Friday, 17 August 2018

Tribute - अटल श्रद्धांजली

आज भारत के रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के ब्रह्मलीन होने से सभी लोग पूर्णतः शोकाकुल हैं। उनकी राजनीतिज्ञ व साहित्यिक व्यक्तित्व को मेरा शत-शत नमन व भावभीनी श्रद्धांजली।


अटल श्रद्धांजली 

                                     


थे अटल वो ,थे गुरु वो
जिन्हें मौत भी ना
लघु कर सकी
द्वार पर खड़ी रही पर
उनकी मर्जी के बिन
साथ ना ले जा सकी
वो भी थे भीष्म ही सरीखे
था मौत को बस में किया
स्वतन्त्रता के पावन दिवस में
ध्वज को ना झुकने दिया
ना रुका है ना रुकेगा
कोई इस जहान में
ज़िंदा केवल वो रहेगा
जो रोशन हुआ हो अपने काम में
कौन कहता हैं नहीं वो
अब इस जहान में
अपने अनुभव व ज्ञान से
सदा रहेंगे हिंदुस्तान में
ऐसे विश्वव्यापी अटल जी को
है मेरा शत शत नमन
नाम उनका व्यापी रहेगा
जब तलक है ये चमन 

Thursday, 16 August 2018

Story Of Life : रत्ना भाग -३

कैसे रत्ना व राजन की मुलाक़ात हुई, और दादा जी की सहमति से दोनों का विवाह तय हो गया, शादी वाले दिन जब वो राजन को बताने गयी थी कि PM. जी आ रहे हैं……अब आगे

रत्ना भाग -३ 

उसे कुछ अजीब सी आवाज़ सुनाई दी, वो धीमे धीमे उस ओर गयी, उसने जो देखा सुना, जानकर रत्ना का खून वहीं जम गया। वो वहाँ से चली गयी। जब बारात आई, तब पूरा माहौल खुशियों से भरा हुआ था।
सभी दादा जी को बहुत सारी बधाइयाँ दे रहे थे। रत्ना भी वरमाला लिए आ गयी।
और जैसे ही वो राजन को वरमाला डालने वाली थी। उसी समय ही P.M. जी भी आ गए। तभी एक चीख की आवाज़ से सभी लोग सकते में आ गए। राजन खून से लथपथ नीचे गिरा हुआ अपना दम तोड़ रहा था। और रत्ना के हाथ में खून से भरा हुआ खंजर था।
ये तूने क्या किया रत्ना.... मेजर साहब चिल्लाये। रत्ना चुपचाप बुत बनी खड़ी थी।
तभी P.M.जी के पास एक आदमी दौड़ के आया, और बोला, सर जी जल्दी निकलें यहाँ से। खबर मिली है यहाँ एक आतंकवादी घुस आया है।
सुन कर रत्ना बोली, अब डरने की कोई जरूरत नहीं है, वो आतंकवादी मारा गया है। वो और कोई नहीं बल्कि राजन ही था।
दादा जी, मैं P.M. जी के आने से बहुत खुश थी, और यही बताने जब मैं राजन के पास गयी थी, तब मैंने वहाँ  देखा, राजन किसी को संदेश भेज रहा था कि, उसकी चाल पूरी तरह कामयाब रही, उसने रत्ना और मेजर का दिल जीत लिया है, आज उसकी शादी है, मेजर की पोती से, और उसमें P.M. भी आ रहे हैं। और P.M. के आते ही वो उन्हें मार देगा।
दादा जी, जिसे मैं अपना हमसफर समझ रही थी, वो तो दुश्मनों का जासूस निकला! कल तक मैं जिसके प्यार के सपने में खोई हुई थी, वो तो मुझसे प्यार ही नहीं करता था, वो, वो तो....  यहाँ P.M. जी को मारने के इरादे से आया था।
जिसके नाम की मेहंदी कल उसके हाथों में सजी थी, आज उसी के खून से उसके हाथ रंगे थे।
आज उसने एक बहुत कठिन निर्णय लिया था, उसने देश के आगे अपने प्यार को कुर्बान कर दिया था।
ये सब सुन कर मेजर साहब की आँखें छलछला उठी, वो बोल उठे, रत्ना तुमने अपना नाम सार्थक कर दिया बेटा! तुम इस देश की रत्न ही हो।
P.M. जी भी बोल उठे, जिस देश में ऐसी वीरांगनाएँ हैं, उस देश का दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

सब मिल कर रत्ना को salute कर रहे थे।

Wednesday, 15 August 2018

Article : भारत को कोटि-कोटि नमन

भारत को कोटि कोटि नमन



आज 15 अगस्त के महान दिवस में अपने देश की महानता की ओर दिल बरबस खिंचता चला गया, हम बहुत ही भाग्यशाली हैं, कि हम इस महान देश का एक अंग हैं। इसके विशाल हृदय की गाथा तो युगों युगों से गायी जा रही है, और आज भी भारत के हृदय में विशालता यूं ही विध्यमान है।
अगर हम इतिहास देखें, तो पाएंगे, जितनी भी विदेशी ताकतों ने भारत पर आक्रमण किया, उन सभी का भारत ने अतिथि के रूप में ही स्वागत किया था। वो तो इरादे उनके विकृत थे, कि वे जिस देश का खा रहे थे, उसी को लूटने के प्रयास में लग गए। फिर वो चाहे, यूनानी हों, मुगल हों या अंग्रेज़।
महानता तो इस कदर है, मेरे देश भारत की कि, जिन्होंने भारत को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उनके भी मासूम निवासियों को ना केवल शरण दी हुई है, बल्कि उन्हें सिर्फ अपने धर्म को मानते रहने की पूरी आज़ादी ही नहीं है, अपितु पूर्णतया सम्मान भी प्राप्त है।
आप ही सोचिए, ऐसा और कौन सा देश है, जहाँ उस देश के त्योहारों के अलावा अन्य देश के त्योहारों को भी पूरे हर्षो-उल्लास से मनाते हैं, जैसे भारत में होली, दिवाली, राखी, बसंत, बैसाखी, पोंगल, आदि के साथ ईद, Christmas, New year, Friendship day, Valentine day  भी मनाते हैं।
हमारा ही ऐसा देश है, जहाँ सारे festival एक समान, उत्साह व रीति- रिवाजों से मनाते हैं।
हमारे देश की ऐसी विशालता को उसकी कमजोरी, या मूर्खता समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। जो महान है, उसकी महानता के लिए नतमस्तक रहना चाहिए।
अब भारत की ज्ञान गंगा में भी बह लेते हैं। फिर चाहे, हमारे ऋषि मुनियों दारा ज्ञात की गयी जड़ी-बूटियाँ हों, त्रेता व द्वापर युग की special techniques हों, आर्यभट्ट का zero का आविष्कार हो, श्रीनिवास रामानुजन के गणितीय खोज हों या सत्येंद्र नाथ बोस के quantum statistics के सिद्धांत हों, जो उन्होने Einstein  से पहले ही बता दिये थे। 
नासा ने computer programming  के लिए संस्कृत भाषा को ही सर्वाधिक उचित घोषित किया है, जिससे ये पूर्णतः सिद्ध होता है कि संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है। राष्ट्रीय भाषा हिन्दी की वर्णमाला तक भी सैद्धांतिक है।
कहाँ तक लिखें? इस विषय में जितना भी लिखेंगे कम ही होगा। ये सभी यही दर्शाते हैं कि ज्ञान और विज्ञान में भारत सबसे आगे है।   
अगर हम योग्यता की बात करें, तो भी यही पाएंगे, कि चाहे भारत हो, या विदेश का कोई भी कोना, उच्च पदों पर भारतीय विद्यमान होंगें।
आज विदेशों की बहुत सी संस्थाओं के साथ WTO, UN  आदि में भारत को एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
हम अपने परिवार के लिए तो जागरूक और समर्पित रहते ही हैं। आज के इस पवन दिवस से अपने जीवन के कुछ क्षण देश की जागरूकता, और विकास में भी लगाएँ। और क्यों ना हम इसे पहले के समान पुनः सोने की चिड़िया बनाए, जहाँ प्यार, अपनापन, संस्कार, विश्वास, आस्था, समृद्धि, संपन्नता, शांति और स्वछ्ता थी।

अपने विशाल व महान भारत को मेरा कोटि-कोटि नमन!

कल मैंने स्वतंत्रता दिवस पर एक कविता भी post करी थी। उसे भी अवश्य पढ़ें और अपने विचार एवं भाव व्यक्त करें।