Friday, 10 January 2020

Stories of Life : इच्छा (भाग- 3)


इच्छा (भाग- 1)..... और  
इच्छा (भाग- 2)...... के आगे...... 

इच्छा (भाग- 3) 

फिर माँ ने कहा, अरे शर्माइन, सब तुम ही बताओगी, या कुछ लड़की को भी बोलने दोगी?

क्षण भर सन्नाटा छाया रहा, फिर शर्मा आँटी बोलीं, बस यही कमी है, इस बच्ची में, यह बोल नहीं सकती है......

क्या! ........बोल नहीं सकती.....!

मुझ पर और माँ पर गाज गिर पड़ी, यह क्या कहा आँटी ने.......?

माँ तो उन पर बिफर ही पड़ीं, क्या सोच कर आयीं थी, शर्माइन? किसी को भी मेरे बेटे के पल्ले बांध दोगी?.....

माँ के स्वर तो आग उगल रहे थे, पर मुझे तो, काटो तो खून नहीं था। मेरा दिमाग सुन्न हो चुका था, यह मैंने कैसी इच्छा कर दी ईश्वर से?

अगले ही क्षण ईश्वर पर बहुत क्रोधित भी हुआ, कभी भी तो, इतनी जल्दी सुनते नहीं हैं, तो आज इतनी जल्दी क्यों सुन ली? काश, मैं इसी मुगालते में रहता कि मुझे सबसे हसीन लड़की से प्यार हुआ था, जो सबसे perfect थी।  

आज जिस की इच्छा की थी, वो मेरी थी, फिर भी मैं आगे बढ़कर उसका हाथ नहीं थाम पा रहा था।

वो बोल नहीं सकती थी, पर उसकी आँखें बोल रही थी, “आपको तो मुझ से प्यार हो गया था। मेरे इतने सारे गुण को छोड़कर, आपको भी मेरी कमी ही बड़ी लगी?

धिक्कार है! ऐसे प्यार को, जो बस एक छोटी सी कमी से हिल गया, वो चली गयी, हमेशा के लिए। साथ ही मेरी किसी से भी शादी करने की इच्छा भी साथ ले गयी।

उसके जाने के बाद मैं यह सोचने लगा, हम बिना कुछ आगे-पीछे का सोचे इच्छा कर बैठते हैं। फिर इच्छा पूरी ना हो, तब भी ऊपर वाले को कोसते हैं, और इच्छा अगर, ऐसे पूरी हो, तब भी ईश्वर से क्रोधित ही होते हैं।

माँ, यह कहते कहते दुनिया से चली गयी, कि बेटा शादी कर ले। पर मन ने फिर किसी से शादी करने की इच्छा जाहिर नहीं की, और दिमाग ने हिम्मत नहीं दिखाई, कि विजया का ही हाथ थाम लूँ।

Thursday, 9 January 2020

Stories of Life : इच्छा (भाग- 2)

इच्छा (भाग-1) के आगे....... 

इच्छा (भाग- 2) 


वो भी हाथ में एक English novel लेकर बैठी थी, और बस उसे ही पढ़ रही थी, किसी से कुछ भी बात नहीं कर रही थी।

मेरा station आ गया था, और उसका destination भी। मेरी नज़रों ने उसे बहुत दूर तक विदा किया, जब वो आँखों से ओझल हो गयी, मैं भी भारी मन से घर की तरफ चल दिया।

घर में माँ मेरा बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। मेरे घर पहुँचते ही माँ बोली, बेटा अगर तू बुरा ना माने, तो लड़की को आज ही बुला लूँ?

मेरे मन में तो वही बसी थी, फिर भी सोच कर आया था, माँ जिससे कहेगी, उसे हाँ कर दूंगा। तो बोल दिया, माँ आपका जब मन करे, बुला लें।


शाम को ही वो लोग आ गए, माँ ने बैठक से ही आवाज़ दी, विनय बाहर आ जा बेटा। मैं जब बैठक में आया, तो अपना दिल थाम कर बैठ गया। यह तो वही लड़की थी। पर अभी वो सलवार-सूट में थी, उसकी लहराती जुल्फें उसे और हसीन बना रही थीं।

आज तक ईश्वर ने मेरी इतनी जल्दी कभी नहीं सुनी थी। मैंने ऊपर वाले का लाखों धन्यवाद किया, कि जिसे चाहा, वही मिल भी जाएगी।

शर्मा आँटी उसके गुणों का बखान कर रही थीं, कि विजया का जैसा नाम है, वैसी ही वो है भी, हर काम में नंबर 1 पर। जितनी यह आज-कल की लड़कियों जैसी पढ़ने-लिखने में होशियार है, और बड़ी farm में job कर रही है, उतनी ही हमारे जैसी, सिलाई, कढ़ाई-बुनाई और रसोई बनाने में भी निपुण है।

ओह! तो नाम विजया है, तभी इसने मेरे मन को एक बार में ही जीत लिया था।

माँ भी लड़की के गुण सुन कर निहाल हुई जा रही थी। जैसी अच्छी बहू की कल्पना कोई सोच सकता था, वो उससे भी अच्छी थी। और मैंने तो उसे जैसा समझ कर प्यार किया था, वो उससे भी कहीं ज्यादा काबिल थी।

फिर माँ ने कहा, अरे शर्माइन......

आगे पढ़े, इच्छा (भाग- 3)

Wednesday, 8 January 2020

Stories of Life : इच्छा

इच्छा


आज मैं ज़िंदगी का अहम फैसला लेने, घर जा रहा था। माँ ने इस महीने की शुरुआत में ही मुझ से बोल दिया था, कि विनय 25 को reservation करा लेना। पड़ोस की शर्मा आंटी ने तेरी पसंन्द की लड़की बताई है, आकर देख लो, तो मैं अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाऊँ।

मैं माँ का बड़ा सीधा बच्चा हूँ, पर शादी को लेकर मैंने उन्हें बहुत परेशान कर दिया था। तो इस बार सोच कर चला था, कि माँ को जो पसंद होगी, उसे हाँ कर दूंगा।


Train में मैं अपनी bedding set कर के बैठ गया। अभी train ने रेंगना शुरू किया ही था, कि एक बेहद खूबसूरत, मासूम सी लड़की train में चढ़ी, और ठीक मेरे सामने वाली seat पर बैठ गयी। 

वो बेहद गोरी थी, उसने jeans and jacket के साथ red scarf पहना हुआ था, जो उसके रूप में चार चाँद लगा रहा था। ठंड से उसके गाल और नाक दोनों ही गुलाबी हो रहे थे।

बार बार मैं अपने आपको उसकी तरफ देखने से रोक रहा था, पर बांवरा मन, इस कदर उस पर लट्टू हो गया था, कि नज़रे बरबस उस ओर खींच रही थी।

उसको भी bedding मिल गयी थी। जितनी वो खूबसूरत थी, उतनी ही करीने से काम भी कर रही थी, उसने बड़े ही सलीके से paper से bedding निकाल कर paper fold कर के रख दिया।

उसका रंग, रूप और सलीका देखकर मैं तो उससे प्यार ही कर बैठा। आज मैंने जाना था, क्या होता है, “वो पहली नज़र वाला प्यार”। 

अब मैं मन ही मन ईश्वर से अपनी इच्छा बताने लगा, हे प्रभू! आप से क्या छिपा है, मैंने ऐसे ही जीवन-साथी की कल्पना की थी। काश मुझे यह ही मिल जाती।

अब तक तो उसे भी खबर हो गयी थी, कि मैं उसका दीवाना हो चुका हूँ। मैं उसे बरबस देखे जा रहा था, पर उससे बात करने की हिम्मत मैं ना जुटा सका।

आगे पढ़ें, इच्छा(भाग-2) में