Sunday, 3 June 2018

Poem : बेटी ओ बेटी

बेटी ओ बेटी


बेटी ओ बेटी, तू कहाँ  पर रहती है
किस घर आंगन को, तू अपना घर कहती है

क्या वो आंगन, 
जहाँ  माँ  ने तुझको  था जन्म दिया
और बैठ कर बाबा के कन्धों में 
तूने जग का भ्रमण किया
भाई-बहन के संग खेल 
 बचपन अपना बिता दिया

बेटी ओ बेटी, तू कहाँ  पर रहती है
किस घर आंगन को, तू अपना घर कहती है

साजन के मिलते ही, 
बाबुल ने था विदा किया
जन्म दिया था  जिसने,
उसने गैरों से मिला दिया
सास ससुर हैं, मात  पिता अब 
देवर नन्द हैं भाई बहन
ये सबने समझ दिया

बेटी ओ बेटी,तू कहाँ पर रहती है
किस घर आंगन को, तू अपना घर कहती है

जन्म बेटी का तूने पाया,
तो तुझको ये सौभाग्य मिला
बेटे का है, बस एक घर
तुझको दो का प्यार मिला

बेटी ओ बेटी, तू कहाँ  पर रहती है
किस घर आंगन को, तू अपना घर कहती है

Saturday, 2 June 2018

Story Of Life : भूख

भूख

रामू के अस्वस्थ होने से पूरे परिवार ने काफी दिनों से ठीक से खाना नहीं खाया था, बच्चे भूख से बिलख रहे थे, वही एक मात्र कमाने वाला सदस्य है, घर में उसकी बीवी के अलावा, 2 छोटे बेटे थे।

रामू लाश ढोने का काम करता था, पर इधर जब से बीमारी ने पकड़ा था, चार पैसे भी घर में नहीं आ पा रहे थे, जो कुछ बचा-खुचा था, उसकी बीमारी में स्वाहा हो गया था।

एक दिन उसका साथी किसना आया, बोला रामू भया, अपने बाजुओं में ताकत भर लो, आज Riva express का बहुत बड़ा वाला accident हुआ है।

लाशों का ढेर लग गया है, जो आज हिम्मत कर ली भया, तो दवाइयों के सारे पैसे भी चुक जाएंगे, और बच्चे भरपेट खाना भी खा पाएंगे

किसना की बात, हीं पास खड़े बच्चे भी सुन रहे थे, भरपेट खाना मिलेगा, सुन कर दोनों खुशी से नाचने लगे।

बच्चों को खुशी से नाचता देखकर रामू की आंखो में आँसू छलक आए। 

रामू के बीमारी के कारण रोम-रोम में दर्द था, पर बच्चों की खातिर, उसमें  ना जाने कहाँ से ताकत आ गयी, उसने नीलू को आवाज़ लगाई, अरी सुनती हो, जरा मेरे समान ला दो।

पर ये क्या? 

वहाँ तो नीलू तैयार हो कर आ गयी।

कहाँ चलने को तैयार हो गयी भागवान?....

तुम्हारे साथ मैं भी चलूँगी। 

और बच्चे?.....

वो भी चलेंगे, नीलू ने भरे गले से उत्तर दिया।

अरे, तू पागल तो नहीं हो गयी है कहीं? 

कोई तो समझाये इसे, वहाँ लाशों के ढेर में बच्चों का क्या काम? बेकार ही डर जाएंगे।   

नहीं। 

तुमने सुना नहीं, किसना भया क्या बोल रहे थे, बड़ा वाला क्सीडेंट हुआ है, अच्छे पैसे मिल जाएंगे, सब चलेगें, तो और ज्यादा पैसा मिलेगा 

फिर ना जाने कितने दिन बाद ऐसा बड़ा वाला होएगा...., फिर तुम्हारी तो तबीयत भी ठीक नहीं है।

आज नीलू ने ठान लिया था, सब का पेट भी भरना है, और पति की दवा का भी सारा पैसा चुकाना है।  

सारे परिवार के साथ रामू वहाँ पहुंचा गया।

बहुत ही करुण दृश्य था, सब तरफ लाशें, बहता हुआ खून व रुदन देखकर, नीलू को चक्कर आने लगे

उसे देख कर रामू खीजता हुआ बोला, मैंने तो पहले ही मना किया था, ना चल, पर तू सुने तब ना।

नीलू को अगले पल ही बच्चों की भूख, और पति की बीमारी याद आ गयी। वो ज़ोर से अपने बच्चों से चिल्लाई.....,बच्चों, लग जाओ काम पे, जितना लाश हटाओगे, उतनी ही रोटी खाने को मिलेगी।

पर मन ही मन सोच रही थी, किसी का दुख आज उसे अपने बच्चो की भूख से बड़ा नहीं दिख रहा है, किसी का दुख, किसी के सुख का सबब बन जाता है

आज रामू के परिवार ने काफी पैसा बना लिया, आज परिवार ने भरपेट खाना खाया, और दवा का भी सारा पैसा चुक गया।

छुटकू पूछ रहा था- माँ अगला बड़ा वाला कब होगा?.......


Friday, 1 June 2018

Kids Story : पेटू - पेटू

समस्या : बच्चा बहुत धीमे धीमे खाता है।

         कहानी : पेटू - पेटू

समर,अपने Mummy Papa का इकलौता बेटा था, बहुत ही लाड़-प्यार से पाला हुआ प्यारा बच्चा था। अपने Mummy Papa की सारी बात मानने वाला, साथ ही पढ़ने में बहुत ही होशियार था।  
लेकिन  इस प्यारे बच्चे में एक खराब आदत भी थी, वो खाना बहुत धीमे-धीमे खाता था, उसकी इस आदत से उसके Mummy Papa बहुत परेशान रहते थे। उसकी Mummy  को लगता था, ये इतनी धीमे खाना खाता है, उससे खाना tasteless  हो जाता है, साथ ही उसकी nutritious value  भी कम हो जाती है। पर उन्हें समझ नहीं आता था की वो क्या करें? कोई कहता कि, इसको T.V. दिखाते हुए खाना खिलाओ, कोई कहता एकदम एकांत में खिलाओ। उसकी माँ ने सब कर के देख लिया था, कोई भी formula बस कुछ दिन ही कारगर सिद्ध होता, फिर समर धीरे-धीरे खाना खाने लगता।
एक दिन समर अपने Mummy Papa  के साथ एक party में गया, वहाँ table system था।  table system concept, उसने पहली बार देखा था, वहाँ उसके school  के friends  भी थे।
Table system में बहुत से लोग एक साथ बैठे थे, और काफी लोग अपनी chance के आने का इंतज़ार कर रहे थे।
समर अपने एक friend के साथ बैठ गया, सारी dishes उसकी पसंद कि थींChips, Donut, White sauce pasta, Cake, Chowmein, Burger, etc. समर तो बस खुश ही हो गया, सब favourite चीज़ें, वो भी जितनी चाहो, मिल सकती थीं
समर ने सब चीज़ें खूब सारी रखवा ली। और धीरे-धीरे खाने लगा, कुछ देर बाद सबका खाना finish  हो गया था, पर समर अभी तक केवल cake  और chips ही खत्म कर पाया था। तभी table से plates हटायी जाने लगी। समर डर गया, उसकी plate में तो अब भी बहुत कुछ बचा था, पर ये क्या uncle ने तो उसकी plate भी उठा ली।  वो बोलता रह गया, कि अभी finish नहीं हुआ है, पर कोई फायदा नहीं हुआ, समर भूखा ही रह गया।
उसने अपनी Mummy  को भी बोला, वो बोलीं बेटा ऐसा ही होता है, बाकी अपनी turn  का wait  कर रहे हैं ना। 
अगले दिन जब वो स्कूल गया, तो वहाँ उसके friend  उसे पेटू-पेटू कह कर चिढ़ा रहे थे।
जब वो घर आया,  तो वो बहुत रो रहा था, उसकी Mumma ने पूछा, क्या हुआ समर?
वो बोला एक तो मैं कल भूखा रह गया, और मेरे दोस्त मुझे पेटू-पेटू कह कर चिढ़ा रहे थे।
तब उसकी Mummy ने समझाया, तुमने बहुत सारा खाना ले लिया था, जबकि खाना उतना ही लेना चाहिए, जितना खा पाओ, फिर तुम सबसे देर तक खाते भी रहे, और uncle को खाना ना ले जाने को बोल रहे थे,  इसी कारण सब तुम्हें चिढ़ा रहे थे।
पर वो तो इसलिए ना, क्योंकि मेरा खाना finish  नहीं हुआ था।
और तुम्हें पता है, खाना क्यों finish  नहीं हुआ था, क्योकि तुम धीरे-धीरे खाते हो, तो औरों से कम खाने के बावजूद सब तुम्हें पेटू कहते हैं।
आज समर समझ गया था, खाना धीरे धीरे खाने से भूखे भी रह जाते हैं, और सब पेटू-पेटू भी कहते हैं।
उसके बाद से समर ने धीरे-धीरे खाना खाना बंद कर दिया, और अपनी  माँ का और ज्यादा लाडला हो गया।