे मूंगफली पसंद नहीं है, और wet mix में मटर, खीरा, और हरी मिर्च नहीं डालते हैं, क्योंकि वो भी उसे पसंद नहीं है।

अब देर किस बात की? यह स्वादिष्ट Bhelpuri खुद भी खाएँ और बच्चों को भी खिलाएँ, उनके tiffin में भेजकर…

Wednesday, 30 September 2026

Article : दुखों की दुनिया

आजकल मन अशांत-सा रहता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो दुनिया में सबसे अधिक दुःख हमें ही है।

न किसी से मिलने की इच्छा, न कहीं जाने की। मानो दुनिया रुकी-सी, थमी-सी हो गई हो। आपको भी कभी ऐसा लगता होगा? 

पर एक बात कहें, मानो तो आप ही सबसे ज़्यादा दुःखी, और अगर चारों ओर नजर घुमाएंगे तो एहसास होगा कि पूरी दुनिया ही दुखों की है। A true sense of melancholy!

दुखों की दुनिया


कहीं कोई सुखी है ही नहीं। किसी को किसी बात की परेशानी, तो किसी को किसी और बात का ग़म।

सच में इधर कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात हुई कि एहसास हुआ कि अभी भी हम ही भाग्यशाली हैं कि अभी भी हम बहुत सुखी हैं।

दरअसल हम मनुष्यों की एक विशेष आदत होती है, कि हम दूसरे के दुःख को कम और अपना बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं।

जबकि दुख तो दुःख होता है, कम या ज़्यादा कहाँ होता है। वैसे ही जैसे दर्द तो दर्द होता है, किस जगह हो‌ रहा है, उससे उसकी intensity में कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

तो दूसरों की तकलीफ़, कष्ट, परेशानी की समझने का प्रयास कीजिए, उसे खत्म करने की कोशिश कीजिए। इससे देखिएगा, आपके कष्ट अपने आप कम लगने लगेंगे।

और शायद सचमुच दूसरों के दुःख कम करते-करते आपके दुःख कम हो जाएँ या फिर शायद खत्म ही हो जाएँ।


कबीरदास जी का यह दोहा शायद आपने सुना होगा-

“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।”


आज उसी दोहे की तर्ज़ पर-

“दुःखी जो देखन मैं चला, दुःखी मिलिया सब कोय।

जो दिल खोजा आपना, मेरा दुःख ही कम होय।।”


हे ईश्वर, आपसे कामना है कि इस दुखों की दुनिया में से सबके दुखों को खत्म कर दें और सभी को सुखी करें।

सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे भवन्तु निरामया...

Tuesday, 29 September 2026

Article : हमारे अपनों के दिन

इस वर्ष पितृपक्ष या कनागत की शुरुआत 26 September (शनिवार) को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ हो चुकी है, और इसका समापन 10 October (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।

इन विशेष दिनों को हमारे अपनों के दिन भी कहा जा सकता है, क्योंकि इन दिनों में हम किसी देवी-देवता की पूजा-अर्चना नहीं करते हैं, बल्कि अपने पूर्वजों की पूजा-अर्चना करते हैं।

अपने पूर्वजों के विशेष दिन में पंडित जी को बुलाकर उनके नाम से दान-पुण्य, पूजा-हवन इत्यादि करते हैं‌।

पर यह विशेष दिन हमारे लिए और अधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाते हैं, क्योंकि इन दिनों में हम ईश्वर से अधिक नज़दीक हो जाते हैं…

हमारे अपनों के दिन


हमारे द्वारा की गई पूजा-अर्चना ईश्वर जल्दी स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि इस समय में की गई पूजा-अर्चना दान-पुण्य इत्यादि हमारे पूर्वजों से होते हुए ईश्वर तक पहुंचते हैं।

हमारे पूर्वज, ईश्वर के प्रिय होते हैं और हम अपने पूर्वजों के। तो हो गई न ईश्वर से नज़दीकी!

पर क्या इसमें उन्हीं पूर्वजों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जो स्वर्गवासी या ब्रह्मलीन हो गए हैं?

नहीं, ऐसा नहीं है कि केवल उन्हीं की पूजा-अर्चना से पुण्य अर्जित किया जा सकता है। 

बल्कि उनकी पूजा-अर्चना के साथ-साथ ही अगर आप अपने जीवित दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता या सास-ससुर की सेवा करेंगे, उनकी इच्छाओं की पूर्ति करेंगे, उनके साथ समय व्यतीत करते हैं, तब भी आप को वही पुण्य मिलेगा।

यह विशेष दिन हमारे अपनों के हैं, उनकी सेवा और पूजा-अर्चना के दिन है।

भारतीय संस्कृति में यह 16 दिन इसलिए ही निर्धारित किए गए हैं, कि हर साल हम atleast 16 दिन अपने पूर्वजों से जुड़ें, उन्हें धन्यवाद दें, उनके नाम से दान-पुण्य पूजा-अर्चना करें।

पर जो चले गए, उनके लिए विधिवत कर्मकाण्ड संस्कार करना, और हमारे जो बुजुर्ग जीवित हैं उन्हें neglect करने से कुछ पुण्य अर्जित नहीं होगा।

अगर पूरी प्रक्रिया विधिवत करनी है, तो जो ब्रह्मलीन पूर्वजों के लिए पूजा-अर्चना दान-पुण्य करें और जो बुजुर्ग जीवित हैं उनकी सेवा-सुश्रुषा करें, उन्हें मान-सम्मान दें, उनके साथ समय व्यतीत करें।

तब आपकी पूजा अर्चना विधिवत पूर्ण होगी। और उनके आशीर्वाद से होंगे आपके सभी कार्य सम्पन्न व पूर्ण होगी सभी मनोकामनाएं, जिससे आप सुखी, स्वस्थ और समृद्ध रहेंगे।

एक और सबसे बड़ी बात होगी, हमारे अपनों के दिन में अपने पूर्वजों और बुजुर्गों की सेवा से, कि आपके बच्चों में संस्कार आएंगे, वो भी सबसे जुड़ेंगे और सबसे बढ़कर वो सीखेंगे। अपनों से जुड़ना, उनकी सेवा करने, उन्हें मान-सम्मान देना।

और एक दिन पलट कर यह आपको भी सुख प्रदान करेगा, क्योंकि ध्यान रखिएगा कि एक दिन बुजुर्ग सबको होना है और ब्रह्मलीन भी।

तो जाने से पहले सबकी सेवा कर लीजिए, क्योंकि ईश्वर भी उन्हीं से प्रसन्न होते हैं, जिनके पूर्वज और बुजुर्ग उनसे प्रसन्न हैं।

हमारे सभी पितर तृप्त रहें, हम से प्रसन्न रहें और उनकी कृपा दृष्टि सदैव बनी रहे।

हमारे सभी पूर्वजों व बुजुर्गों को शत-शत प्रणाम!