अपनों को जानो
आज भी दोनों रजत की पसंद का खाना बना रहे थे। दोनों ही रजत को बहुत चाहते थे, तो उसकी हर पसंद उनके लिए सर्वोपरि थी।
रजत जब kitchen में गया तो दोनों उसे देखकर चहक उठीं।
“आ गए आप! आज मम्मी जी ने आपकी पसंद का शाही पनीर और मैंने लच्छा पराठा बनाया है। चलिए, खाना लगा देती हूं।
“हाँ संजना, पहले एक बात बताओ, तुम लोगों को याद है कि मुझे खानें में क्या पसंद है?” रजत गंभीर स्वर में बोला।
“हाँ, तभी तो बनाया है, पर इसमें इतना serious होने वाली क्या बात है?”
“मम्मी, मेरी favourite icecream?”
“Butterscotch!” रैना ने झट से बता दिया।
“और संजना तुम बताओ, मेरी favourite movie?”
“दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे! पर क्यों रजत? आखिर आज तुम यह सब कुछ क्यों पूछ रहे हो?”
“अच्छा, अब दोनों लोग यह बताओ कि मेरी saving कितनी है?
मैंने पैसे कहाँ-कहाँ invest किए हैं?
मैंने कितने की और कितनी life insurance policies ली हैं?
हम में से किसी को भी कोई critical health issue होगा तो कौन से hospital में admit होना है?
Ambulance number क्या है?”
“ऐसा भी क्या हो गया है रजत, जो तुम हमसे यह बेकार के प्रश्न कर रहे हो?” रैना गुस्से से बोली।
“नहीं माँ, यह बेकार के प्रश्न नहीं हैं, इन्हें परिवार में सबको पता होना चाहिए।
आज मैं बहुत दिनों बाद अपने दोस्त निखिल के घर गया था। वहाँ जाकर पता चला कि उसे अचानक से heart-attack आया और वो इस दुनिया से चला गया।
शिखा भाभी को उससे जुड़ी इस तरह की knowledge नहीं थी, अतः उसकी सारी saving या तो lapse हो गई, या है भी तो कहाँ और कितनी, उन्हें कुछ नहीं पता।
इस कारण उन्होंने अपने बेटे को private school से निकाल कर government school में डाला है, और खुद लोगों के घर-घर जाकर बर्तन-झाड़ू-पोंछा कर रही हैं।
इसलिए मैं चाहता हूँ, हम सबको केवल एक-दूसरे की पसंद ही न पता हो, बल्कि सारी financial information भी पता हो।
इसलिए, खाना खाने के बाद आज मैं आप लोगों के साथ सारी financial information share करूँगा, जिसे आप लोग अच्छे से ध्यान रखिएगा।
जब हम सब लोग, सब कुछ अच्छे से जानेंगे, तभी सही मायने में कह सकेंगे कि हम अपनों को जानते हैं।”
