Tuesday, 22 September 2026

Satire : महान हर एक इंसान

आज बैठे-बैठे यूँ ही ख़्याल आया कि कौन होते हैं महान, कौन हैं सबसे सफल इंसान। फिर बस लगा दिमाग अपने घोड़े दौड़ाने।

देश के प्रधानमंत्री- श्री नरेन्द्र मोदी महान। पर आखिर क्यों क्यों? उन्होंने देश के विकास के लिए विभिन्न कार्य किए इसलिए?

नहीं, क्योंकि वो एक चाय बेचने वाले से देश के प्रधानमंत्री बन गए। वैसे कुछ उन्हें चाय बेचने वाले से देश बेचने वाले भी कहते हैं, हालांकि मोदी जी को इससे क्षणिक फ़र्क नहीं पड़ता।

वो देश के विकास के लिए अथक प्रयास करने में अपने दिन-रात न्यौछावर किए हुए हैं। जबकि कोई व्यक्ति अपने परिवार के प्रभाव से राजनीति में बड़ा कद पाता है, तो वो महान नहीं।

तो क्या गरीब होने से महान बना जा सकता है…

महान हर एक इंसान


सचिन तेंदुलकर एक महान cricketer माना जाता है। उसको देखेंगे तो वो भी दसवीं तक pass नहीं कर पाया था, तो क्या महान खिलाड़ी बनने के लिए पढ़ाई-लिखाई में बेकार होना चाहिए?

अमिताभ बच्चन, सदी के महानायक। बहुत सारी जगहों से reject होने के बाद सफलता के शिखर पर पहुंचे थे। तो क्या असफलता ही सफलता की कुंजी है?

ऐसे ही बहुत से उदाहरण हैं, जहां असफल समझे जाने व्यक्तियों ने महानता के झंडे गाड़े हैं। तो क्या प्रार्थना की जाए ईश्वर से? 

“हे प्रभो, हमें गरीब, पढ़ाई-लिखाई में लद्दड़ और असफल बनना, क्योंकि यही वो विशेषताएँ होती हैं, जो आगे चलकर मनुष्य को महान बनाती हैं।”

पर हाय-हाय! वैसे ही रह गए तो मोदी जी, सचिन तेंदुलकर और अमिताभ बच्चन आदि के जैसे न बन पाए तो! कहीं महान बनने की ख्वाहिश पूरी न हो पाई तो इंसान की श्रेणी में भी नहीं आएंगे।

वैसे एक theory में यह भी निकल कर आया है कि अविष्कार आलस्य के कारण ही संभव हो पाता है।

Isaac Newton आलसी था, तभी भरी दोपहरी में पेड़ के नीचे बैठा था, और वहीं बैठकर उसने गुरुत्वाकर्षण बल (gravity) का अविष्कार कर दिया, पर कसम से बाकी सब के आलस की वाट लगवा दी।

तो क्या आलसी होने से महान बना जा सकता है? भाई साहब! बहुत गड़बड़झाला है। यह ही नहीं समझ आ रहा है कि कामना किस की करें?

एक ही बात समझ में आती है, महान हर इंसान, जिसका जब भाग्य चमक जाए। इसलिए गरीब हो, असहाय हो, कमजोर हो, लद्दड़ हो, कोई बाधा नहीं।

चमकनी होगी, तो कभी भी चमक जाएगी और हो सकता है ऐसी चमके कि सब चकाचौंध हो जाएँ कि यह भी इतना महान बन गया। बाकी जिसकी डोर, राम के हाथ, उसके सब बनते काम…

जय श्री राम!