Sunday, 12 April 2020

Recipe : Cluster beans chauritha

यह मेरे Quarantine segment की 17th recipe है।

आज कल हम लोग, सब्जियां बहुत कम ला पाते हैं, दूसरा रोज़ ला भी नहीं सकते हैं। पर रोज़ रोज़ आलू भी कितना खाएं?

Cluster beans, बहुत दिनों तक ठीक बनी रहती है, इसलिए आप इसे अपनी 1 week तक चलने वाली सब्जियों की list में शामिल कर सकते हैं।

तो आज cluster beans ( ग्वार की फली) की Recipe share कर रहे हैं।
यह बहुत healthy and tasty dish है। तो आज ही इसे बनाएं और रोज़ रोज़ के आलू को थोड़ा break दे दीजिए।

Cluster beans chauritha




Ingredients

Cluster beans( ग्वार की फली) - 250 
Gram flour (बेसन) - 2 tbsp
Rice flour - 2 tbsp
Salt - as per taste
Garlic pods - 6 to 8
Turmeric powder - 1/2 tsp.
Chilli powder - as per taste
Oil - 3 tbsp.
Chat masala- 2 tsp.

Method -  


  1. ग्वार की फली की नसों को हटा कर छोटा-छोटा काट लें।
  2. कटी हुई फलियों को अच्छे से धो लीजिए।
  3. फिर उसमें पानी व 1/4 tsp. salt डालकर 10 minutes microwave कर लीजिए। या  उसके soft होने तक gas में रख कर उबाल लें।
  4. Garlic pods का paste बना लें।
  5. Garlic paste में बेसन, चावल का आटा, और सारे dry powder masala and salt, डालकर पकौड़ी से गाढ़ा paste बना लीजिए, इसमें ग्वार की फली डालकर अच्छे से mix कर लीजिए। बेसन चावल के paste में, नमक इस अंदाज से डालियेगा, कि आप ने beans  boil  करते समय भी  salt  डाला था
  6. एक wok लीजिए, उसमें  Oil डालकर पका लीजिए।
  7. 1 tbsp oil, wok में रहने दीजिए। बाकि निकाल लीजिये।  
  8. इसमें ग्वार की फली का mix डाल दीजिए।
  9. Flame slow कर दीजिए, व wok को ढक दीजिए।
  10. 10 minutes बाद 1 tbsp Oil डालकर फली mix पलट लीजिए। व ढक्कन से wok वापस ढक दीजिए।
  11. 10 minutes के लिए छोड़ दीजिए।
  12. फिर ढक्कन हटा कर, थोड़ा-थोड़ा तेल डालकर हुए, सुनहरा लाल सा भून लीजिए।

सब्जी तैयार है।

इसे दाल, चावल, पूड़ी या परांठे के साथ serve करें।

Note : 

  • ग्वार की फली की नसों को अच्छे से निकालिएगा, अन्यथा सब्जी का मजा ख़राब हो जाएगा, और आपकी मेहनत भी।
  • आप बेसन चावल के mix के paste को बनाने के लिए वही पानी इस्तेमाल करें, जिसमें फली उबाली थी, जिससे फली के पोष्टिक तत्व उसी में रहें।
  • अगर आप के पास cluster beans नहीं है, तो आप उसकी जगह उबला आलू या कटहल भी ले सकते हैं।
Cluster Beans (ग्वार की फली)



Saturday, 11 April 2020

Recipe : Potato and Baby onion ki sabji


यह मेरी Quarantine segment की 16th recipe है इसमें भी आपको green veggies की requirement नहीं है

धीरे-धीरे, काम करते करते लोग बहुत bore होते जा रहे हैं, ऐसे में आपके लिए जो आज की यह सब्जी share कर रहे हैं, वो सबको पसंद आने वाली, बहुत कम ingredients से बहुत कम मेहनत से झटपट बनने वाली सब्जी है।

तो चलिए आज, इस झटपट बनने वाली सब्जी को बनाएं और परिवार के साथ मस्ती करते हुए, इसे enjoy कीजिए।

Potato and Baby onion ki sabji



Potato - 250 gm.
Baby onion - 100 gm.
Salt - as per taste
Turmeric - 1/2 tsp.
Bay leaf - 1
Coriander powder - 1/2 tsp.
Garlic - 3 to 4 pods
Fenugreek Seed- 1/4 tsp.
Red chili powder - as per taste
Oil - 1 tsp.
Cumin -  1/2 tsp.
Tomato Paste - 1tbsp.  

Method -

  1. आलू को छील कर काट लें।
  2. Baby onion, को भी छील लीजिए, अगर आप के पास बड़े प्याज हैं, उनकी outer shell को हटा कर छोटा कर लीजिए।
  3. Cooker में Oil गर्म कीजिए, उसमें, chopped garlic, bay leaf, cumin, Fenugreek seeds डालकर चटकाएं।
  4. अब slow flame में आलू, प्याज, tomato paste और सारे dry masala powder डालकर  खूब अच्छे से भून लें।
  5. फिर उसमें पानी डालकर gravy लगा लीजिए।
  6. 2 whistle High flame पर और 1 whistle slow flame पर दे दें।
  7. इसकी लुटपुटी या ग्रेवी वाली दोनों तरह की सब्जी बना सकते हैं
  8. इसे chopped coriander leaves से garnish करें।
  9. इसे आप रोटी और चावल दोनों के साथ serve कर सकते हैं। यह दोनों के साथ ही बहुत tasty लगती है।

Note :

  • अगर आप चाहें तो इसमें, प्याज, टमाटर, लहसुन, अदरक  के पेस्ट को भूनकर डाल सकते हैं।
  • अगर आप इसमेें भूना मसाला paste भी डालते हैं तो यह राजस्थानी cousin की dish बन जाएगी।

Friday, 10 April 2020

Story of life : छटपटाहट

छटपटाहट


जब से lockdown हुआ है, अजीब सी छटपटाहट रहने लगी है।

आखिर और कितने दिन यूं ही गुजारने होंगे?

पति, बच्चे घर में ही दिन रात रहते हैं। चहल-पहल,शोर रहता घर में.......

खाने पीने की limited चीजें हैं, उनसे ही सोचो कि कैसे क्या बनाएं?

कामवाली बाई को हटा तो दिया, पर दिन रात काम कर कर के शरीर टूट रहा है।

ना जाने कितने दिनों से बाहर नहीं निकले, 
ना गपबाजी और समौसे, गोल गप्पे तो बस सपने...... 

हाँ, दिन-रात बस खाने और सोने से कुछ लोग गोलगप्पे जरुर बन गए हैं।

घर की घंटी दिन में सौ बार बजती थी।अब तो ना बजे हुए कुछ दिन ही हुए थे, पर अरसा बीत गया हो, ऐसा लग रहा था।

पर बगल वाले घर में हर तीन दिन में घंटी जरुर बजती थी, दरवाजे के खुलने की आवाज़ भी आती थी, और लोगों के बाहर निकलने की भी।
स्वादिष्ट खाने की खुशबू भी आती थी, नहीं आती थी तो बस कुछ बोलने की।

आज भी ऐसा ही हुआ था, कुछ दिन पहले ही पड़ोसी shift हुए थे, तो वो कौन हैं? कैसे हैं? क्या करते हैं?

इस मुए lockdown ने यह भी तो नहीं जानने दिया था।

मन में आया कि आज तो मैं भी दरवाजा खोल कर देखूंगी, आखिर माजरा क्या है?

घंटी बजने के साथ मैंने भी दरवाजे को धीरे से खोला कि एक झीर सी बन जाए, जिससे मुझे तो बाहर का दिखे, पर वो लोग मुझे ना देख पाएं।

मन में आज अलग सी संतुष्टि थी, आज के दिन यह सब देखूंगी, तो कुछ तो अलग जाएगा, रोज़ - रोज़ वही ढर्रे की जिंदगी।

तभी देखा, उस घर के बाहर, थका हुआ सा एक आदमी घर से दूर बैठा था, घर का मालिक सा प्रतीत हो रहा था, उसकी पत्नी ने स्वादिष्ट खाने से सजी थाली रखी और वापस दरवाजे पर खड़ी हो गई, उसके साथ उसकी पांच साल की बच्ची भी खड़ी थी, दोनों के अनवरत अश्रु बह रहे थे।

उस इंसान ने खाना उठाया, और फिर दूर बैठ गया, पर इतने स्वादिष्ट खाने को वो स्वाद से नहीं खा रहा था, उसका ध्यान तो बस अपनी बीबी और बेटी पर था।

उसकी थकी बोझल आंखें घर को यूं निहार रही थीं, मानो पूछ रहीं हों, कब आऊंगा मैं घर?

उसका खाना ख़त्म हुआ, तब उसके चेहरे की थकान दूर हो चुकी थी, उसकी निराशा जोश से भर चुकी थी, मानों पुनः तत्पर था, अपने कर्तव्यों के लिए।

वो चला गया, और उसके घर में सन्नाटा पसरा रहा।

थोड़ी देर बाद मैंने भी दरवाजे को बंद कर दिया।

पर आज दरवाजा मेरे भीतर का खुल गया, कि उस घर का मालिक तीन दिन में आता है, खतरों में है, हमें खतरे से बचाने के लिए....
अपने घर- परिवार को छोड़कर दिन-रात बस हमें ठीक करने की चिंता में, 

और एक हम हैं, सबके साथ हैं, घर में हैं, सब सुरक्षित हैं, limited ही सही‌ पर सामान है तो, फिर भी, थकान है, बैचेनी है, छटपटाहट है।

लोग अलग अलग बात बनाकर बाहर निकल कर, lockdown में जमघट लगा कर इसे बर्बाद कर रहे हैं।

कभी उनकी सोची है, जो घर नहीं आ रहे हैं, मजबूर हैं, घर और परिवार को दूर से देखकर संतुष्ट होने के लिए। अपने परिवार से भी distance बनाएं हैं।

आज से मैं भी अपने कर्तव्य को निष्ठा से निभाऊंगी, घर में रह कर lockdown के हर नियम का पालन करुंगी, वो भी खुशी-खुशी, मैं कितनी खुश नसीब हूँ कि घर में हूँ, पूरे परिवार के साथ, सब सुरक्षित हैं।

पर आज मुझे अपना कर्तव्य निष्ठा से निभाना है, उनके लिए भी जो हमारी सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने के लिए दिन-रात लगे हैं, जिससे वो भी सुरक्षित लौट सकें अपने घर, अपने परिवार के पास।

आज मैं नये जोश से भरी थी, मुझे अब थकान नहीं हो रही थी, ना छटपटाहट थी बाहर जाने की।
बस एक आस थी, जल्दी वो दिन आएगा जब हम बाहर निकलेंगे और वो अपने घर आएंगे, अपने परिवार के पास, जो कब से घर के अंदर नहीं आए।

आप भी करेंगे ना, अपने परिवार के साथ उनके लिए.......