Thursday, 29 October 2020

Tips : How to have sufficient breast milk for your kid

 How to have sufficient breast milk  for your kid




आज कल एक problem बहुत common होती जा रही है कि, babies को proper breast feeding नहीं मिल  रही है।

जिसका main reason, यह है कि, दूध sufficient नहीं बन रहा है।

जिससे माँ और बच्चा दोनों ही परेशान हो रहे हैं। यहाँ तक कि, इस problem के बारे में लोग doctors से भी consult कर रहे हैं।

इस problem, पर हम से हमारे बहुत से viewers ने suggestions मांगे हैं, कि Ma'am, इस problem को भी solve कर दीजिए। 

तो  आज इस topic पर ही tip डाल रहे हैं, यह सिर्फ मेरा opinion नहीं है, बल्कि experts and doctors भी यही advice कर रहे हैं।

मातृत्व (Mother hood) ईश्वर के द्वारा, संसार को दिया हुआ सबसे बड़ा आशीर्वाद (blessing) है।

पर आज हम लोगों के पास, इतना समय ही नहीं रहता है कि हम उन पलों को जी सकें और ईश्वर को इसके लिए धन्यवाद दे सकें।

बस यही वजह है कि breast milk की कमी होने की।

आप कहेंगे, इसका क्या मतलब? तो आज आपको यही बता रहे हैं।

Breast milk production, का सीधा, सीधा relation, इस बात पर depend करता है कि आप अपने बच्चे से कितना emotionally and mentally जुड़े हुए हैं। अपने baby को कितना time दे रहे हैं।

Means in short,आपको अपने baby पर कितना लाड़-प्यार आता है।

आप कहेंगे कि कैसी बात कर रही हैं, कौन अपने baby को प्यार नहीं करता है।

करते हैं, सब करते हैं, पर कुछ कमी रह जा रही है। आज वो कैसे पूरी हो, आप को बताते हैं।

1 आप अपने बच्चे को खूब देखें। उसकी सुंदर सुंदर आंखें, छोटी सी नाक, गोल-मटोल गाल, गुलाबी होंठ, कोमल कोमल हाथ और उंगलियों की छुअन और नन्हें नन्हें पैरों से उसका हल्के से मारना, उसकी अंगड़ाई, उसकी सोते-जागते मीठी मीठी मुस्कुराहट, चंचल शरारत....... और भी बहुत कुछ......

यह सब आप को अपने बच्चे से बहुत गहरे से जोड़ देगा।

याद रखिएगा, बच्चे को बहुत देखने से, उसके बारे में बहुत सोचने से आप की उससे bonding बढ़ती है, नज़र नहीं लगती है।

वैसे भी माँ से बढ़कर, बच्चे का हित, कोई और नहीं सोच सकता है, तो माँ  की कभी बच्चे को नज़र नहीं लग सकती है। माँ से बच्चे का कभी भी किसी भी तरह का कोई अहित नहीं हो सकता है।

तो कोई अगर आप से नज़र, अहित, आदि, जैसी बात करे, तो उसे नकार कर अपने बच्चे से bonding बढ़ाएं, क्योंकि वो ही आप के बच्चे और आप के लिए, सबसे ज्यादा important है।

2 आप के बच्चे की मालिश दादी, नानी करती हों, या आप ने किसी को लगाया हो, पर दिन में कम से कम एक बार आप भी मालिश जरुर करें। चाहे आप को नहीं भी आती हो, पूरे शरीर पर हाथ तो फिरा ही सकती हैं।

इसके दो फायदे हैं, एक तो माँ के हाथ का स्पर्श पाकर, बच्चा हष्ट-पुष्ट होता है। 

दूसरा मालिश करने से आप का उसके नन्हें शरीर को स्पर्श करने से मातृत्व भी बढ़ता है, तो in short माँ और बच्चे में अच्छी bonding बनती है।

3. कभी कभी बच्चे को नहला भी सकती हैं। नहाते हुए बच्चा बहुत सुन्दर लगता है, क्योंकि नहाने से freshness आती है, तो उस समय बच्चा सबसे ज्यादा खुश रहता है। अगर आप नहला नहीं पाती हैं तो उसे नहाते हुए निहार तो सकती ही हैं।

4. अपना थोड़ा समय बच्चे के साथ खेलने और मस्ती के लिए निकालें, जो आप दोनों की health improve करेगा।

5. हाँ, एक बात का ध्यान रखिएगा कि बच्चा जो भी हो, बेटा या बेटी, गोरा या सांवला-सलोना। आप के लाड़ प्यार का हक रखता है, क्योंकि वो आप का है, यह ही सबसे बड़ी सच्चाई है।

यह तो हुआ बच्चे से mantally and emotionally attached होने की बात।


अब थोड़ा Diet पर भी ध्यान दें देते हैं।

1. Protein rich foods खाएं, जैसे दालें, चना, मूंगफली, paneer, nuttri nuggets(सोया बड़ी)  etc, बहुत useful होते हैं।

2. Green vegetables, mainly हरे साग खाएं।

3. Diet में calcium rich foods भी रखें, means milk, paneer, curd, egg, etc.

4. Diet में Fibre भी जरुर से शामिल रखें, इससे digestion भी अच्छा रहता है और milk की quantity भी increase होती है।

इन सब बातों का ध्यान रखिए और मातृत्व का सुख लीजिए। क्योंकि यह जिन्दगी के सबसे हसीन पल हैं, यह फिर नहीं आएंगे।

साथ ही यह सही ढंग से नहीं व्यतीत हुए, तो इससे होने वाली परेशानियाँ सारी जिंदगी कष्ट पहुंचाएंगी। 


डिस्क्लेमर: यह tip केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

Wednesday, 28 October 2020

Articles. : Benefits of breast feeding

आज कल बच्चों में immunity power बहुत कम होती जा रही है। जिससे आए दिन बच्चे बीमार हो रहे हैं।

जिसका बहुत बड़ा कारण है, breast feeding की कमी का होना। 

और यह कोई मेरी opinion नहीं है, experienced लोग और doctors का भी यही मानना है।

तभी तो आज doctors भी breast feeding पर जोर दे रहे हैं, उनका कहना है, first yellow milk and 6 months की exclusive breastfeeding, babies की mental health, physical growth and immunity power के लिए बहुत जरूरी है।


Benefits of breast feeding



आइए आपको बताएं, क्यों जरूरी है, breast feeding, और क्या हैं इसके benifits.

1. Breast milk, बच्चे की needs के according customized होता है, means उसे जितना protein, iron, calcium, carbohydrates, fat, vitamins etc. चाहिए होता है, उसके according बनता है। 
जो बच्चे के mental and physical growth को develope करता है।


तो सोचिए, एक ही formula से बना, डिब्बा बंद दूध हर बच्चे को कैसे फायदा करेगा?


और गाय, बकरी, भैंस का दूध उनके बच्चे की needs के according होता है तो वो इन्सान के बच्चे को कैसे फायदा करेगा?


2. Breast feeding वाले बच्चों के gas नहीं बनती है, indigestion भी नहीं होता है। जबकि bottle feeding वालों के gas बनती है। 


क्योंकि bottle feeding में बच्चा air भी suck करता है। उनमें आए दिन, infection and indigestion की problem भी हो जाती है।


3.Bottle feeding वाले बच्चों के teeth भी ख़राब हो जाते हैं। जबकि यह problem breast feeding से नहीं होती है।


 4. Breast feeding से  बच्चा strong हो जाता है, उसमें immunity power बढ़ जाती है। जिससे वो कम बीमार पड़ते हैं।


5. बच्चे के साथ ही यह माँ के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे माँ को भी breast cancer  होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

तो breast feeding जरूर से कराएं, जिससे बच्चा और माँ दोनों healthy रहें।

बहुत सी माँ को यह problem  होती है कि sufficient Milk नहीं बन रहा है तो, क्या करें?
इस problem को लेकर बहुत से viewers की queries आ रही है।
अगर आप की भी queries है, तो इस problem को solve करने के लिए आप हमारी shortly coming tip

How to have sufficient breast milk  for your kid जरूर पढ़िएगा।


So stay tuned.....

Tuesday, 27 October 2020

Articles : एक बेमेल पर सफल विवाह

आज आप सब के साथ मुझे इंदौर से श्रीमती उर्मिला मेहता जी के आलेख को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

उर्मिला जी ने अपनी लेखनी से कालीदास और विद्योत्तमा के प्रेम को बखूबी उकेरा है, साथ ही यह बताया है कि आज के परिप्रेक्ष्य में वो कितना अनुकरणीय है।

आइए इसका आनन्द लें।


एक बेमेल पर सफल विवाह 




कहा जाता है विद्योत्तमा विक्रमादित्य की रूपवती, गुणवती एवं विदुषी पुत्री थी ।

वह सभी शास्त्रों,वेदों,पुराणों आदि में निष्णात थी विवाह के संबंध  में उसकी यह शर्त थी कि  जो  विद्वान पुरुष उसे शास्त्रार्थ में हरा देगा उससे वह विवाह कर लेगी ।

अन्यथा उसे अपना अनुचर बना लेगी‌। एक के बाद एक अनेक पंडित उसे शास्त्रार्थ  में पराजित कर परिणय करने की आकांक्षा से आए, पर सभी पराजित हो गए। 

क्षुब्ध होकर प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर उन पराजित पंडितों ने विद्योत्तमा  का विवाह किसी महामूर्ख से करने का सोचा जिससे उसे अर्थात विद्योत्तमा को आजीवन पति की मूर्खता का दुख झेलना पड़े ।

उन्होंने कालिदास को शास्त्रार्थ के लिए प्रस्तुत किया । कालिदास के मौन व्रत धारण का साधन साध कर उन पंडितों ने विद्योत्तमा से  उनका शास्त्रार्थ करवाया। 

कालिदास द्वारा विद्योत्तमा की एक अंगुली का उत्तर दो अंगुलियों से तथा पांच अंगुलियों का उत्तर मुट्ठी बांधकर प्रदर्शित किया गया।

जिसे पंडितों ने इस प्रकार विश्लेषित किया कि ईश्वर एक है पर उसकी उपासना सगुण तथा निर्गुण दो प्रकार से की जाती है इसी प्रकार मुट्ठी का  यह विश्लेषण किया गया कि यद्यपि महाभूत 5 हैं परंतु उन सब से ही एक शरीर का निर्माण होता है अकेला कोई भी महाभूत अपने आप में सक्षम नहीं है।

 विद्योत्तमा  उन पंडितों की व्याख्या के जाल में फँस गई और कालिदास की विद्वता के सम्मुख नतमस्तक हो गई ।

फल स्वरूप कालिदास और विद्योत्तमा का परिणय  हो गया ।

कहते हैं कि विवाह की प्रथम रात्रि को ही जब कहीं से ऊँट के बोलने की आवाज आई तो विद्योत्तमा कालिदास से बोली, उष्ट्रः वदति  कालिदास तो जन्म से जड़मति थे। दो-तीन बार कहने पर भी उट्र उट्र कहने लगे।

विद्योत्तमा को कुछ  अंदाज पहले  भी था कि कालिदास इतने विद्वान नहीं हैं जितना उन्हें दर्शाया जा रहा है परंतु लोक लाज अथवा अपनी शर्त के कारण वे अधिक कुछ बोल नहीं सकी अब जब उनका विवाह हो गया और कालिदास उट्र उट्र  कहने लगे तो उनकी मूर्खता का ज्ञान विद्योत्तमा को  पूरी तरह से हो गया ।

उन्होंने विवाह को तो अंगीकार कर लिया पर कालिदास को पति रूप में उस समय तक स्वीकार नहीं किया जब तक कि वे  विद्वान एवं प्रकांड पंडित नहीं हो जाते, यह उसके स्वाभिमान एवं पराजित पंडितों के अहंकार को प्रत्युत्तर देने की चुनौती थी।

स्त्री पुरुष की प्रेरणा होती है, इसी रूप में उन्होंने कालिदास को ज्ञानी पंडित और अपने समकक्ष विद्वान बनाने का बीड़ा उठाया।

कालिदास भी अपनी पत्नी की विद्वत्ता के सम्मान में तथा स्वयं को पत्नी के अनुरूप निर्मित करने के कार्य में जुट गए, मां काली की अनुकंपा एवं स्वयं के स्वाध्याय से जड़मति कालिदास महाकवि कालिदास के रूप में रूपांतरित हो गए। 

निश्चित ही  विद्योत्तमा को इसका पूरा पूरा श्रेय जाता है। कहते हैं कि जब कालिदास संस्कृत के प्रकांड पंडित हो  कर घर लौटे तो द्वार पर ही विद्योत्तमा ने उनसे पूछा ,'अस्ति  कश्चित् वाग् विशेष ?' कालिदास ने विद्योत्तमा के इन तीन वाक्य खंडों से तीन काव्यों की रचना की।

अस्ति से कुमारसंभव कश्चित्  से मेघदूत तथा वाग् विशेष से रघुवंशकी रचना की । 

कुमारसंभव में कार्तिकेय, रघुवंश में रघुकुल तथा मेघदूत में यक्ष  तथा रूपवान यक्षिणी का वर्णन है ऐसा माना जाता है कि यक्षिणी के वियोग का वर्णन और कुछ नहीं वरन् विद्योत्तमा से  कालिदास के वियोग का वर्णन है। (जब कालिदास विद्वान बनने हेतु विद्योत्तमा से  अलग रहे थे)।

 विद्योत्तमा और कालिदास के विवाह को यदि आधुनिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो बहुत सी  अनुकरणीय बातें हमें ज्ञात होती हैं  जैसे कि एक बार विवाह हो जाने पर उसका जीवन भर  निर्वाह करना चाहिए। ,

दूसरा पति अथवा पत्नी में से एक  के भी  योग्य अथवा समकक्ष या अनुकूल ना होने पर दूसरे साथी को अपने तुल्य या अनुकूल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

 तीसरा पति अथवा पत्नी को जो भी उनमें सहयोग करने योग्य हो शेष अयोग्य साथी को योग्य बनाने की प्रेरणा देकर  योग्य बनाना चाहिये। 

साथ ही  उसके सद् गुणों को उभारने में सहयोग करना  चाहिये ना कि उसकी खिल्ली उड़ाना या विवाह विच्छेद जैसा अनुचित निर्णय लेना। 

कहते हैं कि  कालिदास के देहावसान के पश्चात् कुमार संभव के सातवें अथवा आठवें  सर्ग के बाद उक्त काव्य को विद्योत्तमा ने ही पूर्णता प्रदान की ।

परंतु यह अत्यंत  दुख का विषय है कि इतनी विदुषी स्त्री होते हुए भी विद्योत्तमा का  नाम साहित्य में कहीं भी उपलब्ध नहीं है जैसे कि गार्गी, मैत्रैयी तथा अन्य विदुषी स्त्रियों का महत्व पूर्ण स्थान नहीं है।

यह पुरुष प्रधान सामाजिक संरचना का का ही प्रतिफल हो सकता है।

कहा यह भी जाता है कि कालिदास रचित ग्रंथ वास्तव में विद्योत्तमा द्वारा ही लिखे गए हैं, ताकि विद्योत्तमा अपने पति की सम्मानजनक स्थिति को स्थापित कर सके साथ ही अपने आत्म सम्मान के साथ भी न्याय कर सके ।जो भी हो इस विषय में अनुसंधान की महती आवश्यकता है।

Disclaimer:
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