Tuesday, 11 May 2021

Article : अब तो Serious हो जाएं

अब तो Serious हो जाएं 




एक समय था, जब किसी चीज़ का कोई मोल नहीं था। खासकर तब तो बिल्कुल नहीं, जब कोई मजबूर हो। 

पर धीरे धीरे हर सामान, का मोल हो गया, उसे खरीदा जाने लगा। पर फिर भी हवा और पानी की कोई कीमत नहीं थी। वो अनमोल था और बेमोल मिल जाता था।

फिर वो समय आया, जब पानी भी बिकने लगा। गांवों में लोग जब यह सुनते थे तो उन्हें आश्चर्य होता था। पर शहर वाले इसे status symbol समझते थे। 

नतीजतन हमने पानी को बचाने के लिए कभी प्रयास नहीं किया। 

हमारी बेफिक्री हमें इस दौर में ले आयी है कि अब हवा (oxygen) भी बिकने लगी है। 

और कुछ बेचने वाले इस क़दर निर्मोही हो गये हैं कि उन्हें मरते हुए इंसान के साथ भी सौदा करने से शर्म नहीं आ रही है।

पर अब हम सब के सचेत होने का समय आ गया है। अगर अभी नहीं जागे तो फिर कभी नहीं सम्भल पाएंगे।

Oxygen की कमी, जिन्दगी की सबसे बड़ी जरूरत की कमी है। और इस कमी को ज़िन्दगी में लाने का पूरा दारोमदार हमारा ही है।

हमारी दिन-प्रतिदिन ज़मीन को पाने की चाह और उसके लिए निरंतर पेड़ों की कटाई, हमें इस दौर में ले आयी है।

आप ने कभी सोचा है कि एक पेड़ हमें क्या क्या देता है? 

प्राणवायु, भोजन, छाया... आप यही सब कहेंगे।

पर एक पेड़ के होने से हमें क्या क्या मिलता है, आप को बताते हैं......

एक समान्य पेड़ सालभर में करीब 118 kg oxygen provide करता है। पीपल, बरगद, तुलसी, मनीप्लांट, आदि जैसे विशेष पेड़ इससे भी अधिक oxygen provide करते हैं।

प्रतिवर्ष करीब एक पेड़ 21 kg carbon dioxide को absorb करता है। 

पेड़ अपने आसपास की हवा को शुद्ध करता है। उसमें से sulphur dioxide, nitrogen oxides and ozone जैसे air pollutants को absorb करता है।

गर्मियों में एक बड़े पेड़ के नीचे approx 1°C to 2°C तक temperature कम रहता है।

घर के क़रीब एक पेड़ होने से वो acoustic wall की तरह काम करता है, means वो शोर को absorb कर लेता है और ध्वनि प्रदूषण (noise pollution) को कम करता है।

इसके अलावा पेड़ हमें सालभर, भोजन, छाया, घर, फर्नीचर, दवा, आदि बहुत कुछ देता है।

यहांँ तक, पानी को जमीन में रोके रखने की क्षमता भी पेड़ों में ही है। पेड़ मिट्टी को erode होने से रोकते हैं। साथ ही बारिश होने के पीछे भी पेड़ों का बहुत बड़ा योगदान होता है।

यह सब पढ़ने के बाद आप को समझ आ गया होगा कि पेड़ों के बिना हमारा धरती पर कोई अस्तित्व ही नहीं है।

इसलिए अब हमारा serious होना बहुत जरूरी है क्योंकि अब बात प्राणवायु (oxygen) तक पहुंच गई है।

अब यदि हमें survive करना है तो, पेड़ों को लगाना बहुत जरूरी है। 

साथ ही साथ पेड़ों को कटने से बचाना भी उतना ही जरूरी है।

तो आइए अपने और अपने बच्चों के लिए पेड़ों को लगाएं और कम होती oxygen को फिर से बढ़ाएं।

Monday, 10 May 2021

Kids story : विश्वास

 विश्वास 




माधो अपने पापा के साथ अपनी दादी जी को लेने गांव गया था।

उसकी दादी जी का गांव हरियाली से भरा हुआ था, उनके आंगन में बहुत से पंछी आया करते थे।

पापा, दादी के सामान बांधने में उनकी मदद कर रहे थे और माधो चिड़ियों के पंख इकठ्ठे कर रहा था। 

वो जब भी अपनी दादी जी के घर आता था, उसे यह पंख हमेशा ही अपनी ओर खींचते थे।

उसे एक मोर पंख मिला, वो उसे लेकर दौड़ाता हुआ अपनी दादी जी के पास आया, और बोला दादी जी यह पंख भी मिला, आज आंगन में।

उसके पापा बोले, आज मोर भी आया होगा।

दादी ने माधो को झट अपनी गोद में बिठाते हुए कहा, अरे कान्हा जी आए होंगे। उन्हीं का गिर गया होगा।

कान्हा जी, कौन दादी जी?

अरे! तुम्हें कान्हा जी नहीं पता?

अच्छा चलो, तुम्हें उनकी कहानी सुनाती हूँ। 

कहानियाँ सुनते सुनते, माधो सो गया। 

अगले दिन सुबह वो लोग शहर वापस आ गए।

कहानियों का और दादी जी की बातों का माधो के बाल मन पर गहरा असर पड़ा।

वो कान्हा जी की पूजा करने लगा और कान्हा जी के आने का इंतजार करता, रोज़ सुबह शाम। 

बालकनी में मोरपंख को ढूंढता, पर शहर में कहाँ मिलता मोरपंख?

हाँ शहर में कोरोना रूपी महामारी का प्रकोप जरुर बहुत जोर से फैलने लगा था।

उसके चलते, दादी जी को भी कोरोना हो गया। उनका oxygen level भी कम होने लगा था, घर में सब बहुत घबरा रहे थे कि ना जाने क्या हो?

पर माधो अपने कान्हा जी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, कि वो अब जरुर से आएंगे। और उसकी दादी जी ठीक हो जाएंगी। 

एक दिन वो अपनी बांसुरी बजा रहा था, तभी ना जाने कहांँ से एक मोरपंख खिड़की से उसके पास आ गया।

मोरपंख देखकर वो खुशी से उछल पड़ा। उसने बांसुरी अपनी कमर में फंसाई, मोरपंख बालों में लगाया। और अपनी दादी जी के कमरे की तरफ दौड़ गया।

और जब तक कोई उसे, वहाँ जाने से रोकता, वो दादी जी के कमरे के दरवाजे के पास पहुंच गया था।

माधो अभी दरवाजे पर था, तो दादी जी ने माधो को देखा, वहांँ हल्का धुंधला दिखाई दे रहा था। जिसमें दादी को माधो की कमर की बांसुरी और लहराता मोरपंख दिख रहा था।

 ऐसा लग रहा था कि कान्हा जी खड़े  हों, दादी ने प्रणाम किया। 

तभी माधो, चिल्ला उठा, दादी जी! कान्हा जी आ गये। अब आप ठीक हो जाएंगी।

माधो की आवाज में सशक्त आस्था और विश्वास था। जिसने दादी में प्राणवायु का संचार कर दिया।

दादी बहुत जल्दी ठीक होने लगीं। कुछ दिनों में वह पूरी तरह से ठीक हो गईं। 

Doctors भी आश्चर्य कर रहे थे, उनकी fast recovery पर।

जब दादी जी पूरी ठीक हो गईं, तो पापा बोले देखा माँ, शहर में थीं तो doctors ने बचा लिया, गांव में रहतीं तो ना बचतीं।

दादी जी बोलीं, मुझे doctors ने नहीं तुम्हारे बेटे के विश्वास ने बचाया है।

जिसका कान्हा हो रखवाला, उसका कहाँ कुछ बिगड़ने वाला।

Sunday, 9 May 2021

Poem : आइए सम्मान दें उन्हें


 आइए सम्मान दें उन्हें




आइए सम्मान दें उन्हें

जिन्होंने हमें जन्म दिया 

आइए सम्मान दें उन्हें

जिसने हमें जीना सिखा दिया 


आइए सम्मान दें उन्हें

जो पल पल हमारे साथ हैं

आइए सम्मान दें उन्हें

जो मुश्किल में छोड़ती नहीं हाथ हैं


आइए सम्मान दें उन्हें

जिनके लिए, हम उनका संसार हैं

आइए सम्मान दें उन्हें

जिन्होंने दिए हमें संस्कार हैं


आइए सम्मान दें उन्हें

जो दुनिया में ईश्वर का अवतार हैं

आइए सम्मान दें उन्हें 

जिन्हें इसका अधिकार है


क्योंकि

 माँ सिर्फ एक शब्द नहीं हैं

माँ, एक एहसास हैं

जो हर बच्चे के लिए

बहुत खास हैं


आइए हम मातृदिवस में

यह संकल्प करें 

सिर्फ आज ही नहीं

सदैव उनका सम्मान करें🙏🏻🙏🏻


सभी माँ को समर्पित 🙏🏻🙏🏻


मातृदिवस के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ

Happy Mother's day

💐 🙏🏻❤️