Thursday, 27 August 2026

Story of Life : राखी का सौदा (भाग-1)

राखी का सही अर्थ बताती हुई, हृदयस्पर्शी कहानी...

राखी का सौदा (भाग-1)


कृष और कृतिका दोनों में बहुत प्यार था। एक-दूसरे के बिना चैन नहीं था। इतना प्यार की उन्हें मां-पापा से पहले एक दूसरे की याद आती थी। 

लतिका दोनों बच्चों का प्यार देख निहाल हो जाती, पर कभी-कभी उसको यह चिंता भी सताती कि क्या यह प्यार इनकी जिंदगी भर रहेगा? इनकी शादी हो जाने से कोई फर्क तो नहीं आएगा?

प्रणव कहता, “तुम नाहक चिंता करती हो, भाई-बहन का रिश्ता सबसे निराला होता है। जब अभी उनको अपने आगे हमारी याद नहीं सताती है, तो कभी भी कोई भी कारण इन लोगों के प्यार में दरार नहीं डाल सकता।”

दिन गुजरते गए और कृष व कृतिका का प्यार गहराता गया।

कृष की शादी सुहाना से हुई। वो भी घर में रच-बस गई।‌ सुहाना और कृतिका की भी खूब पटती थी।

कृतिका की शादी के समय कृष और सुहाना काम में इतने ज्यादा जोश से लगे थे, कि समझ नहीं आ रहा था कि कृतिका लतिका और प्रणव की बेटी है या कृष और सुहाना की।

शादी खूब धूमधाम से हुई। हर ओर शादी के arrangements की वाहवाही हो रही थी।

विदाई के समय कृतिका लतिका और प्रणव से गले मिलकर रोने लगी, पर जब उसके भैय्या-भाभी आए, तो वो उनसे लिपट कर इतना तेज़ रोने लगी कि उसे संभालना मुश्किल हो रहा था।

उसे विह्वल देखकर, कृष और सुहाना कृतिका को उसके ससुराल तक छोड़ कर आए।

पहली राखी पर जब कृतिका मायके में पहुंची तो ढोल-नगाड़े के साथ उसके भैय्या-भाभी ने उसका भव्य स्वागत किया। 

पूरा त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया और विदा के समय कृष ने कृतिका के साथ गहने, रुपये-पैसे, कपड़े, मेवा-मिठाई आदि इतना ज्यादा दिया, जैसे लोग शादी-विवाह में बेटी को देते हैं।

अब तो यह सिलसिला हर राखी में ही होता, कृतिका की ससुराल में भी सब कहते कि तुम्हारा भाई जहां से निराला है, इतने सालों तक कौन इतना मान-मनुहार करता है। तुम दोनों भाई-बहन का प्यार ऐसा ही बना रहे।

पर सब दिन एक से कहां होते हैं। 

कृष का business थोड़ा घाटे में जाने लगा। राखी आने को थी, तो उसकी चिंता और बढ़ गई कि बहन आएगी तो हर बार की तरह उतना नहीं दे पाएगा। 

तो क्या करें, पैसे उधार ले? या इस बार घर पर न रहें? वो इसी उहापोह में था, तो सुहाना ने कहा कि उधार लेकर भी वो उतना अधिक नहीं कर पाएंगे, तो अच्छा रहेगा कि इस साल घर पर न रहें और एक बार सब ठीक-ठाक हो जाने पर वैसा ही मान-मनुहार कर लेंगे।

सुहाना ने कृतिका को फोन करके बता दिया कि वो लोग business के कारण abroad जा रहे हैं, बड़ी deal मिली है, आने से बताएंगे और उसके राखी के तोहफे तभी उसके घर लेकर आएंगे।

कृतिका ने हाँ तो कह दिया, पर उसको विश्वास नहीं था कि उसके भैया उससे राखी बंधवाए बिना रह लें। वो राखी में आई तो उसने देखा कि घर पर सचमुच ताला लगा था। 

यह देखकर उसके आंसू छलक आए, भैया ने ऐसा कैसे कर लिया, वो पलटी ही थी कि उसका ध्यान गया…

आगे पढ़ें, राखी का सौदा (भाग-2) में…

Wednesday, 26 August 2026

Recipe : Easy Kurkuri Bhindi

Kurkuri Bhindi, आप कहेंगे कि कुछ दिन पहले भी तो यह recipe share की थी, तो फिर क्यों?

Actually, पहले authentically बनने वाला method share किया। दिए गए links पर आप authentic व airfryer style Kurkuri Bhindi देख सकते हैं-

पर वो बहुत time taking और मेहनत वाला method है। इसलिए कुछ viewers की demand थी कि इसका कोई easy method बता दें…

Easy Kurkuri Bhindi


Ingredients :

  • Ladyfinger - 300 gm.
  • Garlic - 5 to 7 cloves
  • Salt - as per taste 
  • Turmeric powder - ½ tsp. 
  • Coriander powder - 1 tsp. 
  • Red chilli powder - as per taste 
  • Amchur powder - 1 tsp.
  • Rice flour - 2 tbsp.
  • Oil - 2 tbsp. 


Method :

  1. Garlic cloves को mince कर लें। Wok में oil गर्म करें।
  2. अब इसमें minced garlic डालकर भून लें।
  3. इसमें भिंडी, नमक, हल्दी powder, धनिया powder, और मिर्च powder डालकर अच्छे से mix कीजिए।
  4. फिर wok पर ढक्कन लगाकर 1 से 2 minutes पकाएं।
  5. अब बाकी भिंडी उलट-पुलट कर पूरी तरह से गलने तक पकाएं।
  6. जब भिंडी पूरी पक जाए, तब इसमें अमचूर powder डालकर थोड़ी देर और भूनें।
  7. जब भिंडी पूरी तरह से तक जाए और dry हो जाए (भिंडी से लसलसापन ख़त्म हो जाए), तब उसमें चावल का आटा डालें और भिंडी के crispy होने तक भूनें।

Voila! Kurkuri Bhindi with taste resembling from the authentic version is ready to be served.


Tips and Tricks :

  • भिंडी को काटने से पहले ही धोकर सुखाकर काटें, जिससे भिंडी में extra लस न बने।
  • भिंडी को लंबा और आढ़ा ही काटें, गोल कटी भिंडी में ज्यादा देर तक लस बना रहता है।
  • भिंडी में प्याज़, टमाटर और नींबू न डालें, इससे भिंडी juicy बनेगी, dry नहीं होती है।  जबकि हमें कुरकुरी भिंडी के लिए भिंडी को ऐसे पकाना है कि पकने के बाद भिंडी dry हो जाए।
  • नींबू की जगह amchur powder ही डालें, यह रस भी ख़त्म करेगा और भिंडी को proper dry texture भी देगा।
  • अगर आप garlic नहीं खाते हैं तो उसकी जगह 1 inch ginger ले कर उसे कद्दूकस कर के डाल सकते हैं।
  • भिंडी 2 minutes से ज्यादा ढककर न पकाएं, वरना भिंडी लसलसी बनेगी, खिली-खिली dry नहीं बनेगी।
  • चावल का आटा भिंडी के पूरे पकने के बाद ही डालें, पहले डालने से भिंडी खिली-खिली और कुरकुरी न बनकर चिपकी चिपकी बनेगी।
  • चावल का आटा न होने से चावल को dry पीसकर powder बनाकर उसे use करें। चावल का आटा ही normal भिंडी को कुरकुरी भिंडी में बदलेगा।
  • इसको बनाने में तेल थोड़ा ज्यादा पड़ेगा, तो तेल डालने में कंजूसी न करें।

एक बार सारे tricks and tips को follow करते हुए भिंडी बनाएं, आपको कुरकुरी भिन्डी का स्वाद इस easy method से भी मिल जाएगा।

So enjoy and stay tuned…

कुरकुरी भिन्डी का दाल मखनी के संग बहुत अच्छा combination बनता है, recipe के लिए link पर click करें-

https://shadesoflife18.blogspot.com/2024/01/recipe-daal-makhani.html?m=1

Saturday, 22 August 2026

India's Heritage : पार्वती जी को भी भाए सावन

सावन का पावन माह चल रहा है, शिव जी को प्रसन्न करने वाला, उनकी भक्ति में लीन होने का।

पर क्या आपको पता है, न केवल शिव जी को, बल्कि शक्ति स्वरूपा पार्वती जी को भी सावन माह में पूजा-अर्चना करते हुए प्रसन्न किया जा सकता है?

पर जैसे सावन के सोमवार में पूजा-अर्चना करने से महादेव प्रसन्न होते हैं, वैसे ही पार्वती माता की सावन माह के मंगलवार को पूजा-अर्चना की जाती है, जिसे मंगलागौरी व्रत भी कहते हैं?

पार्वती जी को भी भाए सावन


सावन (श्रावण) मास के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है और मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं।

  • व्रत का महत्व और नियमसमर्पण- यह दिन भगवान शिव की शक्ति और माता पार्वती को समर्पित होता है।
  • सौभाग्य प्राप्ति- विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
  • शीघ्र विवाह- अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • सोलह की संख्या- पूजा में सभी सामग्री (जैसे दीपक, चूड़ियां और प्रसाद) सोलह (16) की मात्रा या संख्या में अर्पित की जाती है।

हर-हर महादेव, माता पार्वती की जय।